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✅राजस्थान कन्हैयालाल हत्याकांड

        कहैया लाल साहू उदयपुर 
हृदय विदारक घटना - कन्हैया लाल हत्याकांड -
पूरा मामला - 
घटना का दिन - 28 जून 2022
समय - दोपहर 2.45 बजे
मृतक का नाम - कन्हैया लाल साहू तेली , 
मृतक का व्यवसाय - दर्जी
घटना के साक्ष्य - 
आरोपियों ने अपने मोबाइल पर पूरी घटना को लाइव प्रसारित किया।
कन्हैयालाल का परिवार - 
बड़ा बेटा - यश कुमार साहू (आयु लगभग 24 वर्ष)
छोटा बेटा - तरुण कुमार साहू (आयु लगभग 22 वर्ष)
पत्नी - जशोदा
(दोनों बेटों को सरकारी नौकरी दी गई)
घायल सहायक का नाम - ईश्वर लाल 
घटना के बाद उग्र भीड़ के हमले से घायल पुलिस कर्मी का नाम - संदीप कुमार (कांस्टेबल)
काम में लिया गया हथियार - छूरा (तत्काल आरोपियों के पास से पुलिस ने बरामद किया)
निवासी - धानमंडी उदयपुर राजस्थान 
घटना का स्थान - धानमंडी उदयपुर
हमलावर -
1.मोहम्मद गौस 
2. मोहम्मद रियाज़ अतारी 
दोनों आरोपी आसींद भीलवाड़ा के मूल निवासी एवं वर्षों से खांजा पीर क्षेत्र में निवास कर रहे थे। उदयपुर में वेल्डिंग एवं चिटफंड कंपनी में ब्रोकर का काम करते थे। दोनों सुन्नी सम्प्रदाय के बरेलवी संगठन दावत-ए-इस्लामी से जुड़े थे। वर्ष 2014 में इस संगठन के एक कार्यक्रम में गौस मोहम्मद कराची भी जा कर आया था। दूसरा आरोपी मोहम्मद रियाज अत्तारी कादरी सम्प्रदाय के अत्तारी सिलसिले के मोहम्मद इलियास अत्तार कादरी का अनुयाई है। अतारी  ने अपनी मोटर साइकल के नंबर 2611 आतंकी हमले 26/11के समर्थन में विशेष रूप से लिए थे।
भाजपा/ RSS के करीबी हैं आरोपी - 
वर्ष 2020 में उदयपुर के RSS एवं भाजपा नेता इरशाद चैनवाला (तत्कालीन जिलाध्यक्ष अल्पसंख्यक मोर्चा) ने 30 नवंबर 2018 को फेसबुक पर टिप्पणी करते हुए अतारी को भाजपा का समर्पित कार्यकर्ता बताया। 
भाजपा नेता गुलाबचंद कटारिया के साथ आरोपी अतारी का फोटो, कार्यक्रम भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा, भीलवाड़ा।
पवन खेड़ा निवासी उदयपुर द्वारा X पर जारी पोस्ट के अनुसार रियाज अतारी भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का सदस्य है।
हत्या का तथाकथित कारण
11 जून 2022 को कन्हैयालाल के पड़ोसी नाज़िम अली ने भाजपा नेत्री एवं प्रवक्ता नुपुर शर्मा द्वारा मोहम्मद साहब का अपमान करते हुए की गई टिप्पणी के समर्थन में सोशल मीडिया पोस्ट (व्हाट्सएप स्टेटस) को लेकर उनके खिलाफ पुलिस थाना धान मंडी में मामला दर्ज करवाया, पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जमानत पर छोड़ दिया।
15 जून को उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं। मृतक ने प्रशासन से सुरक्षा की मांग करते हुए नाज़िम और पांच अन्य के विरुद्ध शिकायत दर्ज करवाई। स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप्स में उनके फोटो डाल कर संदेश प्रसारित किया था कि कन्हैयालाल कहीं भी दिखाई दे अथवा दुकान खोले तो मार दिया जायेगा। पुलिस अधिकारियों ने मध्यस्थता कर दोनों पक्षों के बीच सुलह करवाकर मामला शांत करवा दिया। दोनों पक्षों ने बयान जारी कर मामले में आगे से कोई कार्रवाई नहीं चाहने की बात कही। 
कन्हैया लाल के अनुसार यह विवादास्पद पोस्ट उनके बेटे द्वारा फोन पर गेम खेलते समय अनजाने में साझा हो गई।
हत्या का घटनाक्रम - 
आरोपी मोहम्मद रियाज ने हत्या से ग्यारह दिन पहले 17 जून को टिप्पणीकर्ता कन्हैया लाल की हत्या करने का वीडियो बयान जारी किया।
28 जून को दोनो कपड़े सिलवाने के बहाने उनकी दुकान में घुसे। जब दर्जी उनमें से एक का नाप ले रहे थे दूसरे ने छुरी से हमला करते हुए वीडियो बनाया।
कन्हैया लाल को पकड़ कर दुकान से बाहर खींच लिया गला रेत दिया व शरीर के कई हिस्सों पर वार किया। 
इस बीच उनके सहायक ईश्वर लाल बीच बचाव के प्रयास करने लगे जो सर में गंभीर चोटें आने के कारण घायल हो गए। पड़ोस के अन्य दुकानदारों ने उन्हें बचाने का प्रयास नहीं किया और आरोपी मोटरसाइकिल पर सवार होकर भाग गए। घर जा कर आरोपियों ने यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो वायरल होते ही होते ही उदयपुर में कर्फ्यू लगा कर इंटरनेट बंद करवा दिया गया। तब तक वीडियो हर जगह पहुंच चुका था, संपूर्ण भारत में आक्रोश व्याप्त हो गया। जगह - जगह प्रदर्शन होने लगे।
कन्हैया लाल के बेटे की शपथ - 
इस घटना के बाद उनके बेटे यश साहू ने दोषियों को फांसी नहीं दिए जाने तक नंगे पैर रहने, बाल नहीं कटवाने और अस्थियां विसर्जित नहीं करने की कसम खाई। यश 24 साल का है। उस दिल दहला देने वाली घटना को याद करते हुए वह कहता है कि मैं अपनी प्रतिज्ञा पर कायम रहूंगा। यश का यही कहना है कि हम इस मामले में राजनीति नहीं चाहते लेकिन दोषियों मौत सजा मिले बस यही मांग है।
सरकार के कदम - 
28 जून को राजस्थान सरकार ने तुरंत कन्हैया के परिवार को 50 लाख रुपए आर्थिक सहायता की घोषणा की। इसमें बाद 6 जुलाई को उनके दो बेटों को नौकरी की घोषणा की। हमलावरों को 28 जून को ही राजसमंद से गिरफ्तार कर लिया गया।
मृतक कन्हैया लाल साहू को श्रद्धांजलि देने पहुंचे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत 
भाजपा के कदम - 
यह विरोध प्रदर्शन भाजपा के नेतृत्व में हो रहे थे। 2 जुलाई को बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने मृतक के परिवार से मिलकर 1 करोड़ रुपए व घायल को 25 लाख एवं भीड़ में हिंसा के कारण घायल कांस्टेबल संदीप कुमार को पांच लाख रुपए आर्थिक सहायता की घोषणा की। 
हत्याकांड की जांच - 
इस घटना की जांच एनआईए कर रही है जिसने उनका पाकिस्तान कनेक्शन होने के साथ दावत-ए-इस्लामी का स्लीपर सेल तैयार कर रहा था। इस समय ही वे दो अन्य लोगों की हत्या का षडयंत्र बना रहे थे। घटना की रात को ही केंद्र सरकार के निर्देशानुसार यह केस NIA ने ले लिया। मामला राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर में चल रहा है। लगभग तीन साल बाद स्पष्ट प्रकृति के मामले में दोषियों को सजा नहीं हो कर मई 2025 में एक आरोपी को जमानत मिल गई। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कन्हैयालाल के बेटे द्वारा दायर अपील के आधार पर NIA और आरोपी मोहम्मद जावेद को नोटिस जारी किया गया है।
एनआईए की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने की।
तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बयान - 
उदयपुर के श्री कन्हैयालाल हत्याकांड को लेकर भाजपा ने जमकर राजनीति की एवं राजस्थान के चुनाव का मुख्य मुद्दा इसे बना दिया। श्री कन्हैयालाल के परिजनों ने बताया है कि इस केस को फास्ट ट्रैक नहीं चलाया जा रहा है। यह केस NIA कोर्ट जयपुर में विचाराधीन है। NIA कोर्ट का एडिशनल चार्ज CBI कोर्ट के न्यायाधीश के पास था जिनका तबादला हो गया है जिससे केस की सुनवाई नहीं हो पा रही। विगत छह महीने से केस में कोई तारीख नहीं पड़ी है। इससे पहले गवाहों के बयान ही चल रहे थे परन्तु तीन मुख्य गवाहों के बयान अभी तक दर्ज नहीं किए गए। 
इस केस में गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से अभी तक दो की जमानत हो चुकी है।
इस महीने श्री कन्हैयालाल हत्याकांड को तीन वर्ष पूरे हो जाएंगे। राजस्थान पुलिस ने अपराधियों को मात्र 4 घंटे में गिरफ्तार कर लिया था। श्री कन्हैलाल के परिजनों को 50 लाख रु मुआवजा एवं उनके दोनों पुत्रों को सरकारी नौकरी दी गई। परन्तु भाजपा ने जनता में अफवाह फैलाई कि केवल 5 लाख रु मुआवजा दिया और पांच लाख, पचास लाख की राजनीति की।
यदि NIA ये केस नहीं लेती एवं राजस्थान पुलिस के पास ये केस रहता तो संभवतः हमारी सरकार के कार्यकाल में ही इनको सजा सुना दी जाती परन्तु लगता है भाजपा केवल इस केस पर राजनीति कर रही है। पीड़ितों को न्याय दिलाने का उनका इरादा नहीं लगता है।

निष्कर्ष 
यह है कि सरकार/प्रशासन/पुलिस को कड़े कदम उठाते हुए दोषियों को तुरंत फांसी की सजा देनी चाहिए।

शमशेर भालू खां 
जिगर चुरूवी 
9587243963

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