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काम जिसे याद कर खुशी मिलती है

समय कितनी तेजी से बीत जाता है।

             (राणासर अध्यापक नियाज खान व समाजसेवक मुमताज खान जमालखानी के साथ चित्र)
सन 2010  की बात है चूरू जिला परिषद में जिला प्रमुख पति इन्द्रचंद पूनिया व हाजी मक़बूल मंडेलिया (तत्कालीन विधायक) के मध्य वार्तालाप सुना।
(मुनखानी परिवार राणासर द्वारा करवाये जा रहे निर्माण कार्य का निरीक्षण किया)

पुनिया जी कह रहे थे 90:10 स्कीम (गुरु गोलवलकर योजना) के अंतर्गत श्मशान भूमि व कब्रिस्तान की चारदीवारी बनवाई जा सकती है जो जागरूकता के अभाव में सफल नहीं हो पा रही है। इस संदर्भ में एक फ़ाइल ग्राम पंचायत पिथिसर के द्वारा लगवाई गई थी जिसकी प्रशासनिक/वित्तिय स्वीकृति निकल चुकि थी।

(27 बीघा जमीन पर एक साथ चार दीवार निर्माण राणासर चूरू )
हम एक बार चूरू तहसील को कवर करना चाहते थे जिसके लिये राणासर,सहजूसर, सहनाली,रिबिया,खंडवा,झारिया व घांघू के साथ लाखलान राजगढ़ हेतु 2 बार की स्वीकृतियों के अंतर्गत लगभग सवा दो करोड़ रुपये बाउंड्री वाल निर्माण बाबत स्वीकृत हुये।
            ( दो मित्र बात करते हुए)
आज जब बिना शिलापट्ट के कार्य देखता हूँ तो दिल को बहुत शुकून मिलता है जो आगे भी जारी रहेगा।
साभार
चूरू की जनता

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