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कानूनी ड्राफ्ट

    विवाह विच्छेद (तलाकनामा)

500 का स्टांप पेपर

फोटो       फोटो

मैं ..............पुत्र ............. जाति ........ निवासी ........... (आधार नं. ............)। 
जिसे इस दस्तावेज में आगे "प्रथम पक्ष" के नाम से सम्बोधित किया गया है।

द्वितीय पक्ष
........ पत्नी......... पुत्री....... जाति ..... निवासी.......... हाल ........(आधार नं. 713739224624) जिसे इस दस्तावेज में आगे "द्वितीय पक्ष" उल्लेखित किया गया है।
जो कि हम दोनों पक्षकारान का निकाह दिनांक ...... को ग्राम/शहर......., तहसील......... जिला ........में ........ रीति रिवाज एवं समाज में प्रचलित रस्मों रिवाज के मुताबिक सम्पन्न हुआ था। निकाह/विवाह के पश्चात् हम दोनों पक्षकारान में छोटी मोटी बातों को लेकर आपस में विवाद एवं तनाव रहने लगा एवं दोनों पक्षकारों के मध्य आपसी वैचारिक मतभेद बढ़ते ही रहे। इसलिए दोनों पक्षकारान के मध्य विवाद इतना बढ़ गया, कि हमारे मन एवं विचारों का मिलान असंभव हो गया, अब परिस्थितियों यह बन गयी हैं कि हम दोनों पक्षकारान एक छत के नीचे पति-पत्नी की तरह निवास नहीं कर सकते हैं। 
इस पर हम दोनों पक्षकारान के मध्य के मौजिज व्यक्तियों ने हमें व हमारे परिजनों को आपस में बैठा कर समझाईश में यह तय किया गया कि जब परिस्थितियां इस प्रकार की बन गयी हैं कि दोनों पक्षकारान एक साथ पति- पत्नी की तरह नहीं रह सकते हैं तो दोनों ही पक्षकारान को विवाद को ना बढ़ाते हुऐ पारस्परिक सहमति से निकाह विच्छेद कर लेना चाहिए। इस पर हम दोनों पक्षकारान के मध्य पारस्परिक सहमति से निकाह (विवाह) विच्छेद निम्नलिखित शर्तों व शरायतों के आधार पर तहरीर व तकमील करवाया जा रहा है :-
1. यह कि द्वितीय पक्ष द्वारा प्रथम पक्ष को तीन अलग अलग माह में तलाक की सूचना दी जा चुकी है, जिस पर प्रथम पक्ष द्वारा भी अपनी सहमति तीनों दफा अपनी पत्नी को दी जा चुकी है। तत्पश्चात् उक्त दोनों पक्षकारों के मध्य पूर्व में तलाक हो चुका हैं। पिछले तीन माह से द्वितीय पक्षकार ईदत की अवधि की पालना की जा चुकी है तथा मेहर की राशि भी प्रथम पक्षकार द्वारा द्वितीय पक्षकार को अदा कर दी गई है।
2. यह कि हम दोनों पक्षकारान ने निकाह दिनांकित  ......... को सामाजिक स्तर पर आपसी सहमति से उपरोक्त अनुसार विच्छेद कर लिया है। आज के पश्चात् हम दोनों पक्षकारान एक दुसरे के पति पत्नी नहीं समझे व माने जावेंगे। आज के पश्चात् हम दोनों पक्षकारान में पति- पत्नी जैसे हर सम्बन्ध समाप्त समझे जावेगें। आज के पश्चात् हम दोनों पक्षकारान एक दुसरे के पति पत्नी नहीं रहेगें।
3. यह कि दोनों पक्षकारान के एक दूसरे के प्रति किसी तरह से कोई भी कानूनी अधिकार, दायित्व, कर्त्तव्य एवं फर्ज शेष नहीं रहेगें। आज के पश्चात् हम दोनों पक्षकारान के मध्य हर प्रकार के पारिवारिक एवं दाम्पत्ययिक रिश्ते एवं अधिकार समाप्त समझे जावेगें।
4. यह कि हमारे समाज में सामाजिक स्तर पर आपसी सहमति से विवाह विच्छेद करने की प्रथा है जिसके अनुसार हम दोनों पक्षकारों ने आपसी सहमति से पारस्परिक संबंध विच्छेद कर लिए हैं।
5. यह कि हम पक्षकारान के मध्य हमारे इस निकाह को लेकर अथवा अन्य किसी भी प्रकार का कोई विवाद नहीं है तथा ना ही हमने एक दुसरे के खिलाफ कोई मुकदमा आदि की कार्यवाही की है। परिवारजन एवं समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों की मध्यस्थता से समझौता हो गया। जिसके अनुसार दोनों पक्षकार ने पति पत्नी का सम्बन्ध समाप्त करते हुए अलग- अलग जीवन निर्वहन करने का निश्चय किया है।
6. यह कि द्वितीय पक्ष द्वारा विवाह के समय दिये गये दान दहेज का सम्पूर्ण सामान प्रथम पक्ष से द्वितीय पक्ष से प्राप्त कर लिया है तथा अब द्वितीय पक्ष की कोई भी वस्तु अथवा दहेज / सामान, गहना, कपड़ा प्रथम पक्ष व उसके परिवारजन के कब्जे व अधिकार में नहीं है, ना ही प्रथम पक्ष की कोई भी वस्तु, सामान आदि द्वितीय पक्ष के अथवा उसके परिवार के कब्जे व अधिकार में है अर्थात् पक्षकारान के मध्य किसी प्रकार का कोई लेनदेन शेष नहीं है।
7. यह कि द्वितीय पक्षकार से प्रथम पक्षकार ने अपने जीवन पर्यन्त की भरण-पोषण की राशि एकमुश्त ..... रूपये नकद प्राप्त कर ली है एवं अब कोई लेनदेन शेष नहीं है एवं अब दोनों पक्षकारों में भरण-पोषण की राशि को लेकर एवं स्त्रीधन बाबत किसी प्रकार का कोई विवाद शेष नही है, ना भविष्य में ऐसा कोई विवाद  करेंगे।
8. यह कि आज के पश्चात् हम दोनों पक्षकारान एक दुसरे से हर तरीके के सम्बन्धों से आजाद एवं स्वतन्त्र समझे जावेगें। आज के पश्चात् अगर प्रथम पक्षकार चाहे तो अन्यत्र कहीं निकाह करने के लिए स्वतन्त्र रहेगा एवं इसी प्रकार द्वितीय पक्षकार भी चाहे तो कहीं भी निकाह करने के लिए स्वतन्त्र रहेगी। अन्यत्र निकाह करने में कोई भी पक्षकार एक दुसरे के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं कर सकेगा।
9. यह कि आज के पश्चात् हम दोनों पक्षकारान एक दुसरे से हर प्रकार के वैवाहिक बन्धनों से मुक्त एवं स्वतन्त्र समझे जावेगे। आज के पश्चात् हम दोनों के एक दुसरे के प्रति किसी भी प्रकार के कोई भी वैवाहिक, दाम्पत्यीक, पारिवारिक अधिकार उत्तरदायित्व एवं संबंध शेष नहीं रहेगें।
10. यह कि भविष्य में द्वितीय पक्षकार, प्रथम पक्षकार या प्रथम पक्षकार के परिवार की चल व अचल सम्पति में किसी प्रकार का दावा, क्लेम इत्यादि नहीं करेगी एवं ना ही किसी प्रकार से प्रथम पक्षकार या उसके परिवार की सम्पति में हिस्सा पांति लेने की अधिकारीणी रहेगी।

9. यह कि आज के पश्चात् प्रथम पक्षकार व द्वितीय पक्षकार एक दुसरे के खिलाफ किसी भी पुलिस थाना, न्यायालय आदि में कोई दावा मुकदमा आदि नहीं करेगें।
10. यह कि आज के पश्चात् दोनों ही पक्षकार एक दुसरे के खिलाफ किसी तरह का आरोप प्रत्यारोप करके एक दुसरे को शारीरिक, मानसिक व आर्थिक नुकसान भी नहीं पहुंचायेगें।
लिहाजा हम दोनों पक्षकारान ने अपनी अपनी स्वतन्त्र सहमति एवं इच्छा से, बिना दबाव एवं बिना किसी नशे पते के, स्वस्थ मन एवं स्वतन्त्र चित से, पारस्परिक सहमति से दो गवाहान के समक्ष हमारे निकाह का विच्छेद कर यह लिखा- पढी 500/- रूपये के स्टाम्प पर लिखकर दोनों ने अपने अपने हस्ताक्षर कर निष्पादित कर दिया है कि प्रमाण रहे वक्त जरूरत काम आवे।

प्रथम पक्षकार  द्वितीय पक्षकार

गवाह -
प्रथम पक्षकार - 
गवाह - 
1 श्री......... पुत्र/पुत्री/पत्नी श्री........ जाति......निवासी.....
मोबाइल - 
2 श्री......... पुत्र/पुत्री/पत्नी श्री........ जाति......निवासी.....
मोबाइल - 
3 श्री......... पुत्र/पुत्री/पत्नी श्री........ जाति......निवासी.....
मोबाइल - 
4 श्री......... पुत्र/पुत्री/पत्नी श्री........ जाति......निवासी.....
मोबाइल -

ड्राफ्ट by 
शमशेर भालू खां सहजूसर, चूरू 9587243963


विवाह विच्छेद (खुलानामा)

मैं .... उम्र ..... वर्ष बीबी ....... पुत्री ....... जाति ....... निवासी .......
.. (आधार नं......) हाल निवासी........., तहसील.... जिला ........ जो कि खुलानामा जैल के मुताबिक मुजरी (निष्पादित) कराती हूं कि :-
मेरा निकाह .......पुत्र .......जाति ........निवासी .......... के साथ दिनांक ......... में मुस्लिम मजहबी रस्म-ओ-रिवाज से सर-ए मोहम्मदी के ताबे एवं जाहिरे कानून (कानूनानुसार) मेरे निवास.............. तहसील ........ जिला ...... में मुकम्मल हुआ था।
यह कि ......
1. वरवक्त निकाह हम दोनों बालिग थे, अतः निकाह के समय ही मुकलावे के पश्चात् प्रथम बार मैं अपने हक हकूक जोजियात अदा करने मेरे शौहर के घर रतनगढ़ आ गई। हम दोनों के मध्य मुबाशरत (यौनिक संसर्ग) से ...... औलाद पैदा हुई/ कोई औलाद पैदा नहीं हुई।
2. मेरे निकाह के कुछ वक्त तक हमारा आपसी रवैया ठीक ठाक रहा लेकिन कुछ वक्त बाद हम दोनों खाविंद-ओ-बीबी के दरमियान छोटी- मोटी बातों को लेकर आपसी खलिश (मनमुटाव) रहने लगी ओर हम दोनों के बीच में बुरे हालात इस कदर पैदा हो गये कि हम दोनों का बतौर खाविंद-ओ-बीबी एक साथ एक छत के नीचे रहकर एक दुसरे के हक में हक-हकूक खाविन्द-जोजियत अदा करना मुश्किल हो गया।
3. इस दरम्यिन हमारे मुआशरे और खानदान के मौजिज अफराद (व्यक्तियों) के जरिये काफी समझाईश करने के बाद भी हम खाविंद-ओ-बीबी में खलिश दूर नहीं हुई और साथ-साथ रहना मुमकिन नहीं रहा और हमारा घर आबाद नही रहा।
4. अब हम दोनों खाविंद-ओ-बीबी ने यह मुनासिब समझा कि मैं अपने शौहर ....... से तलाक हासिल कर लूं ताकि हम दोनों अपनी अपनी जिन्दगी में अलहेदगी अख्त्यार कर सकें।
5. मैं बालिग हूं और अपने मुस्तकबिल (भविष्य) के बारे में भला- बुरा सोच व समझ सकती हूं। इसलिए मैंने मेरे शौहर....... पुत्र ......... जाति........... निवासी ......... को तारीख.... माह.......वर्ष.....में तलाक की पेशकश की जिसे कि मेरे शौहर ने कबूल करके तारीख.......... को पहली बार तलाक, तारीख ........... को दूसरी बार तलाक और तारीख ........... को तीसरी बार तलाक मौखिक रूप से रूबरू गवाहान के दे दिया है। मैं मेरे शौहर के जरिये दिये गये तीन तलाक को खुले के बुनियाद पर कुबुल करती हूं और खुला करती हूं कि मेरा व मेरा शौहर.......... का आज के बाद व मुस्तकबिल में खाविंद-ओ-बीबी का रिश्ता खत्म हो गया है और अब मैं खुला करती हूं कि....... अपना निकाह कहीं किसी दीगर औरत से करें तो उसके बाबत मुझे किसी किस्म को उज़र-ओ-ऐतराज नहीं होगा और आज तारीख को मुझ .....को ........ ने रूबरू गवाहान मेरी मेहर की तयशुदा रकम निकाह के वक्त ही अदा कर दी थी व ईदत खर्चा व मेरे स्त्रीधन बाबत भी लेनदेन हो चुका है तथा आजीवन भरण पोषण की रकम ........(अखरे....-रूपये मुझे .......... से नकद प्राप्त हो चुकी है। अब कोई मेहर व स्त्रीधन, भरण पोषण की रकम ........की तरफ बकाया नहीं है और मेरे निकाह के समय तथा निकाह के बाद में मुझे मेरे मुआशरे और खानदान के जरिये दिया गया तमाम सौगात व दहेज का सारा सामान मिल गया है और अब मेरी कोई सौगात व दहेज का सामान बाकी नहीं है।
6. सामान सद्दाम हुसैन या उसके किसी रिश्तेदार के पास बकाया तथा मेरे तमाम कपड़े, बर्तन, सोना-चांदी के जेवरात तमाम दहेज मेरे पास ही है।
7. यह कि मैं, मेरे खानदान के लोग कभी भी मुस्तकबिल में मेरे शौहर से किसी प्रकार का कोई हक, हकूक की मांग नहीं करेंगे ना ही मुझे इस बाबत कोई दावा करने का हक हासिल होगा।
8. यह कि मुस्तकिल नफ्का (स्थाई भरण पोषण) की रकम बाबत मुस्तकबिल (भविष्य) में मैं कोई भी रकम का मुतालबा अपने शौहर............. से नहीं करूंगी तथा ना ही मुझे मेरे नफ्का की किसी भी रकम को इस हेतु दावा करने का हक होगा।
9. यह कि आज दिन तक मैं हामिला (गर्भवती) नहीं हूं।
10. यह कि मैं मुस्तकबिल में अपने शौहर....... और उसके खानदान से मनकूला और गैर-मनकूला (चल-अचल) जायदाद में अपना कोई हिस्सा नहीं मागूंगी तथा न ही इस बारे में कोई दावा/ क्लेम किसी भी अदालत में चल सकेगा।
11. यह कि मैं अब तथा मुस्तकबिल में ......के खिलाफ व उसके खानदान के खिलाफ कोई कानूनी दीवानी और फौजदारी कार्यवाही मेहर, नफ्का (भरण पोषण) की रकम, दहेज इत्यादि से सम्बन्धित नहीं करूंगी यदि कोई कार्यवाही करूं तो उसे झूठा व बेमाना समझा व माना जावे।
लिहाजा यह खुलानामा मैंने मेरी बेदुरूस्ती होश हवास में तथा बिना किसी जब्र इकरार के बिना किसी नशे-पते के व बिना किसी दबाव में लिखवाकर रूबरू गवाहान पढ़, सुन व समझकर उसे सही होना मानकर इस पर अपने अपने दस्तखत/अंगूठा निशानी करके तहरीर व तकमील कर दिया है ताकि सनद् रहे और वक्त जरूरत पर काम आवे। 
उक्त खुलानामा जैल तलाक में...... की सहमति है, जिसके सहमति स्वरूप हस्ताक्षर / अंगूठा निशानी इस दस्तावेज में नीचे कर दिये गये है।

दिनांक - 
स्थान - 

दस्तखत - 
1.                     2.     

गवाह - 
1 श्री......... पुत्र/पुत्री/पत्नी श्री........ जाति......निवासी.....
मोबाइल - 
2 श्री......... पुत्र/पुत्री/पत्नी श्री........ जाति......निवासी.....
मोबाइल - 
3 श्री......... पुत्र/पुत्री/पत्नी श्री........ जाति......निवासी.....
मोबाइल - 
4 श्री......... पुत्र/पुत्री/पत्नी श्री........ जाति......निवासी.....
मोबाइल -


सेवा में,
श्रीमान थानाधिकारी महोदय,
पुलिस थाना सदर, चूरू (चूरू)

विषय - धोखाधड़ी कर अन्य व्यक्ति को बेचा गया भूखंड पुनः अन्य व्यक्तियों को बेचने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिकी रिपोर्ट दर्ज करवाने बाबत।
​महोदय,
मैं ​अमरीन बानो पत्नी श्री अफजल खान जाति कायमखानी आयु 38 वर्ष, निवासी सहजू सर, जिला व तहसील चूरू (राजस्थान), मोबाइल नंबर - 9636176314 चूरू राजस्थान की मूल निवासी हूं।
यह कि मुझ प्रार्थीया ने दिनांक 21/12/2023 को सब रजिस्ट्रार कार्यालय चूरू में जमीदारा सीटी, भालेरी रोड चूरू में स्थित तीन भूखंड संख्या 172, 173 174  श्री इंदरपाल सिंह पुत्र हरलाल सिंह जाति जाट निवासी 35 शिव कॉलोनी झुंझुनू राजस्थान से क्रय कर रजिस्ट्री करवाई।
यह कि रहमान खां पुत्र सलीमुद्दीन खान जाति कायमखानी निवासी अगुणा मौहल्ला चूरू, मोहम्मद शरीफ पुत्र श्री पीर बख्श जाति काजी निवासी शेखावत कॉलोनी चूरू ने मेरे देवर शमशेर खान पुत्र नवाब अली खां निवासी सहजूसर चूरू को पंचायत समिति चूरू के सामने बुला कर जमीदारा सीटी भालेरी रोड चूरू में तीन प्लाट बिकाऊ होने, जिसका मालिकाना हक रहमान खां पुत्र सलीमुद्दीन खान का होना बता कर सौदा करने की बात की, जिस पर मेरे देवर ने हमारे घर आ कर बात करने के लिए कहा।
यह कि इसके बाद बुद्दे खां पुत्र सादुले खां जाति कायमखानी निवासी सहजूसर जिला व तहसील चूरू दिनांक 05/12/2023 को मेरे घर, उक्त जमीदारा सीटी भालेरी रोड चूरू में पूर्व में की गई बात के अनुसार प्लाट बिकाऊ होने एवं उन्हें बेचने के लिए मेरे पास आया।
इसी दिन मैने उक्त बुद्दे खां पुत्र सादुले खां को तीन प्लाट संख्या 172, 173 एवं 174 क्रय करने हेतु 
पेशगी रकम 200000 अखरे दो लाख रुपए अदा कर दिए एवं शेष राशि रजिस्ट्री के समय देने का वचन दिया।
उक्तानुसार दिनांक 21/12/2023 को बुद्दे खां पुत्र सादुले खां जाति कायमखानी निवासी सहजूसर ने रजिस्ट्री करवाने बाबत मुझे चूरू बुलाया। जिस के बाद मैने बुद्दे खां के मार्फत रजिस्ट्री करवाने वाले व्यक्ति इंदरपाल सिंह धनखड़ पुत्र हरलाल सिंह जाति जाट निवासी 35 शिव कॉलोनी झुंझुनू को ₹427500 (अखरे रुपए चार लाख सत्ताइस हजार पांच सौ मात्र) नकद अदा कर दिए। 
इसके बाद साजिद खान पुत्र बुद्दे खां जाति कायमखानी निवासी सहजूसर जिला व तहसील चूरू को (श्री बुद्दे खां के आकस्मिक निधन के कारण) दिनांक 12/06/2024 को शेष मार्जिन मनी एवं अन्य शेष राशि ₹250000 (दो लाख पचास हजार रुपए मात्र) का नकद भुगतान किया।
इस प्रकार से मेरे द्वारा कुल ₹877500 (अखरे रुपए आठ लाख सतहंतर हजार पांच सौ मात्र) का भुगतान किया गया।
यह कि अप्रैल 2026 में राकेश कुमार पुत्र मंशाराम राहड़ जाति जाट निवासी चलाकोई चूरू ने एक स्टाम्प पेपर पर उक्त भूखंडों में से भूखंड संख्या 174 को उनके द्वारा वर्ष 2012 में क्रय करने का दावा किया।
इसके बाद दिनांक 01/06/2026 को सुरेंद्र सिंह नाम के व्यक्ति ने भूखण्ड संख्या 173 की रजिस्ट्री वर्ष 2011 में उसके नाम होने का दावा कर मेरे द्वारा लगवाई गई पट्टियों एवं तारबंदी को हटा कर रेडीमेड दीवार बनाने का काम शुरू कर दिया।
अतः आप से सादर निवेदन है कि उक्त व्यक्तियों क्रमशः 
1. बुद्दे खां पुत्र सादुले खां जाति कायमखानी निवासी सहजूसर 
2. साजिद खान पुत्र बुद्दे खां जाति कायमखानी निवासी सहजूसर जिला व तहसील चूरू 
3. रहमान खां पुत्र सलीमुद्दीन खान जाति कायमखानी निवासी सहजूसर जिला व तहसील चूरू 
4. इंद्रपाल सिंह धनखड़ पुत्र हरलाल सिंह जाति जाट निवासी 35 शिव कॉलोनी झुंझुनू 
5. मोहम्मद शरीफ पुत्र पीर बख्श जाति काजी निवासी शेखावत कॉलोनी चूरू 
के विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्यवाही कर मेरे भूखंड का पुनर्भरण अथवा खर्च की गई राशि (मय हर्जा खर्चा) दिलवाने की कृपा करावे।
धन्यवाद।

भवदीया

अमरीन बानो पत्नी अफजल खां जाति कायमखानी निवासी सहजूसर जिला व तहसील चूरू 
मोबाइल नंबर - 9636176314



निम्नानुसार कानूनी कार्यवाही हेतु निवेदन करती हूँ:  
​यह कि प्रार्थिया ने वर्ष 2023 में चूरू स्थित एक भूखंड (प्लॉट) खरीदा था, जिसकी एक ही वैध रजिस्ट्री में तीन प्लॉट नंबर 172, 173, और 174 शामिल हैं। यह संपत्ति गाजर भालेरी, तारानगर रोड, चूरू पर स्थित है। उक्त भूखंड की रजिस्ट्री नियमानुसार उप-पंजीयक कार्यालय में पंजीकृत है।  
​यह कि उक्त प्लॉट को खरीदने के बाद से (वर्ष 2023 से) लगातार इस पर प्रार्थिया का ही शांतिपूर्ण अधिपत्य (कब्जा) रहा है। प्रार्थिया ने अपनी जमीन की सुरक्षा के लिए चारों तरफ पत्थर की पट्टियां गाड़कर और कटीले तारों से पुख्ता तारबंदी (Fencing) करवा रखी थी।  
​यह कि उक्त प्लॉट की डील/सौदा करवाने में मुख्य रूप से विक्रेता और उसके साथी रहमान (टीचर), शरीफ काजी, साजिद खान, बुद्ध खान और बुद्ध खान का साडू शामिल थे। इन सभी लोगों ने प्रार्थिया को पूर्ण विश्वास में लिया, भूखंड के एवज में पूरा पेमेंट (पैसा) ऐंठा और उसके बदले में उक्त रजिस्ट्री प्रार्थिया के पक्ष में करवाई थी।  
​यह कि कुछ दिन पहले प्रार्थिया के पास कुछ अज्ञात/विपक्षी लोगों के फोन आए, जिन्होंने इस भूखंड पर अपना मालिकाना हक होने का झूठा दावा किया। एक व्यक्ति ने वर्ष 2012 का स्टांप होने का दावा किया और दूसरे व्यक्ति ने वर्ष 2012 की रजिस्ट्री होने की बात कही, जिसमें प्लॉट नंबर 173 की रजिस्ट्री और 174 का इकरारनामा (काम) होने का दावा किया गया है।  
​यह कि इस घटनाक्रम से अब यह पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है कि विक्रेता और उसके साथियों (रहमान टीचर, शरीफ काजी, साजिद खान, बुद्ध खान व अन्य) ने एक सोची-समझी साजिश और आपराधिक षड्यंत्र के तहत प्रार्थिया के साथ लाखों रुपये की धोखाधड़ी (Fraud) की है। इन्होंने पूर्व में किसी और के हक में दस्तावेज निष्पादित करने के बावजूद, उक्त तथ्यों को जानबूझकर छुपाया और प्रार्थिया को वही प्लॉट दोबारा बेचकर गंभीर जालसाजी को अंजाम दिया।  
​यह कि दिनांक 03 जून 2026 [कल रात] को रात के अंधेरे में उक्त विपक्षी लोग और भू-माफिया लाठी-डंडों व अवैध हथियारों से लैस होकर मौके पर आए और उन्होंने प्रार्थिया द्वारा जमीन पर लगाई गई पत्थर की पट्टियां उखाड़ दीं, तारबंदी तोड़ दी और वहां जबरन अवैध निर्माण (कंस्ट्रक्शन) करने की कोशिश कर रहे हैं। प्रार्थिया द्वारा विरोध करने पर उसे व उसके परिवार को जान से मारने की गंभीर धमकी दी जा रही है।  
​अतः श्रीमान जी से नम्र निवेदन है कि:
​(क) उक्त जालसाज व धोखाधड़ी करने वाले आरोपियों (विक्रेता, रहमान टीचर, शरीफ काजी, साजिद खान, बुद्ध खान व अन्य साथियों) के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, अवैध वसूली, तोड़फोड़ व जान से मारने की धमकी देने की सुसंगत धाराओं में तुरंत FIR (मुकदमा) दर्ज की जाए।  
​(ख) मौके पर तुरंत पुलिस जाब्ता भेजकर भूखंड संख्या 172, 173, 174 (गाजर भालेरी, तारानगर रोड, चूरू) पर चल रहे अवैध निर्माण और जबरन कब्जे के प्रयास को तुरंत रुकवाया जाए (यथास्थिति बहाल की जाए)।  
​(ग) प्रार्थिया अमरीन बानो को न्याय दिलाया जाए तथा उसके एवं उसके परिवार के जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।  
​संलग्न दस्तावेज:
​प्रार्थिया की वर्ष 2023 की मूल रजिस्ट्री की छायाप्रति।  
​मौके पर हुई तोड़फोड़ व उखाड़ी गई पट्टियों के फोटोग्राफ्स।  
​आरोपियों के नाम व उपलब्ध मोबाइल नंबरों की सूची।  
​दिनांक: 03-06-2026
स्थान: चूरू (राजस्थान)  
​प्रार्थिया
(अमरीन बानो)
पत्नी श्री अफजल खान
निवासी: सहजू सर, चूरू
मो. नं: 9636176314
ड्राफ्ट by - 
शमशेर भालू खां सहजूसर
9587243963

सेवा में,
श्रीमान थानाधिकारी महोदय,
महिला थाना, चूरू 
विषय - पति द्वारा दहेज के लिए प्रताड़ित करने के लिए वाद दायर करने बाबत।
महोदय जी,
उपर्युक्त विषय अंतर्गत सादर निवेदन है कि मैं मनोज पत्नी राकेश कुमार पुत्री नारायण राम जाति जाट, निवासी ग्राम आसल खेड़ी चूरू हाल राणासर, चूरू शपथ पूर्वक बयान करती हूं कि - 
1. मेरा विवाह दिनांक 22/05/2013 को हिंदू रीति रिवाज से मेरे गांव राणासर चूरू में सम्पन्न हुआ।
2. यह कि मेरा एवं मेरे दो भाइयों का विवाह आटा - साठा प्रथा से हुआ।
3. मेरे पति राकेश कुमार पुत्र भंवर लाल जाति जाट निवासी आसलखेड़ी चूरू जो कि ट्रैक्टर चलाने का काम करता है, ने बार बार कभी हैरो, कभी ट्रॉली तो कभी अन्य साधन लाने के लिए मुझे अपने मायके भेज कर रुपए आदि लाने के लिए विवश किया। दो बार मैंने अपने पिता से रकम ला कर उन्हें दी। तीसरी बार मना करने पर, सो लाख रुपए ले कर आने पर ही घर में आने देने की बात कह कर मेरी छोटी भाभी को राणासर से ले गए एवं मुझे पीहर भेज दिया।
4. मैं लगभग पांच वर्ष से पीहर में बैठी हूं।
5. मेरे परिवार ने दो - तीन बार मुझे ससुराल ले जाने के लिए समाज के लोगों को भेजा कर कोई परिणाम नहीं निकला।
6. गत एक माह पहले राणासर एवं सहजूसर के मध्यस्थों को भेजा परन्तु निराशा हाथ लगी।
अतः आप से निवेदन है कि मुझे मेरी ससुराल में रखा मेरे पिता द्वार दिया गया दहेज का सामान वापस दिलवाया जावे, साथ ही मेरे दो बच्चों एवं मेरे पालन पोषण हेतु 25000 रुपया मासिक गुजारा भत्ता दिलवाया जावे।
धन्यवाद।

प्रार्थिया 
मनोज पत्नी राकेश कुमार पुत्री नारायण राम जाति जाट निवासी ग्राम आसल खेड़ी चूरू हाल राणासर चूरू 
मोबाइल -

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शायर का ताअरूफ -  नाम - शमशेर खान  उपनाम - प्रेम, शमशेर गांधी तखल्लुस - पहले परवाना नाम से लिखना शुरू किया। पत्नी अख्तर बानो (सदफ) के सुझाव पर जिगर चूरूवी नाम से लिखना शुरू किया। पैदाइश - 18.04.1978 सहजूसर, चूरू (राजस्थान) पिता का नाम - श्री भालू खां (पूर्व विधायक (1980 से 1985), चूरू। माता का नाम - सलामन बानो (गृहणी) ताअलिम -  1. रामावि सहजूसर में पहली कक्षा में दाखिला 10.07.1984 से 1993 में मेट्रिक तक। 2. राउमावि बागला, चूरू से हेयर सेकंडरी 1993 से 1995 तक 3. राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण विद्यालय भाषाई अल्पसंख्यक अजमेर से BSTC, 1995 से 1997 4. राजकीय लोहिया महाविद्यालय चूरू से स्वयंपाठी के रूप में स्नातक 1998 से 2001 तक (महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, अजमेर) 5. राजकीय लोहिया महाविद्यालय चूरू से स्वयंपाठी के रूप में अधिस्नातक 2004 से 2005 तक (महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय बीकानेर से गोल्ड मेडलिस्ट - 2005 उर्दू साहित्य) 6. कश्मीर विश्वविद्याल, श्रीनगर के नंद ऋषि शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय से B.Ed.- (2007 - 8) 7. इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय से विशेष आवश्यकता विद्यार्...

पेपर 1.3 संविदा विधि

संबिदा विधि-1 पेपर प्रथम सेमेस्टर 3 डॉक्टर भीमराव अंबेडकर लॉ विश्वविद्यालय, जयपुर       पाठ्यक्रम प्रश्न पत्र 1.3               संविदा कानून-I UNIT-I Definition and Classification of Contracts इकाई-I: अनुबंध की परिभाषा और वर्गीकरण -  1.1 अनुबंध का अर्थ, तत्व और विशेषताएं 1.2 अनुबंध का गठन और वर्गीकरण -  विलेख और साधारण अनुबंध, औपचारिक लिखित दस्तावेज और सामान्य मौखिक या लिखित समझौते, द्विपक्षीय और एक पक्षीय अनुबंध, व्यक्त और निहित अनुबंध,  वैध, शून्य, शून्यकरणीय और अवैध अनुबंध, निष्पादित और निष्पादनीय अनुबंध। 1.3 प्रस्ताव और प्रस्ताव के लिए आमंत्रण,  प्रस्ताव का संवहन और प्रतिसंहरण, प्रस्ताव की सूचना देना और उसे वापस लेना। 1.4   प्रस्ताव की स्वीकृति, स्वीकृति का संवहन और प्रतिसंहरण 1.5 मानक प्रपत्र अनुबंध और ई-अनुबंध इकाई II प्रतिफल (Consideration) 2.1 . प्रतिफल - प्रतिफल का अर्थ, परिभाषा और तत्व; प्रतिफल का महत्व और पर्याप्तता; अनुबंध का संबंध, प्रतिफल के प्रकार और अपवाद। 2.2 . अन...

महाराज पृथ्वीराज चौहान की वंशावली

चौहान वंश के महान सम्राट पृथ्वीराज चौहान को अन्य जातियों द्वारा उनके वंशज होने का अनेक क्षेत्रों में विवाद पैदा कर रहे है। अतः पृथ्वीराज चौहान की वंशावलि राजस्थान के महान लेखक इतिहासकार संत श्री कान्हाराम की पुस्तक पेज संख्या 76,77,78 व दशरथ शर्मा की पुस्तक Early Chauhan Dynasties", pp.109 का संदर्भ लिया गया है। संत श्री कान्हाराम[4] ने लिखा है कि.... [पृष्ठ-76]: ईसा की दसवीं सदी में प्रतिहारों के कमजोर पड़ने पर प्राचीन क्षत्रिय नागवंश की चौहान शाखा शक्तिशाली बनकर उभरी। अहिच्छत्रपुर (नागौर) तथा शाकंभरी (सांभर) चौहनों के मुख्य स्थान थे। चौहनों ने 200 वर्ष तक अरबों, तुर्कों, गौरी, गजनवी को भारत में नहीं घुसने दिया। चौहनों की ददरेवा (चुरू) शाखा के शासक जीवराज चौहान के पुत्र गोगा ने नवीं सदी के अंत में महमूद गजनवी की फौजों के छक्के छुड़ा दिये थे। गोगा का युद्ध कौशल देखकर महमूद गजनवी के मुंह से सहसा निकल पड़ा कि यह तो जाहरपीर (अचानक गायब और प्रकट होने वाला) है। महमूद गजनवी की फौजें समाप्त हुई और उसको उल्टे पैर लौटना पड़ा। दुर्भाग्यवश गोगा का बलिदान हो गया। गोगाजी के बलिदान दिवस भाद्रपद...

👤 शमशेर भालू खान

📍 कायमखानी बस्ती सहजुसर ,चूरू राजस्थान Pin :-331001

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