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लघुकथा शैतान

लघुकथा - शैतान

गांव में काफी दिनों से बेरोजगारी की मार झेल रहा युवक उभरते शहर सीकर पहुंचा।
इधर - उधर घुमा, कहीं काम नहीं मिला। घर से लाए थोड़े से पैसे अब खत्म होने लगे। मोबाइल का बैलेंस भी एक दो दिन का बचा था। जुगाड़ से उसे एक बड़े होटल में वेटर का काम मिल गया।
दिन में वेटर का काम कर शाम को कमरे पर जाकर सो जाना उसका नित्यकर्म था। थोड़े दिन हुए कि रात को ग्यारह बजे तक होटल में ओवर टाइम करने लगा।
युवक ने मेहनत और लगन से सब का दिल जीत लिया। मैनेजर और मालिक उस से बहुत खुश थे।
समय बीतता गया लड़का आगे बढ़ता गया। होटल में वेटर उसे बोस कहने लगे थे। 
एक रात को लगभग बारह बजे वह होटल से निकाला। कल्याण सर्किल के सामने एक चबूतरे पर कचरा बिनने वाली अपने दो बेटों और एक बेटी के साथ सोई हुई थी। थोड़ी ठंड का समय बिना कंबल के बच्चे और उनकी मां सिकुड़े आपस में लिपटे हुए सो रहे थे। युवक को उन पर दया आई, वह जल्दी से कमरे पर गया, एक कंबल उठा कर कल्याण सर्किल की ओर चल पड़ा।
वहां सोई महिला बच्चों को सोता छोड़ कर लघु शंका हेतु गई हुई थी। 
युवक के मन में राक्षसी विचार उत्पन्न होने शुरू हो गए। उसने दो भाइयों के बीच में सोई ढाई साल की बच्ची को उठाया और रेल्वे ट्रैक की झाड़ियों की ओर चला गया। वहां उसने उस मासूम के साथ मुंह काला किया। दर्द के मारे चिल्लाने पर उसके मुंह में उसकी अंडर वियर ठूंस दी। सुबह चार बजे के करीब उसने फिर वही वहशीपन किया। करीब पांच बजे थोड़ी - थोड़ी हलचल पटरियों के आस - पास शुरू हुई तो उसने बच्ची को गोद में उठाया, कल्याण सर्किल के करीब एक बिल्डिंग (बंबई हाउस) की दीवार के पास बच्ची को छोड़ कर निकल गया। उधर मां रोती बिलखती बेटी को ढूंढ रही थी। करीब छह बजे उसे खून में लथपथ बेहोश बेटी दीवार के पास पड़ी मिली। बदहवास मां नन्हीं सी जान को सीने से लगाए पास की पुलिस चौकी पहुंची। मैले कपड़े और फटे हाल सिसकती मां सिपाही ने बाहर से ही खदेड़ दिया। सीकर शहर के चारों थानों, कोतवाली में चक्कर काटने के बाद महिला रोती पीटती पुलिस अधीक्षक के पास पहुंची। Sp ने कोतवाली में भेजा, कोतवाली वालों ने महिला थाना भेज दिया। महिला थाना वालों ने उसे अस्पताल भेज दिया, अस्पताल वालों ने fir के बाद ही इलाज करने का कह कर वापस महिला थाना भेज दिया। महिला थाने में सुनवाई नहीं होने पर महिला फिर SP ऑफिस गई। Sp साहब ने एक कांटेबल को साथ भेज कर बच्ची को अस्पताल में भर्ती करवाया।इस बीच चक्कर पर चक्कर काटते दोपहर के तीन बज गए।
बच्ची लहूलुहान बिलखती रही, महिला थाना के इंचार्ज ने मुकदमा दर्ज किया।
बच्ची की हालत गंभीर होती जा रही थी।
इधर महिला थाना के EO ने मामले की जांच शुरू की। काफी शोध के बाद कल्याण सर्किल पर घटना वाले स्थान के सामने CCTV कैमरे लगे दिखाई दिए। EO ने कप्तान की अनुमति से फुटेज देखते ही मुजरिम की पहचान हो गई। दूसरे दिन करीब नौ बजे पुलिस टीम ने होटल में दबिश दी, परन्तु मुजरिम सुबह सात बजे ही हिसाब ले कर चलता बना।
होटल मालिक से एड्रेस ले कर टीम उसके गांव पहुंची।
मुजरिम से तफ्तीश आईजी रेंज ने खुद की। कोर्ट में ट्रायल चला। उधर बच्ची की अधिक ब्लीडिंग के कारण मृत्यु हो गई।
ट्रायल के दौरान मुजरिम, सिमन नहीं मिलने के कारण संदेह के लाभ के आधार पर बरी हो गया।
शिक्षा - शैतान जब सर चढ़ता है तो नेक को बद होने में देर नहीं लगती।

शमशेर भालू खां 
जिगर चूरूवी

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