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भारतीय न्याय तंत्र का प्राचीनता से आधुनिकता तक का सफर

भारतीय न्याय तंत्र (Indian Judicial System)  -  वर्तमान भारतीय न्याय तंत्र विश्व के सबसे बड़ी और सबसे पुरानी एकीकृत और श्रेणीबद्ध  न्याय प्रणालियों में से एक है। जिसमें शीर्ष अदालत द्वारा दिया गया निर्णय निचली सभी अदालतों पर बाध्यकारी होता है। प्राचीन भारत में न्याय की अवधारणा कानून के स्थान धर्म के सिद्धांत पर आधारित थी। तब न्याय का अर्थ था व्यवस्था को बनाए रखने हेतु राजा और रंक द्वारा कर्तव्यों का पालन करना। प्राचीन भारतीय न्याय प्रणाली की विशेषताएं और संस्थाएं -  1.धर्म - यहां धर्म संकीर्ण अर्थ में नहीं व्यापक अर्थ में काम करता है। धर्म का अर्थ संप्रदाय नहीं, बल्कि नैतिक कर्तव्य और सामाजिक व्यवस्था था। संस्कृत में धर्म शब्द का अर्थ एवं परिभाषा -  धृति क्षमा दमोस्त्यं सोचमिंद्रियनीग्रह धीर विद्या सत्यं अक्रोध दसकं धर्म लक्षणं। एक अन्य सूत्र - यतो धर्मस्ततो जय अर्थात   जहाँ धर्म है, वहीं विजय है। न्याय का मुख्य उद्देश्य धर्म की स्थापना करना था।   राजा का कर्तव्य (राजधर्म) -  राजा को धर्म का रक्षक माना जाता था। यदि राजा न्याय नहीं क...
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🏠समसामयिक लेख

समसामयिक घटनाएं  1. परिवार में वयोवृद्ध 2. बाजार के वर्तमान हालत 3. भूमिगत जल एवं भविष्य 4. भारत में वन, वन्य क्षेत्र एवं पर्यावरण 5. उन्नाव बस दुर्घटना 6. पूर्व RTDC चेयरमैन धर्मेंद्र सिंह राठौड़ 7.की पत्नी का बाय पस ऑपरेशन 8. राजस्थान लाल डायरी प्रकरण 9. संतान ऐसी भी 10. गाय उत्पत्ति एवं स्थिति 11. सामाजिक सरोकार 12. चूरू ट्रिपल मर्डर मिस्ट्री 13. राजस्थान बजट 2024-25 एक छलावा 14. चिकू की बागवानी 15. पंजाबी लोक नायक अब्दुल्ला भट्टी 16. कुश्ती बनाम अखाड़ा 17. शक संपत्ति विवाद और परिवार का अंत 18. ताजमहल 19. उर्दू प्रश्न पत्र 20. भारत सरकार की अग्निवीर योजना (अस्थाई सैनिक) 21. विपत्ति,सरकार और हम (संदर्भ कोरोना काल) 22. सरकार,योजना और जागरूकता 23. हम हमारा व्यवहार और करोना 24. मदरसा बोर्ड जयपुर का फर्जीवाड़ा 25. राजस्थान बजट 2025-26 26. महिला दिवस 8 मार्च 27.  चूरू अग्रसेन नगर ओवर ब्रिज निर्माण 28.  कहानी सिक्किम की 29. पाकिस्तान परस्त कौन 30.  भारत नेतृत्व तब और अब 31.  pok की कहानी 32.  भाजपा सरकार के ग्यारह साल ग्यारह सवाल 33.  नरेगा एवं...

मानव तस्करी

मानव तस्करी गंभीर अपराध और मानवाधिकारों का उल्लंघन है। इसमें डराकर, बलपूर्वक, या धोखे से लोगों का शोषण हेतु क्रय है विक्रय, परिवहन या भर्ती की जाती है। इसे आधुनिक दासता भी कहा जाता है। 1. मानव तस्करी के प्रमुख रूप -  तस्कर मुख्य रूप से शोषण हेतु कमजोर वर्गों को निशाना बनाते हैं। इसके कई रूप हो सकते हैं -  I. जबरन श्रम -  इसे बेगार, बंधुआ मजदूरी भी कहते हैं। कारखानों, ईंट भट्टों, निर्माण स्थलों या घरेलू काम के लिए लोगों से जबरदस्ती काम कराना और उन्हें नाममात्र के वेतन या बिना वेतन के जबरन काम करवाया जाता है। लोगों को ईंट-भट्टों, कपड़ा कारखानों और कृषि कार्यों में बंधुआ मजदूर बनाया जाता है। II. यौन शोषण  - महिलाओं और बच्चों को वेश्यावृत्ति या अन्य प्रकार के यौन कार्यों के लिए मजबूर किया जाता है। हाल ही में जारी एप्सटन फाइल में विश्व के बड़े - बड़े नामवर लोगों के नाम तस्करी कर लाए गए कम आयु के बच्चों से यौन संबंध के चर्चे जोरों पर हैं। अधिकांश मानव तस्करी गरीब देशों से होती है।महिलाओं और बच्चियों को वेश्यावृत्ति हेतु तस्करी कर रेड लाइट एरिया में बेचा दिया ज...

UGC (प्रताड़ना के विरुद्ध कार्यवाही) नियम 2012 (संशोधित नियम 2026) -

उच्च शिक्षा में प्रताड़ना निरोधक नियम 2012, संशोधित 2026 (UGC, लॉ) जिस मामले को लेकर गतमाह में सोशल मीडिया, चौपाल बस एवं कैंपस में विशेष चर्चा रही वो है UGC.  अधिकांश लोग सुनी सुनाई बातों पर यकीं कर लेते हैं, जो सही नहीं है। आइए जानते हैं पूरा सच। भारत में यूनिवर्सिटी कॉलेज और स्कूल कैंपस एवं कक्षा में कई घटनाएं घट चुकी हैं जिनमें से हाल ही की दो घटनाएं वीभत्स एवं हृदयविदारक हैं,  1 . पायल ताड़वी की आत्महत्या 2 . रोहित वेमुला की आत्महत्या इन्हीं घटनाओं को लेकर न्याय की गुहार लगाने वर्ष 2019 में, पायल तड़वी की माता अबेदा तड़वी और रोहित वेमुला की माता राधिका वेमुला की याचिका लेकर कोलंबिया यूनिवर्सिटी से LLM (Columbia Law School Merit Award से सम्मानित) एडवोकेट दिशा वाडेकर, इस संदर्भ में गहन अनुसंधान के  डेटा सहित कोर्ट में याचिका प्रस्तुत करती हैं। कोर्ट में, हो भेदभाव पर बहस हुई जिसमें वर्ष 2023 में भारत सरकार द्वारा राज्यसभा में प्रस्तुत रिपोर्ट (विभिन्न IIT,  NIT, IIM जैसे संस्थानों  में वर्ष 2019 से 2021 तक 98 SC,ST एवं OBC के छात्रों ने आत्महत्या ...

ALU, LLB प्रथम सेमेस्टर पेपर 1 से 6 नोट्स

अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी जयपुर के पाठ्यक्रमानुसार LLB प्रथम सेमेस्टर नोट्स  पेपर 1.1 संविधान पेपर 1.2 अपकृत्य विधि एवं मोटर वाहन अधिनियम पेपर 1.3 संविदा विधि पेपर 1.4 पारिवारिक एवं हिन्दू विधि पेपर 1.5 श्रम एवं औद्योगिक विधि पेपर 1.6 Genaral English and Maxims ******************************* नोट्स - LLB प्रथम सेमेस्टर  द्वारा - शमशेर भालू खां  छात्र - LLB प्रथम सेमेस्टर 2025 राजकीय विधि महाविद्यालय, चूरू  पता - 296 सदफ आशियाना कायमखानी बस्ती सहजूसर, चूरू  9587243963 ******************************* स्त्रोत एवं संदर्भ -  I . पाठ्यक्रम - अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी, जयपुर द्वारा जारी  II .पुस्तक -  ∆. English Class 10th and 12th  ∆.  आधुनिक हिंदू विधि लेखक Dr. पारस दिवान प्रकाशक - इलाहाबाद लॉ एजेंसी पब्लिकेशंस, इलाहाबाद। ∆. अपकृत्य विधि, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम एवं मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत क्षतिपूर्ति - लेखक -एम. एल. शुक्ला  ∆. संविदा - I एवं विर्निदिष्ट अनुतोष अधिनियम ∆. श्रम एवं औद्योगिक विधि  लेखक - प्रोफेसर सूर्य ...

पेपर 1.6 सामान्य अंग्रेजी विधिक भाषा एवं लेखन

सामान्य अंग्रेजी विधिक भाषा, विधिक लेखन  DR. BHIMRAO AMBEDKAR LAW UNIVERSITY, JAIPUR  SYLLABUS - PAPER 1.6 General English, Legal Language and Legal Writing. UNIT I - FUNCTIONAL GRAMMAR AND ENGLISH, LANGUAGE SKILLS -  1.1 Use of Prepositions; Correction of errors in Sentences. 1.2 Narration- Direct and Indirect Speech, Active and Passive Voice. 1.3 Reading Comprehension. 1.4 Precis writing. 1.5 Translation - from English to Hindi and Hindi to English. UNIT II- LEGAL LANGUAGE 2.1 Legal language - meaning, scope and issues. 2.2 Constitutional provisions relating to language. 2.3 Comprehension and analysis of any two Supreme Court judgments. 2.4 Selection of language in drafting of documents/ judgments. 2.5 Language to be used in representations for grievance redressal. UNIT III - LEGAL VOCABULARY AND MAXIMS 3.1 Utility of legal vocabulary and maxims. 3.2 Selection of legal vocabulary appropriate to situation and context. 3.3 Illustrative list of legal vocabulary...