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बी अम्मा

बी अम्मा
नाम - अबादी बानो बेगम
उपनाम - बी अम्मा 
जन्म - सन् 1850, उत्तर प्रदेश, भारत
मौत -  13 नवम्बर 1924
राष्ट्रीयता- भारतीय
कार्य
1. स्वतंत्रता सैनानी
2. खिलाफत आंदोलन
विवाह - अब्दुल अली खान
(रामपुर में जागीरदार, दरबारी, कम आयु मृत्यु)
शिक्षा - बानो बेगम के पास कोई औपचारिक शिक्षा नहीं थी।
संतान
1. मौलाना मोहम्मद अली जौहर 
2. मौलाना शौकत अली जौहर 
(अली ब्रदर्स, स्वतंत्रता सैनानी)
सहित छः संतान, पांच पुत्र एक पुत्री।
बी अम्मा का जीवन - 
जवानी में ही पति की मौत के बाद सीमित संसाधनो के बावजूद अनपढ़ होने पर भी उन्होंने अपने बच्चों को उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में एक अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पढ़ाया। ब्रिटिश राज के खिलाफ असहयोग आंदोलन के दौरान उन्होंने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी थीं जो बुर्का पहनकर राजनीतिक रैली को संबोधित करती थीं। महात्मा गांधी की सलाह पर बी अम्मा ने महिलाओं को आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके अलावा उन्होंने स्वदेशी आंदोलनों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। बी अम्मा ने महिलाओं को ब्रिटिश उत्पादों को त्यागने और स्वदेशी  (खादी) सामान का इस्तेमाल करने का महत्व सिखाने के लिए कई बैठकें कीं। इस अभियान में उनके साथ मौलाना हसरत मोहानी की पत्नी बेगम हसरत मोहानी, बसंती देवी, सरला देवी चौधुरानी, सरला देवी, और सरोजिनी नायडू भी शामिल रहीं। उन्होंने लाहौर में एक बैठक को संबोधित किया। बानो बेगम ने राजनीति में सक्रिय भाग लिया और खिलाफत समिति की सदस्य रहीं। सन् 1917 में वो एनीबेसेंट और अपने दो बेटों को जेल से रिहा करवाने के लिए आंदोलन में भाग लिया। ख़िलाफ़त आंदोलन के समर्थन एवं आर्थिक सहायता के लिए इन्होंने पूरे भारत में यात्रा एवं सभाएं की। बी अम्मा महिलाओं को तिलक स्वराज कोष में दान करने के लिए प्रेरित करती थीं, जिसे बाल गंगाधर तिलक द्वारा स्थापित किया गया था।

स्मृतियों में - 
पाकिस्तान सरकार ने वर्ष 1990 में एक डाक टिकट जारी किया था।
भारत सरकार ने उनकी स्मृति में कोई स्मारक या स्मृति चिह्न नहीं बनवाया।

शमशेर भालू खां 
9587243963

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