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उन्नाव बस हादसा

उन्नाव बस दुर्घटना - 
बस ट्रेन और वायुयान हादसे हर दिन होते रहते हैं। हर दुर्घटना की गहराई से पड़ताल करने पर किसी ना किसी की लापरवाही उजागर होती है। कुछ दुर्घटनाएं ऐसी होती हैं जिनका घटनाक्रम अन्य से पृथक होता है, उन्हीं में से एक है उन्नाव बस दुर्घटना।




                          एक यात्री 

आगरा - लखनऊ एक्सप्रेस वे - 
यह  मैने व्यक्तिगत यात्रा के दौरान देखा है। सिमेंटेंटेड सड़क जो चिकनी परतदार है। अधिकांश वहां 100 से 120 km/घंटा की रफ्तार से दौड़ते हैं। मेरा मानना है  यह मार्ग सब से असुरक्षित मार्ग है। सब से अधिक लूटपाट और नकबजनी की घटनाएं भी इसी मार्ग पर होती हैं। वाहनों का ओवरटेकिंग अत्यंत डरावना होता है।
उन्नाव बास दुर्घटना - 
उन्नाव के निकट इसी एक्सप्रेस वे पर बेहटामुजावर के जोगीकोट गांव के सामने बिहार के शिवहर से  बुधवार को 70 सवारियां लेकर दिल्ली जा रही स्लीपर बस के चालक ने सुबह 04 :30 बजे आगे चल रहे टैंकर को बायीं ओर से ओवरटेक करने का प्रयास किया और बस टैंकर से भिड़ गई। दोनों वाहनों की अत्यधिक गति के कारण टक्कर इतनी भीषण थी कि बस की दाहिनी ओर चालक की सीट से लेकर पीछे तक के हिस्से के परखच्चे उड़ गए, इसमें बिहार प्रांत के पूर्वी चंपारण मोतीहारी के बिरसा टोला सपही निवासी बस चालक अखलाक और रायबरेली जिला निवासी टैंकर चालक सुनील  के अलावा तीन महिलाओं और करीब 10 साल के एक बच्चे सहित 18 लोग अकाल मृत्यु को प्राप्त हो गए जिन में एक ही परिवार के 6 सदस्य सम्मिलित है। 25 घायल हो गए जिनमें 05 की स्थिति अत्यंत गंभीर है जिन्हे लखनऊ ट्रॉमा सेंटर और एक को कानपुर हैलट रेफर किया गया। 10 मृतकों की पहचान हो गई है।
खतरनाक टक्कर से प्रयागराज से 12 हजार लीटर दूध लेकर दिल्ली जा रहा टैंकर भी बीच सड़क पर पलट गया। इस भिड़ंत का समाचार मिलते ही कई थानों की पुलिस वहां पहुंच गई। रेस्क्यू टीम और ग्रामीणों की मदद से सभी को 10 एंबुलेंसों से बांगरमऊ सीएचसी भेजा। यहां 18 लोगों को मृत घोषित कर दिया गया, घायलों को जिला अस्पताल रेफर किया गया। 

सड़क पर लाशें बिछीं थी -
यात्रियों में से बचे हुए लोगों ने बताया कि नींद खुली तो सड़क पर बिखरे थे शव। दुर्घटना के समय अधिकांश यात्री नींद में थे। सद्दाम, बीटू, शमीम, फूल मोहम्मद और संतोष निवासी बिहार ने बताया कि बस लखनऊ में रुकी जहां चालक ने चाय भी पी थी। इसके बाद बस चली तो सभी को गहरी नींद आ गई,अचानक तेज आवाज से नींद खुली तो देखा खून ही खून और लाशों के टुकड़े बिखरे हुए थे। यात्रीयों के अनुसार ड्राइवर 80 - 100 किमी/घंटा की रफ्तार में बस चला रहा था। ओवर टेक करने के कारण बस इधर से उधर लहराते हुए चल रही थी, लखनऊ से एक्सप्रेसवे पर पहुंच कर गति अत्यधिक तेज कर दी गई।

अखबार अमर उजाला ने इस के बाद बस हादसे के तथ्यों की पड़ताल की तो पाया गया कि -
उक्त बस महोबा के मवई खन्ना गांव के निवासी किसान पुष्पेंद्र सिंह के नाम से महोबा डीटीओ ऑफिस में पंजीकृत है। (पुष्पेंद्र सिंह के मुताबिक वह के.सी जैन के कार्यालय में काम करता था। के.सी जैन की कोरोना काल में मौत हो गई थी, इसके बाद नौकरी छोड़ दी थी। अब वह गांव में रहता है और खेती-किसानी करता है। उसे नहीं पता कि बस उसके नाम है।)
वास्तव में बस का मालिक राजस्थान के जोधपुर के एन.के. टॉवर कोहिनूर सिनेमा के पास स्थित मेसर्स करन चंद्र जैन (संचालक जैन ट्रेवल्स) की है। 
बस संचालन पहाड़गंज निवासी चंदन जायसवाल सह संचालक जैन ट्रेवल्स सोहन राम के सानिध्य में करता है। 
बस परमिट 02 जनवरी 2024, फिटनेस जनवरी 2022, बीमा 13 फरवरी 2024 को समाप्त हो गया, जिसके बाद आज तक फिटनेस की जांच नहीं हुई। टैक्स 30 नवंबर 2023 से बाकी चल रहा है। केवल प्रदूषण प्रमाण पत्र 15 अप्रैल 2025 तक वैध है।
इस मार्ग में 16 आरटीओ क्षेत्र आते हैं। ऐसे वाहन संचालन पर परिवहन विभाग, पुलिस और अधिमारियों ने बंद कर रखी थीं आंखें।
यह बस हर पांचवें दिन 1300X 2 = 2600 km के सफर में कुशीनगर, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, अयोध्या, बाराबंकी, लखनऊ, उन्नाव, हरदोई, कन्नौज, फिरोजाबाद, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, नोएडा और गाजियाबाद आरटीओ क्षेत्र पड़ते हैं।

परिवहन विभाग करे जांच सभी स्लीपर और स्रवारी बसों की  - 
दुर्घटना में लिप्त बस बॉडी कोड एआईएस-119 के आधार पर जांच की जा रही है जिसमें तीन विभाग सम्मिलित हैं। परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार स्लीपर बस संचालन के कुछ मानक होते हैं। बस बॉड़ी कोड एआईएस-119, रम्बल स्ट्रिप, ट्रैफिक कॉमिंग मेजर्स, ओवर स्पीडिंग की जांच होती है। यह जांच सरकारी रोडवेज की बसों की भी करवाई जानी चाहिए।

शमशेर भालू खान 
9587243963
संदर्भ - अखबार अमर उजाला की रिपोर्ट।
         - सुशील खन्ना (स्थानीय नागरिक, दिल्ली)

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