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Showing posts from 2025

🏫विश्व के धर्म

1. विश्व धर्म परिचय 2. धर्म क्या एवं क्यों एक विचार 3. धर्म क्या, क्यों एवं आस्था 4. नास्तिकता (धर्म को नहीं मानने वाले) 5.  शिन्तो धर्म जापान 6. चीन का प्राचीन लोक धर्म एवं मान्यताएं 7. कंफ्यूशियस धर्म चीन 8. लाओ धर्म एवं मान्यताएं चीन 9.  आजीविक धर्म भारत 10.  बौद्ध धर्म एवं मान्यताएं 11. पारसी (अग्नि पूजक) धर्म एवं मान्यताएं 12. सनातन धर्म एवं मान्यताएं 13. गाय उत्पत्ति एवं सनातन धर्म में पूजा 14. इस्लाम धर्म एवं मान्यताएं 15.  इस्लाम धर्म के प्रवर्तक हजरत मोहम्मद साहब 16. यहूदी धर्म एवं मान्यताएं 17. जैन धर्म एवं मान्यताएं 18. सिक्ख धर्म एवं मान्यताएं 19. दीन ए इलाही (अकबर) धर्म एवं मान्यताएं 20.  नास्तिकता 21.  नास्तिकता 22.  शामानी धर्म

नास्तिकता

     नास्तिकता (Atheism) (कुफ्र)       नास्तिकवादों के प्रतीक चिह्न  (इस लेख में विभिन्न स्थानों पर प्रकाशित आलेखों के सारांश शामिल किए गए हैं, लेख का उद्देश्य केवल आमजन तक अपेक्षित जानकारी पहुंचाना है, जिसे पढ़ कर सही, सत्य और वास्तविकता का ज्ञान हो सके।) नास्तिकता को समझने के लिए पहले हमें यह समझना होगा-  अज्ञेयवाद (Agnosticism) (जो ज्ञात नहीं है) -  क . इस सिद्धांत की मान्यता है कि विश्व की कुछ वस्तुओं का ही निश्चयात्मक ज्ञान संभव है, अधिकांश तत्व या पदार्थ अज्ञेय हैं, अर्थात्  उनका ज्ञान संभव नहीं है। अज्ञेयवाद , संदेहवाद से भिन्न है, संदेहवाद (संशयवाद) के अनुसार ब्रह्मांड के किसी भी पदार्थ का अवबोध संभव नहीं है। आधुनिक काल में इस शब्द का उपयोग सन् 1869 में अंग्रेज जीवविज्ञानी  टॉमस हेनरी हक्सले   (1825 - 1895) ने किया। इस से पहले संजय नामक भारतीय दार्शनिक ने जीव मात्र के बारे में अज्ञेयवाद को व्यक्त किया,  प्रोटगोरस  (ग्रीक दार्शनिक) 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व ने देवताओं के अस्तित्व के बारे...

शामानी धर्म मंगोल एवं मुगल

        शामांनी धर्म - एक परिचय शामानी धर्म में पूर्वज पूजा, जीववाद और प्रकृति के साथ सामंजस्य पर ज़ोर दिया जाता है धर्म एक प्राचीन, प्रकृति-आधारित आध्यात्मिक प्रणाली है जो आकाश, पृथ्वी, पूर्वजों और आत्माओं के साथ मनुष्य के संबंध पर केंद्रित है.  शामानी धर्म  ( तारों एवं आकाश के पुजारी)  -  शामानी धर्म जिसे  शमनवाद भी कहा जाता है, एक प्राचीन आध्यात्मिक प्रथा है जो जनजातीय और स्वदेशी समाजों में पाई जाती है, जहाँ शमन (Shaman) नामक व्यक्ति आत्माओं, देवताओं और मृतकों की दुनिया से जुड़कर उपचार करने, मार्गदर्शन प्राप्त करने और आध्यात्मिक यात्राएं करने की शक्ति रखता है; यह प्रथा प्रकृति, आत्माओं और पूर्वजों के साथ गहरे संबंध पर आधारित है और साइबेरिया, मध्य एशिया तथा अरुणाचल प्रदेश जैसी जगहों पर प्रचलित है। शामानी धर्म की स्थापना -  शामांनी धर्म का कोई एक संस्थापक नहीं है, यह विश्व की स्वदेशी और आदिवासी संस्कृतियों में हजारों सालों से चली आ रही प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा या प्रथा है। सार्वभौमिक आध्यात्मिक प्रथा माना जाता है जो दुनिया...

अरावली एक विश्लेषण

ढाई सौ करोड़ पुरानी अरावली के संबंध में एक विश्लेषण -  अरावली मुद्दा क्या है ? अरावली पर्वतमाला से जुड़ा मामला कई वर्षों से उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन रहा है, जिसका मूल प्रश्न यह रहा है कि 🔥 प्रश्न 01 -  अरावली पहाड़ियाँ आखिर हैं क्या और उन्हें कैसे परिभाषित किया जाए? ⚖️ इस मुद्दे पर - अलग-अलग राज्यों में अलग परिभाषाएँ लागू थीं, जिससे खनन, निर्माण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर भ्रम बना हुआ था। हालिया सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में गठित केंद्र सरकार की समिति द्वारा प्रस्तावित वैज्ञानिक परिभाषा को स्वीकार किया गया, जिसके अनुसार— जिस भू-भाग की ऊँचाई आसपास के सामान्य धरातल से कम से कम 100 मीटर अधिक है, वही अरावली हिल मानी जाएगी। यदि ऐसी दो या दो से अधिक पहाड़ियाँ 500 मीटर के दायरे में हों, तो उन्हें अरावली रेंज कहा जाएगा। सरकार का तर्क है कि इससे पूरे देश में एक समान और स्पष्ट परिभाषा लागू होगी। इसी बिंदु पर विवाद शुरू हुआ है, क्योंकि अरावली केवल ऊँचाई नहीं, बल्कि पूर्ण पारिस्थितिक तंत्र है। 🔥प्रश्न 02 ...

राजा और रंक

#लघुकथा - राजा और रंक  नोट - इस लघुकथा की किसी भी जीवित और मृत व्यक्ति, संस्था, स्थान या घटना से कोई संबंधता नहीं है। फिर भी यदि किसी प्रकार की कोई समानता पाई जाती है तो यह केवल मेल होगा, वास्तविक नहीं लघुकथा - विधायक जी राजपूताना की रियासत शिकानेर के एक ठिकाने के आमजन सीधे - सादे और वीश्वासी होते है। निकट की रियासत जयपुर के गुरुकुल से पढ़ कर आया महत्वकांक्षी नौजवान नागेंद्र टूटे से पुराने हरे रंग के रथ में सवार हो कर गढ़ पर चढ़ाई करने आ पहुंचा। यहां की जनता ने सूझबूझ से गढ़ की रक्षा करते हुए आक्रांता को मार भगाया। कुछ समय बाद इसी ठिकाने के कोहर सिंह, दुखराम और अन्य लोगों ने ठिकानेदार का घमंड तोड़ने के लिए इस बाहरी आक्रांता से हाथ मिला लिया। घुसपैठिए पूरी चौरासी कोस की धरती पर फैल गए और सब से पहले उन्होंने यहां की जाति एवं धर्म के अंतर विहीन माहौल में जाति और धर्म के साथ गौत्र और क्षेत्र का ज़हर घोलना शुरू किया। स्थान और समर्थन मिलने के बाद चक्रव्यूह रचने की शुरुआत हुई। इस ठिकाने में कभी भी धर्म - जाति का झगड़ा नहीं रहा। शिकानेर रियासत के समय आक्रमण होने पर गढ़ की ...

फर्जी

                    # फर्जी   बिहार के सीतामढ़ी जिले एक छोटा सा गांव मेहसौल। घरों में खुले में पेंट का काम करने वाले राजेश्वर के घर खुशियां मनाई जा रही हैं। बेटा हुआ है बेटा, कहते - कहते दाई बधाइयां बांट रही है। राजेश्वर राजेश्वर आंख बंद किए हाथ जोड़े ईश्वर का धन्यवाद कर रहा है। समय बीतता गया, बेटा किशोर आंगन में दौड़ने लगा। किशोर बचपन से ही गंभीर और संयमित लड़का था। उसके बोलने, उठने, चलने और खाने में एक अलग सी गंभीरता थी।  अब किशोर स्कूल जाने लगा। स्कूल में उसके दोस्त बहुत कम पर जो थे वो एकदम पक्के।  किशोर की सधी हुई दिनचर्या थी, बड़ा होते - होते वो और भी नपा - तुला व्यवहार करने लगा। महसौली में बड़े से आम के पेड़ के नीचे वह अपना कार्यालय बनाता, उसके दोस्त फरियाद ले कर आते और किशोर उन्हें सुलझाता। खेल - खेल में स्कूल के दूसरे साथी भी अपनी समस्या ले कर आने लगे, किशोर उन्हें चुटकियों में सुलझा देता। स्कूल से कॉलेज शिक्षा के लिए वह अब पटना शहर में आ गया। कॉलेज जाता और उसके बाद उसके तो वही ठाठ। कुछ पुराने साथी आ गए...

अवयस्कों के भरण पोषण एवं अभिभावकता/ संरक्षकता

Case study  गीता हरिहरन बनाम भारतीय रिज़र्व बैंक (1999) (Githa Hariharan v. Reserve Bank of India, 1999, Supreme Court of India) यह भारत के अभिभावकता (Guardianship) कानून से जुड़ा एक ऐतिहासिक फैसला है, जिसने माता को भी पिता के बराबर अभिभावक का दर्जा दिलाया। --- ⭐ मामले की पृष्ठभूमि गीता हरिहरन ने अपने बेटे के नाम पर RBI में निवेश करना चाहा। RBI ने कहा कि बच्चे का “natural guardian” (स्वाभाविक अभिभावक) केवल पिता है, इसलिए बच्चे के नाम पर निवेश पिता ही कर सकता है। गीता हरिहरन ने इसका विरोध किया और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की कि -  क्या माँ बच्चे की प्राकृतिक अभिभावक (Natural Guardian) नहीं है? क्या माँ तभी अभिभावक बनेगी जब पिता मर जाए या असमर्थ हो? --- ⭐ मूल कानूनी प्रावधान हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट, 1956 – सेक्शन 6 इसमें लिखा था कि बच्चे का natural guardian है: 1. पहले पिता, 2. फिर माँ इस भाषा से यह समझ आता था कि माँ तभी अभिभावक बनती है  क) जब पिता ख) मर जाए, ग) या असमर्थ हो घ) या त्याग कर दे। --- ⭐ सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय (1999) अदालत ने कहा -...

टटलू

लघुकथा - टटलू  अंकल आपके पास आईफोन है क्या? जल्दी - जल्दी बोलती रेशमा ने वयोवृद्ध पूर्णजी से पूछा। नहीं, कहते हुए वो अपने काम लग गए। रेशमा ने तपाक से एक पेज पर अपने नंबर लिख कर थमाते हुए कहा, एक दो दिन में आए तो इस नंबर पर कॉल कर लेना, अंकल! मुझे एक आईफोन लेना है।  कहानी अब शुरू होती है। जमाना बहुत खराब है पूर्ण सावधानी ही इसका इलाज है, नहीं तो जो पीढ़ियों की इज़्ज़त मिनटों में मिट्टी में मिलते देर नहीं लगेगी।  हमारे पड़ोस के एक कस्बे के मुख्य बाजार की शांत और वीरान गलियों में पूर्ण जी जैसे छोटे, सीधे-साधे दुकानदार रहते हैं। पूर्णजी की पीढ़ियों की दुकान है, जहां अब वो मोबाइल बेचते हैं। उम्र ढल चुकी थी, बाल सफेद हो चले थे, परन्तु व्यापार पूरी ईमानदारी से चलाते। बीवी-बच्चे घर पर, वो दिन भर दुकान, शाम को घर। जिंदगी सरल थी, बिना किसी उलझन के। गौरी चिटी, बड़ी-बड़ीआंखों वाली, मीठी बोली वाली रेशमा की रंगत दोपहर की झुलसाती गर्मी ने एकदम लाल कर दी थी। पूर्णजी के नहीं के बाद वह हर दिन फोन के बारे में पूछने आती, वहां पड़े फोन उठाती, मुस्कुराती, नजरें मिलातीं और चली जाती।...

नशा

लघुकथा  -  नशा  सर्दी के दिनों की सुबह का समय गांव के नौजवान गुवाड़ में इकट्ठे हो रहे हैं, मुरली भी पीपल के नीचे लगे माइक के पास खड़ा था। कल उसकी माँ की तबियत ज्यादा बिगड़ जाने के कारण रात भर अस्पताल में था। अभी घर पहुंचा ही था कि माइक में बुलावा आ रहा था, धर्म स्थापना और धर्म रक्षार्थ कौन लड़े ? "बात उन दिनों की है, जब देश में राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद चरम पर था।  सम्पूर्ण वातावरण - 'बच्चा बच्चा राम का जन्मभूमि के काम का' और 'जन्मभूमि के काम ना आए वो बेकार जवानी है- जिस हिंदू का खून ना खौले, खून नहीं वो पानी है', जैसे नारे गूँजते थे। ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले 15 वर्षीय मुरली घर वालों को बिना बताए कार सेवा हेतु भाग गया। राम शिलाएँ पूजी जा चुकी थीं।  इधर मस्जिद में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के लोग काफिरों के खात्मे की दुआ करवा रहे थे। "नारा ए तकबीर अल्लाह हूं अकबर", "नारा ए रिसालत या रसूल्लाह" बाबरी हमारी जान है, मुसलमानों की पहचान है। हम लोग उन दिनों अपने गृहनगर भीलवाड़ा में राम मंदिर के लिए अभियान चला रहे थे। मेरी कार सेवा...

👤 शमशेर भालू खान

📍 कायमखानी बस्ती सहजुसर ,चूरू राजस्थान Pin :-331001

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