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Showing posts from March, 2022

हम औऱ हमारी सच्चाई

कहां हैं #बड़े_लोगों_की_छोटी_बात            रास्ते पर घर है जहां  वाहनों की लोगों की भीड़ लगी रहती है हम भी समाज के बड़े प्रतिष्ठित सम्मानित नागरिकों में गिने जाते हैं।         सुंदर घर के आगे एक सुंदर सा टॉयलेट-बाथरूम बनवाया जिस में बेहतरीन किस्म की टाइल,गेट व पानी की फिटिंग करवाई। हमारे घर में किसी तरह की गन्दगी न हो इसलिये बाथरूम का नाला सड़क की तरफ खोल दिया और बेतहासा पानी बहा रहे हैं।            उसी रास्ते से नमाजी और पुजारी के साथ राहगीर पानी के छींटों से भीगते हुये दुआओं की बारिश करते चले जाते हैं।        हम कामगार मज़दूर लोग हैं पशु तो रखने ही पड़ेंगे। अब पशु घर के अंदर रहे तो मिंगणी गोबर पेशाब की सड़ांध से जीना दूभर हो जायेगा। रास्ते पर जहां हमने पहले एक चौकी बना ली थी उस से थोड़ा बढ़कर बकरियों, गाय,भैंस के लिये खूँटा गाड़ देंगे। परेशान हम क्यों हो भई, लोग ही हों।        घर का गेट थोड़ा ऊँचा लगवा लिया तो क्या हुआ सड़क पर बड़ा सा खरंजा बना कर आसानी से गाड़ी घर मे जा सकत...

शुद्ध हिन्दी वर्तनी

वर्तनी (हिन्दी)   लिखने की रीति को वर्तनी या अक्षरी कहते हैं। इसे 'हिज्जे' भी कहा जाता है। उच्चारण वर्तनी का सीधा संबंध उच्चारण से होता है। हिन्दी में जो बोला जाता है वही लिखा जाता है। यदि उच्चारण अशुद्ध होगा तो वर्तनी भी अशुद्ध होगी। प्रायः अपनी मातृभाषा या बोली के कारण तथा व्याकरण संबंधी ज्ञान की कमी के कारण उच्चारण में अशुद्धियाँ आ जाती हैं जिसके कारण वर्तनी में भी अशुद्धियाँ आ जाती हैं। संस्कृत भाषा के मूल श्लोकों को अदधृत करते समय संयुक्ताक्षर पुरानी शैली से भी लिखे जा सकेंगे। जैसे:संयुक्त, चिह्न, विद्या, चच्चल, विद्वान, वृद्ध, द्वितीय, बुद्धि आदि। किंतु यदि इन्हें भी उपर्युक्त नियमों के अनुसार ही लिखा जाए तो कोई आपत्ति नहीं होगी। कारक चिह्न हिन्दी के कारक चिह्न सभी प्रकार के संज्ञा शब्दों में प्रातिपदिक से पृथक् लिखे जाएँ। जैसे: राम को, राम से, स्त्री से, सेवा में आदि। सर्वनाम शब्दों में ये चिह्न प्रातिपदिक के साथ मिलाकर लिखे जाएँ। जैसे- तूने, आपने, तुमसे, उसने, उससे आदि। सर्वनामों के साथ यदि दो कारक चिह्न हों तो उनमें से पहला मिलाकर और दूसरा पृथक् लिखा जाए। जैसे- उसके ल...

कश्मीर मिथक व सच

कश्मीर मिथक और तथ्य  (कश्मीर शब्द का नामकरण महर्षि कश्यप के नाम से हुआ है) कश्मीर एवं कश्मीर समस्या को समझने के लिये 'इंडिया आफ्टर गाँधी, 'जहांगीर नामा','बाबर नामा' व उस समय प्रकाशित कुछ 'अखबारों की रिपोर्ट' महत्वपूर्ण हैं जिनके अध्ययन के बिना इसे समझ पाना मुश्किल है। (मेरे एक साल के कश्मीर प्रवास के आधार पर लिखा गया संस्मरण जिस में कश्मीर, कश्मीरियत उनकी समस्या व समाधान विषय पर चर्चा) वर्ष 2007 से 2008 तक शिक्षा प्राप्ति के उद्देश्य से कश्मीर जाना हुआ। सचमुच जवाहर टनल से इस ओर व उस ओर के भारत मे एक बहुत बड़ा अंतर है। एक साल के अनुभव उनके विचार आपके साथ साझा करने का मन हुआ। गर जमी खुल्द अस्त आम अस्त अमी अस्त। जहांगीर बादशाह को कश्मीर की खूबसूरती से बहुत लगाव था। उसने फ़ारसी में यह शेअर लिखा जिस का अर्थ है अगर संसार में कहीं स्वर्ग है तो यहीं है, यहीं है,यहीँ है। वास्तव में कश्मीर की सुंदरता अदम्य अनुदाहरणीय अकल्पनीय है। इस सुंदरता का वर्णन शब्दों में करना सूरज को दिया दिखाने के समान है।   1947 की परिस्थियां बहुत अलग थी। कुछ लोगों द्वारा भ्रामक प्रच...

धर्म क्या और क्यों

धर्म क्या और क्यों  कहा जाता है ईश्वर ने पूरी सृष्टि (कायनात) को एक आवाज कुन फाया कुन (हो जा) से प्रारंभ की जिसके साक्ष्य तो नहीं हैं, और हम अब तक यह पता भी नहीं लगा सके की इस संपूर्ण सृष्टि की रचना किसने कितने वर्ष पूर्व की होगी। विज्ञान प्रकृति नामक (अदृश्य,अलौकिक) शक्ति को मानता है और स्वीकार करता है कि कहीं ना कहीं ऐसी अदृश्य शक्ति जो सर्वशक्तिमान इस सृष्टि में व्याप्त है जो लाखों करोड़ प्रकाश वर्ष में फैले ब्रह्मांड को संचालित कर रही है। इसी सृष्टि का छोटा सा भाग है हमारा सौरमंडल। अभी कुछ वर्ष पूर्व है वैज्ञानिकों ने बिगबैंग थ्येरी के आधार पर हमारे ब्रह्माण्ड के निर्माण का अनुमान लगाया है, जिसके अनुसार एक परमाणु विस्फोट के द्वारा संपूर्ण सृष्टि की रचना हुई। यह प्रश्न समक्ष आ ही जाता है कि इस परमाणु व परमाणु में समाहित इलेक्ट्रॉन न्यूट्रॉन प्रोटोन की संरचना या निर्माण कैसे हुआ, इसका रचनाकार कौन है, किसने प्रोटोन (भारवान) को परमाणु की नाभि अर्थात केंद्र में स्थापित किया न्यूट्रॉन को उदासीन (ठहरा हुआ भारहीन ) व इलेक्ट्रॉन को निश्चित पथ पर प्रोटॉन की परिक्रमा हेतु संचा...

मदरसा बोर्ड

हसन खान मेवाती

       राजा हसन खाँ मेवाती एक वीर 15 मार्च 1527 हसन खां व 12000 घुडसवारों का 495वाँ शहीद दिवस (खानवा का युद्ध राणा सांगा व बाबर के मध्य )   बाबर सू  जा कर  लडो़, लड़्योरोप दई छाती खानवा को जंग अधूरो बिन हसन खाँ मेवाती।         बहुत ही कम ऐसे लोग होंगे जिन्हें शायद यह मालूम हो कि 495 वर्ष पहले अलवर ओर मेवात पर ठठ्ठा के खानजादो/मेवो का शासन था।      नोट- मेव खानजादा एक ही जाति विशेष शब्द है। मेव आज अलवर,भरतपुर फिरोजाबाद,दिल्ली, पुन्हाना,आगरा,अलीगढ़,चित्तौड़,भीलवाड़ा,मध्यप्रदेश(छोटी-मेवात,गुजरात के क्षेत्र में पाये जाते हैं।           बादशाह फ़िरोज तुगलक के काल मे भारत के गढ,मलिपुर,चम्पारन,राजपुर इत्यादि इलाकों के बहुत से यदुवन्शी ओर परमार राजा राजपूतो ने इस्लाम-धर्म स्वीकार किया जिनमें ठठ्ठा के यदुवन्शी राजकुमार साँभरपाल ने भी इस्लाम धर्म की दीक्षा ली।          सांभर या सांभरपाल की तीसरी पीढ़ी में लोधीवंश के अलावत खाँ का जन्म हुआ हसन खाँ मेवाती उनके पुत्र थे।     ...