Skip to main content

✅बलियाली हरियाणा की लाल सड़क

कहानी बलियाली - 
कहानी बलियाली (हिसार - हरयाणा) के दाना राँघड़ और उमदा राँघड़ की, जिन्होंने अंग्रेज़ डिप्टी कलेक्टर बेडर्नबर्न की कोर्ट रूम में गोली मारकर हत्या कर दी थी। 
यूँ तो देश की आज़ादी में मुस्लिम राजपूतों का अतुल्य योगदान रहा है। इसी कड़ी में आज हम बात करते हैं, हरयाणा हिसार के बलियाली गांव के मुस्लिम राजपूतों की। 
मई 1857 को उमदा राँघड़ और दाना राँघड़ ने बलियाली के मुस्लिम राजपूतों के साथ मिलकर हिसार की हाँसी तहसील पर हमला बोल दिया। हरयाणा में अंग्रेजी शासन के खिलाफ़ उठने वाली सबसे मुखर आवाज़ मुस्लिम राजपूतों की थी। 
कहा जाता है कि हांसी की एक सड़क, राँघड़ रणबांकुरों ने अंग्रेजो के खिलाफ़ लड़ते हुए खून से लाल कर दी थी। जिसे आज भी लाल सड़क के नाम से जाना जाता है। 
तहसील कब्ज़ाने और अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ गदर करने के इलज़ाम में अंग्रेज़ी हुकूमत ने राँघड़ क्रांतिकारियों को काला पानी की सज़ा सुनाते हुए अंडमान भेज दिया। बलियाली गांव के जिन राँघड़ क्रांतिकारियो को सज़ा हुई उनके नाम इस प्रकार हैं। 
1. लम्बरदार बस्सू के पुत्र पीर बख्श राँघड़
2. सुक्कू (सक्कू) उर्फ लक्खू खान राँघड़, लंबरदार सराकू का पुत्र। 
3. सुन्दुल (चंदन) खान राँघड़ (1), लम्बरदार हमीद (हामिद) का पुत्र। 
4. मुखुन (मक्खन) उर्फ मुकीम खान राँघड़, लम्बरदार शुकरूल्लाह (शकरुल्लाह) का पुत्र
5. शहजाद खान राँघड़, लंबरदार धौंकल का पुत्र।
6. दुर्गाबी (दरघाबी) खान राँघड़, लंबरदार लाहरू का पुत्र
7. होशदार खान राँघड़, लम्बरदार रहेले खान के पुत्र।
8. चीना राजपूत, लम्बरदार ओड (उदली) का पुत्र,
9. रुस्तम राँघड़, लम्बरदार खैरू का पुत्र।
10. सुन्दुल (चंदन) खान राँघड़ (द्वितीय), लम्बरदार चीना का पुत्र।
स्त्रोत - Gallant Haryana 1857
शमशेर भालू खां 
जिगर चुरूवी 
9587243963

Comments

Popular posts from this blog

15. झाड़ी के फूल - जिगर के दोहे भाग -1

शायर का ताअरूफ -  नाम - शमशेर खान  उपनाम - प्रेम, शमशेर गांधी तखल्लुस - पहले परवाना नाम से लिखना शुरू किया। पत्नी अख्तर बानो (सदफ) के सुझाव पर जिगर चूरूवी नाम से लिखना शुरू किया। पैदाइश - 18.04.1978 सहजूसर, चूरू (राजस्थान) पिता का नाम - श्री भालू खां (पूर्व विधायक (1980 से 1985), चूरू। माता का नाम - सलामन बानो (गृहणी) ताअलिम -  1. रामावि सहजूसर में पहली कक्षा में दाखिला 10.07.1984 से 1993 में मेट्रिक तक। 2. राउमावि बागला, चूरू से हेयर सेकंडरी 1993 से 1995 तक 3. राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण विद्यालय भाषाई अल्पसंख्यक अजमेर से BSTC, 1995 से 1997 4. राजकीय लोहिया महाविद्यालय चूरू से स्वयंपाठी के रूप में स्नातक 1998 से 2001 तक (महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, अजमेर) 5. राजकीय लोहिया महाविद्यालय चूरू से स्वयंपाठी के रूप में अधिस्नातक 2004 से 2005 तक (महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय बीकानेर से गोल्ड मेडलिस्ट - 2005 उर्दू साहित्य) 6. कश्मीर विश्वविद्याल, श्रीनगर के नंद ऋषि शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय से B.Ed.- (2007 - 8) 7. इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय से विशेष आवश्यकता विद्यार्...

पेपर 1.3 संविदा विधि

संबिदा विधि-1 पेपर प्रथम सेमेस्टर 3 डॉक्टर भीमराव अंबेडकर लॉ विश्वविद्यालय, जयपुर       पाठ्यक्रम प्रश्न पत्र 1.3               संविदा कानून-I UNIT-I Definition and Classification of Contracts इकाई-I: अनुबंध की परिभाषा और वर्गीकरण -  1.1 अनुबंध का अर्थ, तत्व और विशेषताएं 1.2 अनुबंध का गठन और वर्गीकरण -  विलेख और साधारण अनुबंध, औपचारिक लिखित दस्तावेज और सामान्य मौखिक या लिखित समझौते, द्विपक्षीय और एक पक्षीय अनुबंध, व्यक्त और निहित अनुबंध,  वैध, शून्य, शून्यकरणीय और अवैध अनुबंध, निष्पादित और निष्पादनीय अनुबंध। 1.3 प्रस्ताव और प्रस्ताव के लिए आमंत्रण,  प्रस्ताव का संवहन और प्रतिसंहरण, प्रस्ताव की सूचना देना और उसे वापस लेना। 1.4   प्रस्ताव की स्वीकृति, स्वीकृति का संवहन और प्रतिसंहरण 1.5 मानक प्रपत्र अनुबंध और ई-अनुबंध इकाई II प्रतिफल (Consideration) 2.1 . प्रतिफल - प्रतिफल का अर्थ, परिभाषा और तत्व; प्रतिफल का महत्व और पर्याप्तता; अनुबंध का संबंध, प्रतिफल के प्रकार और अपवाद। 2.2 . अन...

महाराज पृथ्वीराज चौहान की वंशावली

चौहान वंश के महान सम्राट पृथ्वीराज चौहान को अन्य जातियों द्वारा उनके वंशज होने का अनेक क्षेत्रों में विवाद पैदा कर रहे है। अतः पृथ्वीराज चौहान की वंशावलि राजस्थान के महान लेखक इतिहासकार संत श्री कान्हाराम की पुस्तक पेज संख्या 76,77,78 व दशरथ शर्मा की पुस्तक Early Chauhan Dynasties", pp.109 का संदर्भ लिया गया है। संत श्री कान्हाराम[4] ने लिखा है कि.... [पृष्ठ-76]: ईसा की दसवीं सदी में प्रतिहारों के कमजोर पड़ने पर प्राचीन क्षत्रिय नागवंश की चौहान शाखा शक्तिशाली बनकर उभरी। अहिच्छत्रपुर (नागौर) तथा शाकंभरी (सांभर) चौहनों के मुख्य स्थान थे। चौहनों ने 200 वर्ष तक अरबों, तुर्कों, गौरी, गजनवी को भारत में नहीं घुसने दिया। चौहनों की ददरेवा (चुरू) शाखा के शासक जीवराज चौहान के पुत्र गोगा ने नवीं सदी के अंत में महमूद गजनवी की फौजों के छक्के छुड़ा दिये थे। गोगा का युद्ध कौशल देखकर महमूद गजनवी के मुंह से सहसा निकल पड़ा कि यह तो जाहरपीर (अचानक गायब और प्रकट होने वाला) है। महमूद गजनवी की फौजें समाप्त हुई और उसको उल्टे पैर लौटना पड़ा। दुर्भाग्यवश गोगा का बलिदान हो गया। गोगाजी के बलिदान दिवस भाद्रपद...

👤 शमशेर भालू खान

📍 कायमखानी बस्ती सहजुसर ,चूरू राजस्थान Pin :-331001

💬 Chat on WhatsApp

© 2026 ShamsherBhaluKhan.com | Designed & Managed by Shamsherbhalukhan