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Showing posts from June, 2021

काम जिसे याद कर खुशी मिलती है

समय कितनी तेजी से बीत जाता है।              (राणासर अध्यापक नियाज खान व समाजसेवक मुमताज खान जमालखानी के साथ चित्र) सन 2010  की बात है चूरू जिला परिषद में जिला प्रमुख पति इन्द्रचंद पूनिया व हाजी मक़बूल मंडेलिया (तत्कालीन विधायक) के मध्य वार्तालाप सुना। (मुनखानी परिवार राणासर द्वारा करवाये जा रहे निर्माण कार्य का निरीक्षण किया) पुनिया जी कह रहे थे 90:10 स्कीम (गुरु गोलवलकर योजना) के अंतर्गत श्मशान भूमि व कब्रिस्तान की चारदीवारी बनवाई जा सकती है जो जागरूकता के अभाव में सफल नहीं हो पा रही है। इस संदर्भ में एक फ़ाइल ग्राम पंचायत पिथिसर के द्वारा लगवाई गई थी जिसकी प्रशासनिक/वित्तिय स्वीकृति निकल चुकि थी। (27 बीघा जमीन पर एक साथ चार दीवार निर्माण राणासर चूरू ) हम एक बार चूरू तहसील को कवर करना चाहते थे जिसके लिये राणासर,सहजूसर, सहनाली,रिबिया,खंडवा,झारिया व घांघू के साथ लाखलान राजगढ़ हेतु 2 बार की स्वीकृतियों के अंतर्गत लगभग सवा दो करोड़ रुपये बाउंड्री वाल निर्माण बाबत स्वीकृत हुये।  ...

शासन द्वारा एक गांव को समाप्त करने की कहानी

चूरू शहर की बसावट व जल निकासी के लिये बार बार योजनाएं बनी पर कुछ ज्यादा सफलता नहीं मिल पाई। यहॉं जिस के जैसे जी में आया अपना घर बना लिया किसी तरह की प्लानिंग नहीं है। पुराने शहर की गलियां संकड़ी व उबड़-खाबड़ होने के साथ -साथ बहुत ही घुमावदार मोड़ लिये हुये हैं। 300 साल से अधिक समय से बसा यह शहर प्लानिंग के अभाव में हर सुविधा संसाधन से उपेक्षित रहा। पुराना शहर हाविलियों से अटा पड़ा है जिन में से 90℅ खाली हैं। जिनका कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है। नया शहर  भूमाफियाओं की बुरी नज़र की भेंट चढ़ गया। कुछ सरकार द्वारा काटी गई कॉलोनी भी हैं जिन का सही सलामत होना बानगी की बात है। लगभग रास्तों को रोक लिया गया है चाहे अवैध निर्माण हो या पेड़ पौधों के नाम पर अतिक्रमण। अतिक्रमण इस शहर की बड़ी समस्या रही है जिस के बारे में फिर कभी चर्चा होगी। फिलहाल 2 लाख की आबादी के इस शहर में ड्रेनेज सिस्टम पर चर्चा की जाये। आज से लगभग 30 साल पहले चूरू इतना बड़ा नहीं था ना ही इतना फैला हुआ। शहर बढ़ा लोग अलग अलग गांवों से आकर बसने लगे जिस से कई निकटतम गांव इस शहर में समा गये जिन में से खाँ...

सरकार योजना व जागरूकता

काम सरकार व जागरूकता                        बात भाजपा शासन काल की है। मेरे मित्र दयानन्द गढ़वाल तत्कालीन अल्पसंख्यक कल्याण विभाग चूरु में कार्यक्रम अधिकारी थे ने बताया भारत सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रम के अंर्तगत अल्पसंख्यक बहुल ब्लाक में शिक्षा,चिकित्सा व आधारभूत सुविधाऐं विकसित करने हेतु राशि का आवंटन किया जाता है,परन्तु इस हेतु कुछ फॉर्मेलिटीज हैं जो करनी होंगी। उस समय में कार्यालय जिला परियोजना समन्वयक में कार्यक्रम सहायक के पद पर कार्यरत था। इस हेतु Zakir Khan  तत्कालीन अल्पसंख्यक जिला अध्यक्ष भाजपा च को शहरी क्षेत्र व जंगशेर खान  पिथिसर तत्कालीन सरपँच को ग्रामीण क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई। शेष ब्लॉक की जिम्मेदारी मेने स्वयं संभाली जिस का कुछ ही दिनों बाद नतीजा मिल गया। रिपोर्ट तैयार हो गई जिस के अनुसार सुजानगढ़, सरदारशहर व चूरू ब्लॉक विभागीय शर्तों को पूरी करते थे का प्रस्ताव बना कर भिजवा दिया गया । अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय द्वारा भेजे गये प्रस्ताव को भारत सरकार ने स्वीकार किया और चूरू जिले के 1) सुजानग...

हम हमारा व्यवहार वह करोना

*हम हमारा व्यवहार व कोरोना* आज चिकित्सीय कार्य हेतु घर से बाहर जाना हुआ। गांव में दुकानों के बाहर समूहों में लोग बैठे थे लगभग सभी के मास्क नहीं थे और एक निर्धारित दूरी भी नहीं बना रखी थी। छोटे बच्चे इस बात से सावधानी बरत रहे हैं कि कहीं उस का हाथ किसी को छू ना ले। यह देख कर दिल को बहुत तसल्ली हुई कम से कम बड़ों से बच्चे ज्यादा सावधान हैं। शहर में पहुंचने पर एक गली में 10-12 युवा लूडो खेलते मस्ती कर रहे थे। किसी के मुंह पर मास्क नहीं आगे चलने पर इसी तरह कम से कम 10 जगह यह माहौल देखा। एक जगह रुक कर पूछा कि भाई आप इतने लोग एक जगह बिना मास्क बैठे हैं क्या महामारी चली गई। जवाब बड़ा सुंदर व मासूम था " भाई जी थे भी इन अफसर,नेता व डॉक्टर की बातों में आ गये। यह एक साजिश है बाकि कोरोना-फोरोन कुछ नहीं।"  मैं अपराध बोध के साथ आगे बढ़ा कि पुलिस सायरन सुनाई दिया। पीछे मुड़ कर देखा एक भी युवक वहां नहीं था सब के सब घर में घुस गये। मैं अवाक सन्न रह गया। यह वही युवा हैं जो व्हाट्सएप फ़ेसबुक ट्वीटर के साथ दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पुलिस,डॉक्टर,सरकार व व्यवस्था को पानी पी-पी कर कोसत...

विपत्ति सरकार और हम

विपत्ति सरकार और हमसदियों पूर्व न जाने कितनी आपदा व महामारी मानव के अस्तित्व को मिटाने का असफल प्रयास कर चुके हैं,परन्तु हम हर एक बाधा को पार करते हुये आगे बढ़े।। इस सदी की भयंकर त्रासदी कोविड महामारी से सरकारी आंकड़ों से अधिक जानें गईं। इसका कारण देश और प्रदेशों की सरकारों के गैरजिम्मेदाराना रवैये, आपदा के समुचित प्रबन्धन में आपसी तालमेल की कमी, आपसी राजनैतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ साथ इसके जिम्मेदार कहीं न कहीं हम सब रहे हैं। आमजन की अज्ञानता और हम सब द्वारा महामारी का सटीक मूल्यांकन नहीं कर पाना भी कारण रहा। इस महामारी ने हमें इस बात का अहसास अवश्य करवा दिया है कि अभी बुराई चाहे कितनी शक्तिशाली हो अच्छाई के मानने वाले हार नहीं मानते। आपदा में अवसर की तलाश करने वाले कालाबाज़ारियों,कफ़न बेचने वालों,मुनाफाखोरों, अंग बेचने वाले जल्लाद डॉक्टरों,शेखी बघारने वाले नेताओं,दोगुने तीन गुने मूल्य पर ऑक्सीजन बेचने वाले लोगों,सो गुना से ज्यादा कीमत वसूल करने वाले केमिस्टों, बीस गुना कि...