Skip to main content

पूर्व विधायक स्वर्गीय श्री भालू ख़ाँ


चूरू के विधायक जनाब भालू खां साहब जून 1980 से 1985

       कलम 
श्री राधेश्याम चौटिया 
दादा कायम खान के 602 वे शहादत दिवस पर चूरू के प्रथम अल्पसंख्यक विधायक दादा कायम खान के वंशज 36 कोम से पारिवारिक रूप से जुड़े हुए मरहूम श्री भालू खान जी को नमन करते हुए कहना चाहूंगा।
अल्पसंख्यक विधायकों में एकमात्र यही ऐसे शख्स  रहे जो ग्रास रूट से सामान्य से सामान्य व्यक्ति और कांग्रेसी जनों से जुड़े हुए थे जिसमें 36 कोम के सभी वर्गों के लोग उनकी टीम में शामिल थे।
एक भी कार्यकर्ता यदि उन्हें कुछ समय नहीं दिखता तो वह चिंतित हो जाते थे और तुरंत उस कार्यकर्ता के पास पहुंच जाते थे और अधिकार स्वरूप अपने ठेठ देहाती भाषा में  भला बुरा कह कर अपने साथ बिठा के ले आते थे मेरे ख्याल से 1980 के बाद ही ग्रामीण क्षेत्र के कांग्रेस जनों ने शहर की आबोहवा देखनी प्रारंभ की थी, मुझे याद है पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस की मेहंदी के पौधों पर ग्रामीण क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के धोती कुर्ते सूखते रहते थे।
भालू खान जी के वक्त में पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस कांग्रेस की राजनीति का सेंटर बन गया था देश में जब शिक्षित बेरोजगार योजना लांच की गई उस वक्त के जिला उद्योग अधिकारी ने 300 लोगों की सूची स्वीकृत की किंतु जानबूझकर कांग्रेस के लोगों को उस सूची से बाहर रखा गया तब रियाजत अली खान, सुबोध मासूम, ताराचंद  बांठिया, इलियास अहमद खा,न  जीएन अंसारी, सुशील जी ओझा, इदरीश खत्री व फजले हक चौहान जैसे दर्जनों कांग्रेस कार्यकर्ता जिला उद्योग केंद्र के आगे धरने पर बैठ गये।
धरने के 2 दिन बाद मरहूम भालू खान जी उस वक्त के कांग्रेश के बहुत बड़े ताकतवर नेता मरहूम आरिफ मोहम्मद साहब को लेकर चूरु पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस आए हमेशा कार्यकर्ताओं से घिरे रहने वाले भालू खान जी ने जब देखा के युवा कार्यकर्ता नहीं है तो उन्होंने पूछा कि आज मेरे लड़के दिखाई नहीं दे रहे हैं तो किसी ने उन्हें बताया कि वह तो डी आई सी के आगे धरने पर बैठे हैं।
आप आश्चर्य करेंगे भालू खान जी ने आरिफ साहब को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस बैठाया और स्वयं भूमि विकास बैंक की  जीप लेकर धरना स्थल पर पहुंच गए और हमें डांटने लगे मेरे कार्यकर्ताओं को मेरे बच्चों को धरने पर बैठने की क्या नौबत आ गई अभी तो भालू खान जिंदा है। उन्होंने हम सबको उठाया पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस लेकर आए और 2 दिन बाद ही 35 से 40 कांग्रेस जनों के नाम सूची में जोड़ दिये।
गए उस दौर में हम नो सीखिए कार्यकर्ता थे, 1982 में भारतीय युवा समाज के अध्यक्ष श्री सुबोध मासूम ने सांसद के रूप में वर्तमान मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत को चूरु आने का  निमंत्रण दिया।
संयोग से गहलोत साहब उस दौरान  इंदिरा जी  के मंत्रिमंडल में  मंत्री बन गए और बीकानेर होते हुए आगे बढ़ो दहेज हटाओ कार्यक्रम में भाग लेने चूरु पधारे हमारे ग्रुप के नेता भाई रियाज खान, सुबोध मासूम मैं स्वयं, मरहूम GN अंसारी, इदरीश खत्री, हरि शर्मा ,फजले हक चौहान व स्वर्गीय  समुद्र सिंह राठौड़ आदि ने बिना भालू खान जी  से चर्चा किये अशोक गहलोत जी का कार्यक्रम रख दिया।
कार्ड छपवा दिये जिसमें अध्यक्षता चूरू विधायक भालू खान जी अंकित थी उसी दिन सुराणा स्मृति भवन में लंबा चौड़ा टेंट लगा था हम तो नव सीखिए थे हमने सोचा गहलोत साहब वहां भी कार्यक्रम में जाएंगे हमने कार्यक्रम मनोरंजन क्लब चूरू में रखा ।
कार्यक्रम से 2 दिन पहले कार्ड लेकर हम भालू खान जी के पास गए उन्हें आमंत्रण दिया उन्होंने उसे सहर्ष स्वीकार किया और पूछा क्या समस्या है हमने कहा कार्यक्रम तो हमने रख लिया है लेकिन टेंट माइक आदि के लिए हमारे पास पैसे नहीं हैं, आप आश्चर्य करेंगे उस जमाने में भालू खान जी ने जो सरपंच साहब उनके पास बैठे थे सभी को निर्देश दिया की बच्चों की मदद करो और 10 मिनट में उस वक्त ₹500 से भी अधिक हम को दिए और कहा कार्यक्रम ठाठ से करो। उसी जमाने में यूथ कोऑर्डिनेटर श्री प्रकाश अग्रवाल ग्वालियर  वालों को पार्टी ने चूरु कोऑर्डिनेटर लगाया मुझे याद है प्रकाश जी अग्रवाल केसर पर कांग्रेसका भूत इस कदर हावी था के नाथद्वारा चूरू में उन्होंने यूथ मोटीवेटर्स का प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया और उसके खाने पीने की व्यवस्था के लिए  अपनी सोने की अंगूठी बेचकर खाद्य सामग्री की व्यवस्था की जब भालू खान जी को यह पता चला तो उन्होंने प्रकाश जी अग्रवाल और हमको कड़ी डांट लगाई अंगूठी वापस दिलवाई और सात दिवसीय कैंप की ऐसी व्यवस्था की जो इस विधानसभा क्षेत्र में हमने तो आज तक कांग्रेस के आयोजन में नहीं देगी अनपढ़ होने के बावजूद   हृदय ज्ञान के आधार पर कार्यकर्ता और जनता की भावनाओं को समझने में उन्हें देर नहीं लगती थी मुझे याद है जब उन्होंने मेरे को एनएसयूआई का जिलाध्यक्ष बनाया तब उनके समाज के या यूं कहूं उनके रिश्तेदार भी अध्यक्ष बनना चाहते थे किंतु भालू खान जी ने 500 आदमियों की भीड़ में सार्वजनिक रूप से मेरा चयन किया और अनुशंसा की ऐसे जमीनी स्तर पर जुड़े हुए  कायमखानी समाज के व्यक्तित्व को दादा कायम खा के 602 वे बलिदान दिवस पर कोटि कोटि नमन इस उम्मीद के साथ कि 1 दिन फिर से कॉन्ग्रेस को हवाई नेताओं से निजात मिलेगी तथा जनता और कार्यकर्ताओं के दिलों पर राज करने वाला कोई नेता तो मिलेगा।

राधेश्याम चोटिया

Comments

Popular posts from this blog

बासनपीर मामले की हकीकत

इस ब्लॉग और मेरी अन्य व्यक्ति से हुई बातचीत पर मंहत प्रतापपुरी का बयान जीवनपाल सिंह भाटी की आवाज में सत्य घटना सद्भावना रैली बासनपीर जूनी पूर्व मंत्री सालेह मुहम्मद का बयान बासनपीर जूनी के सत्य एवं जैसाने की अपनायत की पड़ताल -  पिछले कुछ दिनों से जैसलमेर के बासन पीर इलाके का मामला सामने रहा है। कहा जा रहा है कि पूर्व राज परिवार की जमीन पर बासनपीर गांव के लोगों द्वारा कब्जा किया जा रहा है। नजदीक से पड़ताल करने पर हकीकत कुछ ओर निकली। जिसके कुछ तथ्य निम्नानुसार हैं - रियासत काल में सन 1662 में बीकानेर और जैसलमेर रियासत के बीच युद्ध हुआ। इस युद्ध में जैसलमेर सेना के दो वीर योद्धा सोढ़ा जी और पालीवाल जी शहीद हो गए। युद्ध के बाद बासन पीर (युद्ध स्थल) तालाब की तलहटी पर शहीदों की स्मृति में छतरियां बनवाई हैं। जैसलमेर के चारों और 120 किलोमीटर इलाके में 84 गांव पालीवाल ब्राह्मणों ने बसाए जिनमें से एक गांव बासनपीर जूनी भी था। पालीवाल ब्राह्मण समृद्ध किसान और व्यापारी थे, रियासत के दीवान सालिम सिंह से अनबन के कारण सन् 1825 में सभी गांव खाली करने को मजबूर हो गए। पालीवाल...

✍️कायम वंश और कायमखानी सिलसिला सामान्य इतिहास की टूटी कड़ियाँ

कायमखानी समाज कुछ कही कुछ अनकही👇 - शमशेर भालू खां  अनुक्रमणिका -  01. राजपूत समाज एवं चौहान वंश सामान्य परिचय 02. कायम वंश और कायमखानी 03. कायमखानी कौन एक बहस 04. पुस्तक समीक्षा - कायम रासो  05. कायम वंश गोत्र एवं रियासतें 06. चायल वंश रियासतें एवं गोत्र 07. जोईया वंश स्थापना एवं इतिहास 08. मोयल वंश का इतिहास 09. खोखर वंश का परिचय 10. टाक वंश का इतिहास एवं परिचय  11. नारू वंश का इतिहास 12 जाटू तंवर वंश का इतिहास 13. 14.भाटी वंश का इतिहास 15 सरखेल वंश का इतिहास  16. सर्वा वंश का इतिहास 17. बेहलीम वंश का इतिहास  18. चावड़ा वंश का इतिहास 19. राठौड़ वंश का इतिहास  20. चौहान वंश का इतिहास  21. कायमखानी समाज वर्तमान स्थिति 22. आभार, संदर्भ एवं स्त्रोत कायम वंश और कायमखानी समाज टूटी हुई कड़ियां दादा नवाब (वली अल्लाह) हजरत कायम खां  साहब   नारनौल का कायमखानीयों का महल     नारनौल में कायमखानियों का किला मकबरा नवाब कायम खा साहब हांसी,हरियाणा   ...

✅इस्लाम धर्म में व्यापार, ब्याज एवं मुनाफा

अरब व्यापारी हर देश में हर देश का हर एक सामान खरीदते और बेचते थे। अरब में व्यापार -  किसी भी क्षेत्र में सभी सामान उपलब्ध नहीं हो सकते। हर क्षेत्र का किसी ना किसी सामान के उत्पादन में विशेष स्थान होता है। उपलब्ध सामग्री का उत्पादन, भंडारण, परिवहन एवं विपणन ही व्यापार कहलाता है। क्षेत्र अनुसार इसके अलग - अलग नाम हो सकते हैं। इस्लाम धर्म का उदय अरब में हुआ। अरब क्षेत्र में तीन प्रकार की जनजातियां रहती थीं। बायदा - यमनी  अराबा - कहतानू (मिस्र) मुस्ता अराबा - अरबी (इस्माइली) यह जनजातियां खेती, व्यापार एवं अन्य कार्य करती थीं। हजारों सालों से इनका व्यापार रोम, चीन एवं अफ्रीका के देशों से रहा। अरब व्यापारी पश्चिम में अटलांटिक महासागर से लेकर पूर्व में अरब सागर तक, अरब प्रायद्वीप तक व्यापार करते थे। अरब नील से ह्यांग्हो तक व्यापार करते थे। अरब प्रायद्वीप कई व्यापार मार्गों के केंद्र में स्थित था, जिसमें दक्षिण पूर्व एशिया, भूमध्य सागर और मिस्र शामिल थे। यहां मुख्य सभ्यताएं रहीं -  - सुमेरियन एवं बेबीलोन  सभ्यता (मेसोपोटामिया/इराक) (दजला फरात) की सभ्यता। - फ...