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Showing posts from February, 2026

भेदभाव - वास्तविकता, मिथ्या एवं कानून

समानता - भेदभाव वास्तविकता, मिथ्या व कानून  समानता - भेदभाव क्या क्यों और कैसे मानव सभ्यता की शुरुआत ने इस शब्द की रचना की। प्रकृति ने किसी के साथ भी समानता का व्यवहार नहीं किया। किसी को पूंछ दे दी तो किसी को सींग, किसी को गर्दन लंबी दे दी तो किसी को टांग, किसी को शक्तिशाली पंजे दे दिए तो किसी को पंख, किसी को बोलने की क्षमता दी तो किसी को सूंघने की। प्रकृति ने सृष्टि में जो एक विशेषता किसी एक को दी है उसे हम भेदभाव नहीं कह कर विशिष्टता कह सकते हैं। अक्सर लोग कहते हैं ईश्वर ने सब को एक सा नहीं बनाया, हां, परन्तु ईश्वर ने हर एक को विशिष्ट पहचान दी है जो उसकी व्यक्तिगत है। यह पहचान भेदभाव नहीं एक गुण है। भेदभाव (Discrimination) - सजातीय व्यक्तियों द्वारा आपसी मेलजोल में किया जाने वाला असमान्य व्यवहार जो उसके सम्मान के प्रतिकूल हो भेदभाव कहलाता है।  समाजशास्त्रीय अर्थ - भेदभाव से तात्पर्य किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह के साथ उसके किसी विशेष गुण, पहचान या विशेषता के आधार पर दूसरों की तुलना में प्रतिकूल या अनुचित व्यवहार क...

भारतीय न्याय तंत्र का प्राचीनता से आधुनिकता तक का सफर

भारतीय न्याय तंत्र (Indian Judicial System)  -  वर्तमान भारतीय न्याय तंत्र विश्व के सबसे बड़ी और सबसे पुरानी एकीकृत और श्रेणीबद्ध  न्याय प्रणालियों में से एक है। जिसमें शीर्ष अदालत द्वारा दिया गया निर्णय निचली सभी अदालतों पर बाध्यकारी होता है। प्राचीन भारत में न्याय की अवधारणा कानून के स्थान धर्म के सिद्धांत पर आधारित थी। तब न्याय का अर्थ था व्यवस्था को बनाए रखने हेतु राजा और रंक द्वारा कर्तव्यों का पालन करना। प्राचीन भारतीय न्याय प्रणाली की विशेषताएं और संस्थाएं -  1.धर्म - यहां धर्म संकीर्ण अर्थ में नहीं व्यापक अर्थ में काम करता है। धर्म का अर्थ संप्रदाय नहीं, बल्कि नैतिक कर्तव्य और सामाजिक व्यवस्था था। संस्कृत में धर्म शब्द का अर्थ एवं परिभाषा -  धृति क्षमा दमोस्त्यं सोचमिंद्रियनीग्रह धीर विद्या सत्यं अक्रोध दसकं धर्म लक्षणं। एक अन्य सूत्र - यतो धर्मस्ततो जय अर्थात   जहाँ धर्म है, वहीं विजय है। न्याय का मुख्य उद्देश्य धर्म की स्थापना करना था।   राजा का कर्तव्य (राजधर्म) -  राजा को धर्म का रक्षक माना जाता था। यदि राजा न्याय नहीं क...

🏠समसामयिक लेख

समसामयिक घटनाएं  1. परिवार में वयोवृद्ध 2. बाजार के वर्तमान हालत 3. भूमिगत जल एवं भविष्य 4. भारत में वन, वन्य क्षेत्र एवं पर्यावरण 5. उन्नाव बस दुर्घटना 6. पूर्व RTDC चेयरमैन धर्मेंद्र सिंह राठौड़ 7.की पत्नी का बाय पस ऑपरेशन 8. राजस्थान लाल डायरी प्रकरण 9. संतान ऐसी भी 10. गाय उत्पत्ति एवं स्थिति 11. सामाजिक सरोकार 12. चूरू ट्रिपल मर्डर मिस्ट्री 13. राजस्थान बजट 2024-25 एक छलावा 14. चिकू की बागवानी 15. पंजाबी लोक नायक अब्दुल्ला भट्टी 16. कुश्ती बनाम अखाड़ा 17. शक संपत्ति विवाद और परिवार का अंत 18. ताजमहल 19. उर्दू प्रश्न पत्र 20. भारत सरकार की अग्निवीर योजना (अस्थाई सैनिक) 21. विपत्ति,सरकार और हम (संदर्भ कोरोना काल) 22. सरकार,योजना और जागरूकता 23. हम हमारा व्यवहार और करोना 24. मदरसा बोर्ड जयपुर का फर्जीवाड़ा 25. राजस्थान बजट 2025-26 26. महिला दिवस 8 मार्च 27.  चूरू अग्रसेन नगर ओवर ब्रिज निर्माण 28.  कहानी सिक्किम की 29. पाकिस्तान परस्त कौन 30.  भारत नेतृत्व तब और अब 31.  pok की कहानी 32.  भाजपा सरकार के ग्यारह साल ग्यारह सवाल 33.  नरेगा एवं...

मानव तस्करी

मानव तस्करी गंभीर अपराध और मानवाधिकारों का उल्लंघन है। इसमें डराकर, बलपूर्वक, या धोखे से लोगों का शोषण हेतु क्रय है विक्रय, परिवहन या भर्ती की जाती है। इसे आधुनिक दासता भी कहा जाता है। 1. मानव तस्करी के प्रमुख रूप -  तस्कर मुख्य रूप से शोषण हेतु कमजोर वर्गों को निशाना बनाते हैं। इसके कई रूप हो सकते हैं -  I. जबरन श्रम -  इसे बेगार, बंधुआ मजदूरी भी कहते हैं। कारखानों, ईंट भट्टों, निर्माण स्थलों या घरेलू काम के लिए लोगों से जबरदस्ती काम कराना और उन्हें नाममात्र के वेतन या बिना वेतन के जबरन काम करवाया जाता है। लोगों को ईंट-भट्टों, कपड़ा कारखानों और कृषि कार्यों में बंधुआ मजदूर बनाया जाता है। II. यौन शोषण  - महिलाओं और बच्चों को वेश्यावृत्ति या अन्य प्रकार के यौन कार्यों के लिए मजबूर किया जाता है। हाल ही में जारी एप्सटन फाइल में विश्व के बड़े - बड़े नामवर लोगों के नाम तस्करी कर लाए गए कम आयु के बच्चों से यौन संबंध के चर्चे जोरों पर हैं। अधिकांश मानव तस्करी गरीब देशों से होती है।महिलाओं और बच्चियों को वेश्यावृत्ति हेतु तस्करी कर रेड लाइट एरिया में बेचा दिया ज...

👤 शमशेर भालू खान

📍 कायमखानी बस्ती सहजुसर ,चूरू राजस्थान Pin :-331001

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