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131 वां संविधान संशोधन बिल 2026

महिला आरक्षण व परिसीमन विधेयक 2026 -
131 वाँ संविधान संशोधन विधेयक - सदन में भाजपा की पहली बार हार - आज 17 अप्रैल, 2026 को संसद के विशेष सत्र में 131वें संविधान संशोधन विधेयक (और उससे जुड़े अन्य विधेयकों) पर बेहद गहमागहमी रही। इस चर्चा और उसके परिणाम की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं - विधेयक का गिरना (सबसे बड़ी खबर)
लोकसभा में वोटिंग के बाद यह महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका (वास्तव में सरकार इसे पारित ही नहीं करना चाहती थी)। चूंकि यह संविधान संशोधन विधेयक था, इसलिए इसे पारित होने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी।
संख्यात्मक आंकड़े - 
पक्ष में वोट - 298
विरोध में वोट - 230
परिणाम - बहुमत होने के बावजूद यह दो-तिहाई के आंकड़े (जो लगभग 352 होना चाहिए था) तक नहीं पहुँच पाया, जिसके कारण विधेयक गिर गया।
चर्चा के मुख्य बिंदु - 
चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई।
सरकार का पक्ष - गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इन बिलों का उद्देश्य 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करना और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना था। उन्होंने तर्क दिया कि परिसीमन से मतदाताओं का युक्तिकरण (Rationalisation) होगा।
विपक्ष का तर्क - विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने इसे चुनावी पैंतरा बताया। विपक्ष का मुख्य विरोध इस बात पर था कि - 
1. महिला आरक्षण को परिसीमन (Delimitation) से क्यों जोड़ा गया। 
2. बिल पर सदन में चर्चा से पहले इस पर सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुलाई गई।
3. बिल को केवल एक दिन पूर्व सर्कुलेट क्यों किया गया।
4. बिल पर सदन में चर्चा से पूर्व मीडिया में बखेड़ा क्यों किया गया।
इन सवालों का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन को आश्वस्त करने की कोशिश की कि यह उनकी गारंटी है कि किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा जिस पर प्रियंका गांधी वाड्रा ने सवाल दागे कि आपकी गारंटिया - 
1. हर परिवार को 15 लाख - फेल
2. पेट्रोल डीजल की कीमत आधी - फेल 
3. किसानों की आय दोगुनी - फेल
4. रुपए की गिरती कीमत में सुधार - फेल
5. आतंकवाद का अंत - फेल 
6. काले धन की वापसी - काला धन अधिक गति से बाहर
7. माल्या, मोदी, दाऊद का प्रत्यर्पण - फेल 
8. कोरोना प्रबंधन - फेल 
9. PM Care - ना सवाल - ना हिसाब
10. चुनावी बॉन्ड - कोई सार्वजनिक सूचना नहीं 
11. पहलगांव, पुलवामा हमला - ना जांच - ना गिरफ्तारी
12. देश पर क़र्ज़ - उच्चतम स्तर पर
13. जातिय, सांप्रदायिक हिंसा एवं लिंचिंग - चरम पर
14. राज्यों के साथ भेदभाव - बीजेपी शासित राज्यों को विशेष राशियों का आवंटन।
15. विपक्ष की आवाज को दबाना।
16. मणिपुर - सरकार प्रायोजित हिंसा
17. बलात्कारियों का महिमा मंडन
18. बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, बर्मा, भूटान, ईरान, मलेशिया, रूस जैसे मित्र देशों से पाकिस्तान चीन की तरह शत्रुता।
19. बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसा के विरुद्ध सरकार की चुप्पी।
20. चुनी हुई सरकारों को गिराना।
21. फेल विदेश नीति।
22. गैस, तेल एवं अन्य सामग्री के भाव आसमान पर।
23. रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर को तहस - नहस करना।
24. गत सरकारों द्वारा बनाई गई सार्वजनिक उपक्रमों, बंदरगाहों एवं एयरपोर्ट, एयर इंडिया की बिक्री।
25. E.D,, CBI, चुनाव आयोग, सरकारी मीडिया का दुरुपयोग।
इसके अलावा अन्य कई मामले हैं जिनमें आपकी गारंटी, एक सर के बदले दस सर, लाल आँखें, 56 इंच सीना सब फुस्स हो गए।
उन्होंने आशंका जताई कि इससे दक्षिण भारतीय और छोटे राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा।
#विधेयक के प्रमुख प्रस्ताव (जो चर्चा में रहे)
इस संशोधन विधेयक में मुख्य रूप से तीन बातें प्रस्तावित थीं - 
1. लोकसभा सीटों में वृद्धि - सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करना।
2. महिला आरक्षण - 2029 से महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करना।
 3. परिसीमन - 2011 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का नए सिरे से निर्धारण करना।
अब आगे क्या होगा - विधेयक गिरने के बाद सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इससे संबंधित अन्य दो विधेयकों (परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक) पर भी आगे नहीं बढ़ेगी, क्योंकि वे इस मुख्य संशोधन से ही जुड़े हुए थे। संसदीय कार्य मंत्री Kiran rijiju  ने इसे एक #खोया_हुआ_अवसर बताया है।

लेख एवं समीक्षा - जिगर_चूरूवी

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