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रास बिहारी बोस (बसु)

       रास बिहारी बोस संक्षिप्त जीवन परिचय -
                    रास बिहारी बोस 

अंग्रेज सरकार के विरुद्ध आज़ादी के लिए गदर षडयंत्र एवं आजाद हिन्द फौज के संगठन का कार्य, क्रान्तिकारी गतिविधियों का संचालन करने में महत्वपूर्ण भूमिका, विदेश (जापान, इंडियन इंडेपिडेंस लीग व आजाद हिंद फ़ौज व हिन्दू महासभा जापान शाखा की स्थापना) निर्वासित हो कर भारत को स्वतन्त्रता दिलाने के प्रयास में आजीवन प्रयासरत व्यक्ति।दिल्ली में तत्कालीन वायसराय लार्ड चार्ल्स हार्डिंग पर बम फेंकने की योजनाकार।
नाम - रासबिहारी बोस (बांग्ला में बसु)
जन्म - 25 मई 1886 
जन्म स्थान - वर्धमान जिले के गांव सुबलदह गांव (बंगाल)
मृत्यु - 21.01.1945
मृत्यु का स्थान - टोक्यो,जापान
मृत्यु का कारण - क्षय रोग
शांत स्थल - टोक्यो , जापान 
जाति - कायस्थ
पिता का नाम - विनोद बिहारी बोस 
पिता का व्यवसाय -  चंदनगर में सरकारी नौकरी
माता का नाम - भुवनेश्वरी देवी (निधन 1887 में बोस की आयु 3 वर्ष)
पालन - पोषण - मामी ने किया
सहोदर - नहीं
नागरिकता
1 वर्ष 1886 से 1915 भारतीय
2 वर्ष 1915 से 1923 निर्वासित (नागरिकताविहीन)
3 वर्ष 1923 से आमरण जापान)
विवाह - 1916 में जापान में पैन एशियाई समर्थक सोमा आइजो और सोमा कोत्सुको की पुत्री तोशिको (जापानी नागरिक) से । (1924 में पत्नी का निधन)
                      पत्नी के साथ 
संतान - 02
शिक्षा - दीक्षा 
1 आरम्भिक एवं उच्च शिक्षा चन्दननगर बंगाल (फ्रांस के अधीन) के डुप्लेक्स कॉलेज से में हुई, जहाँ उनके पिता विनोद बिहारी बोस कार्यरत थे। 
2 चिकित्सा शास्त्र और इंजीनियरिंग की पढ़ाई फ्रांस और जर्मनी से की।
क्रांति की प्रेरणा - शिक्षक चारूचंद से।
भाषा - 
अंग्रेजी
हिंदी
बांग्ला
जापानी
नारा - जय हिंद
व्यवसाय -
1 देहरादून वन अनुसंधान संस्थान में हेड क्लर्क
2 लेखन 
3 पत्रकारिता - जापान में न्यू एशिया अखबार का प्रकाशन
4 जापान में अंग्रेजी अध्यापन
5 टोक्यो में होटल संचालन (जहां क्रातिकारी गतिविधियों का संचालन)
6 लेखन - 13 पुस्तकें प्रकाशित जिनमें 1937 में लिखी The victory of young indiya महत्वपूर्ण है।
प्रमुख संगठन एवं आंदोलन -
1 जुगांतर (क्रान्तिकारी जतिन मुखर्जी की अगुआई वाले युगान्तर नामक क्रान्तिकारी संगठन के अमरेन्द्र चटर्जी से परिचय हुआ और वह बंगाल के क्रान्तिकारियों के साथ जुड़ गये।)
2 वर्ष1905 बंग - भंग के समय वे क्रान्तिकारी गतिविधियों में सम्मिलित।
3 फरवरी, 1915 में 1857 जैसा विद्रोह करने की योजना लेकिन पुलिस को योजना का पता चल गया और योजना असफल।
4 28 मार्च 1942 में इंडियन इंडिपेंडेंस लीग की स्थापना,जापान
5 वर्ष 1942 के 01 सितंबर को इंडियन नेशनल आर्मी (INA) की जापान में स्थापना जो बाद में सुभाष चंद्र बोस द्वारा आजाद हिंद फौज के रूप में पुनर्गठित की गई। (21 अक्टूबर 1943 में सुभाषचन्द्र बोस ने आजाद हिन्द फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से सिंगापुर में स्वतंत्र भारत की अस्थायी आज़ाद हिन्द सरकार की स्थापना की।)
4 हिंदू महासभा,जापान
5 आर्य समाज कार्यकर्ता - (अरबिंदो घोष के राजनीतिक शिष्य रहे यतीन्द्रनाथ बनर्जी उर्फ निरालम्ब स्वामी के सम्पर्क में आने पर संयुक्त प्रान्त, (वर्तमान उत्तर प्रदेश) और पंजाब के प्रमुख आर्य समाजी क्रान्तिकारियों से निकटता)
                   आजाद हिंद फ़ौज

सम्मान -
बोस के निधन से कुछ समय पहले जापान सरकार ने आर्डर ऑफ द राइजिंग सन के सम्मान से अलंकृत भी किया था।

घटनाक्रम - 
दिल्ली में जार्ज पंचम के 12 दिसंबर 1911 को होने वाले दिल्ली दरबार के बाद जब वायसराय लॉर्ड हार्डिंग की दिल्ली में शोभायात्रा में वायसराय लार्ड हार्डिंग पर बम फेंकने की योजना बनाने में रासबिहारी की प्रमुख भूमिका रही थी।

                   बम धमाके का चित्रण
अमरेन्द्र चटर्जी के एक शिष्य बसन्त कुमार विश्वास ने उन पर बम फेंका लेकिन निशाना चूक गया। वो ब्रिटिश पुलिस से बचने हेतु दिल्ली से रा ईटीतों-रात रेल गाड़ी से देहरादून आ कर आफिस में इस तरह काम करने लगे मानो कुछ हुआ ही नहीं हो। 
अगले दिन उन्होंने देहरादून में हमले की निंदा हेतु सभा बुलाई।
1913 में बंगाल में बाढ़ राहत कार्य के दौरान रासबिहारी बोस जतिन मुखर्जी के सम्पर्क में आये, जिन्होंने उनमें नया जोश भरने का काम किया। रासबिहारी बोस इसके बाद दोगुने उत्साह के साथ फिर से क्रान्तिकारी गतिविधियों के संचालन में जुट गये।  स्वतन्त्रता के लिये प्रथम विश्व युद्ध के दौरान गदर की योजना बनाई। फरवरी 1915 में भरोसेमंद क्रान्तिकारियों की ब्रिटिश सेना में भर्ती कराने की कोशिश की।

जापान यात्रा एवं नागरिकता -
1915 में पैन-एशियाईवादी नेता मित्सुरु तोयामा 
 एवं त्सुयोशी इनुमाई के साथ रात्रि-भोज में बोस 

युगान्तर के कई नेताओं ने सोचा कि यूरोप में युद्ध होने के कारण अधिकतर सैनिक देश से बाहर गये हुये हैं, अत: शेष बचे सैनिकों को आसानी से हराया जा सकता है लेकिन दुर्भाग्य से उनका यह प्रयास असफल रहा और कई क्रान्तिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। ब्रिटिश खुफिया पुलिस ने रासबिहारी बोस को पकड़ने की कोशिश की। 12 मई 1915 को राजा प्रियनाथ टैगोर (छद्म नाम) से शंघाई, जापान पहुँचे और आजादी के लिये काम करने लगे।
               क्रांतिकारी साथियों के साथ
ब्रिटिश सरकार ने जापान सरकार से उनके प्रत्यर्पण की माँग की इसलिए 1915 से 1918 तक लगभग 17 बार पहचान और आवास बदले। 
28 मार्च 1942 को टोक्यो में एक सम्मेलन बुलाया जिसमें 'इंडियन इंडीपेंडेंस लीग' की स्थापना का निर्णय किया गया। इस सम्मेलन में उन्होंने भारत की आजादी के लिए एक सेना बनाने का प्रस्ताव भी पेश किया।
22 जून 1942 को बैंकाक में लीग का दूसरा सम्मेलन हुआ जिसमें सुभाष चंद्र बोस को लीग में शामिल होने और उसका अध्यक्ष बनने के लिए आमन्त्रित करने का प्रस्ताव पारित किया गया। जापान ने मलय और बर्मा के मोर्चे पर कई भारतीय युद्धबन्दियों को पकड़ा था। इन युद्ध बन्दियों को इण्डियन इण्डिपेण्डेंस लीग में शामिल होने और इंडियन नेशनल आर्मी (आई.एन.ए.) का सैनिक बनने के लिये प्रोत्साहित किया गया। आई.एन.ए. इण्डियन नेशनल लीग की सैन्य शाखा के रूप में सितम्बर 1942 में स्थापित की गई और आजाद नाम से एक ध्वज बनाया गया। 
जापानी अधिकारियों से अनबन के कारण जापान सेना ने रास बिहारी बोस व जनरल मोहन सिंह को आई.एन.ए. के नेतृत्व से हटा दिया परंतु आई.एन.ए. का संगठनात्मक ढाँचा बना रहा।
बाद में सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिन्द फौज के नाम से आई.एन.ए. का पुनर्गठन किया।
बोस का क्षय रोग से निधन हो गया और टोक्यो में ही अंतिम संस्कार हुआ।


शमशेर भालू खां
जिगर चुरूवी
9587243963

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