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भारतीय ध्वज संहिता 2002


स्वतन्त्र एवं संप्रभु राष्ट्र का स्वयं एक ध्‍वज होता है। आजादी से पहले यूनियन जैक ही भारत का ध्वज था।राष्‍ट्रीय ध्‍वज को इसके वर्तमान स्‍वरूप में 22 जुलाई 1947 को आयोजित भारतीय संविधान सभा की बैठक में अपनाया गया।। इसे 15 अगस्‍त 1947 और 26 जनवरी 1950 के बीच भारत के राष्‍ट्रीय ध्‍वज के रूप में अपनाया गया। भारत में तिरंगे का अर्थ भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज है।

ध्वज
अधिकृत भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज में तीन रंग की तीन समान लंबाई - चौड़ाई में परस्पर सिली हुई क्षैतिज पट्टियां हैं। सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद ओर नीचे गहरे हरे रंग की प‍ट्टी 1:2 के समानुपात में हैं। ध्‍वज की चौड़ाई का  सफेद पट्टी के मध्‍य में गहरे नीले रंग का सारनाथ के शेर के स्तंभ से लिया गया चौबीस तिलियों वाला नीले रंग सफेद पट्टी के लगभग बराबर का (पहले 1921 के नीले रंग के चरखे के स्थान पर) बौद्ध धर्म का अशोक चक्र है। झंडे बनाने का मानक 1968 में तय किया गया जिसे 2008 में पुन: संशोधित किया गया।
राष्ट्रीय झंडा एक विशेष प्रकार से हाथ से काते गए कपड़े से बनता है जो महात्मा गांधी द्वारा लोकप्रिय बनाया गया। केवल खादी या हाथ से काता गया कपड़ा ही झंडा बनाने के लिए उपयोग में लिया जाता है। कपड़ा बुनने से लेकर झंडा बनने तक की प्रक्रिया में कई बार टेस्टिंग की जाती है। झंडा बनाने के लिए दो तरह की खादी का प्रयोग किया जाता है। एक वह खादी जिससे कपड़ा बनता है और दूसरा खादी-टाट। खादी के केवल कपास, रेशम और ऊन का प्रयोग किया जाता है। यहाँ तक कि इसकी बुनाई भी सामान्य बुनाई से भिन्न होती है जो दुर्लभ है। धारवाण के निकट गदग और कर्नाटक के बागलकोट में ही खादी की बुनाई की जाती है। जबकी हुबली एक मात्र लाइसेंस प्राप्त संस्थान है जहाँ से झंडा उत्पादन व आपूर्ति की जाती है। बुनाई से लेकर बाजार में पहुँचने तक कई बार भारतीय मानक ब्यूरो की प्रयोगशालाओं में इसका परीक्षण होता है। कड़े गुणवत्ता परीक्षण के बाद उसे वापस कारखाने भेज दिया जाता है जिसके बाद उसे तीन रंगो में रंगा जाता है। केंद्र में अशोक चक्र को काढ़ा जाता है। उसके बाद इसे फिर परीक्षण के लिए भेजा जाता है।

बैंकया पिंगली द्वारा संकल्पित 1921 में अपनाया गया ध्वज
     22.07.1947 को अपनाया गया भारत का राष्ट्रीय ध्वज 

राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास - 

भारत की प्रत्येक रियासत या रजवाड़े का अपना - अपना ध्वज था। 

01. प्रथम राष्ट्रीय ध्वज 
पहले झंडे में - 
आठ कमल के फूल - ब्रिटिश भारत के आठ प्रांत
हरा रंग व चांद - मुस्लिम संस्कृति
लाल रंग और सूर्य - सनातन संस्कृति 
पीला रंग - बौद्ध संस्कृति
राष्ट्रीय वाक्य - वन्देमातरम 
तारीख: 7 अगस्त 1906 को कलकत्ता के पारसी बागान चौक (ग्रीन पार्क) में बंगाल विभाजन के विरोध में बॉयकाट दिवस मनाने हेतु हजारों लोग इकट्ठे हुए। इस प्रदर्शन में पहली बार स्वतंत्रता सेनानी सुरेंद्र नाथ बनर्जी ने स्वतंत्रता सेनानी सचिंद्र प्रसाद बोस और हेमचंद्र कानूनगो द्वारा बनाया गया एक झंडा फहराया, जिसे भारत का पहला नेशनल फ्लैग कहा जाता है।

02. दूसरे ध्वज में - 
22 अगस्त 1907 में मैडम कामा और उनके साथियों ने जर्मनी में भारत का झंडा फहराया था। इसे बर्लिन कमेटी फ्लैग कहा गया। इस झंडे में भी तीन रंगों का इस्तेमाल किया गया था। सबसे ऊपर नारंगी, बीच में पीले और आखिर में हरे रंग की पट्टियां थीं। नारंगी रंग की पट्टी में 8 सितारे बने हुए थे। वहीं बीच वाली पीले रंग की पट्टी में वंदे मातरम लिखा था। सबसे नीचे की हरी पट्टी में एक सूरज और चांद के ऊपर सितारे की तस्वीर बनी हुई थी।
03. तीसरा ध्वज - 

1916 में बाल गंगाधर तिलक के बनाए राजनीतिक संगठन 'होम रूल' ने एक झंडा बनाया। कांग्रेस अंग्रेजों से डोमिनियन स्टेट की मांग कर रही थी अर्थात् स्वतंत्र भारत अंग्रेजी सम्राज्य के कानून से चले। इस झंडे में सबसे ऊपर अंग्रेजों का झंडा यूनियन जैक था। इसके अलावा पांच लाल और चार हरे रंग की पट्टियां थीं। इसमें सात तारे भी थे। ये तारे सप्तऋषि को दर्शाते थे। इस पर आधा चांद और उसके ऊपर तारा भी बना हुआ था।


04. चतुर्थ ध्वज -

बाकी देशों की तरह भारत में भी एक ऐसे प्रतीक की जरूरत के अनुसार सभी धर्मों के लोगों को आपस में जोड़ कर रख सकने वाला ध्वज 1921 में मद्रास प्रेसीडेंसी कॉलेज के प्रोफेसर पिंगली वैंकय्या ने महात्मा गांधी को एक झंडा भेंट किया जिसमें देश के दो प्रमुख धर्मों के प्रतीक हरे ओर केसरिया रंग की पट्टियां थीं। पिंगली ने 1916 में झंडों की डिजाइन पर एक किताब छपवाई थी। गांधी जी को प्रोफेसर पिंगली का ध्वज पसंद आया। आर्य समाज के लाला हंस राज सोंधी ने पिंगली को सुझाव दिया कि इस झंडे के बीच में चरखा भी होना चाहिए। उस समय चरखा भारत के लोगों के लिए स्वदेशी कपड़ा बनाकर आत्मनिर्भर होने का संकेत था। 


जब बात आगे बढ़ी तो गांधी जी ने इस झंडे में सफेद रंग की पट्टी जोड़ने के लिए कहा था। गांधी ने इसके पीछे तर्क दिया कि ये रंग बाकी धर्मों का प्रतिनिधित्व करेगा। इस तरह इस झंडे में सबसे ऊपर सफेद फिर हरा और नीचे लाल रंग था।

इस प्रकार से 1921 में चरखे सहित तिरंगा भारत का ध्वज बना जो 1947 में परिवर्तित हो कर चरखे के स्थान पर अशोक चक्र के साथ अंगीकृत किया गया।


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