Skip to main content

उर्दू सिंधी के गुनाहगारों पर मुकदमे बाबत

सलाम साथियों,
  नवम्बर 2020 से चला मेपिंग का काम जिस में सरकार की मंशा तृतीय भाषा(सिंधी,पंजाबी,गुजराती,संस्कृत व उर्दू) के ( स्कूल के कक्षा 6 से 8 में) 10 बच्चे होने पर नवीन पद स्वतः सृजित होने की थी।
काम भी हुआ हमारे लोगों ने बहुत मेहनत की जिस से हम मुतमयीन हो गये थे कि 4300 नवीन उर्दू के पद सृजित होंगे।

बीच के वक्फे में हम स्कूलों में जाकर फिर से जानकारी नहीं ले सके और ज्यादातर प्रधानाध्यापक जी ने (उर्दू व सिंधी) की मेपिंग को बदल कर संस्कृत कर दिया पद सिर्फ 1042 ही बने और इस रीट में आये 309।

इस जालसाजी व धोखाधड़ी मे निदेशालय बीकानेर, ज़िला  शिक्षा अधिकारी,ब्लॉक शिक्षा अधिकारी,नोडल/पंचायत शिक्षा अधिकारी प्रधानाध्यापक व शालादर्पन प्रभारी जिम्मेदार हैं।

सभी साथी इस तरह के स्कूल जहां
(1) बिना सहमति के विषय का चयन किया गया हो,
(2) पहले सहमति ली बाद में बदलाव कर दिया हो
(3) छात्रों को दबाव/बहलाकर/बिना बताये हस्ताक्षर करवाया जाना पाया गया हो
(4) मनमर्ज़ी से मेपिंग कर दी हो।
(5) अन्य कारण से इच्छित विषय पढ़ने से वंचित किया गया हो।
की सूची बनाकर व एक प्रार्थना पत्र माननीय न्यायालय के नाम लिख कर अभिभावकों व छात्रों के हस्ताक्षर करवाकर भिजवाएं।

हमने बहुत ज्ञापन,यात्रा,धरने हड़ताल कर ली।

अब हम संबंधित पर थाने/कोर्ट/मानवाधिकार आयोग/राज्य लोकपाल के माध्यम से फौजदारी व अन्य धाराओं में मुक़दमा करेंगे।

मेरे नम्बर 9587243963 पर व्हाट्सएप व sambhalu36@gmail.com पर मेल करें।

Elementary mai L2 urdu sanctioned post  663  h
Total working L2 urdu 901 ,in which  228 are working on L2 urdu post and 673 are working on L1 post.

आपका 
शमशेर भालुखान

Comments

Popular posts from this blog

बासनपीर मामले की हकीकत

इस ब्लॉग और मेरी अन्य व्यक्ति से हुई बातचीत पर मंहत प्रतापपुरी का बयान जीवनपाल सिंह भाटी की आवाज में सत्य घटना सद्भावना रैली बासनपीर जूनी पूर्व मंत्री सालेह मुहम्मद का बयान बासनपीर जूनी के सत्य एवं जैसाने की अपनायत की पड़ताल -  पिछले कुछ दिनों से जैसलमेर के बासन पीर इलाके का मामला सामने रहा है। कहा जा रहा है कि पूर्व राज परिवार की जमीन पर बासनपीर गांव के लोगों द्वारा कब्जा किया जा रहा है। नजदीक से पड़ताल करने पर हकीकत कुछ ओर निकली। जिसके कुछ तथ्य निम्नानुसार हैं - रियासत काल में सन 1662 में बीकानेर और जैसलमेर रियासत के बीच युद्ध हुआ। इस युद्ध में जैसलमेर सेना के दो वीर योद्धा सोढ़ा जी और पालीवाल जी शहीद हो गए। युद्ध के बाद बासन पीर (युद्ध स्थल) तालाब की तलहटी पर शहीदों की स्मृति में छतरियां बनवाई हैं। जैसलमेर के चारों और 120 किलोमीटर इलाके में 84 गांव पालीवाल ब्राह्मणों ने बसाए जिनमें से एक गांव बासनपीर जूनी भी था। पालीवाल ब्राह्मण समृद्ध किसान और व्यापारी थे, रियासत के दीवान सालिम सिंह से अनबन के कारण सन् 1825 में सभी गांव खाली करने को मजबूर हो गए। पालीवाल...

✍️कायम वंश और कायमखानी सिलसिला सामान्य इतिहास की टूटी कड़ियाँ

कायमखानी समाज कुछ कही कुछ अनकही👇 - शमशेर भालू खां  अनुक्रमणिका -  01. राजपूत समाज एवं चौहान वंश सामान्य परिचय 02. कायम वंश और कायमखानी 03. कायमखानी कौन एक बहस 04. पुस्तक समीक्षा - कायम रासो  05. कायम वंश गोत्र एवं रियासतें 06. चायल वंश रियासतें एवं गोत्र 07. जोईया वंश स्थापना एवं इतिहास 08. मोयल वंश का इतिहास 09. खोखर वंश का परिचय 10. टाक वंश का इतिहास एवं परिचय  11. नारू वंश का इतिहास 12 जाटू तंवर वंश का इतिहास 13. 14.भाटी वंश का इतिहास 15 सरखेल वंश का इतिहास  16. सर्वा वंश का इतिहास 17. बेहलीम वंश का इतिहास  18. चावड़ा वंश का इतिहास 19. राठौड़ वंश का इतिहास  20. चौहान वंश का इतिहास  21. कायमखानी समाज वर्तमान स्थिति 22. आभार, संदर्भ एवं स्त्रोत कायम वंश और कायमखानी समाज टूटी हुई कड़ियां दादा नवाब (वली अल्लाह) हजरत कायम खां  साहब   नारनौल का कायमखानीयों का महल     नारनौल में कायमखानियों का किला मकबरा नवाब कायम खा साहब हांसी,हरियाणा   ...

✅इस्लाम धर्म में व्यापार, ब्याज एवं मुनाफा

अरब व्यापारी हर देश में हर देश का हर एक सामान खरीदते और बेचते थे। अरब में व्यापार -  किसी भी क्षेत्र में सभी सामान उपलब्ध नहीं हो सकते। हर क्षेत्र का किसी ना किसी सामान के उत्पादन में विशेष स्थान होता है। उपलब्ध सामग्री का उत्पादन, भंडारण, परिवहन एवं विपणन ही व्यापार कहलाता है। क्षेत्र अनुसार इसके अलग - अलग नाम हो सकते हैं। इस्लाम धर्म का उदय अरब में हुआ। अरब क्षेत्र में तीन प्रकार की जनजातियां रहती थीं। बायदा - यमनी  अराबा - कहतानू (मिस्र) मुस्ता अराबा - अरबी (इस्माइली) यह जनजातियां खेती, व्यापार एवं अन्य कार्य करती थीं। हजारों सालों से इनका व्यापार रोम, चीन एवं अफ्रीका के देशों से रहा। अरब व्यापारी पश्चिम में अटलांटिक महासागर से लेकर पूर्व में अरब सागर तक, अरब प्रायद्वीप तक व्यापार करते थे। अरब नील से ह्यांग्हो तक व्यापार करते थे। अरब प्रायद्वीप कई व्यापार मार्गों के केंद्र में स्थित था, जिसमें दक्षिण पूर्व एशिया, भूमध्य सागर और मिस्र शामिल थे। यहां मुख्य सभ्यताएं रहीं -  - सुमेरियन एवं बेबीलोन  सभ्यता (मेसोपोटामिया/इराक) (दजला फरात) की सभ्यता। - फ...