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बासनपीर मामले की हकीकत

बासनपीर जूनी के सत्य एवं जैसाने की अपनायत की पड़ताल - 
पिछले कुछ दिनों से जैसलमेर के बासन पीर इलाके का मामला सामने रहा है। कहा जा रहा है कि पूर्व राज परिवार की जमीन पर बासनपीर गांव के लोगों द्वारा कब्जा किया जा रहा है।
नजदीक से पड़ताल करने पर हकीकत कुछ ओर निकली। जिसके कुछ तथ्य निम्नानुसार हैं -
रियासत काल में सन 1662 में बीकानेर और जैसलमेर रियासत के बीच युद्ध हुआ। इस युद्ध में जैसलमेर सेना के दो वीर योद्धा सोढ़ा जी और पालीवाल जी शहीद हो गए।
युद्ध के बाद बासन पीर (युद्ध स्थल) तालाब की तलहटी पर शहीदों की स्मृति में छतरियां बनवाई हैं।
जैसलमेर के चारों और 120 किलोमीटर इलाके में 84 गांव पालीवाल ब्राह्मणों ने बसाए जिनमें से एक गांव बासनपीर जूनी भी था।
पालीवाल ब्राह्मण समृद्ध किसान और व्यापारी थे, रियासत के दीवान सालिम सिंह से अनबन के कारण सन् 1825 में सभी गांव खाली करने को मजबूर हो गए।
पालीवालों के यहां से अन्यत्र जाने के बाद सभी 84 गांव वीरान हो गए जिनमें यह गांव बासनपीर जूनी भी सम्मिलित था।वीरान - बियाबान 120 किलोमीटर के क्षेत्र पर राजपरिवार का अधिकार था।
आजादी के बाद सेटलमेंट के समय भी बासनपीर जूनी गांव वीरान रहा यदि उस समय पालीवाल रहते तो आज सारी जमीन के मालिक पालीवाल ही होते।
वीरान गांव की जमीन को सेटलमेंट ने चारागाह इंद्राज कर दिया।
स्वतंत्रता के बाद सेना ने पोकरण फायरिंग रेंज का विस्तार किया जिससे सैकड़ों गांव विस्थापित हो गए।
राज्य सरकार द्वारा गठित समिति मे जिला कलेक्टर, तहसीलदार, पटवारी और उस समय के राजपरिवार के निकटतम मौजीज भोपालसिंह (निवासी - बडौडा) शामिल थे।
समिति ने पलायन करके आए लोगों को जमीन देने का निर्णय लिया।
सरकार ने समिति की अनुशंसा पर लोगों को भूमि आवासित कर दी।
बासन पीर जुना गांव - 
जैसलमेर - जोधपुर हाइवे पर जैसलमेर से 30 पहले बासन पीर जुना गांव बसा जहां आज 1000 से अधिक घर हैं। निकटवर्ती राजपूत गांव फयाद, रीदवा, हमीरा, बड़ौड़ा आदि।
कालांतर में समय की मार से सैकड़ों वर्ष पूर्व बनी छतरियां जीर्ण - शीर्ण हो गईं। तालाब के पास ही राजकीय प्राथमिक विद्यालय भवन बना, जो बाद में राउप्रावि में क्रमोन्नत हुआ। यहां हमीरा के दो अध्यापक एक सुथार, एक राजपूत कार्यरत थे। उनके कहने से ही टूटी छतरियों के पत्थर एक तरफ रखे गए।
छतरियां विद्यालय सीमा के निकटतम थीं, जहां बच्चे खेलते थे। एक दिन विद्यालय स्टाफ ने गांव के लोगों को बुला कर छतरियों के गिरने और संभावित दुर्घटना से होने वाली जन हानि के बारे में बताया। 
गांव के लोगों ने छतरियों के बिखरे ढांचे के पत्थरों को एक तरफ रख दिया। 
वर्ष 2018 में दूसरे गांव के लालू सिंह सोढ़ा, शैतान सिंह राठौड़, गणपत सिंह आदि ने यहां छतरियों के निर्माण की बात की। स्कूल भवन व अन्य अनबन के चलते स्थानीय निवासी हासमदीन आदि ने विरोध किया। मुकदमे बाजी हुई, कोर्ट स्टे के कारण काम बंद कर दिया गया। 
वर्तमान घटनाक्रम - 
8 जुलाई 2025 को यही लोग फिर आए और छतरियां बनवाने बाबत यहां के लोगों से बात की। लोगों ने कहा, आप पुराने मुकदमे वापस ले लीजिए और छतरियां बनवा लीजिए। इस पर एक पक्ष राजी नहीं हुआ। राजपूत पक्ष पुलिस के साथ आया था। लोगों ने स्टे के बावजूद निर्माण कार्य का विरोध किया। बात थोड़ी बढ़ी और पुलिस ने फायरिंग कर दी। इस फायरिंग में 2 लोगों के गोलियां लगीं। जिन्हें बाद में अस्पताल भेज दिया गया।
फायरिंग की बात सुनकर स्त्रियां और बच्चे बाहर आ गए, जिन्होंने पत्थर बाजी शुरू कर दी। पुलिस ने लाठी चार्ज किया जिसमें कई लोग घायल हुए।
घटना के बाद निर्दलीय विधायक शिव, रविंदर सिंह भाटी, पोकरण से भाजपा विधायक महंत प्रतापपुरी, एवं शैतान सिंह पूर्व विधायक पोकरण सहित लगभग 15 हजार लोगों ने डेरा डाल दिया।
पुलिस ने दूध पीते बच्चों की मांओं और नाबालिग लड़कियों सहित 25 महिलाओं और 8 पुरुषों को 353,151 एवं दंगा भड़काने की विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज कर जेल में डाल दिया।
इसी गांव के रहने वाले इस्लाम खान बासन पीर के अनुसार - 
पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज बनने से काफी गांव की जमीन अवाप्त की गई और लोगों को विस्तापित होना पड़ा,वहा से निकले लोग अलग अलग जगह निवास करने लगे,हमारे बुजर्ग पूर्वजों ने वीरान पड़े बासनपीर जूनी को अपने गले लगाया और उसको आबाद किया।
आपके सामने एक आवंटन आवेदन की एक मिशल दिख रही हैं वो मेरे दादा भले खान के नाम से हैं जिनको 75 बीघा जमीन देने पर सहमति 1976 में बनी, ऐसी सैकड़ों आवेदन मिशल है जिसमे किसानों को जमीन आवंटित की गई थी और हम पिछले 55 साल से उस जमीन पर काबिज हैं आज चौथी पीढ़ी उस जमीन को काश्त कर रही हैं और कुछ लोग कह रहे हैं कि अब कब्जा किया जा रहा हैं।
जैसलमेर राजपरिवार हमारे लिए सम्मान योग्य हैं और इस रियासत को बचाने के लिए हमारे बुजुर्गो ने भी कुर्बानियां दी है इतिहास उठाकर देख सकते हो। महारावल बृजराज सिंह से मधुर संबंध थे उम्मीद है उनके परिवार से भी अच्छे रहेंगे,पर कोई यदि दूसरा आदमी माहौल खराब करने की कोशिश करेगा तो उसको हम कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे,बासनपीर जूनी की जमीन पर बासनपीर के ही लोगों का हक है,मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन हैं और जो भी फैसला आएगा हम न्यायपालिका का सम्मान करेंगे।
आवंटित की गई भूमि की मिशल की प्रति 🖕
कानूनी कार्यवाही बासन पीर - 
इस पूरे मामले की बासनपीर गांव की ओर से पैरवी पूर्व APP दिने खान मांगलिया निवासी मोहनगढ़ के द्वारा की जा रही है।
जीवनपाल सिंह भाटी (निवासी निकटतम गांव) के अनुसार - 
निकटवर्ती गांव के जीवन पाल सिंह भाटी द्वारा भेजी गई वाइस के अनुसार यह पूरी घटना बड़े स्तर पर दंगा भड़काने की साजिश थी। इस घटना के बारे में बताया गया कि स्थानीय प्रधान इस मामले के सुलझावे के लिए आ ही रहे थे, पर कुछ लोगों ने साजिशन मामले को बढ़ाया।
पुलिस तहरीर के आधार पर - 
पुलिस द्वारा दर्ज 2 FIR की प्रतियां -
पहली FIR 
दूसरी FIR 
सामाजिक संगठनों द्वारा आपसी खींचतान को कम करने हेतु प्रस्तावित सद्भावना रैली को रद्द करने हेतु धारा 144 लागू की।
सद्भावना रैली बासनपीर जूनी 

Comments

  1. Sahab pehle savidha karmiyo ko to naye dela de je parmanent karva de je phir Aage bat karte hai

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