Skip to main content

Posts

Showing posts from November, 2021

अख्तर खान अकेला कोटा की कलम

शमशेरभालु खान गांधी भाई शमशेर खान भालू उर्फ़ गाँधी को सियासत विरासत में मिली, लेकिन वोह सियासत जोड़तोड़ ,मौक़ापरस्ती, उर्दू ज़ुबान,मदरसों की उपेक्षा की नहीं उनकी परवरिश गांधीवादी माहौल में रही। एक ईमानदाराना गांधी वादी संघर्ष में रही और यही वजह है के आज वोह उर्दू ,मदरसों के लिए, एक संघर्ष ,एक आवाज़ बनकर उभरे है। अल्लाह से दुआ है कि इस लड़ाई को कामयाब करे। उनके उठाये हुए मुद्दों के अलावा भी जो मुद्दे वो भूल गए है ,उन पर संयुक्त विचार कर ,जल्द ही,गाँधीवादी विचारधारा को पुनर्जीवित करने के लिए , ईमानदाराना फैसले भी ले , उन्हें तुरंत लागू भी करे। राजस्थान में उर्दू ,उर्दू से जुड़े  लोगों के हक़, इन्साफ के लिए,उर्दू तहज़ीब के दायरे में खुद को तकलीफ देकर गाँधीवादी मुख्यमंत्री के राजस्थान में गांधीवादी तरीके से आंदोलन कर रहे भाई शमशेर खान भालू को दिल से सलाम सेल्यूट। सेल्यूट इसलिए के अब तक जो भी तंज़ीमें जो भी तहरीकें जो भी संगठन आंदोलन के लिए आये वोह सिमट कर चले भी गये लेकिन उर्दू तहज़ीब के साथ बलात्कार कहो या फिर कहो पक्षपात या फिर कहो ज़ुल्म ज़्यादती वादा खिलाफी सब होते रहे और...

साथी ओमप्रकाश वर्मा की कलम

प्रिय शमशेर भालू खान भाईसाहब। कड़ाके की सर्दी पड़ने वाली है। घर लौट आओ। वैसे भी आपकी खुद की नौकरी तो परमानेंट भी है और अच्छी तनख्वाह भी। बेटी अंजली खान भी एलएलबी पूरी कर अब वकालत शुरू करने वाली है। अपना पूरा परिवार आपके संघर्ष से गौरवान्वित तो है, किंतु अपने मुखिया को 34 दिनों से नंगे बदन अनशन पर देखकर थोड़ा दुःखी भी है। वैसे भी अंधी बहरी भैंस के आगे ये हल्की सी बीन कब तक बजाते रहोगे। आपका सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि आप उस कौम से ताल्लुक रखते हैं जिसमे उसके धार्मिक प्रतीकों से लेकर नये नवेले अवतार एआईएमआईएम के ओवैसी तक के सम्मान पर यदि हल्की सी चोट हो जाए तो नारों और आंदोलनों से देश की सड़कें भीड़ से पाट दी जाती हैं परंतु  जब बात संवैधानिक अधिकारों की आती है तो मानो सांप सा सूंघ जाता है। आप उस कौम को जगाने का प्रयास कर रहे हैं जिसमे जागने के बाद फ़ज्र की नमाज की तो चिंता होती है परंतु फर्ज की अदायगी की बात होते ही वापिस उबासी आने लगती है।  इससे भी बड़ा दुर्भाग्य यह है कि जिस तरह आपका और हमारा समाज बिना शर्त, बिना लाग लपेट के कांग्रेस से स्थायी रूप से जुड़ चुका है, अब उसे अलग करना लगभग...

साथी निसार खान भारू की कलम से

-:मेरी कलम आज लिखेगी शमशेर गांधी का संघर्ष :- शमशेर पर कुछ लिखू।  ना मिले जो मंजिल तो  मुकद्दर की बात है। गुनाह तो तब हो जो जीवन में संघर्ष न रहे। शमशेर गांधी आज राजस्थान में युवाओं का प्रेरणा स्रोत बन चुका है। शमशेर गांधी का जन्म राजस्थान के चुरू जिले के एक छोटे से गांव सेजूसर में हुआ था। शमशेर गांधी कांग्रेस के पुर्व विधायक मरहूम भालू खान के सुपुत्र है। आप पैसे से एक सरकारी ऊर्दू टीचर हैं। आप हमेशा से ही संघर्षशील रहे हो। आपने ऊर्दू के लिए जो संघर्ष किया है वो किसी से छिपा हुआ है। आप 177 दिन धरने पर बैठ थे चूरू मे। आपने अपना सिर भी मुंडवाया था। आपके संघर्ष बहुत हैं लेकिन मैं बात दांडी सद्भावना यात्रा की करूंगा। एक नवम्बर को जब उस सरकार ने चारों दरवाजे बंद कर दिए जिसको हम 70 सालों से वोट देतें आए हैं। उस सरकार ने सब कुछ नकार दिया। तब एक मर्दे मुजाहिद निकला घर से सर पर मौत का कफन बांद कर और हाथ में गांधी की लाठी और सर पर खादी टोपी पहने निकल गया सेजूसर से दांडी यात्रा के लिए। जब चुरू पहुंचे तो जिस तो माननिय Rafique Mandelia जी ने दांडी यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उस व...

सरदार अली खान झुंझनु की कलम

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2997326507263341&id=100009580634218&sfnsn=wiwspwa

14 नवम्बर इस्तीफा (अनिवार्य सेवा निवृत्ति) बाबत

सेवामें, श्रीमान शिक्षा मंत्री महोदय, प्रारम्भिक व माध्यमिक शिक्षा जयपुर, विषय;- संविदा कर्मियों के नियमितीकरण न करने के विरुद्ध अनिवार्य सेवानीवर्ति बाबत। महोदय,   विषयान्तर्गत सादर निवेदन है कि (क) 1) 5 जुलाई 2019 से चूरू कलेक्ट्रेट के सामने  A. उर्दू विषय व  B.संविदा शिक्षकों के नियमितीकरण  C. अल्पसंख्यक समाज की समस्याओं के समाधान बाबत धरना शुरू किया गया जिसे 117 दिन बाद 27 अक्टूबर 2019 को चूरू प्रत्याशी माननीय मुख्यमंत्री महोदय के निर्देशानुसार कोंग्रेस रफ़ीक़ मंडेलिया जी के आश्वासन व जिला कलक्टर चूरू (जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक व प्रारम्भिक के प्रस्ताव) उपरांत धरना समाप्त किया गया। (ख) माह सितम्बर 2020 में शिक्षा निदेशक श्रीमान सौरभ स्वामी के तानाशाही आदेश एक विद्यालय एक तृतीय भाषा का आदेश निकाला जिस से अल्पभाषा के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न लगा।  27 अक्टूबर के समझौते की अवहेलना व उक्त आदेश के विरोध में दांडी पैदल यात्रा 1 नवम्बर 2020 से चूरू (राजस्थान) से दांडी(गुजरात) प्रारम्भ की गई जो एक जन आंदोलन बन गई। इस आंदोलन को समाप्त करवाने के लिये 22 ...