Skip to main content

सरकार योजना व जागरूकता

काम सरकार व जागरूकता

                       बात भाजपा शासन काल की है। मेरे मित्र दयानन्द गढ़वाल तत्कालीन अल्पसंख्यक कल्याण विभाग चूरु में कार्यक्रम अधिकारी थे ने बताया भारत सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रम के अंर्तगत अल्पसंख्यक बहुल ब्लाक में शिक्षा,चिकित्सा व आधारभूत सुविधाऐं विकसित करने हेतु राशि का आवंटन किया जाता है,परन्तु इस हेतु कुछ फॉर्मेलिटीज हैं जो करनी होंगी।
उस समय में कार्यालय जिला परियोजना समन्वयक में कार्यक्रम सहायक के पद पर कार्यरत था।
इस हेतु Zakir Khan  तत्कालीन अल्पसंख्यक जिला अध्यक्ष भाजपा च को शहरी क्षेत्र व जंगशेर खान  पिथिसर तत्कालीन सरपँच को ग्रामीण क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई।
शेष ब्लॉक की जिम्मेदारी मेने स्वयं संभाली जिस का कुछ ही दिनों बाद नतीजा मिल गया।
रिपोर्ट तैयार हो गई जिस के अनुसार सुजानगढ़, सरदारशहर व चूरू ब्लॉक विभागीय शर्तों को पूरी करते थे का प्रस्ताव बना कर भिजवा दिया गया । अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय द्वारा भेजे गये प्रस्ताव को भारत सरकार ने स्वीकार किया और चूरू जिले के
1) सुजानगढ़
2)सरदारशहर
3)चूरू
को अल्पसंख्यक ब्लॉक घोषित कर दिया गया जिस का श्रेय उस समय बहुत से लोगों ने लेने का प्रयास किया था।
इस योजना के अंतर्गत
बागला,पारख व कई विद्यालयों का पुनरुथान हुआ।
कई विद्यालयों के प्रस्ताव एक-एक स्कूल जा कर हम ने तैयार करवाये थे जिस में सुजानगढ़ से dr. gaffar खान , Shakil G. Ahmed ,  shakir khan तत्कालीन RP सुजानगढ़, Rasid khan, तारीफ बल्लू खान तत्कालीन RP सरदारशहर, प्रताप सिंह नाथावत,krishn kumar Krishna Kant Grover तत्कालीन RP चूरू व Bajaranglal saini, Ashok Shekhawat  चूरू का अविष्मरणीय योगदान रहा।
पारख, बागला व अन्य विद्यालयों का श्रेय भी बहुत से लोगों ने लेने का प्रयास किया परन्तु सत्य अपने स्थान पर अडिग है।
आगामी बात यह है इन ब्लॉक में विद्यालय विकास के बाद चिकित्सा व आधारभूत विकास के कार्य होंगे जिसे कोई मंत्री, सन्तरी,नेता या अधिकारी नहीं रोक सकता ।
इतना लिखने का मक़सद-: सरकार किसी की भी हो जागरूकता से आप योजनाओं के माध्यम से कार्य करवा सकते हैं। जागरूक बनिये आगे बढ़िए।

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

बासनपीर मामले की हकीकत

इस ब्लॉग और मेरी अन्य व्यक्ति से हुई बातचीत पर मंहत प्रतापपुरी का बयान जीवनपाल सिंह भाटी की आवाज में सत्य घटना सद्भावना रैली बासनपीर जूनी पूर्व मंत्री सालेह मुहम्मद का बयान बासनपीर जूनी के सत्य एवं जैसाने की अपनायत की पड़ताल -  पिछले कुछ दिनों से जैसलमेर के बासन पीर इलाके का मामला सामने रहा है। कहा जा रहा है कि पूर्व राज परिवार की जमीन पर बासनपीर गांव के लोगों द्वारा कब्जा किया जा रहा है। नजदीक से पड़ताल करने पर हकीकत कुछ ओर निकली। जिसके कुछ तथ्य निम्नानुसार हैं - रियासत काल में सन 1662 में बीकानेर और जैसलमेर रियासत के बीच युद्ध हुआ। इस युद्ध में जैसलमेर सेना के दो वीर योद्धा सोढ़ा जी और पालीवाल जी शहीद हो गए। युद्ध के बाद बासन पीर (युद्ध स्थल) तालाब की तलहटी पर शहीदों की स्मृति में छतरियां बनवाई हैं। जैसलमेर के चारों और 120 किलोमीटर इलाके में 84 गांव पालीवाल ब्राह्मणों ने बसाए जिनमें से एक गांव बासनपीर जूनी भी था। पालीवाल ब्राह्मण समृद्ध किसान और व्यापारी थे, रियासत के दीवान सालिम सिंह से अनबन के कारण सन् 1825 में सभी गांव खाली करने को मजबूर हो गए। पालीवाल...

✍️कायम वंश और कायमखानी सिलसिला सामान्य इतिहास की टूटी कड़ियाँ

कायमखानी समाज कुछ कही कुछ अनकही👇 - शमशेर भालू खां  अनुक्रमणिका -  01. राजपूत समाज एवं चौहान वंश सामान्य परिचय 02. कायम वंश और कायमखानी 03. कायमखानी कौन एक बहस 04. पुस्तक समीक्षा - कायम रासो  05. कायम वंश गोत्र एवं रियासतें 06. चायल वंश रियासतें एवं गोत्र 07. जोईया वंश स्थापना एवं इतिहास 08. मोयल वंश का इतिहास 09. खोखर वंश का परिचय 10. टाक वंश का इतिहास एवं परिचय  11. नारू वंश का इतिहास 12 जाटू तंवर वंश का इतिहास 13. 14.भाटी वंश का इतिहास 15 सरखेल वंश का इतिहास  16. सर्वा वंश का इतिहास 17. बेहलीम वंश का इतिहास  18. चावड़ा वंश का इतिहास 19. राठौड़ वंश का इतिहास  20. चौहान वंश का इतिहास  21. कायमखानी समाज वर्तमान स्थिति 22. आभार, संदर्भ एवं स्त्रोत कायम वंश और कायमखानी समाज टूटी हुई कड़ियां दादा नवाब (वली अल्लाह) हजरत कायम खां  साहब   नारनौल का कायमखानीयों का महल     नारनौल में कायमखानियों का किला मकबरा नवाब कायम खा साहब हांसी,हरियाणा   ...

✅इस्लाम धर्म में व्यापार, ब्याज एवं मुनाफा

अरब व्यापारी हर देश में हर देश का हर एक सामान खरीदते और बेचते थे। अरब में व्यापार -  किसी भी क्षेत्र में सभी सामान उपलब्ध नहीं हो सकते। हर क्षेत्र का किसी ना किसी सामान के उत्पादन में विशेष स्थान होता है। उपलब्ध सामग्री का उत्पादन, भंडारण, परिवहन एवं विपणन ही व्यापार कहलाता है। क्षेत्र अनुसार इसके अलग - अलग नाम हो सकते हैं। इस्लाम धर्म का उदय अरब में हुआ। अरब क्षेत्र में तीन प्रकार की जनजातियां रहती थीं। बायदा - यमनी  अराबा - कहतानू (मिस्र) मुस्ता अराबा - अरबी (इस्माइली) यह जनजातियां खेती, व्यापार एवं अन्य कार्य करती थीं। हजारों सालों से इनका व्यापार रोम, चीन एवं अफ्रीका के देशों से रहा। अरब व्यापारी पश्चिम में अटलांटिक महासागर से लेकर पूर्व में अरब सागर तक, अरब प्रायद्वीप तक व्यापार करते थे। अरब नील से ह्यांग्हो तक व्यापार करते थे। अरब प्रायद्वीप कई व्यापार मार्गों के केंद्र में स्थित था, जिसमें दक्षिण पूर्व एशिया, भूमध्य सागर और मिस्र शामिल थे। यहां मुख्य सभ्यताएं रहीं -  - सुमेरियन एवं बेबीलोन  सभ्यता (मेसोपोटामिया/इराक) (दजला फरात) की सभ्यता। - फ...