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कुश्ती बनाम अखाड़ा

          भारतीय कुश्ती संघ एक पटकथा
                  एक जीत एक हार 

    ओलंपिक में पदक जीतने के बाद का चित्र 
                    साक्षी मलिक 

                     साक्षी मलिक 
                     महिला रेसलर 
          विश्व ओलंपिक में गोल्ड मेडल

                     विनेश फोगाट 
                     महिला रेसलर 

                       वनिशा फोगाट
                        भावुक बेटी

बृज भूषण शरण सिंह पर खिलाड़ियों के यौन शौषण का आरोप लगाया और महीनो तक दिल्ली धरने पर बैठी रही।

  कुश्ती छोड़ने की घोषणा करते हुए साक्षी मलिक 

             जूते उतार कर टेबल पर रखे 
                       अनिता श्योराण 
                       महिला रेसलर
                          अनिता श्योराण 
बृज भूषण शरण सिंह के साथी संजय सिंह के सामने भारतीय कुश्ती संघ का चुनाव लडा और। 33 वोटों से हार गई। 47 में से 07 वोट मिले।

         भारतीय पुरुष रेसलर बजरंग पुनिया 

       पद्म भूषण पुरस्कार सरकार को लौटाया 

                   बृज भूषण शरण सिंह 
              5 बार के सांसद और बाहुबली 
        50 से अधिक स्कूल कॉलेज का संचालक 
      खिलाड़ियों का यौन शौषण करने का आरोपी
                       भाजपा सांसद

         संजय सिंह उर्फ बबलू

वाराणसी (बनारस) निवासी व बृजभूषण शरण सिंह के सहयोगी संजय सिंह जो कुश्ती संघ के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव, यूपी कुश्ती संघ के उपाध्यक्ष भी रहे। 47 में से 40 वोट ले कर 33 वोट से विजयी।

चुनाव के बाद बृज भूषण शरण सिंह के घर सभी जीते हुए wfi भारतीय कुश्ती संघ के पदाधिकारी 
बृज भूषण शरण सिंह माला पहने हुए।

                    धरने पर बैठे खिलाड़ी

     आंदोलन के दौरान पुलिस की जबरिया 
                         कार्यवाही
                              की
                         पूरी कहानी 

पहलवान विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया की मांग थी कि बृजभूषण सिंह को महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के मामले में गिरफ़्तार किया जाए हालाँकि बृजभूषण ख़ुद पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताते रहे हैं, वहीं ये भी कह चुके हैं कि अगर आरोप साबित हुए तो वो फांसी लगा लेंगे।
कुश्ती के खिलाड़ियों और कुश्ती महासंघ के बीच विवाद जोर पकड़ता गया।  2023 मई महीने में कुश्ती महासंघ और इसके अध्यक्ष ब्रजभूषण शरण सिंह पर पहलवानों ने आरोप लगाए थे उनके आरोपों के बाद एक जांच कमेटी भी बैठाई गई।
 पहलवानों का कहना है कि कमेटी की रिपोर्ट की उन्हें कोई जानकारी नहीं है,इसके बाद रविवार को पहलवान जंतर-मंतर पर धरने पर बैठ गए।
कुश्ती महासंघ के खिलाफ पहलवानों ने एक बार फिर विरोध कर दिया और आरोप लगाया कि  यहां उनके साथ बुरा व्यवहार किया जा रहा है।
 वह कुश्ती को गलत हाथों से निकाल कर सही हाथों में दिए जाने की लड़ाई लड़ने बैठे हैं, लेकिन उनके लिए ऐसी परिस्थितियां बनाई जा रही हैं कि वह यहां से हट जाएं।पहलवानों ने पुलिस पर भी धक्का-मुक्की करने और अलग-अलग तरीके से परेशान करने के आरोप लगाए।
सभी रेसलर रात को जंतर-मंतर पर ही रुके रहे।
इसके बाद शाम चार बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बृज भूषण सिंह को गिरफ्तार कर कुश्ती संघ से हटाने की मांग की।
तीन महीने पहले महासंघ अध्यक्ष ब्रजभूषण शरण सिंह पर अनीता श्योराण ,विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया के साथ कई पहलवानों ने शोषण के आरोप लगाए। इन आरोपों पर आगे कोई कार्रवाई होता न देखकर पहलवानों ने रविवार को एक बार फिर मोर्चा खोल दिया।पहलवान जंतर-मंतर पर धरने पर बैठ गए हैं. इससे पहले शाम 4 बजे उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी बात रखी और कहा कि उन्हें अभी तक न्याय नहीं मिला है।
7 लड़कियों ने शोषण को लेकर शिकायत दी है, लेकिन अभी भी उनकी शिकायत के आधार पर FIR दर्ज नहीं की गई है।
पुलिस ने फिर दायर कर चार्ज शीट जारी कर दी जिस में बृज भूषण सिंह को दोषी करार दिया गया है।

                          अब
देश की बहादुर बेटियां फिर रोईं और आरोपी बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर ठहाके लगाकर हंसे. मेडल जीतने वाले चैम्पियन पहलवानों ने कहा कि वो हार गए. अब कुश्ती में आने वाली पीढियों को बेटियों के सम्मान की लड़ाई खुद लड़नी पड़ेगी. बाहुबली बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि “दबदबा था, दबदबा है, और दबदबा बना रहेगा”. आंखों मे आंसू लिए साक्षी मलिक ने कुश्ती की रिंग में अब कभी न उतरने का ऐलान किया और बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि भारतीय कुश्ती पर 11 महीने से चल रहा राहु काल खत्म हो गया, अब रिंग में उनके मुकाबले कोई नहीं. गुरुवार को भारतीय कुश्ती फेडरेशन WFI के चुनाव हुए. बृजभूषण शरण सिंह ने अपने सारे मोहरों को चुनाव जिता दिया – अध्यक्ष, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उपाध्क्ष, कोषाध्यक्ष, सचिव और कार्यकारिणी के सदस्य, सभी पदों पर बृजभूषण शरण सिंह के लोग जीते. हालांकि दावा ये किया जा रहा था कि अब बृजभूषण का फेडरेशन से कोई लेना देना नहीं है. विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और तमाम महिला पहलवानों ने बृजभूषण पर लड़कियों के साथ जोर-जबरदस्ती करने, उनका यौन शोषण करने के इल्जाम लगाए थे. फेडरेशन में वित्तीय और दूसरी गड़बडियों के आरोप लगाए थे. दिल्ली के जंतर मंतर पर दो-दो बार खिलाड़ी धरने पर बैठे, खेल मंत्री ने कई दौर की बातचीत की. बृजभूषण के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया. बीजेपी के बाहुबली सांसद को फेडरेशन और चुनाव से दूर रखने का भरोसा दिया गया. बृजभूषण और उनके परिवार के किसी सदस्य पर फेडरेशन का चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगा दी गई लेकिन इसके बाद भी बृजभूषण बहादुर पहलवान बेटियों पर हंसते नजर आए और दावा किया कि 90 प्रतिशत वोट उनको मिले हैं. अब सवाल ये है कि क्या बृजभूषण सरकार से बड़े हो गए? क्या बेटियों का संघर्ष बेकार चला गया? क्या पहलवानों के आरोपों का कोई मतलब नहीं था? क्या दिल्ली पुलिस की चार्जशीट की कोई अहमियत नहीं? क्या मेडल जीतने वाली, देश का नाम रौशन करने वाली बेटियों के प्रति दिखाई गई सहानुभूति, उनसे किए गए वादे झूठे थे? चुनाव नतीजों का जश्न बृजभूषण के घर पर ही हुआ. चुनाव जीतने वाले पहले से बृजभूषण के घर पर मौजूद थे. WFI के अध्यक्ष पद के लिए संजय सिंह के खिलाफ राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता अनीता श्योराण खड़ी थीं लेकिन कुल 47 वोटों में से संजय सिंह को 40 वोट मिले और अनीता श्योराण को सिर्फ 7 वोट मिले. जैसे ही नतीजा आया, बृजभूषण के घर पर जम कर आतिशबाजी शुरू हो गई. बृज भूषण विजेता की तरह घर से बाहर निकले. संजय सिंह बृजभूषण के पीछे पीछे चल रहे थे. बाकी पदाधिकारी भी नेताजी के अगल बगल थे. जो जीते, उनके गले में कोई माला नहीं थी, उन पर किसी तरह के फूल नहीं बरसे. सारी मालाएं बृजभूषण के गले में थीं, फूल भी नेताजी पर बरस रहे थे. बाहर आते ही बृजभूषण ने व्यंग्यात्मक हंसी के साथ विक्ट्री का साइन दिखाया, मूंछों पर ताव दिया, और कहा कि दबदबा था, दबदबा है, और दबदबा रहेगा, दबदबा तो भगवान का दिया हुआ है. बृजभूषण जब डायलॉग मार रहे थे तब नए अध्यक्ष संजय सिंह नेताजी के डायलॉग की वाहवाही कर रहे थे. संजय सिंह ने कहा कि वो भले ही चुनाव जीते हैं लेकिन कुश्ती की आत्मा तो बृजभूषण ही हैं. बृजभूषण ने कहा कि अब कुश्ती में नई जान आएगी. बृजभूषण नारे लगवा कर, मीडिया के सामने शेखी बघारकर, विरोध करने वाले पहलवानों को अपनी ताकत का अहसास करवा कर घर में वापस चले गए. उधर, विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया और साक्षी मलिक टीवी पर बृजभूषण की बातें देख रहे थे, उनकी आंखों में आंसू थे. तीनों पहलवान काफी हिम्मत जुटाकर कैमरों के सामने आए, बोलने की बहुत कोशिश की लेकिन दो मिनट से ज्यादा कोई नहीं बोल पाया. सबने कहा कि अब और हिम्मत नहीं है, अब उम्मीद नहीं है, हम हार गए, पता नहीं हमारे देश में न्याय कहां मिलता है, सारे दरवाजे तो खटखटा लिए, अब कहां जाएं, जो आरोपी, गुनहगार हैं, वो जीत के ठहाके लगा रहे हैं, .हमारी बेबसी पर हंस रहे हैं, अब कुश्ती में लड़कियों का क्या होगा, वो नहीं जानते. साक्षी मलिक ने तो अपने जूते खोलकर टेबल पर रख दिए, रोते रोते बोलीं, अब कभी रिंग में नहीं उतरेंगी, कभी मैट पर दिखाई नहीं देंगी. इतना कहकर वह रोते हुए उठकर चली गईं. बृजभूषण ने जो कहा वो करके दिखा दिया. ये साबित कर दिया. कुश्ती संघ में दबदबा तो उनका ही रहेगा लेकिन आज देश के लिए मेडल जीतने वाली बेटियों के आंसू देखकर हर किसी का दिल रोया होगा. यौन शोषण का आरोपी बृजभूषण शरण सिंह का अट्टहास देखकर सबको सिस्टम की बेबसी पर गुस्सा आया होगा. बृजभूषण ने पहले ही कहा था, कुश्ती पर उनका दबदबा है और रहेगा, देश का नाम रौशन करने वाली पहलवान बेटियों से वादा किया गया था कि फेडरेशन को बृजभूषण के चंगुल से आजाद करा दिया जाएगा लेकिन चुनाव जीतने के बाद संजय सिंह अपने आका के घर पहुंचे, जीत का अहंकार बृजभूषण के चेहरे पर दिखा. उनकी तैयारी पूरी थी क्योंकि वोटर उनके थे, सिस्टम उनका था, जीतने वाला चेला उनका था. बृजभूषण छह बार के सांसद हैं, 50 से ज्यादा स्कूल कॉलेज चलाते हैं, कई बार जेल जा चुके हैं, बाहुबली हैं. उनका दावा है कि वो दबदबे से बीजेपी को चुनाव जिता सकते हैं. अगर उन्हें किनारे करने की कोशिश की गई तो वो समाजवादी पार्टी में जा सकते हैं. ये कारनामा वो पहले करके दिखा चुके हैं. महाबली बृजभूषण शरण सिंह मानते हैं कि उनके सामने धरने पर बैठने वाली लड़कियों की कोई हैसियत नहीं है. वह सोचते हैं कि ये चैम्पियन, पहलवान लड़कियां बीजेपी के किस काम की हैं, उनके पास ना वोट है, ना सपोर्ट है, इनके रोने-धोने से क्या होगा. लेकिन मुझे लगता है कि जीत के गुरूर में बृजभूषण शरण सिंह कुछ भूल रहे हैं. दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ जो चार्जशीट फाइल की है वो बहुत खतरनाक है. लड़कियों ने उन पर यौन शोषण के जो आरोप लगाए हैं वो बहुत गंभीर हैं. अगर वो ये सोचते हैं कि फेडरेशन का चुनाव जीतकर अपना दबदबा दिखाकर वो आरोप लगाने वाली पहलवानों को डरा देंगे, गवाहों को धमकाकर पलटवा देंगे तो वो गलतफहमी में हैं. फेडरेशन में बृजभूषण के कब्जे की चिंगारी आग बनकर भड़केगी, साक्षी और विनेश के आंसू अदालत में तेजाब बनकर बरसेंगे. भगवान के घर में देर हैं, पर अंधेर नहीं है. कानून के लंबे हाथ जब बृजभूषण तक पहुंचेंगे तब उन्हें अपनी गलती का अहसास होगा।

जिगर चूरूवी 
9587243963
(लेख में कुछ फोटो और सामग्री गूगल के साभार)

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