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दाऊदी बोहरा समाज एक विश्लेषण -

दाऊदी बोहरा समाज में गरीबी अपेक्षाकृत कम क्यों दिखाई देती है? - 
सामुदायिक अर्थव्यवस्था, ब्याज-मुक्त वित्त, सामूहिक उत्तरदायित्व और आत्मनिर्भरता का एक अध्ययन - 
बोहरा समाज - जब समाज केवल साथ नहीं रहता, एक-दूसरे को संभालता भी है
दुनिया में अनेक समुदाय ऐसे हैं जिनकी पहचान उनकी धार्मिक आस्थाओं, सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक रीति-रिवाजों से होती है। लेकिन कुछ समुदाय ऐसे भी हैं जिन्होंने अपनी सामाजिक एकजुटता को आर्थिक आत्मनिर्भरता का आधार बनाया है। दाऊदी बोहरा समाज इसका अध्ययन योग्य उदाहरण है।
इस समाज के बारे में अक्सर कहा जाता है कि यहां कोई गरीब नहीं होता। हालांकि, यह कथन सांख्यिकीय रूप से प्रमाणित नहीं है और समुदाय में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार भी मौजूद हैं। फिर भी इसकी कुछ संस्थागत व्यवस्थाएं ऐसी हैं, जिनके कारण आर्थिक कठिनाइयों का सामना करने वाले व्यक्ति को सामुदायिक सहयोग मिल सकता है।
इस समाज की आर्थिक व्यवस्था को समझने के लिए केवल इसके व्यापार को देखना पर्याप्त नहीं होगा। इसके पीछे कार्यरत पांच महत्वपूर्ण स्तंभों को समझना होगा - 
* व्यापार और उद्यमिता की संस्कृति।
* ब्याज-मुक्त ऋण एवं आर्थिक सहयोग।
* सामुदायिक भोजन और सामाजिक सुरक्षा।
* शिक्षा, अनुशासन और कौशल विकास।
* आपसी विश्वास एवं सामुदायिक उत्तरदायित्व।
आइए, इन व्यवस्थाओं का तथ्यात्मक और सामाजिक-आर्थिक विश्लेषण करें।
दाऊदी बोहरा समाज का ऐतिहासिक संबंध व्यापार, उद्यमिता और वाणिज्य से रहा है। गुजरात, सूरत, मुंबई तथा पश्चिमी भारत के अनेक व्यापारिक केंद्रों में इस समुदाय की व्यावसायिक उपस्थिति लंबे समय से रही है।
समुदाय के सदस्य परंपरागत रूप से कपड़ा, हार्डवेयर, निर्माण सामग्री, कांच, सैनिटरी उत्पाद, औद्योगिक उपकरण, मसाले, आयात-निर्यात और अन्य कारोबारी गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। नई पीढ़ी में शिक्षा, चिकित्सा, तकनीक और आधुनिक उद्योगों में भी भागीदारी दिखाई देती है।
व्यापार के प्रति इस झुकाव के पीछे पारिवारिक प्रशिक्षण, पीढ़ियों से अर्जित अनुभव, व्यावसायिक संपर्क और सामुदायिक सहयोग की भूमिका हो सकती है।
एक पुरानी मीडिया रिपोर्ट में समुदाय के लगभग 80 प्रतिशत लोगों के व्यवसाय से जुड़े होने का अनुमान है।
महत्त्वपूर्ण सीख - किसी समाज की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए केवल सरकारी नौकरियों पर निर्भरता पर्याप्त नहीं है। स्वरोजगार, छोटे उद्योग, व्यापार और उद्यमिता को सामाजिक प्रतिष्ठा तथा संस्थागत सहयोग मिलना भी आवश्यक है।
1. कर्ज़न-ए-हसना: ब्याज के बोझ से मुक्ति का सामुदायिक वित्तीय मॉडल - 
दाऊदी बोहरा समाज की आर्थिक व्यवस्था का सबसे उल्लेखनीय पक्ष है कर्ज़न-ए-हसना (Qardan Hasana)।
इस्लामी आर्थिक सिद्धांतों में ब्याज (रिबा) निषिद्ध माना गया है। इसी सिद्धांत के अनुरूप समुदाय में ब्याज-मुक्त ऋण उपलब्ध कराने की संस्थागत व्यवस्था विकसित हुई है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि व्यक्ति को कर्ज के ऐसे चक्र में फंसने से बचाना है, जिसमें मूलधन से अधिक ब्याज का बोझ बढ़ता जाता है।
इसके अंतर्गत पात्र सदस्यों को विभिन्न जरूरतों के लिए ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है - 
* नया कारोबार शुरू करने के लिए।
* पहले से चल रहे व्यवसाय का विस्तार करने के लिए।
* शिक्षा और चिकित्सा संबंधी आवश्यकताओं के लिए।
* आवास निर्माण अथवा खरीद के लिए।
* आर्थिक संकट और अन्य आवश्यकताओं के लिए।
इस व्यवस्था का संस्थागत विकास 1970 के दशक के उत्तरार्ध से हुआ। Burhani Qardan Hasana Trust तथा बाद में विकसित विभिन्न संस्थाओं ने इसे संगठित स्वरूप दिया।
इसकी एक विशेषता यह भी है कि व्यवसाय शुरू करने वाले व्यक्ति को केवल पूंजी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रखा जाता। व्यावसायिक व्यवहार्यता, मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और ऋण की वापसी की क्षमता पर भी ध्यान दिया जाता है।
यह समझना आवश्यक है कि कर्ज़न-ए-हसना सामान्यतः लौटाया जाने वाला ऋण है, मुफ्त अनुदान नहीं। पात्रता, स्वीकृति और अन्य शर्तें लागू होती हैं।
आर्थिक विश्लेषण - ब्याज-मुक्त पूंजी उपलब्ध होने से उद्यमी की शुरुआती वित्तीय लागत कम हो सकती है। इससे छोटे व्यवसायों को स्थापित होने और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को संकट से उबरने का अवसर मिलता है।
2. फैयज़ अल-मवाइद अल-बुरहानिया: भोजन की चिंता से सामाजिक सुरक्षा तक - 
दाऊदी बोहरा समाज की सामुदायिक रसोई व्यवस्था इस बात का उदाहरण है कि सामाजिक सहयोग को किस तरह नियमित संस्थागत स्वरूप दिया जा सकता है।
इसका नाम है - 
फैयज़ अल-मवाइद अल-बुरहानिया है 
जिसकी शुरुआत अगस्त 2011 में 52वें दाई सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन ने की थी।
इस व्यवस्था का घोषित उद्देश्य समुदाय के परिवारों तक प्रतिदिन कम-से-कम एक समय पौष्टिक भोजन पहुंचाना है।
प्रकाशित संस्थागत आंकड़ों के अनुसार, इस पहल का विस्तार - 
* 40 देशों तक।
* 869 शहरों तक।
* 1,35,000 से अधिक परिवारों तक।
* 7,000 से अधिक स्वयंसेवकों तक बताया गया है।
ये संस्थागत रूप से प्रकाशित आंकड़े हैं, इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित वर्तमान जनगणना नहीं समझना चाहिए।
इस व्यवस्था के कई सामाजिक-आर्थिक लाभ हैं - 
1. - परिवार को कम-से-कम एक समय के भोजन की चिंता से राहत मिलती है।
2. - भोजन तैयार करने में लगने वाला समय और श्रम बचता है।
3. - परिवार की खाद्य सुरक्षा मजबूत होती है।
4. - सामुदायिक सहयोग और सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं।
यहां एक महत्वपूर्ण आर्थिक सिद्धांत समझने योग्य है। यदि किसी परिवार की भोजन संबंधी नियमित आवश्यकता का एक हिस्सा सामुदायिक व्यवस्था से पूरा हो जाता है, तो उसकी सीमित आय का कुछ हिस्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, बचत अथवा अन्य आवश्यकताओं के लिए बच सकता है।
इस प्रकार सामूहिक रसोई केवल भोजन वितरण नहीं, बल्कि घरेलू अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाली व्यवस्था भी बन जाती है।
3. शिक्षा और कौशल - आत्मनिर्भरता की बुनियाद - 
किसी समाज की दीर्घकालीन आर्थिक समृद्धि केवल पूंजी से नहीं आती। उसके लिए शिक्षा, कौशल, व्यावसायिक समझ और नई परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को बदलने की क्षमता भी आवश्यक है।
दाऊदी बोहरा समाज में धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा को भी महत्व दिया जाता है।
शिक्षा और प्रशिक्षण के प्रमुख क्षेत्र हैं - 
* बालक-बालिकाओं की शिक्षा।
* उच्च शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण।
* व्यापार प्रबंधन एवं लेखांकन।
* तकनीकी और आधुनिक कौशल।
* महिलाओं की शिक्षा और रोजगार।
* नई पीढ़ी को पारिवारिक कारोबार से जोड़ना।
समुदाय की साक्षरता लगभग 100 प्रतिशत होने का दावा भी प्रचलित है। कुछ अध्ययनों में उच्च साक्षरता का उल्लेख मिलता है, लेकिन इसके समर्थन में नवीन, प्रतिनिधिक और आधिकारिक जनगणना आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
आर्थिक विश्लेषण: शिक्षित व्यक्ति केवल कारोबार शुरू करने की क्षमता नहीं रखता, बल्कि बाजार की मांग, पूंजी प्रबंधन, तकनीक, ग्राहक व्यवहार और जोखिम का बेहतर आकलन भी कर सकता है।
4. महिलाओं की भागीदारी - परिवार की आय में साझा योगदान - 
किसी समाज की आर्थिक आत्मनिर्भरता का आकलन करते समय महिलाओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
दाऊदी बोहरा समाज की अनेक महिलाएं शिक्षा, चिकित्सा, व्यवसाय, घरेलू उद्योग और अन्य पेशों में सक्रिय हैं।
कुछ प्रमुख गतिविधियां हैं - 
* बेकरी और खाद्य उत्पाद।
* सिलाई और हस्तशिल्प।
* आभूषण और घरेलू उत्पाद।
* शिक्षा एवं चिकित्सा सेवाएं।
* छोटे उद्यम और स्वतंत्र व्यवसाय।
इससे परिवार की आय के स्रोत बढ़ सकते हैं और आर्थिक जिम्मेदारियों का वितरण अधिक व्यापक हो सकता है।
हालांकि, सभी महिलाओं के रोजगार या व्यवसाय में होने का दावा करना उचित नहीं होगा।
आर्थिक सीख - जब महिलाओं को शिक्षा, पूंजी, बाजार और निर्णय लेने के अवसर मिलते हैं, तो परिवार की आर्थिक क्षमता के साथ सामाजिक आत्मनिर्भरता भी बढ़ती है।
5. सामुदायिक व्यापार नेटवर्क - एक-दूसरे के लिए बाजार तैयार करना - 
व्यापार में केवल पूंजी पर्याप्त नहीं होती। नए व्यवसाय को ग्राहक, बाजार, भरोसा और मार्गदर्शन भी चाहिए।
दाऊदी बोहरा समाज में व्यापारिक संपर्कों, व्यावसायिक संगठनों और परामर्श केंद्रों की भूमिका इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
बुररहानी एक्सपो और  बुढ़ानिया बिजनेस काउंसलिंग सेंटर जैसी पहलों के माध्यम से छोटे कारोबारियों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन, व्यावसायिक संपर्क और सलाह के अवसर उपलब्ध कराने के उदाहरण मिलते हैं।
इस मॉडल के पीछे एक महत्वपूर्ण सामाजिक विचार है - 
यदि समाज का कोई सदस्य नया कारोबार शुरू करता है, तो समुदाय के अन्य सदस्य उसके संभावित ग्राहक, मार्गदर्शक, आपूर्तिकर्ता अथवा व्यावसायिक सहयोगी बन सकते हैं।
इसे सामुदायिक बाजार (Community Market) की अवधारणा कहा जा सकता है।
हालांकि, यह दावा कि प्रत्येक नया कारोबारी शुरू से ही पूरे समाज का ग्राहक बन जाता है, प्रमाणित सार्वभौमिक व्यवस्था नहीं है।
6. ईमानदारी, अनुशासन और सामाजिक विश्वास - 
व्यापार का सबसे बड़ा आधार विश्वास है।
धार्मिक एवं नैतिक शिक्षाओं में सही तौल, ईमानदार लेन-देन, अमानतदारी, समय की पाबंदी और वचन पालन को महत्व दिया जाता है।
जब किसी बाजार में ग्राहकों और दुकानदारों के बीच विश्वास विकसित होता है, तो उसके कई व्यावसायिक लाभ होते हैं
* ग्राहक दोबारा खरीदारी करता है।
* कारोबार की प्रतिष्ठा बढ़ती है।
* व्यापारिक संबंध दीर्घकालीन होते हैं।
* लेन-देन की अनिश्चितता घटती है।
* सामाजिक और व्यावसायिक नेटवर्क मजबूत होता है।
इसे सामाजिक पूंजी (Social Capital) कहते हैं।
यह किसी समुदाय की ऐसी सामूहिक संपत्ति है, जो केवल बैंक खाते या संपत्ति के रूप में नहीं, बल्कि विश्वास, सहयोग और पारस्परिक संबंधों के रूप में मौजूद रहती है।
यहां भी यह अंतर बनाए रखना जरूरी है कि ईमानदारी एक सामाजिक-धार्मिक आदर्श है, प्रत्येक व्यक्ति के व्यवहार का प्रमाणित सार्वभौमिक विवरण नहीं।
7. आवास और संकटग्रस्त परिवारों की सहायता - 
आर्थिक सुरक्षा का अर्थ केवल रोजगार और भोजन उपलब्ध कराना नहीं है। आवास, चिकित्सा और संकट के समय सहायता भी उतनी ही आवश्यक है।
दाऊदी बोहरा समाज में आवास सहायता के लिए फैज ए इनायत अमकीन अल अनवर जैसी संस्थागत पहल का उल्लेख मिलता है।
इसके माध्यम से पात्र परिवारों को आवास संबंधी सहायता और वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
वर्ष 2024 में प्रकाशित एक शोधपत्र में आवास सहायता प्राप्त करने वाले 414 लाभार्थियों के अनुभवों का अध्ययन किया गया था।
यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि समुदाय के भीतर ऐसे परिवार मौजूद हैं जिन्हें आवास और आर्थिक सहायता की जरूरत पड़ती है।
इसलिए समाज में गरीबी या आर्थिक असमानता बिल्कुल नहीं होने का दावा वास्तविकता से परे  है।
8. इस मॉडल की सीमाएं और वास्तविक चुनौतियां - 
किसी भी सामाजिक मॉडल का निष्पक्ष अध्ययन उसकी उपलब्धियों के साथ उसकी सीमाओं को समझे बिना पूरा नहीं हो सकता।
दाऊदी बोहरा समाज की व्यवस्थाओं के संदर्भ में कुछ प्रश्न महत्वपूर्ण हैं - 
* क्या प्रत्येक आर्थिक रूप से कमजोर सदस्य को समान सहायता मिलती है?
* ब्याज-मुक्त ऋण की कुल उपलब्ध पूंजी कितनी है?
* कितने ऋण समय पर वापस आते हैं?
* क्या छोटे कारोबारों की सफलता और असफलता का सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध है?
* सामुदायिक भोजन व्यवस्था का संचालन और वित्तीय लेखा-परीक्षण किस प्रकार होता है?
* आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक सहायता की पहुंच कितनी प्रभावी है?
इन प्रश्नों के विस्तृत सार्वजनिक आंकड़े उपलब्ध हुए बिना गरीबी उन्मूलन की वास्तविक दर या आर्थिक असमानता में कमी का प्रतिशत निर्धारित नहीं किया जा सकता।
फिर भी, इन संस्थागत व्यवस्थाओं का अस्तित्व और उनका सामाजिक महत्व अध्ययन के योग्य है।
9. राजस्थान के गांवों और पंचायतों के लिए क्या सीख? - 
दाऊदी बोहरा समाज के अनुभव से राजस्थान के गांवों में कुछ व्यावहारिक पहल विकसित की जा सकती हैं।
प्रस्ताव क्रियान्वयन का तरीका
1. ग्राम आर्थिक सहायता कोष - पारदर्शी ब्याज-मुक्त ऋण एवं सहायता व्यवस्था।
2. सामुदायिक रसोई - जरूरतमंद परिवारों के लिए भोजन
3. ग्राम उद्यमिता केंद्र - नए कारोबारियों को प्रशिक्षण एवं सलाह।
4. महिला उद्यम समूह - बेकरी, सिलाई, खाद्य उत्पाद एवं हस्तशिल्प।
5. स्थानीय व्यापार नेटवर्क - गांव के उत्पादों की सामूहिक बिक्री।
6. शिक्षा सहायता कोष  - जरूरतमंद विद्यार्थियों की पढ़ाई।
7. संकट सहायता समिति - बीमारी, दुर्घटना और बेरोजगारी में सहयोग।
8. सामाजिक लेखा-परीक्षण - आय-व्यय एवं लाभार्थियों का सार्वजनिक विवरण।
इन योजनाओं को धार्मिक पहचान से अलग रखते हुए सर्वधर्म समभाव और समान नागरिक सहभागिता के आधार पर संचालित किया जा सकता है।
पंचायतें, सहकारी समितियां, स्वयं सहायता समूह और सामाजिक संगठन इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
10. निष्कर्ष - 
समृद्ध समाज वह है जो अपने कमजोर व्यक्ति को अकेला नहीं छोड़ता - 
दाऊदी बोहरा समाज के आर्थिक मॉडल का अध्ययन हमें एक महत्वपूर्ण सामाजिक सत्य की ओर ले जाता है।
किसी व्यक्ति को केवल इसलिए गरीब नहीं माना जाना चाहिए कि उसके पास पर्याप्त पूंजी नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या उसके समाज के पास उसे पूंजी, रोजगार, शिक्षा, भोजन, आवास और संकट के समय सहयोग उपलब्ध कराने की कोई व्यवस्था है?
दाऊदी बोहरा समाज में कर्ज़न-ए-हसना, फैयज़ अल-मवाइद अल-बुरहानिया, व्यावसायिक नेटवर्क, शिक्षा और आवास सहायता जैसी व्यवस्थाएं इसी दिशा में काम करती हैं।
इनसे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि वहां गरीबी समाप्त हो चुकी है। लेकिन यह अवश्य समझ आता है कि संगठित सामुदायिक सहयोग आर्थिक असुरक्षा को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
समाज की वास्तविक समृद्धि इस बात से नहीं मापी जाती कि उसके कितने लोग अमीर हैं, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि उसका कोई सदस्य आर्थिक संकट में पड़ जाए तो उसे संभालने के लिए समाज के पास क्या व्यवस्था है।
और शायद इस पूरे अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है - 
दान किसी की तत्काल जरूरत पूरी करता है, ऋण उसे अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर देता है, शिक्षा उसे आगे बढ़ने की क्षमता देती है और संगठित समाज उसे गिरने पर संभालने का भरोसा देता है।
यही व्यक्तिगत समृद्धि से सामूहिक समृद्धि की ओर जाने का रास्ता है।
संदर्भ एवं अध्ययन के स्रोत - 
![The Community Kitchen that Ensures not a Single Member Goes to Bed Hungry - The Dawoodi Bohras](https://images.openai.com/static-rsc-4/Kco4Je4PYzlXPcT5CkRne_uDtIRJf-nLR0nGXAmnmCUaBmGyeEETUvQscJAZBai6FlmLChOfiam5TPoX8uJiudsD8SFcHaSr1A9dZvinFjiMp1qm4tjKKlxRXMAIR3-8nelDiSJk28yjp4LFmh9jc_95p5DhOpDdH9WGnJjS4jtw8uOh2NGbbynxAhFZiMln?purpose=fullsize)
![Home | Anjuman-e-Burhani (London)](https://images.openai.com/static-rsc-4/MW37U1GelYFMXNwL8z1KQGOtFTuUbHVqfjDpY-mm5ZBgHkYG7Domn7e2AOOplHamu54voFcR-BuVKVmc5nt1rDBpye6PjTXtTArvlaQQbJ4p9_dwG04q1ELPU_MvlyRTZoP5B2XmPnAgfeidzGWds1wSg5dS6jJdXi9XOXwzJgXOSdqU2IGQq0TnJNg0djjE?purpose=fullsize)
![Zero food wastage initiative by Dawoodi Bohras in Pune goes global](https://images.openai.com/static-rsc-4/62l9U6moldD9XI43Z3FPXBUNnivoBCp5mrDsDcALGWUGQSCihp1yRVLqJAiX08o7LaeUELpqE1_Y60N4XpQaY3xsVL_KpDddxbBgHytx0-ojkOTHvtKmed5XuSxlUSCRtHJ55K4LT-23ZKX8on-88w88sh8xcd6CXw8w0OdguVy82vYYBL8OAtpQbjoMYq7j?purpose=fullsize)
![Bohra: Mumbai: A kitchen that ensures no Bohra goes to bed hungry | Mumbai News - Times of India](https://images.openai.com/static-rsc-4/6fftlN7JfUnoU9oD9qhOgk6hz-FRSx82-Fx70TJfqOqP1LfIBY3oFV5gzuFaMZKlDUQlqst7zBowymNzLHCDOMuYvBeweI3JEjJxtcRwEoINScx5iRaa61c1qAQiD7YYDPhGh3TPd0uWbRT8aw7U5ame1bL_sz4dtbOB7WfN-VQTSOLzvjcA6_u2wuNKpbRd?purpose=fullsize)
![Supreme Court Refers Dawoodi Bohra Excommunication Case To Nine-Judge Bench Constituted For Sabarimala Matter](https://images.openai.com/static-rsc-4/IdW0rSi_V1vSotoEfurc3zVrrzo-6Ko5hwJ2Ejykksd6oZ5MuL7ILAhq_ZaeYaV5eXkL4g7tIUgu47XgmhyN1HnKo9G6WRcyXwy6bNhoSIdZd8v7t68I2V8gjdM4rEXBu05uzhUmUa9xGh8EuqsRyibr6GSRS2NPpqfvmbsV6Z2ay1GTKSfhqx4UKFfKxhFRm?purpose=fullsize)
![Fatemi Dawat Syedna Taher Fakhruddin Milad highlights 1441H](https://images.openai.com/static-rsc-4/h9U0Dl5K7IHgXo0Mei2p1czCPY1VEO9ILXA4AvSa-4GbAldptReNk6TNta3wRrdqlj8NjxzPxezxnszlCxGKaMoY_31EGUSFZfKuhvy1NETmfzBYh60ld6X0wfYadVXR4sOsPTZg_X5dzhagcC18nxwcS3jsUe7WiF0O06RsbQR9zeWUsj-pgsjj0t-OVKnw?purpose=fullsize)
![Khichda: An expression of grief, solidarity, and historical continuity](https://images.openai.com/static-rsc-4/Kx3WqULWauRwUsRkSXx013nOB7BtGo8_4IsMkxBRKpFXj_uGLVLsyK3mk4WISj75APi-BtPvMm-dE1GnDEZGUNNGjWFHVDK8ndt7pbZnztG5k3JbXDsenqu6CtarvqGn_U8bZ-9Kdcwo7PdPkZkMVcDbU7DgndeePysS40_tFoM2L-006IDF-JPGtm8rkuvZ?purpose=fullsize)g
![The Dawoodi Bohras of the Middle East (@Bohras_MidEast) on X](https://images.openai.com/static-rsc-4/X8dK3alZVTTJqYz_SQEWP22gBZDm_WsXRVO2tqfe0V8Q9NvbYNRhjYmWbvQhQQv4q3hTj9U4D6fi6XpNV7h7dqhUYkRxYKVe-erd3iXdJGyZ2QEXlyNJWqfY7BNiPbEUCxXuUPTYXCWNss0MmFFaUtWoWVMydLiXa6kZ8dG-sEAkbaMAikfqFTpOZlRZFEJb?purpose=fullsize)
![The Dawoodi Bohras of the Middle East (@Bohras_MidEast) on X](https://images.openai.com/static-rsc-4/vl2bN1QXGZVDkt4QvevNO8EzPUI9_Q6oDO8sqJb4gW2cO42vcMmv7m3f5VyOqwNbex4OygsYYSQ8q7mcXSkn6LYZs_S3LjkuMg2gbIn6-6EbOKoRjbBBOFpzSeN5yxnLd-zwbJtBxIzI2xh4L8iEpDa32CXHR3fg30CTrMMiLuokC-GS2TZ0TezeRt_YTq7r?purpose=fullsize)
![Qardan Hasana | Anjuman-e-Zainee | Dawoodi Bohra Community in Croydon (South London)](https://images.openai.com/static-rsc-4/LflaXfY0RN3XNQ-7HzQiXzeXXjqGSnkfyk1VvCfrT-aB2JPdLMKOE_yRyM7kFuqYt_lLQmV5epkxGBajyH4eiARFGEe8I8EEI7nHXTR2kF6r78oy6wRiOv09uzpSA2FDBzd6Faf4CdlNrcSVKuYxkDTBvZ8zWO2rscvgT-9tg8Ae-E0zg-t5p2DbGfdhDB-7?purpose=fullsize)

* [Dawoodi Bohra Community: आधिकारिक परिचय एवं सामाजिक गतिविधियां](https://in.thedawoodibohras.com/about-us/?utm_source=chatgpt.com)
* [Burhani Qardan Hasana Trust](https://www.thedawoodibohras.com/burhani-qardan-hasana/?utm_source=chatgpt.com)
* [Business Development Department](https://dawatehadiyah.org/departments/business-development/?utm_source=chatgpt.com)
* [Faiz al-Mawaid al-Burhaniyah](https://dawatehadiyah.org/departments/faiz-al-mawaid-al-burhaniyah-community-kitchens/?utm_source=chatgpt.com)
* [Mumbai Mirror: बोहरा समुदाय की व्यावसायिक संस्कृति पर रिपोर्ट](https://betamumbaimirror.indiatimes.com/opinion/columnists/manoj-r-nair/entrepreneur-energy/articleshow/15833899.cms?utm_source=chatgpt.com)
* [आवास सहायता पर 2024 का शोधपत्र](https://journalofcmsd.net/wp-content/uploads/2024/02/Journal-of-cmsd-Vol-112_compressed-1.pdf?utm_source=chatgpt.com)
* [दाऊदी बोहरा समाज का सामाजिक एवं शैक्षिक अध्ययन](https://www.tavinstitute.org/wp-content/uploads/2018/08/TIHRsynthesisDB2018.pdf?utm_source=chatgpt.com)
[Dawoodi Bohra Muslims | Dawoodi Bohra succession row: Bombay High Court dismisses suit against appointment of Syedna Mufaddal Saifuddin - Telegraph India](https://images.openai.com/static-rsc-4/Wi4152bWZiDZNgNy1RKUuB25ISv6R2RDq4YhfJlFzdmPSDooITGpowTdoeqVEJ9a9LjOq4JWgF-O_hmAymbMumO6dZ3zcfyZZmvNltqjUBmMQJ2MgBr6-wedTHkmXZ5Fxj2BNXkE-22A5tyv-36lHxBVMoGptNxhHbXQjAhXI9sUmZ7-mvHeX4zYhebXLveb?purpose=fullsize)
![Business - The Dawoodi Bohras](https://images.openai.com/static-rsc-4/wwk_vyEfvEcb-FKaTi4x04DT36TZuTqoPcx3sIINaMCFEHbCxoXo3pkJ42jLLVY_VZTgk4dgqR3W0HU26TT_VE9yJ-M8L5wzRwGXvqD5kYMNMe2I47ijmN_zmyYRo2PHtlT46Q5t_HGUKJb_Lk0kCEzd-s6dWpV-uO6mK4_CxHe4sr9G16OzlOMzHTqIpbC5?purpose=fullsize)
![The Community Kitchen that Ensures not a Single Member Goes to Bed Hungry - The Dawoodi Bohras](https://images.openai.com/static-rsc-4/Kco4Je4PYzlXPcT5CkRne_uDtIRJf-nLR0nGXAmnmCUaBmGyeEETUvQscJAZBai6FlmLChOfiam5TPoX8uJiudsD8SFcHaSr1A9dZvinFjiMp1qm4tjKKlxRXMAIR3-8nelDiSJk28yjp4LFmh9jc_95p5DhOpDdH9WGnJjS4jtw8uOh2NGbbynxAhFZiMln?purpose=fullsize)
संपादकीय टिप्पणी - इस लेख में संस्थागत व्यवस्थाओं, प्रकाशित आंकड़ों और सामाजिक-आर्थिक विश्लेषण को अलग रखा गया है। पुराने अनुमानों को वर्तमान तथ्य तथा धार्मिक आदर्शों को प्रत्येक सदस्य के व्यवहार का प्रमाण नहीं माना गया है।
#जिगर_चूरूवी

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शायर का ताअरूफ -  नाम - शमशेर खान  उपनाम - प्रेम, शमशेर गांधी तखल्लुस - पहले परवाना नाम से लिखना शुरू किया। पत्नी अख्तर बानो (सदफ) के सुझाव पर जिगर चूरूवी नाम से लिखना शुरू किया। पैदाइश - 18.04.1978 सहजूसर, चूरू (राजस्थान) पिता का नाम - श्री भालू खां (पूर्व विधायक (1980 से 1985), चूरू। माता का नाम - सलामन बानो (गृहणी) ताअलिम -  1. रामावि सहजूसर में पहली कक्षा में दाखिला 10.07.1984 से 1993 में मेट्रिक तक। 2. राउमावि बागला, चूरू से हेयर सेकंडरी 1993 से 1995 तक 3. राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण विद्यालय भाषाई अल्पसंख्यक अजमेर से BSTC, 1995 से 1997 4. राजकीय लोहिया महाविद्यालय चूरू से स्वयंपाठी के रूप में स्नातक 1998 से 2001 तक (महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, अजमेर) 5. राजकीय लोहिया महाविद्यालय चूरू से स्वयंपाठी के रूप में अधिस्नातक 2004 से 2005 तक (महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय बीकानेर से गोल्ड मेडलिस्ट - 2005 उर्दू साहित्य) 6. कश्मीर विश्वविद्याल, श्रीनगर के नंद ऋषि शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय से B.Ed.- (2007 - 8) 7. इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय से विशेष आवश्यकता विद्यार्...

महाराज पृथ्वीराज चौहान की वंशावली

चौहान वंश के महान सम्राट पृथ्वीराज चौहान को अन्य जातियों द्वारा उनके वंशज होने का अनेक क्षेत्रों में विवाद पैदा कर रहे है। अतः पृथ्वीराज चौहान की वंशावलि राजस्थान के महान लेखक इतिहासकार संत श्री कान्हाराम की पुस्तक पेज संख्या 76,77,78 व दशरथ शर्मा की पुस्तक Early Chauhan Dynasties", pp.109 का संदर्भ लिया गया है। संत श्री कान्हाराम[4] ने लिखा है कि.... [पृष्ठ-76]: ईसा की दसवीं सदी में प्रतिहारों के कमजोर पड़ने पर प्राचीन क्षत्रिय नागवंश की चौहान शाखा शक्तिशाली बनकर उभरी। अहिच्छत्रपुर (नागौर) तथा शाकंभरी (सांभर) चौहनों के मुख्य स्थान थे। चौहनों ने 200 वर्ष तक अरबों, तुर्कों, गौरी, गजनवी को भारत में नहीं घुसने दिया। चौहनों की ददरेवा (चुरू) शाखा के शासक जीवराज चौहान के पुत्र गोगा ने नवीं सदी के अंत में महमूद गजनवी की फौजों के छक्के छुड़ा दिये थे। गोगा का युद्ध कौशल देखकर महमूद गजनवी के मुंह से सहसा निकल पड़ा कि यह तो जाहरपीर (अचानक गायब और प्रकट होने वाला) है। महमूद गजनवी की फौजें समाप्त हुई और उसको उल्टे पैर लौटना पड़ा। दुर्भाग्यवश गोगा का बलिदान हो गया। गोगाजी के बलिदान दिवस भाद्रपद...

👤 शमशेर भालू खान

📍 कायमखानी बस्ती सहजुसर ,चूरू राजस्थान Pin :-331001

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