अस्सलामो अलैकुम भाई जान में अजमेर से हू सर् मदरसा पैराटीचर्स मुनव्वर हुसैन आपको याद है आप अजमेर आये थे रैली में मैने नात शरीफ पढ़ी थी।सर् आपने हमारे लिए बहुत कुछ किया है आपने अपना घर बार छोड़ कर बीवी बच्चो को छोड़कर सिर्फ हमारे लिए, हमे हमारा हक दिलाने के लिए आज तक धरने पर बैठे हो ये आपका एहसान हम ताउम्र नही चुका पाएंगे।सर् जब मदरसा पैराटीचर्स का कोई धनी धोरी नही था हम अपने आप को अनाथ ही समझ रहे थे लेकिन अहसान उस अल्लाह करीम का जिसने आपको मसीहा बनाकर हमारे बीच मे भेजा कसम खुदा की आज हमें एहसास है कि हम अकेले नही है हमारा भी कोई सिपेसालार है जो जयपुर की धरती पर सीना ठोक कर खड़ा है जिसने कुछ ही दिनों मे सरकार की नाक में नकेल कसने का काम किया है हमे फक्र है अपने नसीब पर की अल्लाह ने हमारे बीच एक मोती भेजा है जिसका नाम है ठाकुर शमसेर खान गांधी।जिसने कुछ ही दिनों में पूरे राज्य में अपना लोहा मनवाया है साहब ये अहसास में कर सकता हूँ कि घर बार सब कुछ छोड़कर बिना कुछ खाये हुवे अनसन पर बैठना कैसा होता है, मुझे बढ़ी तकलीफ होती है साहब इस कौम को देखकर क्या ये कौम अपने आप मे तब्दीली नही ...