आज कल सरकार आदमी को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए के उपदेश देने का काम ही ज्यादा कर रही है जब के नियमों का पालन करते हुए प्रत्येक नागरिक को महान भारतीय संविधान ने संस्कृति खानपान रहनसहन वस्त्र पूजा पद्धति सामाजिक और सांस्कृतिक संरक्षण भाषा लिपि और वयक्तिगत जीवन को अपने तरीके से जीने का अधिकार सम्मान के साथ दिया ह फिर कैसे कोई सरकार यह तय कर सकती है के किस व्येक्ति को कितने दिन तक क्या खाना है और क्या नहीं खाना है।
क्या सभ्य समाज में ये विचारणीय विषय नहीं है। और सरकार ऐसा करना चाहती है उस को अन्य धर्म व पंथों को मानाने वालों को पहले दूसरे दर्ज़े की नागरिकता देनी चाहिए लोक सभा व राज्य सभा में बिल पास कर सभी अन्य पंथों के लोगों को isolet कर उन के समस्त संवेधानिक राजनैतिक और संसकृतिक अधिकार छीन लेने चाहिए उस के बाद सरकारः जो चाहे करे।
जिस से उन लोगों को एक तरह से सुकून तो मिले और सरकार पंथ निरपेक्षता ढोंग न कर सके।
जीवन जीने और उसे अपने पंथ की मन्येताओं को मानते हुए वयतीत करने का अधिकार तो स्वयं भगवन ने दिया ह उसे कोई कैसे छीन सकता ह।
क्या सभ्य समाज में ये विचारणीय विषय नहीं है। और सरकार ऐसा करना चाहती है उस को अन्य धर्म व पंथों को मानाने वालों को पहले दूसरे दर्ज़े की नागरिकता देनी चाहिए लोक सभा व राज्य सभा में बिल पास कर सभी अन्य पंथों के लोगों को isolet कर उन के समस्त संवेधानिक राजनैतिक और संसकृतिक अधिकार छीन लेने चाहिए उस के बाद सरकारः जो चाहे करे।
जिस से उन लोगों को एक तरह से सुकून तो मिले और सरकार पंथ निरपेक्षता ढोंग न कर सके।
जीवन जीने और उसे अपने पंथ की मन्येताओं को मानते हुए वयतीत करने का अधिकार तो स्वयं भगवन ने दिया ह उसे कोई कैसे छीन सकता ह।
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