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Showing posts from April, 2025

✅भारत - पाकिस्तान सिंधु समझौता एक तर्क

प्यासा मरेगा पाकिस्तान:- पहलगाम आतंकवादी घटना के बाद प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में पाकिस्तान के विरुद्ध 5 महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। यद्यपि इनका कानूनी अधिकार क्या है और पहलगाम आतंकवादी हमले में पाकिस्तान का हाथ हो इसके क्या सबूत हैं ? यह देश की जनता को नहीं पता, ऐसा संभव है कि सरकार के पास सारे तथ्य और सबूत हों। वैसे भी इस दर्दनाक आतंकवादी हमले को पाकिस्तान ने कराया हो इसको लेकर नकारा नहीं जा सकता। इस मामले में मैं अपनी देश की सरकार के साथ हूं। भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ जो त्वरित कार्रवाई की है उनमें सबसे महत्वपूर्ण है सिंधु नदी जल संधि का स्थगन। इन बातों का जनता पर प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि पाकिस्तान से आना जाना वैसे ही बंद है तो पाकिस्तानी दूतावास खुले या बंद रहे क्या फर्क पड़ता है? अटारी बार्डर खुले या बंद हो क्या फर्क पड़ता है ? सारे पाकिस्तानियों का विज़ा रद्द नहीं किया गया इससे क्या फर्क पड़ता है ?  कोई फर्क नहीं पड़ता....बात सिंधु जल समझौते की -  वर्ष 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी जल बंटवारे हेत...

✅बलियाली हरियाणा की लाल सड़क

कहानी बलियाली -  कहानी बलियाली (हिसार - हरयाणा) के दाना राँघड़ और उमदा राँघड़ की, जिन्होंने अंग्रेज़ डिप्टी कलेक्टर बेडर्नबर्न की कोर्ट रूम में गोली मारकर हत्या कर दी थी।  यूँ तो देश की आज़ादी में मुस्लिम राजपूतों का अतुल्य योगदान रहा है। इसी कड़ी में आज हम बात करते हैं, हरयाणा हिसार के बलियाली गांव के मुस्लिम राजपूतों की।  मई 1857 को उमदा राँघड़ और दाना राँघड़ ने बलियाली के मुस्लिम राजपूतों के साथ मिलकर हिसार की हाँसी तहसील पर हमला बोल दिया। हरयाणा में अंग्रेजी शासन के खिलाफ़ उठने वाली सबसे मुखर आवाज़ मुस्लिम राजपूतों की थी।  कहा जाता है कि हांसी की एक सड़क, राँघड़ रणबांकुरों ने अंग्रेजो के खिलाफ़ लड़ते हुए खून से लाल कर दी थी। जिसे आज भी लाल सड़क के नाम से जाना जाता है।  तहसील कब्ज़ाने और अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ गदर करने के इलज़ाम में अंग्रेज़ी हुकूमत ने राँघड़ क्रांतिकारियों को काला पानी की सज़ा सुनाते हुए अंडमान भेज दिया। बलियाली गांव के जिन राँघड़ क्रांतिकारियो को सज़ा हुई उनके नाम इस प्रकार हैं।  1. लम्बरदार बस्सू के पुत्र पीर बख्श राँघड...

✅जलियांवाला बाग हत्याकांड

जलियांवाला बाग़ की कहानी - भारत में  स्वतंत्रता आंदोलन को दबाने के लिए अंग्रेज़ी सरकार एनार्कीअल एंड रेवोल्यूशनरी क्राइम्स (रौलेट एक्ट) लेकर आई जो ब्रिटिश न्यायधीश सिडनी रौलेट के नाम पर जाना जाता है। यह कानून आज के UAPA कानून जैसा था जिसमें बिना मुकदमा चलाए गिरफ्तारी की जा सकती थी। इसके विरुद्ध पंजाब में और ख़ास कर अमृतसर में विरोध शुरू हुआ। गांधीजी ने 30 मार्च 1919 को राष्ट्रव्यापी हड़ताल की घोषणा कर दी, जो तैयारी की कमी के कारण अगले रविवार 6 अप्रैल तक स्थगित कर दी गई। अमृतसर में कांग्रेस नेता एडवोकेट सैफुद्दीन किचलू और डाक्टर सत्यपाल के नेतृत्व में 30 मार्च को के दिन हड़ताल हो गई। अमृतसर के लोगों को छह अप्रैल की मीटिंग की सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी नहीं दी गई। अंग्रेजों ने स्वामिभक्त रायबहादुरों को तलब कर किसी भी तरह की प्रदर्शन ना होने देने का आदेश दिया।  05 अप्रैल के दिन सत्यपाल ने प्रस्तावित सभा स्थल में चल रहे क्रिकेट मैच को रुकवाने हेतु अपने घर में करीब दो सौ लोगों की सभा कर अगले दिन हड़ताल की घोषणा कर दी। हड़ताल की सूचना एक से दुसरे नागरिक तक पहुँचती गई और 0...

✅झज्जर के शहीद

1857 की क्रांति में झज्जर के शहीद -           झज्जर का युद्ध स्थल  झज्जर की स्थापना -  झज्जर की स्थापना छज्जु नामक किसान ने की जिसके कारण पहले इसका नाम छज्जु नगर था, बाद में यहां की मशहूर (झझरी) सुराही के कारण इसका नाम झज्जर पड़ा। झज्जर का इतिहास -  झज्जर के दो मुख्य शहर बहादुरगढ़ और बेरी है। बहादुरगढ़ की स्थापना राठी जाटों ने की थी। पहले बहादुरगढ़ को सर्राफाबाद के नाम से जाना जाता था। पिछले दिनों बहादुरगढ़ का तेजी से औद्योगिकरण हुआ है। बेरी इसका दूसरा मुख्य शहर है। यहां भीमेश्वरी देवी का प्रसिद्ध मन्दिर है। इस मन्दिर में पूजा करने के लिए देश-विदेश से पर्यटक प्रतिवर्ष आते हैं। मन्दिरों के अलावा पर्यटक यहां पर भिंडावास पक्षी अभ्यारण भी है। झज्जर का गुरुकुल संग्रहालय -  यह हरियाणा के सबसे बड़े संग्रहालय का निर्माण 1959 ई.में स्वामी ओमानंद सरस्वती ने किया था। इसमें विश्व की प्राचीन वस्तुएं संग्रहित की हैं जो झज्जर की प्रसिद्धि का एक कारण है। देश-विदेश के शोधार्थी यहाँ आते रहते हैं जो यहां पर रोम, यूनान, गुप्त, पाल, चोल, गुजर, प्...