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✅बिल्ली

बिल्ली (Cat) 😺 -
बिल्ली से संबंधित लोकोक्तियां एवं मुहावरे - 
बिल्ली - शातिर स्त्री।
बिल्ली के गले में घंटी बांधना - समस्या को खुद के पास बुलाना।
सौ चूहे खा कर बिल्ली हज पर चली - बुरे काम छोड़ने का ढोंग।
बिल्लौरी आँखें - सुंदर नीली आँखें।
चूहे - बिल्ली की लड़ाई - बात - बात पर झगड़ने वाले
बिल्ली को ताकु का घाव ही बहुत है - थोड़ा नुकसान ही अधिक है।
बिल्लियों की लड़ाई में बंदर का फायदा - फूट का फायदा अन्य उठाते हैं।
बिल्ली ने शेर को पेड़ पर चढ़ना नहीं सिखाया - गुरु सभी ज्ञान वाली बात चेले को नहीं बताते
खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे - खीज उतारना, अपनी गलती पर उल जुलूल हरकतें करना, गलती होते हुए चढ़ाई करना।
बिल्ली के भाग का छींका टूटना - भाग्य से सम्मान/धन/पद मिलना।
बिल्ली मौसी - शातिर स्त्री
भीगी बिल्ली - डरा हुआ।

बिल्ली के पर्यायवाची - 
बिल्ली, पुसी, बिल्ली मौसी, म्याऊं

बिल्ली से संबंधित शब्द - 
बिल्ली - मादा।
बिल्ला - नर।
बिलौटा - बिल्ली का बच्चा।
झबरी और कबरी - बिल्लियों के कहानियों में प्रचलित नाम।
मिनकी - मारवाड़ी में घरेलू बिल्ली
बलारा - जंगली बिल्ली 

बिल्ली का वैज्ञानिक वर्गीकरण - 
जगत - जंतु
संघ - कौरडेटा
वर्ग - स्तनधारी (मेमल)
गण - मांसाहारी (कार्निवरा)
कुल - फ़ेलिडाए
वंश - फ़ीलिस
जाति - फ़ीलिस कैटस
द्विपद नाम - फ़ीलिस कैटस डोमेस्टिका 

बिल्ली का इतिहास - 
लगभग 9500 वर्षों (नवपाषाण युग) से बिल्ली मनुष्य के साथी के रूप में है। सब से पहले मिश्र वासियों ने बिल्ली को पाला। बिल्लियों को चूहे भगाने हेतु पाला गया जिससे अनाज को नुक़सान से सुरक्षित रखा जा सके। बिल्लियाँ प्राचीन मिस्र में पूजनीय जानवर थी। प्राचीन मिस्री देवी बास्त बिल्ली का रूप धारण करती थी।  
मिस्र में बिल्ली को देवी माफ़डेट का रूप माना जाता हैबिल्ली मांसाहारी स्तनपाई पालतू पशु है जिसकी सुनने और सुँघने की तीव्र शक्ति के कारण यह रात के समय भी देख सकती हैं। यह शिकार एकांत में करती हैं परंतु जीवन सामाजिक जीती हैं। बिल्लियां आपसी संवाद आवाज़ (म्याऊँ म्याऊँ, घूर घूर, फुंकारता, बड़बड़ाना) फेरोमोन रासायन एवं विशेष शारीरिक भाषा के माध्यम से करती हैं। घरेलू बिल्लियों की विशेषताओं में पीछे हटने योग्य पंजे, छोटा परन्तु शक्तिशाली शरीर, तीव्र इंद्रियां (आंख,कान एवं नाक), लंबी पूंछ, शिकार का पीछा करने हेतु अनुकूल ढांचा इसे शेर की मौसी कहने पर उतारू करता है।

बिल्ली के निकटतम संबंधी - 
बिल्लियों के सबसे करीबी रिश्तेदार फ़ेलिडाए (Felidae) कुल के जानवर शेर, चीता, लिंक्स, और बाघ आदि हैं।
फ़ेलिडाए कुल की दो शाखाएं हैं - 
पैन्थेरिनाए - 
इसमें बाघ, शेर, तेन्दुआ, और चीता शामिल हैं जो जानवर दहाड़ते हैं।
फ़ेलिनाए -
इसमें कौगर, बॉबकैट, और घरेलू बिल्लियां शामिल हैं जो गुर्राते हैं। अफ़्रीकी जंगली बिल्ली, फ़ेलिस सिल्वेस्ट्रिस लिबिका, घरेलू बिल्लियों से बहुत करीबी से संबंधि है।

बिल्लियों में प्रजनन - 
4 महीने की उम्र में अपनी पहली बार रजस्वला होती हैं। इसके 2 या 3 गर्मी चक्र होते हैं। गर्मी के दौरान, मादा नर के प्रति आकर्षित होती है। वह विशिष्ट संभोग व्यवहार दिखाती है। वह लोटेगी, वस्तुओं से रगड़ेगी, अपने पिछले पैरों को दबायेगी, और बार-बार जोर से चिल्लायेगी। इनकी गर्भावस्था, लगभग 2 महीने (60 से 63 दिन) तक चलती है, जिसमें औसतन 4 बिल्ली के बच्चे पैदा होते हैं। कभी - कभी बिल्लियां छद्म गर्भावस्था भी दिखाती हैं।

बिल्ली का शारीरिक ढांचा एवं जीवन - 
बिल्ली कई रंग एवं आकर में होती हैं। यह भूरी, सफेद, काली, मटमैली एवं पीली हो सकती हैं। प्राकृतिक रूप से इनका जीवनकाल लगभग 15 वर्षों का होता है। पालतू बिल्लियों का आकार बड़े से छोटे रूप में होता है। पालतू बिल्ली और उसकी सब से क़रीबी जंगली पूर्वज, दोनों ही द्विगुणसूत्रक (डिप्लॉइड) जानवर हैं जिनमें 38 गुणसूत्र और लगभग 20,000 जीन होते हैं।

भाषा एवं संचार - 
बिल्लियाँ संवाद करने के लिए शारीरिक भाषा का उपयोग करती हैं। बिल्ली किसी वस्तु को रगड़ती है या चाटती है तो वह प्रेम का इजहार कर रही है। बिल्ली की शारीरिक भाषा का ज़्यादातर हिस्सा उसकी पूंछ, कान, सिर की स्थिति और पीठ की मुद्रा से इंगित होता है। पूँछ द्वारा  बिल्ली प्रेमभाव प्रकट करने हेतु उसे सीधी ऊंची कर लेती है। बिल्ली खुश, संतुष्ट और आरामदायक है। यदि पूंछ दबाई गई है तो वह डर या भय का संकेत दे रही है। खुश मिजाज में बिल्ली खुद को बड़ा कर लेती है और डर के समय सिकुड़ जाती है। डराने हेतु यह दांत दिखाती है।

बिल्लियों की नस्लें - 
बिल्लियों का धार्मिक महत्व - 
सनातन धर्म में बिल्ली -
सनातन धर्म में बिल्ली को अशुभ माना जाता है। बिल्ली (विशेषकर काली) द्वारा रस्ता काटना एवं रोना अशुभ माना जाता है। बिल्ली को माता लक्ष्मी की बहन और अलक्ष्मी एवं राहु का वाहन माना गया है। बिल्ली को देवी मंगम्मा का अवतार माना जाता है। कई मान्यताओं के अनुसार, बिल्ली पालना शुभ होता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि बिल्ली व्यक्ति को काले जादू के प्रभाव से बचाती है। लेकिन कई मान्यताओं के अनुसार, बिल्ली पालना अशुभ भी है, क्योंकि घर में बिल्ली होने से राहु तत्व भी सक्रिय होता है, जिससे व्यक्ति के जीवन की परेशानियां बढ़ सकती हैं। माना जाता है कि जिस घर में बिल्ली बच्चों को जन्म देती है, तो उस परिवार के सदस्यों के लिए तरक्की की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही उस घर में नकारात्मक ऊर्जा का भी प्रवेश नहीं होता। बिल्ली की गर्भनाल (जेर) मिलना अतिशुभ माना जाता है। षष्ठी (छठी) माता या देवसेना सनातन धर्म की महादेवी हैं। इन्हें भगवती की श्रेणी में रखा जाता है का वाहन बिल्ली है।
इस्लाम में बिल्लियों का महत्व -
  मुस्लिम लेखक के पास बैठी बिल्ली
इस्लाम धर्म में बिल्लियों को पवित्र माना जाता है। बिल्लियों को धार्मिक रूप से पवित्र माना जाता है। इनके द्वारा जूठा गया भोजन हलाल (ग्रहण्य) माना जाता है।
एक कहानी के अनुसार, मुहम्मद के पास मुएज़ा नामक बिल्ली थी। नमाज हेतु जाते समय मुहम्मद साहब ने अपने चोगे पर मुएज़ा को बैठा देखा, उन्होंने बिल्ली को परेशान न कर उसकी आस्तीन काट दी। हालाँकि, किसी भी हदीस में ऐसी किसी बिल्ली या कहानी का ज़िक्र नहीं है। जिसके कारण कई मुसलमान इस कहानी को झूठ मानते हैं।
ईसाई धर्म में बिल्ली का महत्व - 
ईसाई धर्म ग्रन्थ बाइबल में बिल्लियों का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है। बिल्ली को वर्जिन मैरी के साथ जोड़ा जाता है। इससे उन्हें पवित्र और पूजनीय दर्जा प्राप्त होता है। ईसाई धर्म में बिल्ली को सबसे बुरे रूप में शैतान के एजेंट के रूप में माना जाता था।
मिश्र के प्राचीन धर्म में बिल्ली का महत्व - 
प्राचीन मिस्र में बिल्ली का संबंध देवी बस्टेट से था जो चूल्हा, घर, महिलाओं और महिलाओं के हितों की देखरेख करती थी। हेरोडोटस के अनुसार बिल्लियों को इतना महत्व दिया जाता था कि जब मिस्र के किसी घर में आग लग जाती थी, तो लोग सबसे पहले अपनी बिल्लियों को बचाने के बारे में सोचते थे और उसके बाद ही आग बुझाने के बारे में सोचते थे। जब परिवार की कोई बिल्ली मर जाती थी, तो घर के लोग वही शोक - अनुष्ठान मनाते थे जो किसी मानव परिवार के सदस्य के लिए होते थे और बिल्लियों को नियमित रूप से बेहतरीन लिनेन में ममी बनाकर रखा जाता था।

बिल्लियों में रोग -
बिल्लियों के तकरीबन 250 आनुवंशिक रोग पहचाने जा चुके हैं जिनमें से काफ़ी मानवीय जन्मजात रोगों के समान हैं। बिल्लियों के कई रोग जो शुरुआत में मनुष्य में भी पाए जाते थे।
आंतों के परजीवी बिल्ली के बच्चों में सबसे आम हैं। लार्वा प्लेसेंटा या माँ के दूध के माध्यम से बच्चे के पेट में प्रवेश करते हैं। कृमि इतने आम हैं कि बिल्ली के बच्चों को अक्सर नियमित निवारक उपाय के रूप में व्यापक स्पेक्ट्रम कृमिनाशक से उपचारित किया जाता है। कृमिनाशक के बाद मल परीक्षण कर आवश्यकतानुसार अतिरिक्त उपचार किया जाता है। बाहरी परजीवियों (पिस्सू सहित) का भी उपचार किया जाना चाहिए।
बिल्लियों में कई तरह के रोग हो सकते हैं, जैसे कि दंत रोग, बिल्ली-खरोंच रोग, सूजन आंत्र रोग, वजन कम होना, और मुंह के विकार आदि।
1. दंत रोग - 
बिल्लियों में दांतों और मसूड़ों की बीमारियां आम हैं। मसूड़े की सूजन, पीरियोडोंटाइटिस, और दांतों का पुनर्जीवन ये तीन सबसे आम दंत रोग हैं। दंत रोग से गंभीर दर्द और परेशानी होती है। दंत रोग के कारण बिल्ली खाना बंद कर देती है।
2. बिल्ली-खरोंच रोग - 
यह रोग बैक्टीरिया बार्टोनेला हेन्सेले के कारण होता है। संक्रमित बिल्ली के काटने या खरोंचने से यह रोग फैलता है। यह रोग घाव या नाक, मुंह और आंखों जैसी म्यूकोसल सतहों पर बिल्ली की लार के संपर्क में आने से भी फैल सकता है।
3. सूजन आंत्र रोग - 
यह जठरांत्र पुरानी जलन और सूजन है।
यह स्थिति सबसे अधिक मध्यम आयु वर्ग और वृद्ध बिल्लियों को प्रभावित करती है।
लक्षणों में उल्टी, दस्त, वजन कम होना, भूख में बदलाव, पेट फूलना, शरीर की खराब स्थिति और पेट में दर्द शामिल हैं।
4. मुंह के विकार - 
मौखिक कैंसर या अन्य विशिष्ट मुंह विकारों को बाहर करने में मदद के लिए ऊतक का एक नमूना (बायोप्सी) लिया जा सकता है।

बिल्लियों के रोगों का उपचार -
बिल्लियों में होने वाले रोगों का पता चलते ही तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क कर उचित इलाज करवाना चाहिए।

बिल्ली पालन व्यवसाय -
बिल्ली सहित अन्य खिलौना जानवर पालना आजकल शहरों एवं गांवों में एक रिवाज जैसा हो गया है। पहले यह जरूरत के हिसाब से पाले जाते थे, अब शोक के लिए पाले जाते हैं। पेट केयर सेंटर हेतु लायसेंस की आवश्यकता होती है जो सरलता से मिल जाता है। इस बाबत प्रशिक्षित वेटनरी स्टाफ की आवश्यकता होती है। जिसमें भोजन, टीकाकरण, कटिंग, ब्रीडिंग, मेटिंग और देखभाल संबंधी कार्य किए जाते हैं। पालतू खिलौना जानवरों की साज - सज्जा का सामान भी उपलब्ध करवाया जाता है। 

बिल्लियों की कीमत - 
शुद्ध नस्ल की बिल्लियों की कीमत उनकी लोकप्रियता और उपलब्धता के आधार पर कुछ सौ से लेकर कई हज़ार रुपयों तक हो सकती है। उदाहरण के लिए सियामी जैसी एक सर्वव्यापी नस्ल 15000 तक मिल सकती है, जबकि लोकप्रिय मेन कून की कीमत 40000 तक हो सकती है। सवाना जैसी विदेशी और दुर्लभ नस्ल की कीमत लाख रुपए से अधिक हो सकती है।

बिल्ली मानव के साथ आदि काल से रहती आई है, और एकाकी लोगों के लिए अच्छे साथी की भूमिका निभाती है।

शमशेर भालू खां 
9587243963

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