अस्मिता की जंग - बात दूसरे विश्व युद्ध की है।। जापान, तुर्की, इटली और जर्मनी के सैनिक और मित्र राष्ट्रों की सेना के सिपाही लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे थे। लड़ाई को महीने बीत चुके थे, फौजी थकान और सहवास की तीव्र इच्छा के कारण निढाल हुए जा रहे थे। जापान ताकतवर था। उसके लाखों सैनिक जंग लड़ रहे थे। राशन और गोला-बारूद तो उनके पास थे, लेकिन शरीर की जरूरत के लिए लड़कियां नहीं थीं। कमांडरों ने सरकारों को इस संबंध में सूचित कर दिया। समस्या विकट होती जा रही थी जिसका समाधान फौजियों को बिना छुट्टी दिए किया जाना ही संभव था।सभी देशों में सैनिकों की संख्या लगातार घटती जा रही है और जो जिंदा थे वो थकान से निढाल। फ्रांस, ब्रिटेन, ऑस्ट्रिया और मित्र राष्ट्रों ने इस हेतु प्रोफेशनल सेक्स वर्कर और गुलाम (उपनिवेश) देशों से अपहृत लड़कियों को सेना के सामने परोसा गया। जर्मनी ने रूस और दूसरे देशों से पकड़ी गई युवतियों को नोचने के लिए भूखे भेड़िए की तरह व्यवहार करने वाले सैनिकों के सामने चारे के रूप में फेंक दिया। जापान में इसी तरह से नौची गई एक स्त्री की कहानी झकझोरने वाली है। फिलीपींस की सड...