Skip to main content

इंदिरा गांधी (प्रियदर्शिनी)

            इंदिरा प्रियदर्शिनी
                  इंदिरा गांधी (प्रियदर्शिनी)
          इंदिरा गांधी फिरोज गांधी की शादी 
         इंदिरा फिरोज स्वतंत्रता आंदोलन के समय

इंदिरा गांधी पिता जवाहर लाल नेहरू,पुत्र राजीव 
                और संजय गांधी के साथ।
   फिल्म जगत के कलाकारों के साथ
         इंदिरा जी मारुति सुजुकी में सवार 

    एक पत्र राजस्थान के मुख्यमंत्री मोहन लाल सुखाडिया जी के नाम।

पोते पोतियों के साथ इंदिरा गांधी 
सरदार पटेल, नेहरू और इंदिरा जी

19 मई 1975 में सिक्किम का भारत में विलय हुआ था और देश का 22वाँ राज्य बना था . यह दिन उन अल्प अक्ल के लोगों को जनन्ना जरुरी है जो एक लंगूर की उछल कूद और बक्लोली को देश के लिए बड़ा योगदान समझते हैं, हम स्कूल में पढते थे और उस समय काजी लेंदुप दोरजी का नाम सभी की जुबान पर था .
सिक्किम का इतिहास भी रोचक है . बौद्ध भिक्षु गुरु रिन्पोचे 8वीं सदी में सिक्किम दौरे पर आए थे। मान्यता के अनुसार 14वीं सदी में ख्ये बुम्सा, पूर्वी तिब्बत में खाम के मिन्यक महल के एक राजकुमार को एक रात दैवीय दृष्टि के अनुसार दक्षिण की ओर जाने का आदेश मिला। इनके ही वंशजों ने सिक्किम में राजतन्त्र की स्थापना की।1642इस्वी में ख्ये के पांचवें वंशज फुन्त्सोंग नामग्याल को तीन बौद्ध भिक्षु, जो उत्तर, पूर्व तथा दक्षिण से आये थे, द्वारा युक्सोम में सिक्किम का प्रथम चोग्याल (राजा) घोषित किया गया। इस प्रकार सिक्किम में राजतन्त्र का आरम्भ हुआ।
सिक्किम की समस्या तब बढ़ने लगी, जब वहां के महाराज ने एक अमेरिकी महिला से शादी कर ली। इसके बाद वहां सीआईए का दखल होने लगा, जो भारत के लिए अच्छा नहीं था।जब भारत ऐशिया की प्रमुख शक्तियों में शुमार हो रहा था। तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी सन 1971 के युद्ध में अमेरिका के पाकिस्तान के साथ खड़े होने से बेहत सतर्क थीं, उन्होंने रॉ के पहले निदेशक रामेश्वरनाथ काव को सिक्किम के लिए विशेष ऑपरेशन के लिए नियुक्त किया और श्री काव ने सिक्किम के भारत में विलय को साकार कर दिया .सिक्किम नामग्याल राजतन्त्र द्वारा शासित एक स्वतन्त्र राज्य था। 1975 में हुए जनमत संग्रह के बाद यह भारत में विलीन हो गया। इस जनमत संग्रह के बाद राजशाही का अन्त और भारतीय संविधान की नियम-प्रणाली के अंतर्गत यहाँ प्रजातन्त्र का उदय हुआ। सिक्किम नामग्याल राजतन्त्र द्वारा शासित एक स्वतन्त्र राज्य था, परन्तु प्रशासनिक समस्यायों के चलते यहां के लोग खुशी-खुशी भारत में शामिल हुए थे।
चीन की नाक के नीचे यह सब करना मुश्किल था। चीन की सेना सीमा पर थीं, लेकिन काव के कुशल नेतृत्व और शानदार रणनीति की वजह से बगैर खून बहाए, 3000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र का भारत में विलय कराया और सिक्किम भारत का 22वां राज्य बना।
आज सिक्किम पर्यटन की दृष्टि से दुनिया का पसंदीदा स्थान है , पूर्वोत्तर का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां पर्याप्त उद्योग हैं, बहुत कम पलायन है और किसी भी तरह की अलगाववादी गतिविधि नहीं हैं 
सिक्किम के साथ इंदिरा गांधी के कुशल नेतृत्व और श्री काव की शानदार नीति को याद करना जरुरी है . सिक्किम स्वीटज़रलेंड से भी सुन्दर है।
सिक्किम के भारत में विलय का एक दुर्लभ फोटो तथा ऑपरेशन सिक्किम की सफलता के बाद एक अकबर रोड पर इंदिरा गाँधी के साथ मानिक राम, आर एन काव, गैरी सक्सेना, जी बी एस सिद्धू

Comments

Popular posts from this blog

बासनपीर मामले की हकीकत

इस ब्लॉग और मेरी अन्य व्यक्ति से हुई बातचीत पर मंहत प्रतापपुरी का बयान जीवनपाल सिंह भाटी की आवाज में सत्य घटना सद्भावना रैली बासनपीर जूनी पूर्व मंत्री सालेह मुहम्मद का बयान बासनपीर जूनी के सत्य एवं जैसाने की अपनायत की पड़ताल -  पिछले कुछ दिनों से जैसलमेर के बासन पीर इलाके का मामला सामने रहा है। कहा जा रहा है कि पूर्व राज परिवार की जमीन पर बासनपीर गांव के लोगों द्वारा कब्जा किया जा रहा है। नजदीक से पड़ताल करने पर हकीकत कुछ ओर निकली। जिसके कुछ तथ्य निम्नानुसार हैं - रियासत काल में सन 1662 में बीकानेर और जैसलमेर रियासत के बीच युद्ध हुआ। इस युद्ध में जैसलमेर सेना के दो वीर योद्धा सोढ़ा जी और पालीवाल जी शहीद हो गए। युद्ध के बाद बासन पीर (युद्ध स्थल) तालाब की तलहटी पर शहीदों की स्मृति में छतरियां बनवाई हैं। जैसलमेर के चारों और 120 किलोमीटर इलाके में 84 गांव पालीवाल ब्राह्मणों ने बसाए जिनमें से एक गांव बासनपीर जूनी भी था। पालीवाल ब्राह्मण समृद्ध किसान और व्यापारी थे, रियासत के दीवान सालिम सिंह से अनबन के कारण सन् 1825 में सभी गांव खाली करने को मजबूर हो गए। पालीवाल...

✍️कायम वंश और कायमखानी सिलसिला सामान्य इतिहास की टूटी कड़ियाँ

कायमखानी समाज कुछ कही कुछ अनकही👇 - शमशेर भालू खां  अनुक्रमणिका -  01. राजपूत समाज एवं चौहान वंश सामान्य परिचय 02. कायम वंश और कायमखानी 03. कायमखानी कौन एक बहस 04. पुस्तक समीक्षा - कायम रासो  05. कायम वंश गोत्र एवं रियासतें 06. चायल वंश रियासतें एवं गोत्र 07. जोईया वंश स्थापना एवं इतिहास 08. मोयल वंश का इतिहास 09. खोखर वंश का परिचय 10. टाक वंश का इतिहास एवं परिचय  11. नारू वंश का इतिहास 12 जाटू तंवर वंश का इतिहास 13. 14.भाटी वंश का इतिहास 15 सरखेल वंश का इतिहास  16. सर्वा वंश का इतिहास 17. बेहलीम वंश का इतिहास  18. चावड़ा वंश का इतिहास 19. राठौड़ वंश का इतिहास  20. चौहान वंश का इतिहास  21. कायमखानी समाज वर्तमान स्थिति 22. आभार, संदर्भ एवं स्त्रोत कायम वंश और कायमखानी समाज टूटी हुई कड़ियां दादा नवाब (वली अल्लाह) हजरत कायम खां  साहब   नारनौल का कायमखानीयों का महल     नारनौल में कायमखानियों का किला मकबरा नवाब कायम खा साहब हांसी,हरियाणा   ...

✅पाकिस्तान परस्त कौन

नापाक परस्त कौन -  👉 नापाक पसंद भाजपा - एक विश्लेषण 🔥# ऑपरेशन_सिन्दूर के बाद भारतीय सेना के आक्रमण में यदि #मोदी (भाजपा) सरकार ने दुश्मन से हमदर्दी न दिखाई होती और अमेरिका की व्यापार नहीं करने धमकी में ना आए होते तो भारतीय सेना नापाकिस्तान के नक्शे के चार टुकड़े कर चुकी होती। थोड़े समय के लिए सेना को फ्री हैंड मिल जाता, विदेश राज्य मंत्री पाक सरकार को हमले की पूर्व जानकारी ना देते और शहबाज़ शरीफ़ के प्रति प्रेम न छलकाते तो आज तस्वीर दूसरी होती। आख़िर भाजपा इतनी पाकिस्तान परस्त क्यों है, आईए जानते हैं,  1. 👉 वर्ष 1999 का फरवरी महीना दिनांक 19.02.1999 -  🔥 वाजपेई की लाहौर यात्रा और कारगिल युद्ध -             दिल्ली से लाहौर बस  लाहौर पहुंचे प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पाक PM नवाज शरीफ से भेंट की। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बस द्वारा बाघा बॉर्डर होते हुए लाहौर में नवाज शरीफ को गले लगाने पहुंचकर लाहौर घोषणा- पत्र जारी करते हैं। इधर वाजपेयी शरीफ के गले मिल कर मेहमाननवाज़ी का मजा ले रहे थे उधर नापाक स...

👤 शमशेर भालू खान

📍 कायमखानी बस्ती सहजुसर ,चूरू राजस्थान Pin :-331001

💬 Chat on WhatsApp

© 2026 ShamsherBhaluKhan.com | Designed & Managed by Shamsherbhalukhan