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जीवन का प्रारंभ

जीवन एवं मानव विकास 


मर्चिसन उल्कापिंड: क्या जीवन के बीज अंतरिक्ष से आए थे? 

28 सितंबर 1969 का दिन विज्ञान के इतिहास में एक ऐसा मोड़ लेकर आया, जिसने जीवन की उत्पत्ति को लेकर हमारी सोच को ही बदल डाला। ऑस्ट्रेलिया के मर्चिसन शहर में एक रहस्यमयी पत्थर आकर गिरा और यह कोई साधारण पत्थर नहीं था बल्कि एक अंतरिक्ष से आया हुआ उल्कापिंड था,जिसे आज हम मर्चिसन उल्कापिंड के नाम से जानते हैं। 

क्या है मर्चिसन उल्कापिंड?
मर्चिसन उल्कापिंड एक कार्बनसस कोन्ड्राइट प्रकार का उल्कापिंड है। यह सौरमंडल की शुरुआत के समय का बचा हुआ टुकड़ा माना जाता है,जिसकी उम्र लगभग 4.6 अरब साल बताई गई है यानी यह हमारे सूरज और ग्रहों से भी पुराना हो सकता है। 

क्या मिला इस उल्कापिंड में?
जब वैज्ञानिकों ने इस उल्कापिंड का गहराई से अध्ययन किया, तो जो बातें सामने आईं, वो चौंकाने वाली थीं:
1. अमीनो एसिड्स की खोज
* इसमें 70 से अधिक प्रकार के अमीनो एसिड पाए गए।
* अमीनो एसिड वे कार्बनिक अणु हैं जो जीवन की नींव माने जाते हैं। हमारे DNA,प्रोटीन और कोशिकाओं की संरचना में इनकी भूमिका है।
* आश्चर्य की बात यह थी कि इन अमीनो एसिड्स में से कुछ ऐसे थे जो पृथ्वी पर नहीं पाए जाते। 

2. RNA-DNA से जुड़े तत्व
* इसमें यूरासिलऔर ज़ैंथीन जैसे तत्व मिले जो RNA और DNA जैसे आनुवंशिक कोड की संरचना में इस्तेमाल होते हैं।
* यह खोज दर्शाती है कि जीवन के मूलभूत तत्व पृथ्वी से बाहर भी मौजूद हैं। 

3. स्टार डस्ट के संकेत
* इसमें ऐसे आइसोटोप्स पाए गए जो केवल सुपरनोवा (विस्फोटक तारकीय घटनाओं) के दौरान बनते हैं।
* इसका मतलब है कि मर्चिसन उल्कापिंड ब्रह्मांड की गहराइयों से आया हुआ एक प्राचीन टुकड़ा है। 

क्या जीवन की शुरुआत पृथ्वी से बाहर हुई?
मर्चिसन उल्कापिंड ने वैज्ञानिकों को यह सोचने पर मजबूर किया कि:
* क्या पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत बाहरी अंतरिक्ष से हुई थी?
* क्या उल्कापिंडों के ज़रिए पृथ्वी पर अमीनो एसिड और अन्य जैविक तत्व आए?
* क्या जीवन ब्रह्मांड में फैला हुआ एक सामान्य घटनाक्रम है? 

इन सवालों को जन्म देता है एक विचार Panspermia सिद्धांत जिसके अनुसार जीवन के बीज अंतरिक्ष में फैले हुए हैं और उल्कापिंडों या धूमकेतुओं के ज़रिए विभिन्न ग्रहों पर पहुंच सकते हैं। 

वैज्ञानिक दृष्टिकोण
नासा,ESA और जापानी मिशनों ने इस सिद्धांत को और मजबूती देने के लिए अंतरिक्ष से धूल,बर्फ और उल्कापिंडों के नमूने एकत्र किए हैं। Hayabusa2 और OSIRIS-REx जैसे मिशनों ने अंतरिक्ष से लौटे नमूनों में भी ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स की पुष्टि की है। 

निष्कर्ष
मर्चिसन उल्कापिंड सिर्फ एक पत्थर नहीं,बल्कि यह ब्रह्मांड की प्रयोगशाला से गिरा एक रहस्यभरा संदेश है। यह बताता है कि जीवन का बीज केवल पृथ्वी तक सीमित नहीं है यह पूरे ब्रह्मांड में फैला हो सकता है। हो सकता है अगली बार जब कोई उल्कापिंड पृथ्वी पर गिरे तो वह जीवन के और भी गहरे रहस्यों को उजागर करे।
जीव कोशिका

भाषाओं का विकास
भगवान की अवधारणा
50,000 साल पहले होमोसेपियंस अफ्रीका से बाहर निकल कर दुनिया में फैल गए।
15,000 साल पहले मानव शिकारी संग्रहकर्ता थे. जानवरों को मार कर, वनस्पतियों को बीन बीन खाते थे।
9000 साल पहले Bottle-Neck की घटना घटी. पृथ्वी पर 95% पुरुष बिना कोई संतान पैदा किए मारे गए. Bottle-Neck वैज्ञानिक भाषा है।
9000 साल पहले दुनिया की आबादी 40 - 50 लाख के बीच थी. यानी 25 लाख पुरषों में 23,75,000 मारे गए केवल 1,25,000 जिंदा बचे।
सवाल है 9000 साल पहले क्या हुआ. 95% पुरुष ही क्यों मारे गए. महिलाओं की आबादी जस की तस बनी रही. दरअसल 9000 साल पहले दुनिया में भीषण Tribal War हुआ।
मानव शिकारी संग्रहकर्ता से कृषि और पशुपालन सभ्यता की ओर शिफ्ट हो रही थी. इसी दौर में पृथ्वी पर मनावओं ने दूसरों क़बीलों और इंसानी बसाहट पर हमला करना शुरू किया।
पुरषों और बच्चों को मारकर महिलाओं को उठा ले जाते. गुलाम महिलाओं अपने कबीले के पुरषों में बांट देते. महिलाओं का बलात्कार करते. पृथ्वी पर यह सिस्टम 9000 साल पहले कई सदी तक चला।
एक एक पुरुष ने 20 - 20 महिलाओं से प्रजनन कर कई बच्चे पैदा किए. यानी 1,25,000 पुरषों ने 25,00,000 को पेट से किया. यह सब 9000 साल पहले हुआ जब पृथ्वी पर इंसानों ने एक दूसरे के खिलाफ इतिहास का सबसे बड़ा खूनी संघर्ष किया।
95% पुरुष मारे गए. आज जो पृथ्वी पर 840 करोड़ आबादी है उन्ही 5% पुरषों के सभी वंशज हैं।

भाषाओं का विकास 
हड़प्पा लिपियों का पढ़ा जाना आज भी एक पहेली है क्योंकि मिस्र की रोसेटा अभिलेख की तरह आजतक ऐसा कोई मुहर या शिलालेख नहीं मिला जिसपर हड़प्पा लिपि के साथ किसी अन्य लिपि में वही बात लिखी मिली हो।
आजतक हड़प्पा लिपि को पढ़ने के जितने भी दावे हैं वह केवल कंप्यूटर या साहित्य आधारित हैं, उसमें भी दो ही दावे अधिक होते हैं। पहला कि यह संस्कृत है, दूसरा कि द्रविड़ भाषा में है, और ये दोनों ही दावे पूर्वाग्रह ग्रसित और राजनीतिक तुष्टिकरण के अधीन हैं जिनका धरातल पर कोई भी पुष्ट प्रमाण अबतक उपलब्ध नहीं।
हड़प्पा लिपि को पढ़ने का प्रयास भी कम नहीं है,बहुत काम हुआ है इसपर लेकिन अफसोस कि रोसेटा अभिलेख जैसा त्रिलिपि/त्रिभाषी(Hieroglyphic, Demotic, Ancient Greek) अभिलेख हड़प्पा लिपि के साथ नहीं मिलना इसमें सबसे बड़ा रोड़ा है। 
उम्मीद करें कि अपने वृहद वैदेशिक व्यापार के कारण कहीं से भी हड़प्पा लिपि के साथ एक ही पत्थर पर कोई अन्य प्राचीन सभ्यता की पढ़ी जाने वाली लिपि मिल जाए और हमें हड़प्पा सभ्यता के लोगों के बारे में असल जानकारी मिल सके।

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