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Showing posts from May, 2022

कायमखानी 57वनी

57वनी के कायमखानी गांव कायमखानी  सूची(1891 A 1.झाड़ोद पटी 2.अलखपुरा 3.आसलसर B 3.बांसा 4.भदलिया 5.बेड़वा 6.बेगसर 7.बरांगना 8.बरड़वा 9.बनवासा 10.बेरी छोटी 11.बेरी बड़ी 12.बेमोट 13.बुखावास 14.भाडासर 15.बावड़ी C 16.चुगनी 17.छापरी कलां 18.छापरी खुर्द 19.चोलुखां D 20.ढिगाल 21.डिकावा 22.डाबड़ा 23.धनकोली 24.दाऊद सर 25.दयाल पुरा F 26.फोगड़ी G 27.गेलासर K 29.कुडली 30.ख़ातिया बासनी 31.खुडी 32.किचक 33.खाखोली 34.खारिया 35.क्यामसर 36.खानड़ी L 37.लादड़िया M 38. 39.मौलासर 40.मोड़ियावट 41.मावा N 42.नोसर 43.निमोद 44.निम्बी कलां 45.निम्बी खुर्द 46.निनावटा 47.नुवा P 48.पायली 49.पावटा R 50.रसीद पुरा 51.सरदार पुरा कलां 52.सरदार पुरा खुर्द 53.सदवास 54.सेवा 55.सूपका 56.सुदरासन T 57.तोलियासर

ताजमहल

ताजमहल पर विवाद और उसकी हक़ीकत  ताजमहल पर दायर पीआईएल इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने खारिज कर दी है। कानूनी जानकार, इस अजीबोगरीब जनहित याचिका का परिणाम जानते थे। अदालत ने याचिकाकर्ता को, इतिहास का अध्ययन करने, अकादमिक शोध के लिए निर्धारित शैक्षणिक प्रक्रिया जो विश्वविद्यालयों में उच्चतर अध्ययन के लिए स्वीकृत है अपनाने की सलाह भी दी है।  ताजमहल की यह याचिका या ताज पर अचानक उठा यह विवाद न तो कोई अकादमिक विवाद है और न ही कोई जिज्ञासु जनहित का प्रश्न। यह एक प्रकार से राजनीतिक उद्देश्यों से लिपटा हुआ विवाद है, जिसमे जानबूझकर जयपुर राजघराने की राजकुमारी और भाजपा सांसद दीया कुमारी को आगे किया गया। मेरी निजी राय यह है कि, ताज़महल विवाद मे जयपुर राजघराने को नहीं पड़ना चाहिए। जयपुर राजघराना मुगलों का सबसे वफादार राजघराना रहा है और उसने कभी भी मुगलों का विरोध नहीं किया। जयपुर राजघराना तब भी मुगलों के साथ था जब औरंगज़ेब दिल्ली की तख्त पर था। औरंगज़ेब की कट्टर धार्मिक नीति के खिलाफ जयपुर कभी खड़ा भी नहीं हुआ। आज दीया कुमारी जी कह रही हैं कि...

कार्ल मार्क्स

#मजदूरों_को_शीर्ष_पर_लाने_वाले_मार्क्स 👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌 मानव सभ्यता के कोई 8-10 हजार वर्ष के लिखित इतिहास में कार्ल मार्क्स पहले दार्शनिक थे जिन्होंने मजदूरों को मान दिया, गरिमा दी, अभिमान दिया बल्कि और आगे जाकर उसे पूरी दुनिया का नायकत्व  प्रदान किया । उसे भावी और बेहतर दुनिया का कर्णधार बताया । इसके लिए अपने दोस्त लासाल सहित तब तक के सभी स्थापित विचारों से पंगा लिया । ● 1848 में एंगेल्स के साथ मिलकर लिखे कम्युनिस्ट पार्टी के घोषणापत्र में 'दुनिया के मजदूरो एक हो' का नारा गुंजा कर उन्होंने सारी दुनिया को चौंका दिया था ।  ● इसी घोषणापत्र में उन्होंने इसकी वजह स्पष्ट करते हुये उन्होंने कहा था कि "पूंजीपति वर्ग के मुकाबले में आज जितने भी वर्ग खड़े हैं उन सबमे सर्वहारा ही वास्तव में क्रांतिकारी वर्ग है । दूसरे वर्ग आधुनिक उद्योग के समक्ष ह्रासोन्मुख होकर अंततः विलुप्त हो जाते हैं ; सर्वहारा वर्ग ही उसकी मौलिक और विशिष्ट उपज है ।" ●मार्क्स अपने सिध्दांतों को गाइड टू एक्शन कहते थे । इसलिये वे सिर्फ विचार ही नहीं देते थे, उसे आकार देने के लिए स्वयं भी सक्रिय होते थे । ...