समानता - भेदभाव वास्तविकता, मिथ्या व कानून समानता - भेदभाव क्या क्यों और कैसे मानव सभ्यता की शुरुआत ने इस शब्द की रचना की। प्रकृति ने किसी के साथ भी समानता का व्यवहार नहीं किया। किसी को पूंछ दे दी तो किसी को सींग, किसी को गर्दन लंबी दे दी तो किसी को टांग, किसी को शक्तिशाली पंजे दे दिए तो किसी को पंख, किसी को बोलने की क्षमता दी तो किसी को सूंघने की। प्रकृति ने सृष्टि में जो एक विशेषता किसी एक को दी है उसे हम भेदभाव नहीं कह कर विशिष्टता कह सकते हैं। अक्सर लोग कहते हैं ईश्वर ने सब को एक सा नहीं बनाया, हां, परन्तु ईश्वर ने हर एक को विशिष्ट पहचान दी है जो उसकी व्यक्तिगत है। यह पहचान भेदभाव नहीं एक गुण है। भेदभाव (Discrimination) - सजातीय व्यक्तियों द्वारा आपसी मेलजोल में किया जाने वाला असमान्य व्यवहार जो उसके सम्मान के प्रतिकूल हो भेदभाव कहलाता है। समाजशास्त्रीय अर्थ - भेदभाव से तात्पर्य किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह के साथ उसके किसी विशेष गुण, पहचान या विशेषता के आधार पर दूसरों की तुलना में प्रतिकूल या अनुचित व्यवहार क...