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फर्जी

                    #फर्जी 
बिहार के सीतामढ़ी जिले एक छोटा सा गांव मेहसौल।
घरों में खुले में पेंट का काम करने वाले राजेश्वर के घर खुशियां मनाई जा रही हैं। बेटा हुआ है बेटा, कहते - कहते दाई बधाइयां बांट रही है। राजेश्वर राजेश्वर आंख बंद किए हाथ जोड़े ईश्वर का धन्यवाद कर रहा है।
समय बीतता गया, बेटा किशोर आंगन में दौड़ने लगा। किशोर बचपन से ही गंभीर और संयमित लड़का था। उसके बोलने, उठने, चलने और खाने में एक अलग सी गंभीरता थी। 
अब किशोर स्कूल जाने लगा। स्कूल में उसके दोस्त बहुत कम पर जो थे वो एकदम पक्के। 
किशोर की सधी हुई दिनचर्या थी, बड़ा होते - होते वो और भी नपा - तुला व्यवहार करने लगा। महसौली में बड़े से आम के पेड़ के नीचे वह अपना कार्यालय बनाता, उसके दोस्त फरियाद ले कर आते और किशोर उन्हें सुलझाता। खेल - खेल में स्कूल के दूसरे साथी भी अपनी समस्या ले कर आने लगे, किशोर उन्हें चुटकियों में सुलझा देता।
स्कूल से कॉलेज शिक्षा के लिए वह अब पटना शहर में आ गया। कॉलेज जाता और उसके बाद उसके तो वही ठाठ। कुछ पुराने साथी आ गए और कुछ नए। किशोर अब बातों की हेरा फेरी का चलता फिरता नमूना बन गया। एटीट्यूड, सलीका और व्यक्तित्व के कारण किशोर का रौब अलग ही रहा।
पढ़ाई पूरी हुई, तीन बार UPSC परीक्षा दी, इंटरव्यू तक गया पर पास नहीं हो सका। 
UPSC परीक्षा पास न कर पाने पर उसने सत्ता तक पहुँचने का एक तेज़ रास्ता खोज निकाला—
अगर आप IAS परीक्षा पास नहीं कर सकते, तो बस IAS बन जाइए।”
और इसी तरह IAS अधिकारी श्री किशोर, 2022 बैच का उदय हुआ।
32 साल का किशोर झारखंड पहुंच जाता है। रांची के जालसाजों से मिलकर डुप्लीकेट कागज बनवा कर तामझाम खड़ा करता है। दस का स्टाफ साथ में, कार्यालय और पटना में कार्यालय को संभालने वाला पंद्रह व्यक्तियों का स्टाफ, महिला भी - पुरुष भी। जाली दस्तावेज़, फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार किए और इस धोखे को कायम रखने के लिए पूरा तंत्र खड़ा कर दिया।
नकली IAS के पास असली मशीनरी पर महीने का बीस लाख रुपए खर्च होने लगा। यह खर्च निकालने के लिए उसने भर्ती विज्ञापन में चयन, PMO/CMO में काम करवाने के नाम पर पैसे लेने शुरू किए। 
फर्जी निरीक्षण, फर्जी निविदाएं, फर्जी फाइलें बनाता। कई पांच करोड़ से अधिक रकम कमीशन में मिली है।
बड़े फंसे लोग अपने अटके काम करवाने के लिए आते किशोर चुटकियों में यह करता और कमिशन लेता, उसकी यह कमाई दो करोड़ प्रति माह से अधिक रही। बिहार, झारखंड और उत्तराखंड CMO दिल्ली PMO या दूसरे कार्यालयों में जबरदस्त धाक के कारण उसका नाम ले कर लोग काम करवाने लगे। 
2022 से अगस्त 2025 तक किशोर की तूती बजने लगी। 
सायरन/हूटर बजते कारों के काफिले के साथ जैसे ही वह पुलिस पायलट के साथ किसी सड़क से गुजरता तो अलग ही शमा बन जाता।
वह अपने कार्यालय से ई - मेल द्वारा अपने संबंधित क्षेत्र में आने की सूचना भिजवाता, जिसमें प्रोटोकॉल संबंधी निर्देश जारी किए जाते।
किशोर अपने आप को प्रधानमंत्री कार्यालय का विशेष जनसंपर्क अधिकारी के रूप में प्रस्तुत करता।
एक दिन 
एक दिन वह भागलपुर दौरे पर निकला जहां उसका सामना स्थानीय एसडीएम से हो गया। एसडीएम ने उससे रैंक और बैच पूछ लिया। बस फिर क्या था…
गुस्से में तमतमाए किशोर ने एसडीएम को एक के बाद एक पांच - सात थप्पड़ यह कहते हुए कि “हमको नहीं पहचानते हो? हमको नहीं पहचानते हो?” रसीद कर दिए। तुरंत सूचना जिलाधीश कार्यालय भिजवाई गई, और एसडीएम ने माफी मांगते हुए मामला रफा दफा करने की विनती की।
एक दिन किशोर बड़े मगरमच्छ के जाल में फंस गया। हुआ यह कि गोरखपुर के रसूखदार (एक महंत) से उसकी झड़प हो गई। उसने IAS होने का रौब झाड़ा, जिसकी शिकायत महंत जी ने लखनऊ CMO में कर दी। 
CID/CB ने जांच शुरू कर लखनऊ में ही जन सुनवाई दरबार लगाते हुए गिरफ्तार कर लिया।
ख़बर अखबारों में छपी, टीवी पर प्रसारित हुई कि गोरखपुर और लखनऊ पुलिस ने फर्जी IAS अधिकारी को पकड़ा।
अखबारों और टीवी पर नाम आने के बाद चार लड़कियां जो अपने आप को उसकी गर्लफ्रेंड होने का दावा करती है में से तीन ने गर्भवती उसके बच्चे की मां होने का दावा कर दिया, हर एक को लगता था कि वह एक सीनियर IAS अधिकारी से रिश्ते में है।
आज किशोर तिहाड़ दिल्ली में सजा काट रहा है, पर रुतबा, एटीट्यूड वही है।
#जिगर_चूरूवी 

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