Case study
गीता हरिहरन बनाम भारतीय रिज़र्व बैंक (1999)
(Githa Hariharan v. Reserve Bank of India, 1999, Supreme Court of India)
यह भारत के अभिभावकता (Guardianship) कानून से जुड़ा एक ऐतिहासिक फैसला है, जिसने माता को भी पिता के बराबर अभिभावक का दर्जा दिलाया।
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⭐ मामले की पृष्ठभूमि
गीता हरिहरन ने अपने बेटे के नाम पर RBI में निवेश करना चाहा।
RBI ने कहा कि बच्चे का “natural guardian” (स्वाभाविक अभिभावक) केवल पिता है, इसलिए बच्चे के नाम पर निवेश पिता ही कर सकता है।
गीता हरिहरन ने इसका विरोध किया और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की कि -
क्या माँ बच्चे की प्राकृतिक अभिभावक (Natural Guardian) नहीं है?
क्या माँ तभी अभिभावक बनेगी जब पिता मर जाए या असमर्थ हो?
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⭐ मूल कानूनी प्रावधान
हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट, 1956 – सेक्शन 6
इसमें लिखा था कि बच्चे का natural guardian है:
1. पहले पिता,
2. फिर माँ
इस भाषा से यह समझ आता था कि माँ तभी अभिभावक बनती है
क) जब पिता
ख) मर जाए,
ग) या असमर्थ हो
घ) या त्याग कर दे।
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⭐ सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय (1999)
अदालत ने कहा -
“after the father” का अर्थ “पिता की मृत्यु के बाद” नहीं है।
इसका मतलब है कि कुछ परिस्थितियों में माँ भी बराबरी से natural guardian हो सकती है।
मुख्य बिंदु
1. माता और पिता—दोनों ही बच्चे के समान रूप से natural guardian हैं।
2. यदि पिता
क) बच्चा नहीं संभाल रहा
ख) अनुपस्थित है
ग) इच्छुक नहीं है
घ) या माँ ही बच्चा पाल रही है—
तो माँ पूर्ण अधिकार से अभिभावक बन सकती है।
3. किसी भी संस्था/सरकार को यह नहीं कहने का अधिकार कि
“माँ guardian नहीं बन सकती”।
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⭐ इस फैसले का प्रभाव
अभिभावकता कानून में लैंगिक समानता (gender equality) की शुरुआत।
सरकारी फ़ॉर्म, बैंक, पासपोर्ट आदि में guardian = mother/father मान्य।
माँ के अधिकारों को संवैधानिक सुरक्षा मिली।
मातृत्व और पितृत्व दोनों को समान दर्जा।
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⭐ सरल भाषा में निष्कर्ष
माँ बच्चे की उतनी ही प्राकृतिक अभिभावक है जितना पिता।
पिता के जीवित रहते हुए भी माँ अकेले guardian बन सकती है।
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कानूनी उत्तर
(Exam style)
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⭐ गीता हरिहरन बनाम भारतीय रिज़र्व बैंक (1999): कानूनी उत्तर
1. मामले का नाम व उद्धरण
Githa Hariharan v. Reserve Bank of India, (1999) 2 SCC 228
यह मामला अभिभावकता (Guardianship) और धारा 6, हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट, 1956 की व्याख्या से संबंधित है।
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2. तथ्य (Facts of the Case)
याचिकाकर्ता गीता हरिहरन ने अपने नाबालिग पुत्र के नाम से RBI में निवेश करना चाहा।
RBI ने आवेदन अस्वीकार कर दिया यह कहते हुए कि—
हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट, 1956 की धारा 6(a) के अनुसार
पिता “Natural Guardian” है,
माँ केवल “after the father” होती है, अर्थात् पिता नहीं होने की स्थिति में ही माँ अभिभावक बन सकती है।
इससे अपमानित होकर याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से पूछा -
क्या पिता के जीवित रहते हुए माँ natural guardian नहीं हो सकती?
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3. मुद्दा (Issues)
मुख्य विधिक प्रश्न:
1. क्या Hindu Minority and Guardianship Act, 1956 की धारा 6(a) में प्रयुक्त शब्द
“after the father” का अर्थ “पिता की मृत्यु के बाद” है?
2. क्या एक हिंदू माँ पिता के जीवित रहते हुए भी नाबालिग बच्चे की Natural Guardian हो सकती है?
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4. तर्क - (Arguments)
याचिकाकर्ता के तर्क -
धारा 6 की भाषा भेदभावपूर्ण है और Article 14 एवं 15 का उल्लंघन करती है।
“after the father” का अर्थ “माता-पिता की तुलना में प्राथमिकता” होना चाहिए, न कि “मृत्यु के बाद”।
यदि पिता नाबालिग के हितों की देखभाल नहीं कर रहा, तो माँ को स्वाभाविक अभिभावक माना जाना चाहिए।
प्रतिवादी (RBI/Union of India) के तर्क
कानून में पिता को पहला प्राकृतिक अभिभावक माना गया है।
माँ केवल पिता के बाद guardian बन सकती है—यह विधायिका की इच्छा है।
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5. निर्णय (Judgment) — सुप्रीम कोर्ट, 3 जज बेंच
अदालत ने याचिकाकर्ता के पक्ष में निर्णय दिया और कहा—
⭐ “after the father” का अर्थ—“death of father” नहीं है।
यह वाक्यांश केवल प्राथमिकता (priority) दिखाता है, पूर्ण वरीयता (absolute preference) नहीं।
⭐ माता भी पिता के समान प्राकृतिक अभिभावक है।
यदि परिस्थितियाँ बताती हैं कि -
पिता बच्चे की परवरिश क) नहीं कर रहा
ख) अनुपस्थित है
ग) इच्छुक नहीं है
घ) या माँ ही देखभाल कर रही है—
तो माँ स्वतः natural guardian (नैसर्गिक अभिभावक) मानी जाएगी।
⭐ कानून की व्याख्या संविधान के अनुरूप होगी
धारा 6 की भाषा को Article 14 और 15 (लैंगिक समानता) के अनुरूप पढ़ा जाएगा।
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6. Ratio Decidendi (कानूनी सिद्धांत)
1. अभिभावकता कानून में लैंगिक समानता लागू होगी।
2. माँ और पिता दोनों समान रूप से natural guardian हैं।
3. “after the father” का अर्थ—“उचित परिस्थितियों में माँ भी guardian हो सकती है”।
4. कोई भी संस्था केवल इस आधार पर कि “माँ guardian नहीं है”, आवेदन अस्वीकार नहीं कर सकती।
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7. प्रभाव (Impact of the Judgment)
भारत में माँ को पूर्ण अभिभावकीय अधिकार मिला।
पासपोर्ट, बैंक, स्कूल, निवेश आदि में माँ = पिता guardian मानी गई।
यह निर्णय महिलाओं के अधिकारों और gender justice की दिशा में ऐतिहासिक माना गया।
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⭐ 8. निष्कर्ष (Conclusion)
गीता हरिहरन केस ने यह सिद्ध किया कि—
माता और पिता दोनों बच्चे के समान रूप से स्वाभाविक अभिभावक (Natural Guardian) हैं।
माँ को केवल पिता के “न होने” पर ही अभिभावक मानने वाली व्याख्या असंवैधानिक है।
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