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सर छोटूराम (चौधरी)

      दीनबंधु सर छोटूराम चौधरी 

सरकार के साथ मिलकर गरीब किसानों का भला किया जा सकता है। सरकार के खिलाफ लड़कर नहीं।
छोटूराम चौधरी।

 किसानों के असली मसीहा
किसानों के मसीहा थे छोटूराम, सरदार पटेल ने उनके बारे में कही थी ये खास बात
नाम - रिछपाल (घर में सब से छोटे होने के कारण नाम छोटू से छोटूराम पड़ा)
उपाधि
1. सर
2. दीनबंधु 
जन्म - 24 नवंबर, 1881
जन्म स्थान - गढ़ी सांपला झज्जर, हरियाणा (तत्कालीन पंजाब)।
मृत्यु - 9 जनवरी 1945
मृत्यु का स्थान - रोहतक 
प्रसिद्धि - ब्रिटिश शासन में किसान अधिकार हेतु संघर्ष।
पद - वर्ष 1937 से पंजाब प्रांत सरकार में विकास मंत्री।
शिक्षा
प्रारंभिक शिक्षा - गांव से 
माध्यमिक शिक्षा -  दिल्ली में
उच्च शिक्षा - सेंट स्टीफंस कॉलेज दिल्ली
बैरिस्टर - 

कार्य - 
अखबार में कार्य
वकालत
किसान हित में संघर्ष
पंजाब सरकार में मंत्री

व्यक्तित्व -  
सर छोटूराम बहुत ही साधारण जीवन जीते थे। अपने वेतन का बड़ा भाग रोहतक के एक स्कूल को दान में देते थे।
कार्य -  वर्ष 1912 में जाट सभा का गठन किया। जाटों को खेती के अलावा अन्य कार्यों की ओर ले जाने हेतु प्रथम विश्व युद्ध में रोहतक के लगभग 22 हजार जाटों को अंग्रेज सेना में भर्ती करवाया।
वर्ष 1916 में जब रोहतक में रोहतक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने। 
कुछ दिन बाद गांधी जी के असहयोग आंदोलन से असहमत हो कर वर्ष 1920 में कांग्रेस से अलग हो कर नई पार्टी यूनियनिस्ट पार्टी का गठन किया।
वर्ष 1937 में प्रोवेंशियल असेंबली चुनावों में यूनियनिस्ट पार्टी से जीत मिली कर पंजाब सरकार में विकास व राजस्व मंत्री बने।

क्रांतिकारी छोटूराम - (एक घटना)
एक दिन छोटूराम पिता के साथ कर्ज हेतु साहूकार के पास सापला गए। साहूकार ने उसके पिता सुखीराम का बहुत अपमान किया। उसी दिन से छोटूराम ने ठान लिया कि वह अन्याय के खिलाफ लड़ेंगे। 
छोटूराम ने पहली हड़ताल क्रिश्चियन मिशन स्कूल के प्रभारी के विरुद्ध की। इस हड़ताल के बाद उन्हें जनरल राबर्ट नाम से पुकारा जाने लगा। छोटूराम ने अंग्रेजों के साथ रह कर गरीब, किसान और कमजोर वर्ग के अधिकारों की पैरवी की। चौधरी छोटूराम ने भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों और सूदखोर महाजनों के शोषण के विरुद्ध अनेक लेख लिखे,कोर्ट मे उनके विरुद्ध मुकदमें लड़े और जीते।

लेखन - 
छोटूराम ने अनेक लेखों द्वारा किसानों में राजनैतिक चेतना, स्वाभिमान की जागृति एवं देशभक्ति की भावना जगाने के प्रयास किए - 
1. मोर बचाओ 
2. ठग्गी के बाजार की सैर
3. बेचारा जमींदार
4. जाट नौजवानों के लिए जिन्दगी के नुस्खे
5. पाकिस्तान

कमजोर वर्ग के उत्थान हेतु योगदान - 

1. साहूकार पंजीकरण एक्ट (1934)
2 सितंबर 1938 से प्रभावी कानून के अनुसार कोई भी साहूकार बिना पंजीकरण के किसी को कर्ज़ नहीं दे पाएगा और न ही किसानों पर अदालत में मुकदमा कर पायेगा।

2. गिरवी जमीनों की मुफ्त वापसी एक्ट (1938)–
9 सितंबर 1938 से प्रभावी इस एक्ट द्वारा 8 जून 1901 के बाद कुर्की से बेची गई या गिरवी रखी गई जमीनें किसानों को वापिस लौटा दी गईं। किसान को सादे कागज पर जिलाधीश को प्रार्थना-पत्र देना होता था और सरकार उधार दी गई राशि के दुगुना राशि कर्जदाता को दिलवाकर जमीन छुड़वाने की कार्यवाही करती। यह राशि यदि पूर्व में साहूकार ने प्राप्‍त कर ली तो भूमि को लौटाना होगा।

3. कृषि उत्पाद मंडी अधिनियम(1938)–  5 मई 1939 से प्रभावी इस एक्ट के अंतर्गत माना अधिसूचित क्षेत्रों में कृषि उत्पाद मंडी समिति का गठन किया गया। मंडी में किसान को फसल का पूरा मूल्य दिया जाता, इस से पहले आधा मूल्य ही मिल पाता था। आढ़त, तुलाई, रोलाई, मुनीमी, पल्लेदारी,जकात के नाम पर कटौतियां की जाती जो मंडी में बंद कर दी गईं। इस अधिनियम के अंतर्गत किसानों को आढ़तियों के शोषण से मुक्ति मिली।

4. व्यवसाय श्रमिक अधिनियम (1940)–  11 जून 1940 से लागू हुआ इस एक्ट के अनुसार बंधुआ मजदूरी पर रोक लगाई गई। मजदूरों को शोषण से मुक्त किया गया। इस एक्ट के अनुसार - 
1. एक सप्‍ताह में 61 घंटे, एक दिन में 11 घंटे से अधिक काम नहीं करवाया जा सकता।
2. एक वर्ष में 14 छुट्टियां दी जानी अनिवार्य कर दी गई।
3. 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से मजदूरी नहीं कराई जाएगी।
4. दुकान व व्यवसायिक संस्थान रविवार को बंद रहेंगे।
5. छोटी-मोटी गलती पर वेतन नहीं काटा जाएगा।
6. श्रमिकों से किसी कारण वसूल की गई जुर्माने राशि या काटे गए वेतन की राशि श्रमिक कल्याण हेतु ही काम में ली जा सकेगी।
7. बेहतर पर्यवेक्षण हेतु श्रम निरीक्षक द्वारा समय-समय पर जांच की जाएगी।

5. ऋण माफी अधिनियम(1934) – 
8 अप्रैल 1935 में किसान व मजदूर को सूदखोरों के चंगुल से मुक्त कराने हेतु यह ऐतिहासिक एवं क्रांतिकारी एक्ट बनवाया गया। इस एक्ट के अनुसार यदि समस्त ऋण की मूल राशि का दुगुना धन वसूल कर लिया गया है तो ऋणी को ऋण-मुक्त समझा जाएगा। इस अधिनियम के तहत ऋण माफी (रीकैन्सिलेशन) बोर्ड बनाए गए जिसमें एक चेयरमैन और दो सदस्य होते थे। दाम दुप्पटा नियम के अनुसार दुधारू पशु, बछड़ा, ऊंट, रेहड़ा, घेर, गितवाड़ आदि आजीविका के संसाधनों को नीलाम नहीं किया जा सकेगा।

6. मोर के शिकार पर रोक – 
मोर ग्रामीण संस्कृति एवं परिवेश का परिचायक रहा है। किसान की किसानी और मोर परस्पर पूरक हैं। शिकारी मोर को मार कर उसके पंखों व मांस का अवैध व्यवसाय करने लगे, जिस से देखते ही देखते मोर विलुप्ति के मुहाने चले गए। छोटूराम ने इस हेतु अभियान चला कर सरकार से मोर के शिकार को अपराध घोषित करवाया।
 

          भाखड़ा नांगल बांध
              भाखड़ा नहर

7. भाखड़ा नांगल बांध परियोजना–
सर छोटूराम ने ही भाखड़ा बांध का प्रस्ताव रखा। सतलुज नदी के पानी पर विलासपुर के महाराज का अधिकार था। छोटूराम ने नवंबर 1944 में बिलासपुर के राजा से समझौता किया कि इस नदी का व्यर्थ बहने वाला पानी बांध बना कर एकत्रित किया जाएगा जिस पर सरकार का अधिकार होगा। इस तरह आम आदमी को इस बांध का पानी नहरों के माध्यम से मिलना प्रारंभ हुआ। 8 जनवरी 1945 को छोटूराम जी की तबियत खराब हो गई। डाक्टर ने उन्हें आराम करने कि सलाह दी। परंतु बांध का काम अहम था अतः फाइल पर अंतिम हस्ताक्षर करने अनिवार्य थे। अगले ही  दिन 9 जनवरी को सर छोटूराम का देहांत हो गया। यह बांध भाखड़ा गांव में सतलुज नदी पर कंक्रीट से बनाया गया बांध है। इसी बांध पर जल विद्युत संयंत्र लगा कर बिजली उत्पादन किया जा रहा है। भाखड़ा गांव से इसी बांध से भाखड़ा नहर निकाली गई।
               भाखड़ा नहर

दूरदर्शी सोच के धनी सर छोटूराम - 
आज उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, व दिल्ली राज्यों में भाखड़ा बांध से सिंचाई, पेयजल और बिजली की आवश्यकताओं की पूर्ति हो रही है। भारत की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक भाखड़ा - नांगल बांध परियोजना के कारण ही यह क्षेत्र वीराने से गुलजार हुआ।

ऐसे ही सच्चे जन सेवक को हमारी श्रद्धांजलि।

स्त्रोत -
सर छोटूराम के सम्बंध में लिखे गए लेख।
चित्र -
गूगल के साभार

शमशेर भालू खां 
जिगर चुरूवी 
9587243963

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