Skip to main content

ट्रेड यूनियन 1926

ट्रेड यूनियन एक्ट 1926

“Trade Union Act, 1926” (ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926) भारत के श्रम कानूनों में बहुत महत्वपूर्ण कानून है।
यह अधिनियम मजदूरों (Workers) और नियोक्ताओं (Employers) दोनों को यह अधिकार देता है कि वे अपने हितों की रक्षा के लिए यूनियन (संघ) बना सकें और कानूनी तौर पर काम कर सकें।

आइए इसे आसान भाषा में समझें 👇


⚖️ ट्रेड यूनियन एक्ट, 1926 का सारांश (Summary in Hindi)

🔹 लागू होने की तिथि:

1 जून 1927 (अधिनियम 1926 में पारित हुआ था)

🔹 मुख्य उद्देश्य (Objectives):

  1. ट्रेड यूनियनों का पंजीकरण (Registration) करवाना
  2. यूनियनों को कानूनी दर्जा (Legal Status) देना
  3. यूनियन के सदस्यों और पदाधिकारियों के अधिकार और कर्तव्य तय करना
  4. मजदूरों के सामूहिक हितों की रक्षा करना (Collective Bargaining)

📘 मुख्य प्रावधान (Main Provisions):

1️⃣ ट्रेड यूनियन की परिभाषा (Definition):

"Trade Union" वह संगठन है जो

  • मजदूरों या नियोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया हो।
  • वेतन, कार्य की शर्तें, रोजगार, या अधिकारों से जुड़े मामलों में
    सामूहिक रूप से प्रतिनिधित्व करता हो।

2️⃣ पंजीकरण (Registration of Trade Union):

  • कम से कम 7 सदस्य मिलकर एक यूनियन बना सकते हैं।
  • इसे रजिस्ट्रार ऑफ ट्रेड यूनियन्स के पास पंजीकृत कराना होता है।
  • पंजीकरण के बाद यूनियन को कानूनी मान्यता (Legal Status) मिल जाती है।

3️⃣ पंजीकृत यूनियन के अधिकार (Rights of Registered Trade Union):

  • कानूनी तौर पर संपत्ति रख सकती है, मुकदमे दायर कर सकती है, और सदस्यों की ओर से वार्ता कर सकती है।
  • यूनियन के सदस्य अपने वेतन, भत्ते, सुरक्षा, वेलफेयर, छुट्टियों आदि के लिए सामूहिक माँगें कर सकते हैं।
  • यूनियन के वैध कार्यों के लिए उसके सदस्यों पर नागरिक या आपराधिक मुकदमे नहीं चलाए जा सकते।

4️⃣ फंड का उपयोग (Use of Union Funds):

यूनियन के फंड का उपयोग निम्न कार्यों के लिए किया जा सकता है:

  • सदस्यों के कल्याण के लिए (welfare activities)
  • कानूनी मामलों में सहायता के लिए
  • यूनियन कार्यालय के खर्चों के लिए
  • मजदूरों की हड़ताल या आंदोलन के समर्थन में

5️⃣ रिपोर्ट और लेखा (Reports & Accounts):

  • यूनियन को हर साल अपने वित्तीय लेखे और गतिविधियों की रिपोर्ट रजिस्ट्रार को देनी होती है।

6️⃣ संरक्षण (Immunity):

  • यूनियन के सदस्य यदि कानूनी दायरे में रहकर आंदोलन या हड़ताल करते हैं,
    तो उन्हें सिविल कोर्ट में मुकदमे से संरक्षण (Immunity) प्राप्त होता है।

7️⃣ ट्रेड यूनियन का समाप्त होना (Dissolution):

  • यदि यूनियन के सदस्यों का बहुमत चाहे या कानून का उल्लंघन हो,
    तो रजिस्ट्रार उसे भंग (Dissolve) कर सकता है।

⚙️ संशोधन (Amendments):

  • बाद में इस अधिनियम में कई बार संशोधन हुए,
    जैसे कि Trade Unions (Amendment) Act, 1947, 2001 आदि।
  • अब यह अधिनियम Industrial Relations Code, 2020 में समाहित हो गया है।

🎯 उद्देश्य सारांश में:

“मजदूरों को एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए
कानूनी और संगठित रूप से आवाज़ उठाने का अधिकार देना।”


📌 महत्व (Importance):

  • यह अधिनियम मजदूरों को कानूनी रूप से संगठित होने का अधिकार देता है।
  • मजदूर-नियोक्ता संबंधों में संतुलन और न्याय स्थापित करता है।
  • उद्योगों में श्रमिक हितों की रक्षा और सौहार्द बनाए रखता है।

Comments

Popular posts from this blog

बासनपीर मामले की हकीकत

इस ब्लॉग और मेरी अन्य व्यक्ति से हुई बातचीत पर मंहत प्रतापपुरी का बयान जीवनपाल सिंह भाटी की आवाज में सत्य घटना सद्भावना रैली बासनपीर जूनी पूर्व मंत्री सालेह मुहम्मद का बयान बासनपीर जूनी के सत्य एवं जैसाने की अपनायत की पड़ताल -  पिछले कुछ दिनों से जैसलमेर के बासन पीर इलाके का मामला सामने रहा है। कहा जा रहा है कि पूर्व राज परिवार की जमीन पर बासनपीर गांव के लोगों द्वारा कब्जा किया जा रहा है। नजदीक से पड़ताल करने पर हकीकत कुछ ओर निकली। जिसके कुछ तथ्य निम्नानुसार हैं - रियासत काल में सन 1662 में बीकानेर और जैसलमेर रियासत के बीच युद्ध हुआ। इस युद्ध में जैसलमेर सेना के दो वीर योद्धा सोढ़ा जी और पालीवाल जी शहीद हो गए। युद्ध के बाद बासन पीर (युद्ध स्थल) तालाब की तलहटी पर शहीदों की स्मृति में छतरियां बनवाई हैं। जैसलमेर के चारों और 120 किलोमीटर इलाके में 84 गांव पालीवाल ब्राह्मणों ने बसाए जिनमें से एक गांव बासनपीर जूनी भी था। पालीवाल ब्राह्मण समृद्ध किसान और व्यापारी थे, रियासत के दीवान सालिम सिंह से अनबन के कारण सन् 1825 में सभी गांव खाली करने को मजबूर हो गए। पालीवाल...

✍️कायम वंश और कायमखानी सिलसिला सामान्य इतिहास की टूटी कड़ियाँ

कायमखानी समाज कुछ कही कुछ अनकही👇 - शमशेर भालू खां  अनुक्रमणिका -  01. राजपूत समाज एवं चौहान वंश सामान्य परिचय 02. कायम वंश और कायमखानी 03. कायमखानी कौन एक बहस 04. पुस्तक समीक्षा - कायम रासो  05. कायम वंश गोत्र एवं रियासतें 06. चायल वंश रियासतें एवं गोत्र 07. जोईया वंश स्थापना एवं इतिहास 08. मोयल वंश का इतिहास 09. खोखर वंश का परिचय 10. टाक वंश का इतिहास एवं परिचय  11. नारू वंश का इतिहास 12 जाटू तंवर वंश का इतिहास 13. 14.भाटी वंश का इतिहास 15 सरखेल वंश का इतिहास  16. सर्वा वंश का इतिहास 17. बेहलीम वंश का इतिहास  18. चावड़ा वंश का इतिहास 19. राठौड़ वंश का इतिहास  20. चौहान वंश का इतिहास  21. कायमखानी समाज वर्तमान स्थिति 22. आभार, संदर्भ एवं स्त्रोत कायम वंश और कायमखानी समाज टूटी हुई कड़ियां दादा नवाब (वली अल्लाह) हजरत कायम खां  साहब   नारनौल का कायमखानीयों का महल     नारनौल में कायमखानियों का किला मकबरा नवाब कायम खा साहब हांसी,हरियाणा   ...

01. मीरातुल जिगर (दीवान ए जिगर) (हिंदी/उर्दू गज़ल संग्रह 01) 75 गजल पूर्ण

शायर का ताअरूफ -  नाम - शमशेर खान  उपनाम - प्रेम, शमशेर गांधी तखल्लुस - पहले परवाना नाम से लिखना शुरू किया। पत्नी अख्तर बानो (सदफ) के सुझाव पर जिगर चूरूवी नाम से लिखना शुरू किया। पैदाइश - 18.04.1978 सहजूसर, चूरू (राजस्थान) पिता का नाम - श्री भालू खां (पूर्व विधायक (1980 से 1985), चूरू। माता का नाम - सलामन बानो (गृहणी) ताअलिम -  1. रामावि सहजूसर में पहली कक्षा में दाखिला 10.07.1984 से 1993 में मेट्रिक तक। 2. राउमावि बागला, चूरू से हेयर सेकंडरी 1993 से 1995 तक 3. राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण विद्यालय भाषाई अल्पसंख्यक अजमेर से BSTC, 1995 से 1997 4. राजकीय लोहिया महाविद्यालय चूरू से स्वयंपाठी के रूप में स्नातक 1998 से 2001 तक (महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, अजमेर) 5. राजकीय लोहिया महाविद्यालय चूरू से स्वयंपाठी के रूप में अधिस्नातक 2004 से 2005 तक (महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय बीकानेर से गोल्ड मेडलिस्ट - 2005 उर्दू साहित्य) 6. कश्मीर विश्वविद्याल, श्रीनगर के नंद ऋषि शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय से B.Ed.- (2007 - 8) 7. इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय से विशेष आवश्य...

👤 शमशेर भालू खान

📍 कायमखानी बस्ती सहजुसर ,चूरू राजस्थान Pin :-331001

💬 Chat on WhatsApp

© 2026 ShamsherBhaluKhan.com | Designed & Managed by Shamsherbhalukhan