लघुकथा - पागल कौन ?
बहुत पुरानी बात है, बदरपुर राज्य का राजा बहुत बुद्धिमान एवं प्रजापलक था। राज कार्य में पारंगतता के साथ - साथ वह अध्ययन - अध्यापन व कला को बहुत महत्व देता था। समय समय पर उसके दरबार में विभिन्न विशेषज्ञ आते और अपनी विशेषज्ञता का प्रदर्शन करते। राजा भी प्रसन्न हो कर उन्हें विभिन्न पुरस्कार देता।
राजा के इस व्यवहार के बारे में सुनकर एक बार एक ज्योतिषि उनसे मिलने आया और राजा से मिलने की इच्छा जताई। दरबारियों ने इस हेतु राजा को सूचित किया तो उसे दरबार में बुलाया गया।
सभी राजकार्य से संबंधित गणमान्य उपस्थित थे। राजा ने ज्योतिषी को उचित सम्मान दिया और आसन प्रदान किया। चर्चा चली के आप किस तरह की ज्योतिष विद्या में पारंगत हैं तो उस ने कहा में महामारियों से संबंधित भविष्यवाणी करता हूँ। राजा ने उत्सुकता से पूछा कि क्या हमारे राज्य में किसी प्रकार की महामारी की संभावना है ?
ज्योतिष ने जान की खैर मांगी और कहा "महाराज आज से 14 दिन बाद 5 मिनिट तक एक ऐसी हवा चलेगी जिस के संपर्क में आने वाला हर जीव पागल हो जायेगा।" राजा द्वारा पूछने पर के इस से बचाव का उपाय क्या हो सकता है तो ज्योतिष ने कहा कि अगर 5 मिनिट तक चलने वाली उस हवा के संपर्क से बचा लिया जाये तो ये बीमारी उस पर असर नहीं करेगी।
राजा ने ज्योतिष को बहुत सारी भेंट दे कर विदा किया। ज्योतिष पास ही खड़ी रानी को चुपके से एक कागज की पुड़िया पकड़ा कर चला गया। रानी ने एकांत में जा कर कागज को पढ़ा और फाड़ कर नष्ट कर दिया।
उधर राजा ने दरबार में राज्य के विद्वानों की सभा बुलाई। सभा में निर्णय हुआ कि पूरे राज्य की जनता को इस से नहीं बचाया जा सकता, चूंकि राज्य का महत्वपूर्ण व्यक्ति राजा होता है उसे बचा लिया जाए। पर कैसे बचाया जाये कोई संतुष्टिपूर्ण उत्तर नहीं मिला। मोलवी, पंडित, बूझा, ओझा, सयाने-सेवड़े सब निरुत्तर हो गये।
पास ही के गांव कानासर में में सुसुप्ति नाम का कारीगर रहता था जो विभिन्न प्रकार के वैज्ञानिक प्रयोग करता रहता था। मंत्री ज्ञानुप्त ने उस कारीगर की सलाह लेने की बात राजा से कही। राजा ने तुरंत सुसुप्ति को दरबार में तलब किया।
हरकारे के साथ ही कारीगर सुसुप्ति ने अविलंब दरबार में हाज़िरी लगाई। राजा को झुक कर प्रणाम किया। राजा ने भविष्यवाणी से संबंधित बात बता कर समाधान के संबंध में कारीगर से राय पूछी। कारीगर ने पूरी बात सुनकर कहा,
"महाराज, इस समस्या का हल है। मैं एक शीशे का मकान बनाऊंगा जिस में हवा का प्रवेश नहीं होगा, आप उसमें बैठ कर भविष्यवाणी के अनुसार चलने वाली हवा से बच सकते हैं। राजा ने कारीगर को उसकी मांग के अनुसार सामग्री उपलब्ध करवाने के निर्देश मंत्री को दे कर कारीगर को पांच दिन में कार्य पूर्ण करने की जिम्मेदारी दे कर सभा समाप्त की।
समय सीमा ए योजनानुसार कारीगर ने निश्चित समय पर कार्य पूर्ण कर राजा को निरीक्षण करवाया। कारीगर द्वारा तैयार शीशे का मकान उसे बहुत पसंद आया। राजा ने खुश हो कर कारीगर को बहुत धन एवं राजगीर की उपाधि दी। राजगीर रानी को एक शीशे की बोतल पकड़ा कर दरबार से बाहर चला गया।
अब भविष्यवाणी के पूरा होने का समय आ गया। उचित विधि-विधान के बाद राजा को शीशे के मकान में बंद कर वायुरोधी बना दिया गया और निश्चित समय पश्चात उस मकान को तोड़ कर निकलने हेतु राजा को एक हथौड़ा दे दिया गया।
समय आया हवा चली और भविष्यवाणी के अनुसार सब पागल हो गये। रानी ने ज्योतिषि के बतायेनुसार बहती हवा को कारीगर द्वारा दी गई में बोतल में बंद कर के पूर्व निर्धारित सुरक्षित स्थान पर रख दिया।
अब राजा जी शीशे के मकान को तोड़ कर बाहर निकले तो जनता ने उन पर "पागल राजा - पागल राजा" कहते हुए पत्थर बरसाने शुरू कर दिये।
चूंकि निश्चित समय गुजर गया था वो हवा अब जा चुकी थी ज्योतिष जो निकट के राज्य में ठहरा हुआ था जो उस हवा के प्रभाव से सुरक्षित था पुनः राज्य में आया तो देखा राजा लहूलुहान पड़ा है। लोगों से पत्थरबाज़ी का कारण पूछने पर बताया गया कि राजा पागल हो गया है।
(बताईये पागल कौन, राजा या जनता ?)
ज्योतिषी ने जनता से कहा आप थोड़ी देर रुको में राजा को ठीक कर दूंगा। वो महल में दौड़ा और रानी को बताए पूर्व निश्चित स्थान पर पहुंच कर वहां रखी गई बोतल में बंद हवा राजा पर फेंकी।
हवा लगते ही राजा भी उन जैसा हो गया। जनता ने राजा के साथ - साथ थाली, घंटी, बर्तन, ढोल, नगाड़े जो हाथ लगा बजाने शुरू कर दिए। "राजाजी की जय, राजा जी की जय, राजा जी ठीक हो गए राजा जी ठीक हो गए" के नारों के साथ हर्ष में सब राज्य के नागरिक नाचने गाने लगे।
सवाल :- कुछ नहीं आपको जो समझ आया वही जवाब है।
जिगर चूरूवी
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