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Showing posts from October, 2025

एंजेल

एंजल फोटो थेरेपी मशीन में

मदरसा मकतब

मकतब मदरसा एवं जामिया  (आधुनिक शिक्षण केंद्र) शिक्षा एवं शिक्षण की शुरुआत - हम जानते हैं कि मानव ने सब से पहले पढ़ना, लिखना एवं लिखे हुए को सुरक्षित रखने की शुरुआत अरब क्षेत्र के बेबीलोन (मेसोपोटामिया) इराक से की थी। यहां मानव ने कीलाक्षर लिपि में मिट्टी को पट्टियों पर लिख कर उसे आग में तपा कर सुरक्षित किया। बाद में ताड़ पत्तों या अन्य माध्यमों पर लिख कर सुरक्षित करने की शुरुआत हुई। इस से पहले आदि मानव ने गुफाओं में भित्ति चित्रों के माध्यम से लिख कर संदेश पहुंचाने की शुरुआत की। विश्व की प्राचीनतम भाषा इब्रानी (परिष्कृत रूप अरबी व फारसी) का प्रारंभ इसी क्षेत्र में हुआ। यहीं यहूदी, ईसाई एवं इस्लाम धर्म का उदय हुआ। इस्लाम धर्म में शिक्षा का महत्व - इस्लाम धर्म में शिक्षा को अति महत्व दिया गया है। कुरान में पहली आयात इकरा बिस्मी रब्बी कल्लजी ख़लक से हुई है। इस का अर्थ है पढ़ो अपने रब के नाम से। नबी मोहम्मद साहब ने हर मुस्लिम को पढ़ना चाहिए चाहे इसके लिए तुम्हें चीन तक जाना पड़े। इस्लाम में एक वाक्य गोद से गौर तक पढ़ो। अर्थात् पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। ज्ञान (इल्म) हासिल ...

काफी की कहानी

डच व्यापारियों ने 1600 के दशक में यमन से कॉफ़ी के पौधे चुरा लिए और उन्हें इंडोनेशिया के जावा द्वीप में एक कठोर पर्यावरण में उगाने में सफलता हासिल कर ली। ये कठोर पर्यावरण के बागान यूरोप को असीमित कॉफ़ी बीन्स उपलब्ध कराते थे, जिससे पूरे महाद्वीप में कॉफ़ी का जुनून छा गया। यह फ़सल इतनी सफल रही कि “जावा” यूरोप और अमेरिका में कॉफ़ी का दूसरा नाम बन गया औपनिवेशिक शोषण की एक विरासत भी, जो आज भी हमारी कितबों में मौजूद है। यमन में पवित्र पेय से लेकर जावा में वैश्विक वस्तु तक, कॉफ़ी ने विश्व व्यापार और संस्कृति को नया रूप दिया।  9वीं–10वीं सदी – इथियोपिया (काफ़ा क्षेत्र) में कॉफ़ी पौधे की खोज सबसे पहले ख़ालिद नाम के एक चरवाहे ने की थी, 11वीं सदी में ये कॉफ़ी अरब जगत (यमन) पहुँची और सूफ़ी संत इसे रातभर इबादत व ध्यान के लिए पीने लगे ताकी नींद ना आए। 15वीं सदी – यमन में मोचा (Mocha) बंदरगाह से कॉफ़ी का व्यापार शुरू हुआ। 16वीं सदी – मक्का, काहिरा, दमिश्क और इस्तांबुल तक कॉफ़ीहाउस ("क़हवा खाना") खुल गए,कॉफ़ी उस दौर में एक “पवित्र पेय” और सामाजिक मेलजोल का साधन थी। 1600 के दशक मे...

हमारा व्यवहार और करोना

          हमारा व्यवहार और करोना  हम हमारा व्यवहार व कोरोना आज चिकित्सीय कार्य हेतु घर से बाहर जाना हुआ। गांव में दुकानों के बाहर समूहों में लोग बैठे थे लगभग सभी के मास्क नहीं थे और एक निर्धारित दूरी भी नहीं बना रखी थी। छोटे बच्चे इस बात से सावधानी बरत रहे हैं कि कहीं उस का हाथ किसी को छू ना ले। यह देख कर दिल को बहुत तसल्ली हुई कम से कम बड़ों से बच्चे ज्यादा सावधान हैं। शहर में पहुंचने पर एक गली में 10-12 युवा लूडो खेलते मस्ती कर रहे थे। किसी के मुंह पर मास्क नहीं आगे चलने पर इसी तरह कम से कम 10 जगह यह माहौल देखा। एक जगह रुक कर पूछा कि भाई आप इतने लोग एक जगह बिना मास्क बैठे हैं क्या महामारी चली गई। जवाब बड़ा सुंदर व मासूम था " भाई जी थे भी इन अफसर,नेता व डॉक्टर की बातों में आ गये। यह एक साजिश है बाकि कोरोना-फोरोन कुछ नहीं।"  मैं अपराध बोध के साथ आगे बढ़ा कि पुलिस सायरन सुनाई दिया। पीछे मुड़ कर देखा एक भी युवक वहां नहीं था सब के सब घर में घुस गये। मैं अवाक सन्न रह गया। यह वही युवा हैं जो व्हाट्सएप फ़ेसबुक ट्वीटर के साथ दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफार्...

अंधविश्वास.

अंधविश्वास व सच एक नज़र पीपल 24 घण्टे ऑक्सीजन नहीं छोड़ता :-  हरित प्रणाम, इन दिनों दैनिक भास्कर में छपी एक फ़ोटो काफी वायरल हो रही है इस फ़ोटो में एक व्यक्ति पीपल के पेड़ पर कुर्सी लगाकर बैठा हुआ है इस फ़ोटो के साथ जो विवरण दिया हुआ है उसमें अखबार ने लिखा है कि पीपल 24 घंटे ऑक्सीजन देता है I इस खबर के अलावा भी हम अक्सर यह सुनते- पढ़ते हैं कि पीपल 24 घंटे ऑक्सीजन देता है बरगद के बारे में भी कई लोग ऐसा दावा करते हैं कुछ दिन पहलें राजस्थान के जालोर जिले से दैनिक भास्कर में ऐसी ही एक और खबर छपी जिसमें एक डॉक्टर कोरोना मरीजों को खेजड़ी के पेड़ के नीचे सुलाकर उनका ऑक्सीजन स्तर सुधारने की बात कह रहे हैं I इस खबर में भी अखबार ने दावा किया है कि खेजड़ी का पेड़ 24 घंटे ऑक्सीजन छोड़ता है हालांकि डॉक्टर के हवाले से यह दावा नहीं किया गया बल्कि अखबार ने अपनी तरफ से इसे लिखा है लेकिन डॉक्टर के हवाले से भी इस खबर में एक दूसरी बात लिखी गयी है, डॉक्टर ने यह दावा किया है कि खेजड़ी का पेड़ नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करता है इस कारण खेजड़ी अधिक ऑक्सीजन छोड़ती है I अगर हम वैज्ञानिक आधार पर देखें तो ये तीनों ह...

लघुकथा -जो जिसके काम आए

    लघुकथा - जो जिसके काम आए -              "जो जिसके काम आए" -  बात बहुत पुरानी है। एक गांव में भले और मेहनती लोग रहा करते थे। गांव का ठाकुर हुकुम सिंह खूब रसूखदार और बड़ा जमींदार था। गांव में किसी के कोई काम होता तो वो हमेशा लवाजमे के साथ घोड़े पर सवार हो कर आता, परिवार के सदस्यों को बाहर से ही जोर से पुकारता और कहता कि मेरे लायक कोई काम हो तो ज़रूर बताना। लोग ठीक है ठाकुर हुकुम कह कर मुजरा करते। गांव के एक किसान राधे की मां का देहांत हुआ, ठाकुर हुकुम सिंह वही घोड़े पर सवार हो कर आए, वही पहले वाली बात दोहराई। राधे ने अन्य गांव वालों की तरह जी हुकुम कह कर अर्थी का काम करने लगा। थोड़े दिन बीते ठाकुर साहब की मां का निधन हो गया। गांव वालों को यह सूचना मिली तो सब राधे के घर इकट्ठे हुए। राधे थोड़ा पढ़ा - लिखा किसान था। उसने गांव के लोगों से कहा, यह ठाकुर साहब हमारे किसी भी काम पर आते हैं, बाहर ड्योढ़ी से ही किसी काम के बारे में पूछ कर चले जाते हैं। इन्हें सबक़ सिखाना चाहिए। निहंग सिंह ने राधे की हां में हां मिलाते हुए...

कहानी - कश्मीर में पढ़ने वाले छात्र की

#कहानी #कश्मीर_आंदोलन_की राजस्थान से बाहर कश्मीर में 21 दिन के सफल आंदोलन की कहानी, साल- 2007 नंदऋषी कालेज बड़गांव श्रीनगर में अक्टूबर माह की सुबह का तकरीबन 10:00 बजे का वक़्त, कॉलेज के सभी साथी क्लासेज की तैयारी कर रहे थे, हम उसी कैंपस के होस्टल में रहते थे कि मेरा दोस्त दौड़ता हुआ आया के आज मेडम ने फाइन जमा करवा कर ही क्लास लेने को कहा है।  हम 20-25 साथी मैडम से पूछने गये कि फाइन किस बात का ,जवाब आया मेरा बस चले तो तुम लोगों के सांस लेने पर भी फाइन लगा दूँ। अक्सर शांत रहने वाला मैं, न जाने क्या हुआ, यकायक मेडम ओर स्टाफ से उलझ गया और विरोध शुरू कर दिया। भानू प्रताप भागा-भागा आया के पूजा (जयपुर से B. Ed. साथी) को लेबर पैन शुरू हो गया है। मैं उस के लिए रिक्शा लेने दौड़ा। रिक्शा आ गया पर मेडम ने किसी को भी बाहर जाने की सख्त मनाही कर दी। हम ने उनसे कहा आप जितना चाहो हम से फाइन ले लो लेकिन अभी हमारी बहन को हस्पताल ले जाने दो, लेकिन वो पत्थर दिल ना पिघली हम लाख मन्नत करते रहे ,आखिर वो बेहोश हो गयी ओर खून बहने लगा, हम मन्नत पर मन्नत कर रहे थे पर मैडम ना मानी और पूजा का बच्चा उस के गर्भ में ख...

राहुल गांधी एक परिचय

लघुकथा - भाई -भाई

लघुकथा - भाई भाई की लड़ाई भाई भाई की लड़ाई सुंदर वन में हरियल चिड़िया का घोंसला था। हरियल के दो बेटे थे, एक का नाम गोलू और दूसरे का नाम ढोलू था। दोनों में बहुत प्रेम था। माता - पिता का लाया दाना आपस में दोनों भाई प्रेम से बांट कर खाते। उसी जंगल में दुष्ट नाम का सांप और झपकी बिल्ली भी रहते थे। दोनों की नजर सुंदर गोलू - ढोलू को चारा बनाने की थी। वो हर समय उनको झपटने की ताक में रहते। हरियल और उसकी पत्नी यह जानते थे कि उनके बच्चों पर दुष्ट और झपकी की नजर है। एक दिन दुष्ट घोंसले तक पहुंच गया। दोनों भाई जोर - जोर से चींचीं करने लगे। आस - पास के सभी चीड़ा - चीड़ी इकठ्ठे हो गए। सब ने एक साथ चोंच से दुष्ट पर आक्रमण कर दिया। घायल सांप पेड़ कांटों में गिरा और मारा गया।  बच्चे अब बड़े हो गए। एक दिन दिनों ने पिता हरियल से कहा कि वो अपना अलग घोंसला बना कर घर बसाना चाहते हैं। हरियल खुश हुआ। हरियल और उसकी पत्नी ने दोनों बेटों के घोंसले बनाने में सहायता की। समय बीतता गया। दोनों भाइयों के भी बच्चे हो गए। एक दिन गोलू की पत्नी ने कहा, ढोलू के बच्चे हम जो दाना चुग कर लाते हैं उन में से खा ज...