विवाह विच्छेद (तलाकनामा)
500 का स्टांप पेपर
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मैं ..............पुत्र ............. जाति ........ निवासी ........... (आधार नं. ............)।
जिसे इस दस्तावेज में आगे "प्रथम पक्ष" के नाम से सम्बोधित किया गया है।
द्वितीय पक्ष
........ पत्नी......... पुत्री....... जाति ..... निवासी.......... हाल ........(आधार नं. 713739224624) जिसे इस दस्तावेज में आगे "द्वितीय पक्ष" उल्लेखित किया गया है।
जो कि हम दोनों पक्षकारान का निकाह दिनांक ...... को ग्राम/शहर......., तहसील......... जिला ........में ........ रीति रिवाज एवं समाज में प्रचलित रस्मों रिवाज के मुताबिक सम्पन्न हुआ था। निकाह/विवाह के पश्चात् हम दोनों पक्षकारान में छोटी मोटी बातों को लेकर आपस में विवाद एवं तनाव रहने लगा एवं दोनों पक्षकारों के मध्य आपसी वैचारिक मतभेद बढ़ते ही रहे। इसलिए दोनों पक्षकारान के मध्य विवाद इतना बढ़ गया, कि हमारे मन एवं विचारों का मिलान असंभव हो गया, अब परिस्थितियों यह बन गयी हैं कि हम दोनों पक्षकारान एक छत के नीचे पति-पत्नी की तरह निवास नहीं कर सकते हैं।
इस पर हम दोनों पक्षकारान के मध्य के मौजिज व्यक्तियों ने हमें व हमारे परिजनों को आपस में बैठा कर समझाईश में यह तय किया गया कि जब परिस्थितियां इस प्रकार की बन गयी हैं कि दोनों पक्षकारान एक साथ पति- पत्नी की तरह नहीं रह सकते हैं तो दोनों ही पक्षकारान को विवाद को ना बढ़ाते हुऐ पारस्परिक सहमति से निकाह विच्छेद कर लेना चाहिए। इस पर हम दोनों पक्षकारान के मध्य पारस्परिक सहमति से निकाह (विवाह) विच्छेद निम्नलिखित शर्तों व शरायतों के आधार पर तहरीर व तकमील करवाया जा रहा है :-
1. यह कि द्वितीय पक्ष द्वारा प्रथम पक्ष को तीन अलग अलग माह में तलाक की सूचना दी जा चुकी है, जिस पर प्रथम पक्ष द्वारा भी अपनी सहमति तीनों दफा अपनी पत्नी को दी जा चुकी है। तत्पश्चात् उक्त दोनों पक्षकारों के मध्य पूर्व में तलाक हो चुका हैं। पिछले तीन माह से द्वितीय पक्षकार ईदत की अवधि की पालना की जा चुकी है तथा मेहर की राशि भी प्रथम पक्षकार द्वारा द्वितीय पक्षकार को अदा कर दी गई है।
2. यह कि हम दोनों पक्षकारान ने निकाह दिनांकित ......... को सामाजिक स्तर पर आपसी सहमति से उपरोक्त अनुसार विच्छेद कर लिया है। आज के पश्चात् हम दोनों पक्षकारान एक दुसरे के पति पत्नी नहीं समझे व माने जावेंगे। आज के पश्चात् हम दोनों पक्षकारान में पति- पत्नी जैसे हर सम्बन्ध समाप्त समझे जावेगें। आज के पश्चात् हम दोनों पक्षकारान एक दुसरे के पति पत्नी नहीं रहेगें।
3. यह कि दोनों पक्षकारान के एक दूसरे के प्रति किसी तरह से कोई भी कानूनी अधिकार, दायित्व, कर्त्तव्य एवं फर्ज शेष नहीं रहेगें। आज के पश्चात् हम दोनों पक्षकारान के मध्य हर प्रकार के पारिवारिक एवं दाम्पत्ययिक रिश्ते एवं अधिकार समाप्त समझे जावेगें।
4. यह कि हमारे समाज में सामाजिक स्तर पर आपसी सहमति से विवाह विच्छेद करने की प्रथा है जिसके अनुसार हम दोनों पक्षकारों ने आपसी सहमति से पारस्परिक संबंध विच्छेद कर लिए हैं।
5. यह कि हम पक्षकारान के मध्य हमारे इस निकाह को लेकर अथवा अन्य किसी भी प्रकार का कोई विवाद नहीं है तथा ना ही हमने एक दुसरे के खिलाफ कोई मुकदमा आदि की कार्यवाही की है। परिवारजन एवं समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों की मध्यस्थता से समझौता हो गया। जिसके अनुसार दोनों पक्षकार ने पति पत्नी का सम्बन्ध समाप्त करते हुए अलग- अलग जीवन निर्वहन करने का निश्चय किया है।
6. यह कि द्वितीय पक्ष द्वारा विवाह के समय दिये गये दान दहेज का सम्पूर्ण सामान प्रथम पक्ष से द्वितीय पक्ष से प्राप्त कर लिया है तथा अब द्वितीय पक्ष की कोई भी वस्तु अथवा दहेज / सामान, गहना, कपड़ा प्रथम पक्ष व उसके परिवारजन के कब्जे व अधिकार में नहीं है, ना ही प्रथम पक्ष की कोई भी वस्तु, सामान आदि द्वितीय पक्ष के अथवा उसके परिवार के कब्जे व अधिकार में है अर्थात् पक्षकारान के मध्य किसी प्रकार का कोई लेनदेन शेष नहीं है।
7. यह कि द्वितीय पक्षकार से प्रथम पक्षकार ने अपने जीवन पर्यन्त की भरण-पोषण की राशि एकमुश्त ..... रूपये नकद प्राप्त कर ली है एवं अब कोई लेनदेन शेष नहीं है एवं अब दोनों पक्षकारों में भरण-पोषण की राशि को लेकर एवं स्त्रीधन बाबत किसी प्रकार का कोई विवाद शेष नही है, ना भविष्य में ऐसा कोई विवाद करेंगे।
8. यह कि आज के पश्चात् हम दोनों पक्षकारान एक दुसरे से हर तरीके के सम्बन्धों से आजाद एवं स्वतन्त्र समझे जावेगें। आज के पश्चात् अगर प्रथम पक्षकार चाहे तो अन्यत्र कहीं निकाह करने के लिए स्वतन्त्र रहेगा एवं इसी प्रकार द्वितीय पक्षकार भी चाहे तो कहीं भी निकाह करने के लिए स्वतन्त्र रहेगी। अन्यत्र निकाह करने में कोई भी पक्षकार एक दुसरे के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं कर सकेगा।
9. यह कि आज के पश्चात् हम दोनों पक्षकारान एक दुसरे से हर प्रकार के वैवाहिक बन्धनों से मुक्त एवं स्वतन्त्र समझे जावेगे। आज के पश्चात् हम दोनों के एक दुसरे के प्रति किसी भी प्रकार के कोई भी वैवाहिक, दाम्पत्यीक, पारिवारिक अधिकार उत्तरदायित्व एवं संबंध शेष नहीं रहेगें।
10. यह कि भविष्य में द्वितीय पक्षकार, प्रथम पक्षकार या प्रथम पक्षकार के परिवार की चल व अचल सम्पति में किसी प्रकार का दावा, क्लेम इत्यादि नहीं करेगी एवं ना ही किसी प्रकार से प्रथम पक्षकार या उसके परिवार की सम्पति में हिस्सा पांति लेने की अधिकारीणी रहेगी।
9. यह कि आज के पश्चात् प्रथम पक्षकार व द्वितीय पक्षकार एक दुसरे के खिलाफ किसी भी पुलिस थाना, न्यायालय आदि में कोई दावा मुकदमा आदि नहीं करेगें।
10. यह कि आज के पश्चात् दोनों ही पक्षकार एक दुसरे के खिलाफ किसी तरह का आरोप प्रत्यारोप करके एक दुसरे को शारीरिक, मानसिक व आर्थिक नुकसान भी नहीं पहुंचायेगें।
लिहाजा हम दोनों पक्षकारान ने अपनी अपनी स्वतन्त्र सहमति एवं इच्छा से, बिना दबाव एवं बिना किसी नशे पते के, स्वस्थ मन एवं स्वतन्त्र चित से, पारस्परिक सहमति से दो गवाहान के समक्ष हमारे निकाह का विच्छेद कर यह लिखा- पढी 500/- रूपये के स्टाम्प पर लिखकर दोनों ने अपने अपने हस्ताक्षर कर निष्पादित कर दिया है कि प्रमाण रहे वक्त जरूरत काम आवे।
प्रथम पक्षकार द्वितीय पक्षकार
गवाह -
प्रथम पक्षकार -
गवाह -
1 श्री......... पुत्र/पुत्री/पत्नी श्री........ जाति......निवासी.....
मोबाइल -
2 श्री......... पुत्र/पुत्री/पत्नी श्री........ जाति......निवासी.....
मोबाइल -
3 श्री......... पुत्र/पुत्री/पत्नी श्री........ जाति......निवासी.....
मोबाइल -
4 श्री......... पुत्र/पुत्री/पत्नी श्री........ जाति......निवासी.....
मोबाइल -
ड्राफ्ट by
शमशेर भालू खां सहजूसर, चूरू 9587243963
विवाह विच्छेद (खुलानामा)
मैं .... उम्र ..... वर्ष बीबी ....... पुत्री ....... जाति ....... निवासी .......
.. (आधार नं......) हाल निवासी........., तहसील.... जिला ........ जो कि खुलानामा जैल के मुताबिक मुजरी (निष्पादित) कराती हूं कि :-
मेरा निकाह .......पुत्र .......जाति ........निवासी .......... के साथ दिनांक ......... में मुस्लिम मजहबी रस्म-ओ-रिवाज से सर-ए मोहम्मदी के ताबे एवं जाहिरे कानून (कानूनानुसार) मेरे निवास.............. तहसील ........ जिला ...... में मुकम्मल हुआ था।
यह कि ......
1. वरवक्त निकाह हम दोनों बालिग थे, अतः निकाह के समय ही मुकलावे के पश्चात् प्रथम बार मैं अपने हक हकूक जोजियात अदा करने मेरे शौहर के घर रतनगढ़ आ गई। हम दोनों के मध्य मुबाशरत (यौनिक संसर्ग) से ...... औलाद पैदा हुई/ कोई औलाद पैदा नहीं हुई।
2. मेरे निकाह के कुछ वक्त तक हमारा आपसी रवैया ठीक ठाक रहा लेकिन कुछ वक्त बाद हम दोनों खाविंद-ओ-बीबी के दरमियान छोटी- मोटी बातों को लेकर आपसी खलिश (मनमुटाव) रहने लगी ओर हम दोनों के बीच में बुरे हालात इस कदर पैदा हो गये कि हम दोनों का बतौर खाविंद-ओ-बीबी एक साथ एक छत के नीचे रहकर एक दुसरे के हक में हक-हकूक खाविन्द-जोजियत अदा करना मुश्किल हो गया।
3. इस दरम्यिन हमारे मुआशरे और खानदान के मौजिज अफराद (व्यक्तियों) के जरिये काफी समझाईश करने के बाद भी हम खाविंद-ओ-बीबी में खलिश दूर नहीं हुई और साथ-साथ रहना मुमकिन नहीं रहा और हमारा घर आबाद नही रहा।
4. अब हम दोनों खाविंद-ओ-बीबी ने यह मुनासिब समझा कि मैं अपने शौहर ....... से तलाक हासिल कर लूं ताकि हम दोनों अपनी अपनी जिन्दगी में अलहेदगी अख्त्यार कर सकें।
5. मैं बालिग हूं और अपने मुस्तकबिल (भविष्य) के बारे में भला- बुरा सोच व समझ सकती हूं। इसलिए मैंने मेरे शौहर....... पुत्र ......... जाति........... निवासी ......... को तारीख.... माह.......वर्ष.....में तलाक की पेशकश की जिसे कि मेरे शौहर ने कबूल करके तारीख.......... को पहली बार तलाक, तारीख ........... को दूसरी बार तलाक और तारीख ........... को तीसरी बार तलाक मौखिक रूप से रूबरू गवाहान के दे दिया है। मैं मेरे शौहर के जरिये दिये गये तीन तलाक को खुले के बुनियाद पर कुबुल करती हूं और खुला करती हूं कि मेरा व मेरा शौहर.......... का आज के बाद व मुस्तकबिल में खाविंद-ओ-बीबी का रिश्ता खत्म हो गया है और अब मैं खुला करती हूं कि....... अपना निकाह कहीं किसी दीगर औरत से करें तो उसके बाबत मुझे किसी किस्म को उज़र-ओ-ऐतराज नहीं होगा और आज तारीख को मुझ .....को ........ ने रूबरू गवाहान मेरी मेहर की तयशुदा रकम निकाह के वक्त ही अदा कर दी थी व ईदत खर्चा व मेरे स्त्रीधन बाबत भी लेनदेन हो चुका है तथा आजीवन भरण पोषण की रकम ........(अखरे....-रूपये मुझे .......... से नकद प्राप्त हो चुकी है। अब कोई मेहर व स्त्रीधन, भरण पोषण की रकम ........की तरफ बकाया नहीं है और मेरे निकाह के समय तथा निकाह के बाद में मुझे मेरे मुआशरे और खानदान के जरिये दिया गया तमाम सौगात व दहेज का सारा सामान मिल गया है और अब मेरी कोई सौगात व दहेज का सामान बाकी नहीं है।
6. सामान सद्दाम हुसैन या उसके किसी रिश्तेदार के पास बकाया तथा मेरे तमाम कपड़े, बर्तन, सोना-चांदी के जेवरात तमाम दहेज मेरे पास ही है।
7. यह कि मैं, मेरे खानदान के लोग कभी भी मुस्तकबिल में मेरे शौहर से किसी प्रकार का कोई हक, हकूक की मांग नहीं करेंगे ना ही मुझे इस बाबत कोई दावा करने का हक हासिल होगा।
8. यह कि मुस्तकिल नफ्का (स्थाई भरण पोषण) की रकम बाबत मुस्तकबिल (भविष्य) में मैं कोई भी रकम का मुतालबा अपने शौहर............. से नहीं करूंगी तथा ना ही मुझे मेरे नफ्का की किसी भी रकम को इस हेतु दावा करने का हक होगा।
9. यह कि आज दिन तक मैं हामिला (गर्भवती) नहीं हूं।
10. यह कि मैं मुस्तकबिल में अपने शौहर....... और उसके खानदान से मनकूला और गैर-मनकूला (चल-अचल) जायदाद में अपना कोई हिस्सा नहीं मागूंगी तथा न ही इस बारे में कोई दावा/ क्लेम किसी भी अदालत में चल सकेगा।
11. यह कि मैं अब तथा मुस्तकबिल में ......के खिलाफ व उसके खानदान के खिलाफ कोई कानूनी दीवानी और फौजदारी कार्यवाही मेहर, नफ्का (भरण पोषण) की रकम, दहेज इत्यादि से सम्बन्धित नहीं करूंगी यदि कोई कार्यवाही करूं तो उसे झूठा व बेमाना समझा व माना जावे।
लिहाजा यह खुलानामा मैंने मेरी बेदुरूस्ती होश हवास में तथा बिना किसी जब्र इकरार के बिना किसी नशे-पते के व बिना किसी दबाव में लिखवाकर रूबरू गवाहान पढ़, सुन व समझकर उसे सही होना मानकर इस पर अपने अपने दस्तखत/अंगूठा निशानी करके तहरीर व तकमील कर दिया है ताकि सनद् रहे और वक्त जरूरत पर काम आवे।
उक्त खुलानामा जैल तलाक में...... की सहमति है, जिसके सहमति स्वरूप हस्ताक्षर / अंगूठा निशानी इस दस्तावेज में नीचे कर दिये गये है।
दिनांक -
स्थान -
दस्तखत -
1. 2.
गवाह -
1 श्री......... पुत्र/पुत्री/पत्नी श्री........ जाति......निवासी.....
मोबाइल -
2 श्री......... पुत्र/पुत्री/पत्नी श्री........ जाति......निवासी.....
मोबाइल -
3 श्री......... पुत्र/पुत्री/पत्नी श्री........ जाति......निवासी.....
मोबाइल -
4 श्री......... पुत्र/पुत्री/पत्नी श्री........ जाति......निवासी.....
मोबाइल -
ड्राफ्ट by -
शमशेर भालू खां सहजूसर
9587243963
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