मानव तस्करी गंभीर अपराध और मानवाधिकारों का उल्लंघन है। इसमें डराकर, बलपूर्वक, या धोखे से लोगों का शोषण हेतु क्रय है विक्रय, परिवहन या भर्ती की जाती है। इसे आधुनिक दासता भी कहा जाता है।
1. मानव तस्करी के प्रमुख रूप - तस्कर मुख्य रूप से शोषण हेतु कमजोर वर्गों को निशाना बनाते हैं। इसके कई रूप हो सकते हैं -
I. जबरन श्रम - इसे बेगार, बंधुआ मजदूरी भी कहते हैं। कारखानों, ईंट भट्टों, निर्माण स्थलों या घरेलू काम के लिए लोगों से जबरदस्ती काम कराना और उन्हें नाममात्र के वेतन या बिना वेतन के जबरन काम करवाया जाता है। लोगों को ईंट-भट्टों, कपड़ा कारखानों और कृषि कार्यों में बंधुआ मजदूर बनाया जाता है।
II. यौन शोषण - महिलाओं और बच्चों को वेश्यावृत्ति या अन्य प्रकार के यौन कार्यों के लिए मजबूर किया जाता है।
हाल ही में जारी एप्सटन फाइल में विश्व के बड़े - बड़े नामवर लोगों के नाम तस्करी कर लाए गए कम आयु के बच्चों से यौन संबंध के चर्चे जोरों पर हैं। अधिकांश मानव तस्करी गरीब देशों से होती है।महिलाओं और बच्चियों को वेश्यावृत्ति हेतु तस्करी कर रेड लाइट एरिया में बेचा दिया जाता है।
III. बाल तस्करी - बच्चों को भीख मांगने, बाल मजदूरी, या अवैध गतिविधियों के लिए बेचना भी एक कारण है। सड़कों पर हाथ कटे, लंगड़े, अंधे भिखारी प्रतिदिन भीख क्यों मांगते हैं, कौन है उसके पीछे, अबकी बार ऐसे किसी भिखारी को देखें तो जरूर सोचें।
IV. अंग व्यापार - किडनी या अन्य अंगों को अवैध रूप से निकालने और बेचने के लिए लोगों (खास तौर से छोटे बच्चों) की तस्करी की जाती है। सौंदर्य एवं लंबी यौवन अवस्था हेतु बच्चों के अंगों से बनी दवाइयां सम्पूर्ण विश्व में प्रचलित हैं।
हरियाणा की मनीषा अगर उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखोगे तो हैरानी होगी उसकी आंखें निकाल ली गई, किडनी निकाली गई।
इस रिपोर्ट से एक बात साफ है उसकी मौत की वजह जो भी रही लेकिन मानव अंगों की तश्करी वाले ओर डाक्टर दोनों इस वारदात में शामिल है।
भारत में हर रोज बीस लोगों का अपहरण मानव अंगों की तश्करी के लिए होता है आप लोगों को यकीन नहीं होता तो फोटो में देखिए हर राज्य का नम्बर तक बताया हुआ है । ना जाने कितने लोगों का सुराग तक नहीं मिलता है ।
लड़की गायब होती है तो लोग सोचते हैं किसी के साथ भाग गई होगी जरुरी नहीं हर लड़की भागने वाली ही होती है बहुत सारी लड़कियां मानव तस्कर के हत्थे चढ़ कर इस दुनिया को अलविदा कह चुकी होती है।
V. जोखिम के काम - अरब की ऊंटों की दौड़, कांच उद्योग एवं अन्य जोखिक के काम करवाने के लिए बच्चों को खरीदा और बेचा जाता है। बच्चों को जयपुर, हैदराबाद, फिरोजाबाद और बैंगलोर के होटलों और गैरेज में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है।
VI. घरेलू दासता - आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियों को शहरों में घरेलू सहायिका के नाम पर लाकर उनका शोषण किया जाता है। अरब देशों में दक्षिण एशिया के लोग अधिक फंसे हैं, खास कर महिलाएं।
VII. मोल की दुल्हन - लिंगानुपात में असंतुलन वाले राज्यों (जैसे हरियाणा, राजस्थान) में दूसरे राज्यों से लड़कियों की तस्करी कर शादी कराई जाती है। एक लाख से पांच लाख रुपए में आसानी से अंकोला, झारखंड, बिहार, असम और उड़ीसा से दुल्हन खरीदी जा सकती है।
2. मानव तस्करी के मुख्य कारण -
I. गरीबी और बेरोजगारी - आर्थिक तंगी के कारण लोग अच्छे जीवन के झूठे वादों में फंस जाते हैं।
II. अशिक्षा - जागरूकता की कमी के कारण लोग तस्करों के जाल को नहीं समझ पाते।
III. सामाजिक असमानता - समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को आसानी से निशाना बनाया जाता है।
IV. प्राकृतिक आपदाएँ एवं युद्ध- आपदा या युद्ध के समय विस्थापन का फायदा तस्कर उठाते हैं।
मानव तस्करी के वैश्विक आकंड़े - यह छिपा हुआ अपराध है, इसलिए इसके सटीक आंकड़े एकत्र करना अति दुष्कर हैं, फिर भी, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO), संयुक्त राष्ट्र (UNODC) और वॉक फ्री फाउंडेशन द्वारा जारी 'ग्लोबल एस्टिमेट्स ऑफ मॉडर्न स्लेवरी की रिपोर्ट सबसे विश्वसनीय मानी जाती है के अनुसार -
उपलब्ध रिपोर्ट्स (मुख्यतः 2022-2024 के संदर्भ में) प्रमुख वैश्विक आंकड़े दिए गए हैं -
I. आधुनिक दासता - विश्व स्तर पर लगभग 50 मिलियन (5 करोड़) लोग आधुनिक दासता में जी रहे हैं। पिछले 5 वर्षों में इसमें लगभग 1 करोड़ की वृद्धि हुई है।
जबरन श्रम - 27.6 मिलियन
जबरन विवाह - 22 मिलियन
II. जबरन श्रम का विवरण - इन 27.6 मिलियन लोगों में से -
A. निजी क्षेत्र, निर्माण, खेती, घरेलू काम - 17.3 मिलियन
B. व्यावसायिक यौन शोषण (वेश्यावृति) - 6.3 मिलियन
C. राज्य द्वारा थोपे गए जबरन श्रम - 3.9 मिलियन
3. लिंग और आयु के आधार पर - मानव तस्करी का सबसे भयानक पहलू जिसमें महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं -
महिलाएं और लड़कियां - 54%
यौन शोषण (महिलाएं) - 99%
बच्चे - 30-35%
4. अवैध मुनाफा के आधार पर - मानव तस्करी ड्रग्स और हथियारों के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा अवैध व्यापार है -
वार्षिक व्यापार - 150 बिलियन डॉलर
यौन शोषण - 100 बिलियन डॉलर
5. क्षेत्रीयता के आधार पर -
I.- एशिया-प्रशांत - सर्वाधिक
II. अफ्रीका - जबरन श्रम एवं विवाह के मामले अधिक।
III. यूरोप और अमेरिका: - यौन शोषण के अधिक मामले।
भारत में मानव तस्करी के संबंध में कानूनी प्रावधान -
I. भारतीय संविधान (अनुच्छेद 23) - यह मानव दुर्व्यापार और बेगार (जबरन श्रम) पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है।
II. IPC 1860 - धारा 370 (BNS 143) और 370A के अनुसार कठोर सजा (7 साल से लेकर आजीवन कारावास तक) का प्रावधान।
III. अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 (ITPA) - यह अधिनियम विशेष रूप से व्यावसायिक यौन शोषण के उद्देश्य से की गई तस्करी को रोकने हेतु है।
IV. POCSO एक्ट, 2012 - बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए। इस एक्ट में बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए। यदि तस्करी का उद्देश्य बच्चे का यौन शोषण है, तो इस एक्ट के तहत भी मामला दर्ज होता है।
V. मानव तस्करी निरोधक अभियान - देश के सभी जिलों में AHTU स्थापित की गई है, जो स्थानीय पुलिस और एनजीओ से मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाते हैं।
VI. ऑपरेशन आहट - रेलवे सुरक्षा बल (RPF): इनका ऑपरेशन आहट ट्रेनों के जरिए होने वाली तस्करी को रोकने में बहुत प्रभावी रहा है।
VII. अनुच्छेद 24 - यह 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों, खानों या अन्य खतरनाक कार्यों में नियोजित करने पर रोक लगाता है (जो अक्सर बाल तस्करी का परिणाम होता है।
VIII. धारा 372 और 373 - वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से नाबालिगों को बेचना और खरीदना।
IX. धारा 374 - किसी व्यक्ति को गैर-कानूनी रूप से अनिवार्य श्रम हेतु मजबूर करना।
X. बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 - यह पीढ़ियों से चली आ रही बंधुआ मजदूरी को समाप्त करता है और मजदूरों को कर्ज से मुक्त करता है।
XI. बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 - यह बच्चों के रोजगार को विनियमित करता है और कड़े दंड का प्रावधान करता है। |
XII. किशोर न्याय (JJ) एक्ट, 2015 - इसमें देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के पुनर्वास के प्रावधान हैं। इस हेतु समाज कल्याण विभाग द्वारा किशोर न्याय बोर्ड की स्थापना हर जिला मुख्यालय पर की गई है।
6. मानव तस्करी रोकथाम के उपाय और चुनौतियां -
I. जागरूकता - ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में लोगों को तस्करों के तौर-तरीकों के प्रति जागरूक करना।
II. पुनर्वास - पीड़ितों को छुड़ाने के बाद उन्हें समाज में वापस स्थापित करना और रोजगार देना एक बड़ी चुनौती है।
III. सीमा सुरक्षा - नेपाल और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों से होने वाली सीमा पार तस्करी को रोकने के लिए सख्त निगरानी।
7. भारत में मानव तस्करी - भारत में मानव तस्करी एक जटिल समस्या है क्योंकि भारत इस हेतु स्रोत, पारगमन और गंतव्य तीनों के रूप में कार्य करता है।
भारत में तस्करी के आधिकारिक आंकड़े राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी किए जाते हैं। यहाँ नवीनतम उपलब्ध रुझानों और NCRB की रिपोर्ट (2022-23) पर आधारि हैं -
NCRB की 'क्राइम इन इंडिया' रिपोर्ट के अनुसार -
I. दर्ज मामले - भारत में हर साल औसतन 2,000 से 2,300 केस मानव तस्करी (IPC 370) के तहत दर्ज किए जाते हैं। (वर्ष 2022 में 2,250 केस दर्ज हुए। दर्ज मामले वास्तविकता के आधे भी नहीं हैं।
II. पीड़ितों की संख्या - मामलों की तुलना में पीड़ितों की संख्या अधिक होती है, क्योंकि एक ही मामले में कई लोगों को तस्करों से छुड़ाया जाता है। सालाना लगभग 6,000 से 7,000 पीड़ितों को रेस्क्यू किया जाता है।
III. सजा की दर - यह चिंता का विषय है। मानव तस्करी के मामलों में सजा की दर बहुत कम है (लगभग 10-15%)।
8. सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य - NCRB के आंकड़ों के अनुसार कुछ राज्य तस्करी के हब माने जाते हैं -
I. तेलंगाना और आंध्र प्रदेश
II. महाराष्ट्र - मुंबई अन्य देशों को सप्लाई का प्रमुख गंतव्य है, जहाँ यौन शोषण और बाल श्रम हेतु तस्करी होती है।
III. पश्चिम बंगाल और असम - सीमावर्ती राज्य होने के कारण, यहाँ बांग्लादेश और नेपाल के रास्ते से मानव तस्करी।
IV. झारखंड और ओडिशा - जहाँ से गरीबी का फायदा उठाकर आदिवासियों को बड़े शहरों में ले सस्ते श्रम हेतु जाया जाता है।
V. राजस्थान - राजस्थान इस मामले में सातवें स्थान पर है। यह स्रोत और गंतव्य दोनों है। आदिवासी क्षेत्र, उदयपुर, बांसवाड़ा से बच्चों को बीटी कपास के खेतों में काम करने के लिए गुजरात भेजा जाता है।
पर्यटन राज्य होने के कारण, जयपुर और अन्य शहरों में बाल भिक्षावृत्ति और लोक कलाकारों के नाम पर शोषण की घटनाएं भी रिपोर्ट होती हैं।
9. जांच एजेंसियां, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) - NIA एक्ट, 2008 में 2019 में संशोधन किया गया, जिससे NIA को अब मानव तस्करी (IPC धारा 370 और 370A) के मामलों की जांच करने का अधिकार मिल गया है, खासकर जब अपराध अंतर-राज्यीय या अंतर्राष्ट्रीय हो।
10. प्रमुख केस लॉ -
I. बचपन बचाओ आंदोलन बनाम भारत संघ (2011) - सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि सर्कस में बच्चों के काम करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और गुमशुदा बच्चों के मामलों में पुलिस को यह मानते हुए कि तस्करी हो सकती के आधार पर अनिवार्य रूप से FIR दर्ज करनी चाहिए।
II. बुद्धदेव करमाकर बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (2011) - कोर्ट ने कहा कि यौनकर्मियों को भी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मान से जीने का अधिकार है और उनके पुनर्वास के लिए योजनाएं बननी चाहिए।
4. राज्यवार दोषसिद्धि दर -
I. तमिलनाडु, केरल और पंजाब जैसे कुछ राज्यों में सजा की दर राष्ट्रीय औसत से बेहतर है।
II. पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे उच्च तस्करी वाले राज्यों में सजा की दर बहुत कम है, जो कानून के कार्यान्वयन में कमी को दर्शाती है।
शमशेर भालू खां
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