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लघुकथा - भाई -भाई

लघुकथा - भाई भाई की लड़ाई
सुंदर वन में हरियल चिड़िया का घोंसला था। हरियल के दो बेटे थे, एक का नाम गोलू और दूसरे का नाम ढोलू था। दोनों में बहुत प्रेम था। माता - पिता का लाया दाना आपस में दोनों भाई प्रेम से बांट कर खाते।
उसी जंगल में दुष्ट नाम का सांप और झपकी बिल्ली भी रहते थे।
दोनों की नजर सुंदर गोलू - ढोलू को चारा बनाने की थी। वो हर समय उनको झपटने की ताक में रहते। हरियल और उसकी पत्नी यह जानते थे कि उनके बच्चों पर दुष्ट और झपकी की नजर है।
एक दिन दुष्ट घोंसले तक पहुंच गया। दोनों भाई जोर - जोर से चींचीं करने लगे। आस - पास के सभी चीड़ा - चीड़ी इकठ्ठे हो गए। सब ने एक साथ चोंच से दुष्ट पर आक्रमण कर दिया। घायल सांप पेड़ कांटों में गिरा और मारा गया। 
बच्चे अब बड़े हो गए। एक दिन दिनों ने पिता हरियल से कहा कि वो अपना अलग घोंसला बना कर घर बसाना चाहते हैं। हरियल खुश हुआ। हरियल और उसकी पत्नी ने दोनों बेटों के घोंसले बनाने में सहायता की।
समय बीतता गया। दोनों भाइयों के भी बच्चे हो गए।
एक दिन गोलू की पत्नी ने कहा, ढोलू के बच्चे हम जो दाना चुग कर लाते हैं उन में से खा जाते हैं। आप अपने भाई से कहें अपने बच्चों के लिए खुद दाना लाएं, हमारा दाना ना चुगें। गोलू ने, "ठीक है मैं कह दूंगा" कहते हुए बात टाल दी।
बच्चे तो आखिर बच्चे हैं, आपस में एक साथ दाना चुगते, खेलते और लड़ते। गोलू की पत्नी को यह बिल्कुल पसंद नहीं था। इस बात को लेकर दोनों देवरानी - जेठानी में बार - बार तकरार होने लगी। बाहर से आने पर दोनों अपने - अपने पतियों को दिन भर में क्या हुआ, बढ़ा - चढ़ा कर सुनाती। दोनों हंसी - हंसी में सुनकर टाल देते।
एक दिन गोलू की पत्नी ढोलु के घोंसले में आई, बच्चों को मारा और ढोलू की पत्नी के पंख नोच डाले। ढोलू धार्मिक आदमी था, दस दिन के लिए तीर्थ पर गया हुआ था।
पत्नी ने संदेश भेजा तो उसने कहलवाया कि "ठीक है एक बार तुम शांत रहो मैं आकर बात करूंगा।"
ढोलू आया उसने गोलू को भाभी की हरकत पर उलाहना दिया। अब गोलू वो भाई नहीं रहा, पत्नी की बातें सुन - सुनकर बदल चुका था। दोनों में तकरार शुरू हो गई। पड़ोसी घोंसले वाले सब देख रहे थे, पर उन्हें छुड़वाने की हिम्मत किसी में नहीं थी।
दोनों कहासुनी के थोड़ी देर में गुत्थमगुथी हो गए। 
लड़ते - लड़ते घोंसले से सड़क पर कब आ गए पता ही नहीं चला।
झपकी बिल्ली इसी मौके की तलाश में थी। वो लड़ते गोलू - ढोलू पर झपटी, मुंह में दबाया और चलती बनी।
शिक्षा 
- लड़ाई का अंत स्वयं के अंत के साथ होता है।
- लड़ाई समाधान नहीं अंत है।
जिगर चुरूवी (शमशेर भालू खां)

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