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चूरू जिला विकास सूचकांक एक झलक

बिलखता चूरू मज़े में नेताजी -  संसाधन एवं विकास की पड़ताल -  चूरू जिले का SDI/SDG इंडेक्स का पूरा विश्लेषण -  चूरू में वंशवाद और विकास पर चल रही चर्चा के संदर्भ में विकास हुआ कि नहीं का पता लगाने सबसे उपयोगी तरीका यह है कि जिले के विकास को सरकारी आंकड़ों से परखा जाए। इसके लिए राजस्थान सरकार का Rajasthan SDGs Index 2024 (Version 5.0) एक महत्त्वपूर्ण आधिकारिक स्रोत है। इसमें चूरू के समग्र स्कोर के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी, रोजगार, बुनियादी सुविधाओं और पर्यावरण जैसे विकास लक्ष्यों का आकलन किया गया है। चूरू के नजदीकी जिले नागौर, बीकानेर, सीकर, झुंझुनू एवं हनुमानगढ़ शिक्षा, चिकित्सा, मूलभूत संसाधन (बिजली, पानी, सड़क) सिंचाई एवं सुरक्षा के क्षेत्र में कहीं आगे हैं जबकि इनकी आबादी एवं क्षेत्रफल बीकानेर को छोड़ कर कम है। चूरू की जनता ने इन मुद्दों की ओर ध्यान दिए बगैर केवल धर्म, जाति और भावनाओं के आधार पर वोट किया है। 20 सूत्री कार्यक्रम (बीसूका), मरु विकास कार्यक्रम, नाबार्ड, वित्त आयोग, मनरेगा  एवं अन्य योजनाओं का लाभ जो इस जिले को मिलना चाहिए था वो नहीं मि...
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चूरू समसामयिक लेख

1. चूरू में वंशवाद - एक झलक 2. चूरू कांग्रेस बदहाल क्यों 3.  चूरू में बढ़ता नशे का प्रभाव 4.  चूरू कांग्रेस का नगर परिषद चुनावों में 36 से 24 पर कारण एवं विश्लेषण  5.  चूरू जिला विकास सूचकांक एक झलक

राजनीति में वंशवाद एक झलक

सियासत में वंशवाद, टिकट वितरण और कार्यकर्ता की उपेक्षा पर एक पड़ताल। वंशवाद एक झलक -  चूरू वंशवाद की सूची - 1. राजेंद्र सिंह राठौड़ पूर्व केबिनेट मंत्री चूरू/तारानगर पार्टी - भाजपा  1. पराक्रम सिंह राठौड़ पुत्र 2. कनिका सिंह राठौड़  पुत्रवधु (दोनों को जिला परिषद की टिकट) 2. मकबूल मंडेलिया पूर्व जिलाध्यक्ष कांग्रेस, पूर्व विधायक, चूरू पार्टी - कांग्रेस 1. रफीक मंडेलिया पुत्र (प्रदेश उपाध्यक्ष कांग्रेस, दो बार सांसद, दो बार विधायक की टिकट, हार 2. इरशाद मंडेलिया, पौत्र (पिता रफीक मंडेलिया उसे चूरू का विधायक देखना चाहते हैं) 3. नरेंद्र बुडानिया, दो बार सांसद, तीन बार विधायक) पार्टी - कांग्रेस कनक बुडानिया, पत्नी  जिला परिषद से टिकट 4. भंवरलाल शर्मा पूर्व केबिनेट मंत्री सरदारशहर पार्टी - पहले भाजपा, अब कांग्रेस 1. अनिल शर्मा पुत्र (दो बार सरदारशहर से विधायक)  2. केसरी शर्मा, पुत्र (जिला परिषद चूरू से टिकट) 3. श्यामलाल शर्मा, भाई (निर्दलीय प्रत्याशी BDC) 5. भंवर...

चूरू कांग्रेस बदहाल क्यों

चूरू कांग्रेस बदहाल क्यों.... जब तक कांग्रेस में रफीक मंडेलिया जी हैं तब तक भाजपा को ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है। क्योंकि बीजेपी का काम तो यही कर देंगे। सोचिये कैसे  21 बिंदुओं के रूप में विश्लेषण -  1. चूरू पंचायत समिति जीती हुई थी बहुमत होने के बावजूद भाजपा की झोली में डाल दी। 2. ठेके पर टिकट बांट कर चूरू नगर परिषद में 40 सीटे आनी थी उनको यह व्यक्ति 24 पर ले आए।  3. 2018 का चुनाव यह व्यक्ति जानबूझकर हारा। 4. 2023 के चुनावों में रणजीत सातड़ा, महेंद्र सहनाली, रामनिवास सहारण, अहसान बीनासर जैसे कर्मठ कार्यकर्ताओं की उपेक्षा के कारण हारा। 5. चुनावों के बाद सीधे बंबई चले जाते हैं और वापस चुनावों पर ही आते हैं। 6. बोलने की बिल्कुल भी सलाहियत नहीं है, जातिये टिप्पणियां सरेआम करते हैं। 7. जब जब चूरू को विपक्ष की जरूरत पड़ी यह महाशय नदारद रहे। 8. यह हर काम पैसे के दम पर करने की मंशा रखते हैं जबकि सभी काम पैसों से नहीं होता। 9. गत सरकार में इनके निकटतम लोगों पर ट्रासंफर या अन्य काम के लिए पैसे लेने के आरोप सरेआम लगे हैं, काफी लोगों ने पैसे वापस भी लिए हैं। 10. ईमानदा...

खबर की पड़ताल

चार ख़बरें, एक सवाल -  क़ानून की सीढ़ी पर नियम कहाँ लचीले हो जाते हैं? #news  आज की चार ख़बरें चार अलग-अलग संस्थाओं और परिस्थितियों से जुड़ी हैं। लेकिन इन्हें साथ रखकर पढ़ें तो एक साझा सवाल उभरता है: क्या जवाबदेही, पारदर्शिता और क़ानून की प्रक्रिया का अनुभव हर व्यक्ति के लिए समान है? यह सवाल किसी को दोषी घोषित करने का नहीं, बल्कि सत्ता, संस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रता के बीच जवाबदेही के रिश्ते को समझने का है। #पहली_ख़बर - तस्वीर, मुलाक़ात और याददाश्त - #एपस्टीन_फाइल अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी जेफ़्री एपस्टीन से संबंधित दस्तावेज़ों में भारत के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की एक तस्वीर सामने आई है। तस्वीर में पुरी और एपस्टीन मेज़ के आमने-सामने बैठे दिखाई देते हैं। इस वर्ष फरवरी में पुरी ने कहा था कि उन्होंने एपस्टीन से लगभग आठ वर्षों की अवधि में तीन या अधिकतम चार बार मुलाक़ात की थी। उनके अनुसार, ये मुलाक़ातें इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट से जुड़े प्रतिनिधिमंडल के संदर्भ में हुई थीं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, उनके कार्यालय ने कहा कि लगभग एक दशक पुरानी तस्वीर म...

लघुकथा - छोटी बहू

लघुकथा - छोटी बहू...... कुंदरू शहर के निकट के गांव जूसर में एक नामचीन बड़े परिवार में चार भाई रहते थे। गांव के लोग इस परिवार की बड़ी इज्जत और सम्मान करते थे। पिता अपने समय के जागीरदार थे परंतु लाख कोशिशों के बावजूद बेटों को जिस हद तक पढ़ाने की इच्छा थी नहीं पढ़ा सके। समय ने करवट बदली, परिवार की जागीरदारी जाती रही, घर में कमाई कम हो गई लेकिन खर्चे वही रहे। कबीर का दोहा है - बढ़त बढ़त संपत्ति सलिल मन सरोज बढ़ी जात, घटत- घटत पुनि ना घटे बरू समूल कुमलात। धीरे धीरे घर की स्थिति में कमजोरी आने लगी। कमजोर होते घरों में अक्सर महिलाएं अपने परिवार के लिए लालची हो जाती हैं, ऐसा ही इस घर में हुआ। बड़ा बेटा पंवरा जिस के नाम से जमीदार ने पानी वाली सिंचित जमीन खरीदी थी पर कब्जा कर लिया। पिता के खूब समझाने पर भी वह नहीं माना तो मायूस हो कर जागीरदार जी ने उसे अपनी सारी जमीनों से बेदखल कर दिया। उस से छोटा तेरा सिंह जो जागीरदार जी का पूरा काम संभालता था ने बड़ी चालाकी से जमा धन संपत्ति को अपने कब्जे में कर लिया।  दोनों ही बड़ों ने अपने खुद के मन से कोई फैसला नहीं किया, बस घर वालियों के हठ के आ...

भारत में 1 अक्टूबर 2026 से जन्म मृत्यु रजिस्ट्रेशन एक विश्लेषण

भारत में 1 अक्टूबर 2026 से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र संबंधी नए आदेशों का विश्लेषण -  जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र केवल सरकारी दस्तावेज़ नहीं हैं, बल्कि नागरिक की पहचान, शिक्षा, पासपोर्ट, उत्तराधिकार, पेंशन और विभिन्न सरकारी सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण अभिलेख हैं। इसलिए 1 अक्टूबर से लागू बताए जा रहे नए आदेशों का विश्लेषण करते समय यह समझना आवश्यक है कि कौन-सा नियम बदला है, किस पर लागू है और आम नागरिक के अधिकारों पर उसका क्या प्रभाव पड़ेगा। इस विषय में एक महत्वपूर्ण अंतर भी ध्यान देने योग्य है: जन्म-मृत्यु पंजीकरण कानून में संशोधन, केंद्र सरकार का नया आदेश और किसी राज्य द्वारा जारी प्रशासनिक निर्देश, तीनों अलग-अलग चीजें हैं। इनके प्रभाव और लागू होने की तारीख अलग हो सकती है। 1. नया कानून क्या है और कब लागू हुआ? भारत सरकार ने Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026 अर्थात जन्म-मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 को 1 अक्टूबर 2026 से लागू किया है। गृह मंत्रालय के अंतर्गत भारत के महारजिस्ट्रार की 16 सितंबर 2026 की राजपत्र अधिसूचना में यह तारीख निर्धारित की गई थी। ...

👤 शमशेर भालू खान

📍 कायमखानी बस्ती सहजुसर ,चूरू राजस्थान Pin :-331001

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