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Showing posts from April, 2024

संतान ऐसी भी।

संतान ऐसी भी घटना - 01 दिनांक 17.03.2024 मैं किसी काम से झुंझुनूं से चूरू आ रहा था। बिसाऊ स्टेंड पर मेरे प्राथमिक शिक्षक गन्ने की दुकान पर बैठे थे। गाड़ी रोक कर उनको लिफ्ट दी। प्रणाम करने के बाद गुरुजी के हाल चाल पूछे। एक गहरी सांस लेते हुए रुआंसे हो कर बोले अब तो बेटा मरने का इंतजार है बस इतना कहते ही झर झर आंसू बहने लगे। गुरुजी 1984 में पहली कक्षा से मेरी स्कूल में थे और मैं उस समय सब से अधिक मार खाने वाला छात्र। गुरू जी गांव से साइकल पर चूरू से आते। उस समय लूना मोपेड चल चुकी थी। लीलाधर जी गुरुजी लूना ले कर आते थे। मैंने गुरुजी को धारी वाली शर्ट, सेंडल और कत्थई रंग की पेंट में ही देखा, शायद उनके पास दो ही जोड़ी कपड़े थे। बचत और रिटायरमेंट के पैसों से बड़ी संपत्ति बनाई। मैने ढाढस बंधाते हुए गुरु जी से पूछा, क्या बात है ? कोई समस्या है जो मेरे लायक है तो बताइए। पानी पीते हुए बताने लगे, काफी समय से घर वाली बीमारी के कारण खाट पर है। एक बेटा दो बेटियां हैं। बेटा कहीं दूसरी जगह नौकरी करता है और बेटियां भी अपने ससुराल में व्यस्त हैं। बहु बेटे के साथ ही रह...

एक अपील कांग्रेस को वोट दें।

दूसरा चरण या कहे तो बीजेपी के ताबूत में दूसरी कील। प्रथम चरण के चुनाव के पश्चात एक बीजेपी के नेता जिसे राजस्थान की कुछ सीट पर प्रचार की ज़िम्मेवारी दी गई से बात हुई कि क्या माहौल है और अपने स्वभाव के विपरीत आश्चर्यान्वित रूप से उसने जवाब दिया इस बार मामला बड़ा टफ है। मैंने कहा क्यों मोदी जी है ना वो फिर इमोशनल बेवक़ूफ़ बना देंगे तो उसका जवाब था कि इस बार किसानों और स्पेशली जाटो ने लट्ठ उठा रखा है और कुछ सुनने और मानने को तैयार नहीं है‌ तो इमोशनल कहा से बेवक़ूफ़ बनेंगे । सबसे बड़ी बात जो उसने मानी की राम मंदिर जिसे वो तुरुप का इक्का समझ रहे थे ज़मीन पर वो कोई मुद्दा ही नहीं है क्योंकि किसान कह रहा है कि जब पूजने पे आये तो खेत की जाँटी ही सबसे बड़ा मंदिर है और जब खेत और खेती ही ना बचेगी तो मंदिर का क्या करेंगे ? नार्थ जो बीजेपी का सबसे बड़ा गढ़ हुआ करता है वहाँ अजीब क़िस्म का चुनाव लड़ा जा रहा है जिसमें किसान से लेकर ओबीसी और अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग इस चुनाव को अपने अस्तित्त्व की लड़ाई मान कर चुनाव लड़ रहे हैं और यह चुनाव जानता वर्सेज़ बीजेपी बनता जा रहा है। राजस्थान, ...

भारतीय इतिहास राजवंशों से भारत गणराज्य तक एक परिचय

भारत की अंतराष्ट्रीय सीमा एवं पड़ोसी देश भारत एक परिचय -  1870 में राजस्थान की मीणा जनजाति के योद्धाओं की खींची गई तस्वीर गणराज्यों की सीमा राजवंशों से भारत गणराज्य एक अवलोकन - 25 वर्ष की उम्र में 200 साल की अंग्रेज हुकुमत को हिला देने वाले आदिवासी क्रांतिकारी  जल, जंगल, ज़मीन और आदिवासी अस्मिता के लिए संघर्ष करने वाले महान स्वतंत्रता सैनानी   बिरसा मुंडा।    दांतिया भील एक स्वतंत्रता सेनानी       अंग्रेजी कैद से मुक्त हो कर आए क्रांतिकारियों का स्वागत करती जनता 12 किलो ग्राम वज़नी इस सिक्के की ढ़लाई मुग़ल बादशाह जहांगीर के समय हुई थी ।  मुगल शिल्पकार मुहम्मद सालेह थट्टवी द्वारा बनाया गया खगोलीय ग्लोंब, 1663 ईस्वी। उपलब्ध दस्तावेज़ों के अनुसार जहांगीर ने ये 1000 मोहर का सिक्का ईरानी राजदूत जमील बेग को दिया था। जहांगीर की यह सोने की मोहर सारे विश्व में चर्चा का विषय बन गई थी। मुगल काल में भारत की जीडीपी लगभग 27% थी। इसी काल के भारत को सोने की चिडिया कहा जा...