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पूर्व विधायक स्वर्गीय श्री भालू ख़ाँ


चूरू के विधायक जनाब भालू खां साहब जून 1980 से 1985
नाम - भालू खां
वास्तविक नाम - हासम खां
जन्म - 24.07.1923
मृत्यु - 25 जून 2001 ( 74 वर्ष आयु)
(राजस्थान विधानसभा में 7 नवंबर, 2001)
जन्म स्थान - सहजूसर चूरू 
मृत्यु का स्थान - सहजूसर, चूरू 
शांत स्थल - सहजूसर, चूरू 
मृत्यु का कारण - मई 2000 में लकवा हुआ, लकवे के कारण लगभग नौ माह जयपुर SMS में भर्ती रहे, आखिर लकवे के दूसरे झटके के कारण मृत्यु को प्राप्त हुए)
विवाह - 17.03.1947 (24 वर्ष आयु)
पत्नी - सलामन बानो (गांगियासर झुंझुनू के जवादी खान अखाण की पुत्री, इनके भाई फूले खां और फतेह खां टोंडल्यार, सिंध पाकिस्तान चले गए, मृत्यु - ब्रेन हेमरेज के कारण SMS हॉस्पिटल जयपुर में 31 अगस्त 2008) 
पिता का नाम - लावदी खां 
माता - करीमन बानो (चूरू, अथुना मोहल्ला की चायल कायमखानी) (जनाब भालू खा जी) के नाना जी का नाम (इनके नाना का नाम मेहराब खां चायल था जिनके दो बेटे हुए  
1. असरू खां हाल निवासी; अथुना मोहल्ला चुरू)
2. अस्त अली खां, हाल: खीपुरा सिंध पाकिस्तान में जा कर बस गए।
पिता श्री लावदी खान गांव के पंच पटेलों में थे।
सहोदर - कुल 2 भाई, 7 बहन
1. इलायची बानो - (कासम अली खां मलवान मोडावासी, राजगढ़)
2. सनावर बानो - (बशीर खान, मलवान मोडावासी, राजगढ़)
3. मुन्नी बानो - (इनायत खां मलवान मोडावासी, राजगढ़)
4. बानो - नजीर खां मलकान, हेतमसर फतेहपुर, सीकर)
5. हाजरा बानो - (अस्त अली खां अखाण थैलासर चूरू, हाल मेलुसर सरदारशहर)
6. अनवर बानो - (रुस्तम खान आलमान, झारिया, चूरू)
7. मैना बानो - (हुसैन खां मलकान, रेणु लक्ष्मणगढ़ सीकर)
8. आजम अली खां - (गुलाब बानो फरीद खान मलकान की पुत्री, पीथीसर, चूरू)
संतान - 2 बेटियां 4 बेटे (बारह में से छः संतान कम आयु में काल कवलित)
1. भंवरू खां 1951 (नौवीं पास) - (1974 खातून बानो पुत्री मोड़ावासी राजगढ़ के जीवन खां जमालखानी (राणासर, चूरू से ननिहाल में गोद) मृत्यु - मार्च 2016 व्यवसाय - राजनीति में भाग्य आजमाया (दो बार सरपंच, एक बार ब्लॉक मेंबर पंचायत समिति चूरू से चुनाव लड़ा) परन्तु असफल।
2. शरीफन बानो  1963 -(साक्षर) (1978 यूसुफ खान पीथीसर के सादुले खान दुलेखानी के पुत्र) व्यवसाय - गृहिणी
3. ताज बानो 1966 (साक्षर) - (1978 शब्बीर खान पीथीसर के फ़ैजू खान दुलेखानी के पुत्र) व्यवसाय - गृहणी
4. शेर खान 1968 - (06.09
1986 कुलसुम बानो (भंवरी), पीथीसर के तजु खान हबीबखानी की पुत्री) (झारिया से पीथीसर, ननिहाल गोद) व्यवसाय - पहले विदेश अब ग्रामीण राजनीति
5. इलियास खान (खुशी) 1975 -  (शबनम बानो, पीथीसर के तजु खान हबीबखानी की पुत्री) (झारिया से पीथीसर, ननिहाल गोद मृत्यु - ब्रेन हेमरेज के कारण 06.09.2025 को), व्यवसाय - विदेश
6. शमशेर खां (प्रेम)18.04.1978 MA Gold medalist- (विवाह 20.10.1996 अख्तर बानो (सदफ़) 09.02.1980  चूरू पंखा रोड़ चूरू के लाल खान इसेखानी की पुत्री) व्यवसाय - द्वितीय श्रेणी अध्यापक से स्वैच्छिक सेवानिवृति,, अब प्रदेश संयोजक सेवादल, जिलाध्यक्ष शिक्षक कांग्रेस, तहसील मंत्री किसान सभा चूरु। हाल LLB राजकीय विधि महाविद्यालय चूरू से।
उनके एक पुत्र, शमशेर भालू खान सहजूसर, ने उनके पदचिन्हों पर चलते हुए सामाजिक कार्यकर्ता और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया।
जीवन परिचय - 
भालू खान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता और सामाजिक कार्यकर्ता थे, जो राजस्थान के चुरू क्षेत्र में स्थानीय शासन, कृषि तथा समुदाय कल्याण में उनके योगदान के लिए जाने जाते थे।
प्रारंभिक शिक्षा -  
उन्होंने प्राथमिक स्तर तक शिक्षा गांव से ही प्राप्त की। गांव में ठाकुर जी के मंदिर में निजी शिक्षक से पांचवीं तक की शिक्षा ग्रहण की। निकटम विद्यालय नहीं होने के कारण आगे की पढ़ाई नहीं कर सके।
व्यवसाय - 
भालू खां पेशे से वे कृषि और पशुपालन से जुड़े थे। कृषि के साथ - साथ उन्होंने कतार (अन्य स्थानों पर बाजरा बेचकर गेहूं और चावल का व्यापार)। का काम भी किया। भालू खां ने पशु खरीद फरोख्त का काम भी किया।
राजनीतिक जीवन - 
मोहर सिंह राठौड़ और हनुमान सिंह बुडानिया के साथ भालू खान ने ग्रामीण और अल्पसंख्यक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हुए राजनीति में प्रवेश किया। उन्होंने कांग्रेस पार्टी में कई नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभाईं, जिनमें शामिल हैं - 
सदस्य - जिला कांग्रेस कार्यकारी समिति के , चुरू।
अध्यक्ष - जिला कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग  (1974-1977)
मंत्री - ग्रामीण ब्लॉक कांग्रेस समिति (I), चुरू  (1977 से 1980)।
1980 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में, उन्होंने चुरू निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (I) के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीते, जिसमें उन्होंने 20,490 वोट प्राप्त किए, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी राम नाथ कस्वा (बाद जैसे का चूरू निवासी, पार्टी JNP(SC)) को 14,977 वोट मिले (मार्जिन: 5,513 वोट)। वे 1980 से 1985 तक राजस्थान विधानसभा के सदस्य (MLA) रहे। उनका जयपुर पता था - B - 15 विधायकपुरी, जालुपुरा, जयपुर। अपने कार्यकाल के दौरान, वे प्रमुख विधानसभा समितियों में शामिल थे, जैसे:
सदस्य - संसदीय सलाहकार समिति (1982-1985)।
सदस्य - लोक लेखा समिति के  (1983-1984)।
सदस्य - नियम समिति/उप-समिति के  (1980-1985)।
1985 के चुनाव में, उन्होंने चुरू से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा लेकिन चौथे स्थान पर रहे, जिसमें उन्हें 5,381 वोट (8.63% वोट शेयर) मिले। चुनाव INC की हमीदा बेगम ने 22,398 वोटों से जीता।
भालू खान को 1978 में इंदिरा गांधी की गिरफ्तारी से संबंधित विरोध प्रदर्शनों के दौरान से जेल में रखा गया था, जो कांग्रेस के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सामाजिक और प्रशासनिक भूमिकाएं - राजनीति के अलावा, भालू खान सामाजिक और समुदाय संगठनों में सक्रिय थे।
सदस्य - राजस्थान हज समिति (1981, 1982-1983, 1983-1984)।
अध्यक्ष - जिला कायमखानी महासभा, बीकानेर के  (5 वर्ष तक)।
अध्यक्ष - जिला वक्फ समिति, चुरू के  (5 वर्ष तक)।
स्थानीय विकास और सहकारी संस्थाओं में विभिन्न प्रशासनिक पद - 
मंत्री - गांव सेवा सहकारी सोसाइटी (1961 - 1981)।
सरपंच - ग्राम पंचायत सहजूसर (1965 - 1978)।
निदेशक - कृषि उत्पाद बाजार समिति, चुरू  (1975 -1976)।
अध्यक्ष - राजस्थान भूमि विकास बैंक, चुरू के  (8 जून, 1981 से 1985 )।
सदस्य - सूखा प्रभावित क्षेत्र परियोजना समन्वय समिति, चुरू (6 फरवरी, 1981 से)।
सदस्य - सामाजिक कल्याण बोर्ड, चुरू।
सदस्य - क्षेत्रीय रेलवे उपयोगकर्ता सलाहकार समिति, उत्तरी रेलवे (15 मई, 1981 से)।
सदस्य - छोटे और मध्यम शहरों में एकीकृत शहरी विकास कार्यक्रम के लिए निगरानी समिति (15 सितंबर, 1981 से)।
सदस्य - कृषि संस्थाओं के राज्य प्रतिनिधि।
उनका सामाजिक कार्य अल्पसंख्यकों की सेवा, गरीबों को चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करना, पिछड़े और घुमंतू जनजातियों का पुनर्वास, वंचित छात्रों के लिए छात्रवृत्तियां, तथा सामाजिक सद्भाव और धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देने पर केंद्रित था।
व्यक्तिगत रुचियां और बाद का जीवन - भालू खान को कबड्डी जैसे खेल और पारंपरिक ग्रामीण खेल पसंद थे। उन्होंने दो बार पाकिस्तान की यात्रा की। उनका निधन 25 जून, 2001 को हुआ, और  को शोक व्यक्त किया गया।
भालू खान की विरासत राजस्थान में ग्रामीण विकास, अल्पसंख्यक कल्याण और जमीनी स्तर की राजनीति के प्रति उनकी समर्पण में निहित है।
कलम, श्री राधेश्याम चौटिया - 
दादा कायम खान के 602 वे शहादत दिवस पर चूरू के प्रथम अल्पसंख्यक विधायक दादा कायम खान के वंशज 36 कोम से पारिवारिक रूप से जुड़े हुए मरहूम श्री भालू खान जी को नमन करते हुए कहना चाहूंगा।
अल्पसंख्यक विधायकों में एकमात्र यही ऐसे शख्स  रहे जो ग्रास रूट से सामान्य से सामान्य व्यक्ति और कांग्रेसी जनों से जुड़े हुए थे जिसमें 36 कोम के सभी वर्गों के लोग उनकी टीम में शामिल थे।
एक भी कार्यकर्ता यदि उन्हें कुछ समय नहीं दिखता तो वह चिंतित हो जाते थे और तुरंत उस कार्यकर्ता के पास पहुंच जाते थे और अधिकार स्वरूप अपने ठेठ देहाती भाषा में  भला बुरा कह कर अपने साथ बिठा के ले आते थे मेरे ख्याल से 1980 के बाद ही ग्रामीण क्षेत्र के कांग्रेस जनों ने शहर की आबोहवा देखनी प्रारंभ की थी, मुझे याद है पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस की मेहंदी के पौधों पर ग्रामीण क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के धोती कुर्ते सूखते रहते थे।
भालू खान जी के वक्त में पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस कांग्रेस की राजनीति का सेंटर बन गया था देश में जब शिक्षित बेरोजगार योजना लांच की गई उस वक्त के जिला उद्योग अधिकारी ने 300 लोगों की सूची स्वीकृत की किंतु जानबूझकर कांग्रेस के लोगों को उस सूची से बाहर रखा गया तब रियाजत अली खान, सुबोध मासूम, ताराचंद  बांठिया, इलियास अहमद खा,न  जीएन अंसारी, सुशील जी ओझा, इदरीश खत्री व फजले हक चौहान जैसे दर्जनों कांग्रेस कार्यकर्ता जिला उद्योग केंद्र के आगे धरने पर बैठ गये।
धरने के 2 दिन बाद मरहूम भालू खान जी उस वक्त के कांग्रेश के बहुत बड़े ताकतवर नेता मरहूम आरिफ मोहम्मद साहब को लेकर चूरु पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस आए हमेशा कार्यकर्ताओं से घिरे रहने वाले भालू खान जी ने जब देखा के युवा कार्यकर्ता नहीं है तो उन्होंने पूछा कि आज मेरे लड़के दिखाई नहीं दे रहे हैं तो किसी ने उन्हें बताया कि वह तो डी आई सी के आगे धरने पर बैठे हैं।
आप आश्चर्य करेंगे भालू खान जी ने आरिफ साहब को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस बैठाया और स्वयं भूमि विकास बैंक की  जीप लेकर धरना स्थल पर पहुंच गए और हमें डांटने लगे मेरे कार्यकर्ताओं को मेरे बच्चों को धरने पर बैठने की क्या नौबत आ गई अभी तो भालू खान जिंदा है। उन्होंने हम सबको उठाया पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस लेकर आए और 2 दिन बाद ही 35 से 40 कांग्रेस जनों के नाम सूची में जोड़ दिये।
गए उस दौर में हम नो सीखिए कार्यकर्ता थे, 1982 में भारतीय युवा समाज के अध्यक्ष श्री सुबोध मासूम ने सांसद के रूप में वर्तमान मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत को चूरु आने का  निमंत्रण दिया।
संयोग से गहलोत साहब उस दौरान  इंदिरा जी  के मंत्रिमंडल में  मंत्री बन गए और बीकानेर होते हुए आगे बढ़ो दहेज हटाओ कार्यक्रम में भाग लेने चूरु पधारे हमारे ग्रुप के नेता भाई रियाज खान, सुबोध मासूम मैं स्वयं, मरहूम GN अंसारी, इदरीश खत्री, हरि शर्मा ,फजले हक चौहान व स्वर्गीय  समुद्र सिंह राठौड़ आदि ने बिना भालू खान जी  से चर्चा किये अशोक गहलोत जी का कार्यक्रम रख दिया।
कार्ड छपवा दिये जिसमें अध्यक्षता चूरू विधायक भालू खान जी अंकित थी उसी दिन सुराणा स्मृति भवन में लंबा चौड़ा टेंट लगा था हम तो नव सीखिए थे हमने सोचा गहलोत साहब वहां भी कार्यक्रम में जाएंगे हमने कार्यक्रम मनोरंजन क्लब चूरू में रखा ।
कार्यक्रम से 2 दिन पहले कार्ड लेकर हम भालू खान जी के पास गए उन्हें आमंत्रण दिया उन्होंने उसे सहर्ष स्वीकार किया और पूछा क्या समस्या है हमने कहा कार्यक्रम तो हमने रख लिया है लेकिन टेंट माइक आदि के लिए हमारे पास पैसे नहीं हैं, आप आश्चर्य करेंगे उस जमाने में भालू खान जी ने जो सरपंच साहब उनके पास बैठे थे सभी को निर्देश दिया की बच्चों की मदद करो और 10 मिनट में उस वक्त ₹500 से भी अधिक हम को दिए और कहा कार्यक्रम ठाठ से करो। उसी जमाने में यूथ कोऑर्डिनेटर श्री प्रकाश अग्रवाल ग्वालियर  वालों को पार्टी ने चूरु कोऑर्डिनेटर लगाया मुझे याद है प्रकाश जी अग्रवाल केसर पर कांग्रेसका भूत इस कदर हावी था के नाथद्वारा चूरू में उन्होंने यूथ मोटीवेटर्स का प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया और उसके खाने पीने की व्यवस्था के लिए  अपनी सोने की अंगूठी बेचकर खाद्य सामग्री की व्यवस्था की जब भालू खान जी को यह पता चला तो उन्होंने प्रकाश जी अग्रवाल और हमको कड़ी डांट लगाई अंगूठी वापस दिलवाई और सात दिवसीय कैंप की ऐसी व्यवस्था की जो इस विधानसभा क्षेत्र में हमने तो आज तक कांग्रेस के आयोजन में नहीं देगी अनपढ़ होने के बावजूद   हृदय ज्ञान के आधार पर कार्यकर्ता और जनता की भावनाओं को समझने में उन्हें देर नहीं लगती थी मुझे याद है जब उन्होंने मेरे को एनएसयूआई का जिलाध्यक्ष बनाया तब उनके समाज के या यूं कहूं उनके रिश्तेदार भी अध्यक्ष बनना चाहते थे किंतु भालू खान जी ने 500 आदमियों की भीड़ में सार्वजनिक रूप से मेरा चयन किया और अनुशंसा की ऐसे जमीनी स्तर पर जुड़े हुए  कायमखानी समाज के व्यक्तित्व को दादा कायम खा के 602 वे बलिदान दिवस पर कोटि कोटि नमन इस उम्मीद के साथ कि 1 दिन फिर से कॉन्ग्रेस को हवाई नेताओं से निजात मिलेगी तथा जनता और कार्यकर्ताओं के दिलों पर राज करने वाला कोई नेता तो मिलेगा।
शमशेर भालू खां 
9587243963

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