ग्राम स्वराज का धूमिल होता स्वप्न - कहा जाता है कि भारत गांवों का देश है, यहां की 70% से अधिक आबादी आज भी गांवों में निवास करती है। इन गांवों में प्राथमिक संसाधन और विकास का स्वप्न देखते हुए महात्मा गांधी ने ग्राम स्वराज की धारणा प्रतिपादित की थी। देश आजाद हुआ, भारत की जनता की, भारत की जनता के लिए, भारत की जनता के द्वारा सरकार का गठन हुआ। लोगों की उम्मीदें परवान पर थीं, जब देश आजाद होगा तो हमारे संसाधनों पर हमारा अधिकार होगा, हम जैसे चाहें योजना बना कर अपने लोगों को विकसित वातावरण प्रदान कर सकेंगे, परन्तु आजादी के आठवें दशक में पहुंचते बुढ़े भारत में लोकतंत्र और ग्राम स्वराज का सपना केवल सपना ही रहा। आज भी लाखों गांव विकास नाम के पक्षी को अपने क्षेत्र पर उड़ते देखना चाहते हैं जो वर्तमान व्यवस्था के चलते असंभव सा लग रहा है। आप पाठकगण प्रश्न करेंगे यह कैसी बात कर रहे हैं आप। टेलीविजन और अखबार तो विकसित भारत के बड़े - बड़े विज्ञापन दिखा रहे हैं और हर पार्टी की सरकार अपने कार्यकाल में हुए विकास कार्यों के बारे में बताते हुए वाह वाही लूटने का मौका नहीं चूकती। यहां हम वास्तविक विकास एवं ग्रा...