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मेरी हवालात यात्राएं

जेल और मुकदमे कोई सजा नहीं होती। पर हित कार्य जीवन का सुंदरतम काम है। मेरी अब तक की हवालात यात्राएं एक संस्मरण के रूप में - 

हवालात की पहली यात्रा - 
शाम के समय मैं जालीदार बनियान और नेकर पहन कर खेत जा रहा था, गांव के कुछ लड़के इंद्रपुरा क्रिकेट खेलने जा रहे थे।  मैं शायद 7 वीं कक्षा में पढ़ता था। खेल आदि में मेरी कोई रुचि नहीं थी और पढ़ाई के अलावा अन्य अन्य कार्यों में सिर्फ खेत जाना पसंद था जहां से गाय भैंसों के लिए हरी भरोन्टी लाते थे। उस समय पैसा किस के पास होता था, रोडवेज कंडक्टर से लड़कों का झगड़ा हो गया। कंडक्टर ने गालियां निकाली और लड़कों ने गाड़ी रुकवा कर बस के शीशे तोड़ दिए। मैं वहां खड़ा था, ड्राइवर और कंडक्टर ने मुझे बस में बैठा लिया, कोतवाली ले गए और थोड़ी मारपीट भी की। रात को करीब 8 बजे मुझे वहां से छोड़ा। बिना किसी कसूर के पहली बार हवालात में कुछ थप्पड़ खाए।

हवालात की दूसरी यात्रा - 
वर्ष 1993 में 10 वीं परीक्षा पास कर चूरू शहर में जाना हुआ। चूरू उस समय बहुत छोटा था आज से लगभग आधा।
पंखा चौराहा एक विरान जगह हुआ करती थी। आक और झाड़ियां यहां बहुतायत से उगी थी। शहर में नए - नए आए और नए लोगों से मुलाकात हुई।
बागला स्कूल चूरू में 11वीं क्लास में प्रवेश लिया। 
एक दिन स्कूल लगा था की हमारे साथी सुभाष पुनिया को स्थानीय बाजार के व्यापारियों ने पीटना शुरू कर दिया। छात्रों को पता चला तो सब एक साथ भीड़ के रूप में स्कूल से बाहर निकले पर घायल सुभाष के अलावा सब भाग चुके थे।
कुछ ही देर में व्यापारियों ने स्कूल के अंदर लाठियों से हमला कर दिया, रोकने पर पॉलिटिकल साइंस के व्याख्याता हीरालाल जी शर्मा पर वार कर हाथ तोड़ दिया। हीरालाल जी पहले मेरे गांव में पढ़ाते थे और पड़ोसी गांव बूंटिया के रहने वाले थे। यह सब देख कर हम लड़कों ने आव देखा ना ताव और टूट पड़े। बाजार में सन्नाटा पसर गया। व्यापारियों ने कोतवाली में शिकायत दर्ज करवाई और मुझे कोतवाली के जाया गया।

हवालात की तीसरी यात्रा -
बगला स्कूल वर्ष 1995 सुबह की प्रार्थना हो रही थी,प्रिंसिपल फेल सिंह जी तोमर प्रार्थना के बाद सभी स्टूडेंट्स से बातें कर रहे थे की अचानक एक आवाज आई सुजाता (बदला हुआ नाम) के हत्यारों को - फांसी दो, फांसी दो। कुछ कॉलेज के छात्र स्कूल में दाखिल हुए और जरदस्ती छुट्टी करवा दी। हम भी साथ हो लिए। कॉलेज वाले छात्र नई सड़क से कलेक्ट्रेट की ओर चले गए और हम बागला स्कूल के छात्र लाल घंटाघर की तरफ। 
वहां हम सब बैठ गए और नारे बाजी शुरू कर दी। 
चूरू में सुजाता (बदला हुआ नाम) नामक लड़की के साथ दो ओर लड़कियों का बलात्कार हुआ और सुजाता की हत्या कर दी गई। आरोप था तत्कालीन गर्ल्स कॉलेज की एक महिला शिक्षिका पर कि वह ऐसा करवाने में रसूखदार लोगों के लिए लड़कियों को बहला फुसला कर तैयार करती है। ऐसा ही इस कांड में हुआ। काफी देर रास्ता जाम रहने पर उस समय डिप्टी एसपी रणजीत खां जी आए और मुझे उठा कर ले गए। भीड़ भाग गई। शाम होने पर छोड़ दिया गया।

चौथी हवालात यात्रा -
चूरू से बाहर पहले कभी पिताजी के साथ जयपुर गया था या एक दो बार ncc कैंप में रामगढ़, आगरा, झांसी। अब bstc में एडमिशन हो गया और में अजमेर पहुंचा। लगभग दो महीने आराम से गुजरे की स्थानीय अजमेर निवासी मनचले हमारी कॉलेज की लड़कियों से छेड़खानी करते। काफी समझाने के बाद भी नहीं मानने पर हमने थोड़ी जंत्री बना दी। वो तत्कालीन अजमेर विधायक के गुर्गे थे। निकट के थाने गंज में जाकर पुलिस को ले आए। मुझे थाने में बैठा लिया। काफी समय बाद अजमेर के कांग्रेस के पूर्व विधायक तक मेरे शिक्षक नंदवानी जी ने बात पहुंचाई और छुड़वाया।

पांचवीं हवालात यात्रा -
अजमेर में हमारी कॉलेज भाग चंद की कोठी सुभाष गार्डन आनासागर के पास लगती थी। बिडिंग किराए की थी जिस का सरकार से केस चल रहा था। कॉलेज केस हार गई और रेल लाइन के पास हाथीभाटा अजमेर एक ब्रिटिश काल की बिल्डिंग में कालेज शुरू हो गई। यहां भी हमारी साथी लड़कियों से छेड़खानी होने लगी। हमने लगभग एक महीने समझाइश से काम लिया पर पानी नाक से ऊपर चला गया। एक दिन उन मजनुओं की अच्छी खबर ली। मुझे ओर एक अन्य साथी को पुलिस उठा कर क्लॉक टावर थाना ले आई।
थोड़ी पुलिसिया मेहमान नवाजी भी हुई। लगभग 4 घंटे बाद कॉलेज के लड़के लड़कियों की भीड़ आई और क्लॉक टावर थाने के सामने नारे बाजी करने लगी। इस दिन चूरू विधायक राजेंद सिंह राठौड़ मंत्री पद थे और अजमेर ही थे। हमें उठाने वाले (asi) भी चूरू से ही थे। आखिरकार रात 10 बजे के आस पास हमें छोड़ दिया गया।

छठी, सातवीं हवालात यात्रा -
स्कूल से छात्र के रूप में निकल कर वापस स्कूल में शिक्षक के रूप में आ गया। कॉलेज लाइफ नहीं जीने का मलाल खाए जा रहा था। आखिर मौका मिला और हम कश्मीर बीएड करने पहुंच गए। कॉलेज का चलन था कि 20000 अतिरिक्त दो और परीक्षा देने आओ। लेकिन हमारी कॉलेज के लगभग सभी लड़के लड़कियों ने फैसला किया की हम रेगुलर कॉलेज आयेंगे और पढ़ेंगे। प्रिंसिपल को उसी दिन से हम खास कर राजस्थानी खटकने लगे। एक दिन सभी ने प्लान किया कि जब कश्मीरी अपनी स्थानीय ड्रेस पहन कर आते हैं तो हम भी अपनी स्थानीय वेष भूषा पहन कर कॉलेज जाएंगे, यह दृश्य मैडम को पसंद नहीं आया और जोर चिल्ला कर कहा "मेरा बस चले तो तुम लोगों के यहां सांस लेने पर tex लगा दूं, बात खटक गई पर हम चुप रहे। काफी दिन निकल गए और exam फॉर्म निकले। Exam form के साथ प्रिंसिपल मैडम ने 20 हजार से 30 हजार रुपए फाइन के नाम पर वसूलने शुरू कर दिए। हमने विरोध किया पर मजबूरी में जमा करवा दिए। हमारी साथी पूजा शर्मा जो गर्भवती थी उस के प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। हम ने मैडम से अनुरोध किया कि आप फाइन वसूल कर लो पर हमारी बच्ची को हॉस्पिटल पहुंचाओ। मैडम ने अनसुनी कर दी। समाचार मिला पूजा का बच्चा पेट में ही मर गया। लड़कों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। हम कुछ साथी दौड़े और पूजा को ऑटो में डाल कर लाल डेड हॉस्पिटल लाल चौक ले गए। और वहीं से स्थानीय नाटीपोरा पुलिस थाना पहुंच कर रिपोर्ट दर्ज करवाई। हम सब लड़के हड़ताल पर बैठ गए। दो दिन तो सिर्फ नंद ऋषि कॉलेज के छात्र ही हड़ताल पर रहे पर बाद में अन्य कॉलेज से छात्रों का आना शुरू हुआ। 21 दिन चली हड़ताल के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद के कहने पर स्थानीय विधायक के माध्यम से वार्ता हुई और हमारी जीत। इस दौरान मुझे जान से मारने की धमकी, 12 लाख नकद देने का लालच दिया गया पर हम अडिग रहे। 21 दिन में दो बार हवालात की हवा भी खानी पड़ी।

8,9 और 10 वीं हवालात यात्रा -
2019 से 2023 तक चले आंदोलन में एक बार जेल भरो आंदोलन, दो बार आंदोलन के दौरान हवालात की यात्रा की।

11 वीं हवालात यात्रा - 
अभी का चूरू आंदोलन। इसका वृतांत और अनुभव अलग से लिखूंगा।

शमशेर भालू खान
9587243963

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