मानवता के भगवान या फरिश्ते
आइए सच जानें,
मेरा व्यक्तिगत विश्वास है कि सृष्टि का पालनहार एक ईश्वर है, परन्तु यदि धरती पर कोई भगवान अवतरित हुआ है तो वह ज्योति राव फूले, देवी पैदा हुई है तो सावित्री बाई फूले हैं। यदि इस संसार में कोई फरिश्ता पैदा हुआ है तो उस्मान शेख और फातिमा शेख थे। इतिहास के पन्नों में यदि ढूंढा जाए तो कोई धर्म के लिए लड़ा कोई जाति के लिए।
केवल ज्योतिबा फुले ही थे जो पत्नी सावित्री बाई फूले के संग केवल दलित और पिछड़ों की शैक्षिक स्थिति को सुधारने हेतु लड़े। खूब लड़े।
दूसरे दलितों एवं पिछड़ों के कानूनी अधिकारों के लिए लड़ने वाले बाबा साहब भिंवराव अम्बेडकर।
आज यह दोनों महान हस्तियां ना होती तो भारत की 84.86% आबादी (शूद्र (माली, किसान (जाट), खाती, कुम्हार, स्वामी, गिरी, पूरी, सुनार, लुहार, भार्गव आदि) (दलित - मोची, रैगर, भील, गरासिया, डामोर, बाल्मीकि, मेघवाल, नायक, धानक, ढोली, कोली, सारकीबंद, नट, मीणा, आदि) जो नरकीय जीवन जीते थे आज भी वहीं जीवन जीते।
स्त्री या पुरुष का अधखुला बदन, चारदीवारी में कैद महिला, नंगे पैर, पीठ के पीछे झाड़ू, गले में में लटकी मटकी।
तत्कालीन मुस्लिम समाज में भी मौलानाओं और शेखों ने वास्तविक शिक्षा से आम मुस्लिम खास तौर से महिलाओं को दूर रखा।
फातिमा शेख और उस्मान शेख ने ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई फूले के साथ मिलकर अशिक्षा का अंधेरा हटाया।
यह भी स्पष्ट है कि दोनों ही धर्म में शिक्षा आमजन के लिए दूर की कौड़ी थी। खासतौर पर समानता और स्वतंत्रता के साथ।
आज कहने को तो हम अंग्रेज शासन को शोषक कहते हैं पर आज हम जो आजादी की परिकल्पना कर रहे हैं वो राजतंत्रीय व्यवस्था में लगभग असंभव थी।
हो सकता है आप मेरे विचारों से सहमत नहीं हैं पर
आप जब ज्योतिबा फुले -सावित्री बाई फूले, बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर का जीवन इतिहास पढ़ेंगे तो स्पष्ट रूप से m मानेंगे।
अंधविश्वास छोड़िए
तर्क शील बनिए
विज्ञान पढ़ने का नहीं सोचने का विषय है।
आडंबर और कर्मकांड मानव के सदैव शत्रु रहे हैं और आगे भी रहेंगे।
इसलिए मानव को धर्म और जाति के स्थान पर मानव समझ कर व्यवहार करना ही मानवता है।
शेष सभ्यताओं का पतन और विश्वास सतत् प्रक्रिया है।
शमशेर भालू खां सहजूसर, चूरू
#फूले फिल्म जरूर देखें।
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