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संघर्ष एक कहानी

एक आदमी से हजारों का काफिला दांडी यात्रा चूरू से दांडी 01 नवंबर 2020 से प्रारंभ
जब 27 दिसंबर 2019 का समझौता फेल हो गया और सौरभ स्वामी निदेशक माध्यमिक शिक्षा बीकानेर ने एक विद्यालय एक तृतीय भाषा का आदेश 5 सितंबर 2020 को निकाला तो बहुत दुख हुआ।
सीकर के गुलामु खान बेसवा और खिरवा के (तत्कालीन शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के विधानसभा क्षेत्र के लोग) शिक्षा मंत्री से मिले तो कोई सार्थक जवाब नहीं दिया गया।
मैं ने निदेशक माध्यमिक शिक्षा बीकानेर से बात की ओर उनको खुली चेतावनी दे दी की आपको अपने हाथों से यह आदेश करने होंगे। उन्होंने। भी चेतावनी स्वीकार कर ली और कहा तुझ से जो होता है कर ले मैं आदेश वापस नहीं लूंगा।
बात लग गई। मैं घर पर क्या किया जाए इस तरह की प्लानिंग करने लगा। मेरी आदत है जब मन में विचार आने लगते हैं तो एक जगह नहीं बैठ सकता,को सदफ (मेरी पत्नी) अच्छी तरह से जानती है।
रात काफी हो गई तो उसने सोने को कहा पर मेरा मन बहुत दुखी और व्याकुल था। मैंने उससे पूछा मुझे क्या करना चाहिए।
सदफ का जवाब था "अब क्या दांडी जाओगे?" 
यहीं से दांडी का प्लान शुरू हुआ। 
भारत के नक्शे में चूरू से दांडी पैदल मार्ग की पड़ताल की,स्थानों का चिन्हीकरण किया,जिसमें तकरीबन 10 दिन लगे।

5 फरवरी 2019 से प्रारंभ आंदोलन की झलकियां

चूरू से फतेहपुर फतेहपुर से सुजानगढ़ क्लिप 01
रास्ते में क्लिप 02
नज्म मंसूर चुरूवी के फरजंद मन्नान खान मजहर चुरूबी गायकार अरशद मारवाड़ी मारवाड़ी म्यूजिक कंपनी सीकर खुल कर करेंगे पैरवी उर्दू जबान की 

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