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✅सरकार के ग्यारह साल दिन 03

ग्यारह साल बारह दिन ग्यारह सवाल
ग्यारह साल से जिन मुद्दों को लेकर भाजपा को जनता ने चुना उनके संबंध में ग्यारह दिन तक ग्यारह सवाल -
दिन तीन -
1. क्या राफेल हथियार समझौते में घोटाला हुआ - हां
2. क्या रक्षा बजट में कमी हुई - हां
3. क्या सेना की संख्या में कमी हुई - हां (1966 की स्थिति) 
4. क्या सेना को अत्याधुनिक हथियार मिले - नहीं
5. क्या पूर्णतया वन रैंक वन पेंशन मिली - नहीं
6. वर्तमान में स्थाई सेना का स्वरूप क्या है - चार साल के लिए अग्निवीर
7. क्या नए हवाई अड्डे /सैन्य हवाई अड्डे बने - नहीं
8. क्या सेना में नई कंपनी/बटालियन का गठन हुआ - नहीं
9. क्या अग्निवीर को पूर्ण सैनिक सम्मान एवं सुविधाएं देय हैं- नहीं
10. भारतीय सेना से संबंधित महत्वपूर्ण बातें सार्वजनिक रूप से कुछ चैनलों द्वारा प्रसारित की जा रही हैं, इन कर रोक नहीं लगना क्या प्रदर्शित करता है, क्या ऐसे चैनलों पर रोक लगाई गई है - नहीं
11. क्या भारत में नई सैन्य आयुध उपक्रम स्थापित किए गए - नहीं
लगातार ......

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इस ब्लॉग और मेरी अन्य व्यक्ति से हुई बातचीत पर मंहत प्रतापपुरी का बयान जीवनपाल सिंह भाटी की आवाज में सत्य घटना सद्भावना रैली बासनपीर जूनी पूर्व मंत्री सालेह मुहम्मद का बयान बासनपीर जूनी के सत्य एवं जैसाने की अपनायत की पड़ताल -  पिछले कुछ दिनों से जैसलमेर के बासन पीर इलाके का मामला सामने रहा है। कहा जा रहा है कि पूर्व राज परिवार की जमीन पर बासनपीर गांव के लोगों द्वारा कब्जा किया जा रहा है। नजदीक से पड़ताल करने पर हकीकत कुछ ओर निकली। जिसके कुछ तथ्य निम्नानुसार हैं - रियासत काल में सन 1662 में बीकानेर और जैसलमेर रियासत के बीच युद्ध हुआ। इस युद्ध में जैसलमेर सेना के दो वीर योद्धा सोढ़ा जी और पालीवाल जी शहीद हो गए। युद्ध के बाद बासन पीर (युद्ध स्थल) तालाब की तलहटी पर शहीदों की स्मृति में छतरियां बनवाई हैं। जैसलमेर के चारों और 120 किलोमीटर इलाके में 84 गांव पालीवाल ब्राह्मणों ने बसाए जिनमें से एक गांव बासनपीर जूनी भी था। पालीवाल ब्राह्मण समृद्ध किसान और व्यापारी थे, रियासत के दीवान सालिम सिंह से अनबन के कारण सन् 1825 में सभी गांव खाली करने को मजबूर हो गए। पालीवाल...

✍️कायम वंश और कायमखानी सिलसिला सामान्य इतिहास की टूटी कड़ियाँ

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