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सुनसान बाजार में निराश व्यापारी

सुनसान बाजार में निराश व्यापारी
चूरू, मुख्य बाजार में बर्तन व्यवसायी से वार्ता
मैं आज प्रातः 11:00 से शाम 04:00 बजे तक चूरू शहर के मुख्य बाजार में बेटियों के विवाह से संबंधित खरीददारी करने घुमा। कुछ बर्तन खरीदने हेतु किसी समय बर्तनों के नामी व्यापारी की दुकान पर पहुंचा।
दुकानदार ग्राहक को देख कर बहुत खुश हुआ। थोड़ी देर बातचीत के बाद उसने अपनी आप बीती शुरू की।
भाई जी, 2019 से पहले हमारे लिए रोज 50000 की बिक्री कोई बड़ी बात नहीं थी। नोट बंदी वाले दिन हमने आखिरी बार 78000 का गल्ला उठाया। इस के बाद 5 से 8 हजार के बीच गल्ला उठा लें तो बहुत है। इतनी कम बिक्री में घर का खर्च केसे चलता है, आपको बता पाना मुश्किल है।
मैंने पूछा - नोट बंदी के पहले और अब में क्या फर्क है 
उसने जवाब दिया भाई जी, हम अपना गला फाड़ कर रो नहीं सकते बस इसके अलावा कुछ नहीं बचा हमारे पास।
मेरा अगला सवाल - GST का कोई प्रभाव पड़ा क्या।
सेठ ने बताया कि GST के कारण ग्राहक जो 100 रुपए का सामान खरीदता था 30 रुपए पर आ गया। विवाह आदि में भी पहले खूब खरीदी होती थी। इसी कारण कभी हमारी दुकान में हर प्रकार का आइटम मिल जाता था, अब मंगवाने से डरते हैं, बिके या नहीं कोई भरोसा नहीं।
मेने पूछ लिया सेठ जी नोट बंदी और GST के आलावा मार्केट पर कोई असर।
सेठ बोला - भाई जी, चूरू जैसे शहर में दो बड़े मॉल खुल गए वहां ग्राहक को हर चीज एक जगह मिल जाती है। साथ ही एक ही आईटम की अलग अलग वेराईटी भी मिल जाती हैं। अधिकांश ग्राहक वहीं जाने लगे हैं। इसके अलावा यह मॉल रात दस बजे तक खुले रहते हैं जिस से ग्राहक का शाम के समय घूमना और खरीददारी दोनों काम हो जाते हैं। मॉल के कारण बहुत फर्क पड़ा है।
मेने तुरंत सवाल दागा - भाई जी ऑनलाइन वालों से भी प्रभाव पड़ा है क्या।
सेठ इस बात से निराश हुआ और कहने लगा, भाई जी इस ऑनलाइन ने हमारा ही नहीं सभी तरह के व्यापारियों का भट्ठा बैठा दिया। अब फिल्टर की गई फोटो और 99 के चक्कर में ग्राहक ढूंढते रह जाते हैं। गांवों के ग्राहक को ऑनलाइन के कारण घर पर ही सामान मिल जाता है। पर भाई जी, ऑनलाइन वाला आपको डिलीवरी तो दे सकता है, परंतु ग्राहक में मोल - भाव के गुण नहीं उपज पा रहे हैं। दुकानदार और ग्राहक में मध्य लंबे समय के व्यापारिक संबंध जिस के कारण बाजार से बिना पैसे भी समान ले लिया जाता था समाप्त हो रहा है। धर्मदा खाता बंद होने के कगार पर है। बाजार समाप्त हुआ तो अन्य समस्याएं उठ खड़ी होंगी।
इस पूरे वार्तालाप के बाद सेठ ने एक बात और जोड़ी - 
भाई जी, पहले मुस्लिम समाज के लोग विशेष कर महिलाएं विदेश से आमदनी के कारण बड़ी खरीददारी करती थीं। सऊदी बिन लादेन कंपनी के खत्म होने और विदेश से आमदनी कम होने के कारण बाजार की पूरी रौनक खत्म हो गई। खास कर कपड़ा, जूता, श्रृंगार, और सजावट के सामान की ग्राहकी आधी से अधिक घट गई।
पास ही की दुकान का परचूनी वाले ने बताया कि भाई जी, लोग कह रहे हैं कि आबादी बढ़ रही है पर खाने पीने की चीजों की बिक्री ओसत रूप से घट रही है। आज से दस साल पहले की ग्राहकी और अब की ग्राहकी में बहुत अंतर आ गया। पहले लोग दो तीन महीने का सामान साथ ले जाते थे अब पांच - सात दिन का सामान ले जाते हैं। भाई जी, आप क्या मानोगे हमारी दुकान के बड़े - बड़े ग्राहक जो अन्य सामग्री जेसे बिस्किट, भुजिया, और अन्य  सामान बड़ी मात्रा में लेते थे वो आज तेल, मिर्च, धाना आदि सीमित मात्रा में खरीद रहे हैं। 
बर्तन वाली दुकान के सामने बांस बल्ली वाले गोविंद राम ने बताया भाई जी, सेठ अब नहीं भर पा रहा पेट। पहले सेठ गो - शाला, स्कूल मंदिर आदि में दान करता था अब खुद दान लेने वाले हालात हो गए। कभी कभी तो पूरे दिन बिना ग्राहक के जेसे आए वैसे ही घर जाना पड़ता है।

उपरोक्त वार्तालाप हम दोनो का व्यक्तिगत था जो आप के समक्ष रख रहा हूं। आशा है हम मरते बाजार को जीवित करने में भूमिका का निर्वहन करेंगे।

शमशेर भालू खान 
9587243963

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