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भाषा और बोलियां

भारत में भाषा एवं बोलियां 
भाषा - 

राजस्थान में भाषाएं - 
राजस्थान में राजस्थानी पढ़ाने की कितनी व्यवस्था है? यह हम जानते हैं। इसी लिए उसका धीरे धीरे लोप होता जा रहा है।

उत्तर भारत के हिन्दी भाषी राज्यों में तृतीय भाषा के रूप में संस्कृत और उर्दू को पढ़ाने की व्यवस्था है, उर्दू की भी बहुत से स्कूलों में नहीं है। लेकिन अन्य किसी भारतीय भाषा को पढ़ाने की व्यवस्था बिरले ही मिलेगी। यदि मेरे बच्चे किसी दक्षिण भारतीय भाषा तमिल, तेलगू या तमिल चुनते या फिर गुजराती, मराठी, बंगाली, असमी आदि को चुनते तो उन्हें पढ़ाने की कोई व्यवस्था इधर राजस्थान में नहीं दिखायी देती। स्टालिन ने सही कहा कि हिन्दी और संस्कृत पर सरकारों का जोर होने के कारण भारतीय भाषाएँ नष्ट हो रही हैं। गैर हिन्दी भाषी प्रदेशों में भी लोग हिन्दी को तीसरी भाषा के रूप में चुनते हैं और अन्य भाषाएँ पिछड़ती चली जाती हैं। स्टालिन के बयान को सियासी कहा जा सकता है लेकिन उसने बोला तो सच ही है। सियासत होती ही इसलिए है कि मुद्दों को उठाया जाए और सत्ता हासिल होने के बाद उस पर कुछ काम करके दिखाया जाए। 

असल में राजस्थान में राजस्थानी भाषा का प्रश्न केवल राजस्थान का नहीं है, बल्कि यह तमाम भारतीय भाषाओं को जीवित रखने का प्रश्न भी है। इसलिए राजस्थानी के प्रश्न को भी भारतीय भाषाओं के प्रश्न के रूप में देखना होगा। मायड़ भाषा दिवस पर फेसबुक पर पोस्टें ठेल देने से तो कुछ नहीं होने का।

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