चार ख़बरें, एक सवाल - क़ानून की सीढ़ी पर नियम कहाँ लचीले हो जाते हैं? #news आज की चार ख़बरें चार अलग-अलग संस्थाओं और परिस्थितियों से जुड़ी हैं। लेकिन इन्हें साथ रखकर पढ़ें तो एक साझा सवाल उभरता है: क्या जवाबदेही, पारदर्शिता और क़ानून की प्रक्रिया का अनुभव हर व्यक्ति के लिए समान है? यह सवाल किसी को दोषी घोषित करने का नहीं, बल्कि सत्ता, संस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रता के बीच जवाबदेही के रिश्ते को समझने का है। #पहली_ख़बर - तस्वीर, मुलाक़ात और याददाश्त - #एपस्टीन_फाइल अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी जेफ़्री एपस्टीन से संबंधित दस्तावेज़ों में भारत के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की एक तस्वीर सामने आई है। तस्वीर में पुरी और एपस्टीन मेज़ के आमने-सामने बैठे दिखाई देते हैं। इस वर्ष फरवरी में पुरी ने कहा था कि उन्होंने एपस्टीन से लगभग आठ वर्षों की अवधि में तीन या अधिकतम चार बार मुलाक़ात की थी। उनके अनुसार, ये मुलाक़ातें इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट से जुड़े प्रतिनिधिमंडल के संदर्भ में हुई थीं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, उनके कार्यालय ने कहा कि लगभग एक दशक पुरानी तस्वीर म...
लघुकथा - छोटी बहू...... कुंदरू शहर के निकट के गांव जूसर में एक नामचीन बड़े परिवार में चार भाई रहते थे। गांव के लोग इस परिवार की बड़ी इज्जत और सम्मान करते थे। पिता अपने समय के जागीरदार थे परंतु लाख कोशिशों के बावजूद बेटों को जिस हद तक पढ़ाने की इच्छा थी नहीं पढ़ा सके। समय ने करवट बदली, परिवार की जागीरदारी जाती रही, घर में कमाई कम हो गई लेकिन खर्चे वही रहे। कबीर का दोहा है - बढ़त बढ़त संपत्ति सलिल मन सरोज बढ़ी जात, घटत- घटत पुनि ना घटे बरू समूल कुमलात। धीरे धीरे घर की स्थिति में कमजोरी आने लगी। कमजोर होते घरों में अक्सर महिलाएं अपने परिवार के लिए लालची हो जाती हैं, ऐसा ही इस घर में हुआ। बड़ा बेटा पंवरा जिस के नाम से जमीदार ने पानी वाली सिंचित जमीन खरीदी थी पर कब्जा कर लिया। पिता के खूब समझाने पर भी वह नहीं माना तो मायूस हो कर जागीरदार जी ने उसे अपनी सारी जमीनों से बेदखल कर दिया। उस से छोटा तेरा सिंह जो जागीरदार जी का पूरा काम संभालता था ने बड़ी चालाकी से जमा धन संपत्ति को अपने कब्जे में कर लिया। दोनों ही बड़ों ने अपने खुद के मन से कोई फैसला नहीं किया, बस घर वालियों के हठ के आ...