भारतीय न्याय तंत्र (Indian Judicial System) - वर्तमान भारतीय न्याय तंत्र विश्व के सबसे बड़ी और सबसे पुरानी एकीकृत और श्रेणीबद्ध न्याय प्रणालियों में से एक है। जिसमें शीर्ष अदालत द्वारा दिया गया निर्णय निचली सभी अदालतों पर बाध्यकारी होता है। प्राचीन भारत में न्याय की अवधारणा कानून के स्थान धर्म के सिद्धांत पर आधारित थी। तब न्याय का अर्थ था व्यवस्था को बनाए रखने हेतु राजा और रंक द्वारा कर्तव्यों का पालन करना। प्राचीन भारतीय न्याय प्रणाली की विशेषताएं और संस्थाएं - 1.धर्म - यहां धर्म संकीर्ण अर्थ में नहीं व्यापक अर्थ में काम करता है। धर्म का अर्थ संप्रदाय नहीं, बल्कि नैतिक कर्तव्य और सामाजिक व्यवस्था था। संस्कृत में धर्म शब्द का अर्थ एवं परिभाषा - धृति क्षमा दमोस्त्यं सोचमिंद्रियनीग्रह धीर विद्या सत्यं अक्रोध दसकं धर्म लक्षणं। एक अन्य सूत्र - यतो धर्मस्ततो जय अर्थात जहाँ धर्म है, वहीं विजय है। न्याय का मुख्य उद्देश्य धर्म की स्थापना करना था। राजा का कर्तव्य (राजधर्म) - राजा को धर्म का रक्षक माना जाता था। यदि राजा न्याय नहीं क...