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फिरोज गांधी एक परिचय

फिरोज गांधी एक परिचय - 
प्रचलित नाम - फिरोज जहांगीर गांधी
वास्तविक नाम - फिरोज जहांगीर घांडी 
जन्म - 12 सितंबर 1912
जन्म स्थान - 
बॉम्बे (मुंबई) के फोर्ट ज़िले का तहमुलजी नरीमन अस्पताल
मृत्यु - 8 सितंबर 1960 (47 वर्ष)
मृत्यु का स्थान - नई दिल्ली 
मृत्यु का कारण - दिल का दौरा
शांत स्थान - 
पारसी कब्रिस्तान, इलाहाबाद (प्रयागराज)
पिता - जहांगीर फ़रदून घांडी 
(जहाँगीर किलिक निक्सन के लिए मरीन इंजीनियर रूप में काम करते थे जो बाद में वारंट इंजीनियर के रूप में पदोन्नत हुए।)
माता - रतिमाई कोमासरियत
धर्म - पारसी
निवास - 
1. दादा कोटपारीवाड़ भरूच गुजरात में रहते थे, जो बाद में व्यवसाय हेतु बॉम्बे आ गए। इनका पैतृक मकान आज भी यहां अवस्थित है।
2. भरूच से दादा के घर में रतिमाई कमिसरियट ओर जहांगीर फ़रदून घांडी  बॉम्बे के खेतवाड़ी मोहल्ले में नौरोजी नाटकवाला भवन में रहने लगे।
3. 1920 में इलाहाबाद आगमन - 
फिरोज गांधी बॉम्बे पिता की मृत्यु के बाद इलाहाबाद आए।
(फिरोज और उनकी मां अविवाहित मौसी शिरीन कमिसारिएट, इलाहाबाद के लेडी डफरिन अस्पताल में सर्जन थीं, के साथ रहने हेतु इलाहाबाद चले आए।)
शिक्षा - 
1. विद्या मंदिर हाई स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा 
2. ब्रिटिश कर्मचारियों के बच्चों हेतु बने इविंग क्रिश्चियन कॉलेज, प्रयागराज में इंटर मीडियत की पढ़ाई की।
 3. वर्ष 1935 में लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स लंदन से बी.एससी. की डिग्री प्राप्त की।
4. फिरोज आगे की पढ़ाई करना चाहते थे परन्तु आजादी की लड़ाई में शामिल होने हेतु पढ़ाई बीच में छोड़ कर भारत आ गए।
विवाह - 
इंदिरा और फिरोज गांधी की शादी आर्य समाज रीति से आनंद भवन इलाहाबाद में 26 मार्च 1942 को हुई। 
इंदिरा और फिरोज का विवाह इलाहाबाद में एक आर्य समाज मंदिर में हुआ था। जिसे बाद में इलाहाबाद कोर्ट में रजिस्टर करवाया गया। इस विवाह के पहले नेहरू राजी नहीं थे, पर बाद में ताजी हो गए।
इंदिरा नेहरू (प्रियदर्शिनी) (1942)
संतान - 
1. राजीव गांधी (पुत्र, 20 अगस्त 1944)
2. संजय गांधी (पुत्र)
सहोदर
1. दोराब फ़रीदून (भाई)
2. तहमीना केरशास्प (बहन)
3. आलू दस्तूर (बहन)
4. फ़रदून (भाई)
(इन पांच भाई बहनों में जहांगीर फ़रदून सब से छोटे थे।)
राजनीतिक दल - भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
कार्य - 
1. पत्रकार
 द नेशनल हेराल्ड 
द नवजीवन 
समाचार पत्र के प्रकाशक एवं एडिटर
2. स्वतंत्रता सेनानी - 1938 से
3. सांसद 
1.1950 से 1952 तक प्रांतीय संसद के सदस्य 
2. लोकसभा के सदस्य रायबरेली - 
(1) 17 अप्रैल 1952 – 4 अप्रैल 1957
(2) 5 मई 1957 – 8 सितंबर 1960
स्वतंत्रता आन्दोलन और फिरोज - 
1938 से आजादी के आंदोलन से जुड़ने के बाद वे नेहरू परिवार जुड़ गए। इलाहाबाद में उनका और नेहरू परिवार का निवास था, जिसके कारण अधिकतर समय आनंद भवन में ही कटता था। यहीं पर इंदिरा (प्रियदर्शिनी) से उनकी मुलाकात हुई जो बाद में प्यार में बदल गई। इसी समय उन्होंने महात्मा गांधी के सम्मान में अपने मूल उपनाम, घांधी को गाँधी के रूप में बदल लिया।
26 मार्च 1942 को आनंद भवन में फिरोज गांधी और इंदिरा नेहरू का विवाह समारोह। 1984 में, शादी की एक तस्वीर का इस्तेमाल अदालत में यह दिखाने के लिए किया गया था कि समारोह में हिंदू रीति-रिवाजों का पालन किया गया था , न कि पारसी रीति-रिवाजों का।
वर्ष 1930 में कांग्रेस ने स्वतंत्रता सेनानियों की शाखा, वानर सेना का गठन किया। एक दिन इविंग क्रिश्चियन कॉलेज के बाहर का नेतृत्व कमला जवाहर लाल नेहरू बेटी प्रियदर्शिनी (इन्दिरा) के साथ धरना दे रही थी। यहीं फिरोज की मुलाकात कमला नेहरू और इंदिरा से हुई । कमला नेहरू के धूप के कारण बेहोश होने पर फिरोज ने उनकी देखभाल की। अगले दिन, उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़कर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए।
वर्ष 1930 में उन्हें लाल बहादुर शास्त्री (इलाहाबाद (प्रयागराज) जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण फैजाबाद जेल में उन्नीस महीने तक नज़रबंद रखा गया। रिहाई के तुरंत बाद, वे संयुक्त प्रांत (उत्तर प्रदेश) में लगान-मुक्ति आंदोलन में शामिल हो कर नेहरू के साथ काम करने लगे। 1932 और 1933 में दो बार जेल गए। 
1945 में आनंद भवन में राजीव फ़िरोज़ इंदिरा गांधी और नेहरू
इंदिरा फिरोज गांधी 
फिरोज ने पहली बार 1933 में इंदिरा को प्रपोज किया जिसे इंदिरा और उनकी मां ने इंदिरा की आयु कम (सोलह साल) होने के कारण मना कर दिया। फिरोज नेहरू परिवार के बहुत करीब आ गए। कमला नेहरू (इंदिरा की मां) के 1934 में टीबी होने पर भोवाली टीबी सेनेटोरियम में उनके साथ रहे। अप्रैल 1935 में कमला की हालत स्विज्रलैण्ड (यूरोप) जाने का प्रबंध फिरोज ने ही किया था। फिरोज कमला से बाडेनवीलर के सेनेटोरियम और लुसाने मिलने आए। लुसाने में 28 फरवरी 1936 को उनकी मृत्यु हो गई। फिरोज इस समय उनके पास थे। अब फिरोज और इंदिरा पढ़ने हेतु इंग्लैंड चले गए, जहां उनमें करीबी बढ़ती गई और मार्च 1942 में आदि धर्म रीति-रिवाजों अनुसार विवाह रचा लिया।
अगस्त 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हो गया, उनके विवाह को अभी छः माह हुए थे, दोनों इस आंदोलन में कूद पड़े। दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। फिरोज एक साल हेतु नैनी सेन्ट्रल जेल इलाहाबाद भेज दिए गए। जेल से छुटकर 1943 से 1948 तक दोनों आजादी के आंदोलन में रहे। इस कालखंड में इनके दो बेटे राजीव रत्न गांधी (1944) और संजय गांधी (1946) का जन्म हुआ।
आज़ादी के बाद नेहरू प्रधानमंत्री बन दिल्ली रहने लगे। फ़िरोज़ और इंदिरा बच्चों के साथ इलाहाबाद में हो रहे। इलाहाबाद में फ़िरोज़ नेहरू द्वारा स्थापित समाचार पत्र द नेशनल हेराल्ड के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्य करते रहे।
वर्ष 1950 में गठित प्रांतीय संसद के सांसद (1950 से 1952) तक चुने गए। फिरोज ने वर्ष 1952 में स्वतंत्र भारत के पहले आम चुनावों में उत्तर प्रदेश के रायबरेली निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। फिरोज भ्रष्टाचार के प्रति मुखर थे, उन्होंने ससुर की सरकार की आलोचना की और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई शुरू कर दी।
आज़ादी के बाद व्यापारियों ने नेताओं से मिल का वित्तीय अनियमितताएँ कीं जिनका फिरोज ने जमकर विरोध किया।
दिसंबर 1955 में फिरोज़ डालमिया घराने के आर्थिक घोटाले (रामकिशन डालमिया ने एक बैंक और बीमा कंपनी के अध्यक्ष के रूप में बेनेट एंड कोलमैन के अधिग्रहण हेतु इनका धन शोधन हेतु अनैतिक उपयोग किया।)
वर्ष 1957 के आम चुनावों में फिरोज रायबरेली से पुनः सांसद चुने गए। वर्ष 1958 में फिरोज ने संसद में सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में हरिदास मूंदड़ा घोटाले का मुद्दा उठाया जिसके कारण वित्त मंत्री टीटी कृष्णमाचारी को पद से इस्तीफा देना पड़ा। फिरोज़ ने LIC से शुरु करते हुए कई वित्तीय संस्थाओं के राष्ट्रीयकरण हेतु अभियान चलाए। जिसमें टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी (टेल्को) (जापान निर्मित रेल इंजन की दुगनी राशि वसूलने के कारण) का राष्ट्रीयकरण करने का सुझाव शामिल है जो स्वीकार नहीं किया गया। इस पर (टाटा के पारसी होने के कारण) पारसी समुदाय में उनका विरोध होने लगा। फिरोज ने भ्रष्टाचार एवं वित्तीय अनियमितताओं के विरुद्ध ससुर के प्रधानमंत्री होने के बावजूद अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ चुनौती देना बंद नहीं किया।
अंतिम समय है - 
वर्ष 1958 में फिरोज को दिल का दौरा पड़ा। उस समय इंदिरा प्रधानमंत्री निवास तीन मूर्ति भवन में पिता के साथ भूटान की राजकीय यात्रा पर जा रही यात्रा पर थीं। पति के बीमार होने का समाचार सु कर वापस घर आ गईं। वर्ष 1960 में फिरोज को दूसरी बार दिल का दौरा पड़ा और दिल्ली के विलिंगडन अस्पताल में निधन हो गया । 
उनका अंतिम संस्कार दिल्ली में किया गया और अस्थियाँ इलाहाबाद के पारसी कब्रिस्तान में दफनाई गईं।
फिरोज की पैतृक सीट रायबरेली - 
रायबरेली लोकसभा सीट पर 1967 से 1976 तक इंदिरा गांधी और 2004 से 2024 तक बहू और सोनिया गांधी (राजीव गांधी की पत्नी)का चुनती आ रही हैं। 2024 से राहुल गांधी (फिरोज गांधी के पोते) ने यहां से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
गांधी सरनेम - 
इंदिरा नेहरू ने फिरोज से शादी के बाद पति का सरनेम गांधी उपयोग में लना शुरू किया। जो आगे चलकर दोनों बेटों राजीव और संजय का भी उपनाम हुआ। इस परिवार की तीसरी पीढ़ियों में राहुल और वरुण उनकी बहुएं सोनिया और मेनका भी इसी नाम को अपनाया।. 
कुछ लोगों के प्रश्न हैं कि क्या फिरोज शुरू से गांधी थे या उन्होंने ये सरनेम बाद में अपनाया ?
फिरोज वास्तव में गांधी नहीं घांधी सरनेम से थे, ना कि गांधी।
सोशल मीडिया पर लोग उन्हें फिरोज खान के नाम से भी बुलाते हैं जो भ्रामक एवं झूठ है। यहां उनकी पैदाइश, धर्म और अंतिम संस्कार को लेकर अलग - अलग बातें होती रहती है, जिसका जीता जगता उद्गम मेरी यू ट्यूब शॉर्ट में आएं कमेंट्स हैं।
यू ट्यूब शॉर्ट
खुद फिरोज गांधी की आधिकारिक जीवनी Feroze the Forgotten Gandhi में स्वीडन के बर्टिल फाक लिखते हैं - 
26 मार्च 1942 में इलाहाबाद के आनंद भवन में शामियाना सजाया गया. इसी के नीचे फिरोज और इंदिरा ने सात फेरे हुए।
वास्तविकता - 
फिरोज घांधी महात्मा गांधी से बहुत प्रभावित थे। उपनाम मिलता जुलता था। गांधीजी के इलाहाबाद दौरे के समय उन्होंने अपना नाम घांधी से बदलकर गांधी कर लिया। गांधी शब्द इत्र बेचने वालों का उपनाम है। न ही महात्मा गांधी और ना ही फिरोज गांधी के परिवार में कोई इत्र बेचने वाला था। फिरोज का परिवार ब्रिटिश राज में सरकारी मुलाजिम रहा और गांधीजी का परिवार महाराजा के परिवार का निजी कार्मिक रहा।
इस तरह से स्पष्ट है कि एक जैसे उच्चारण के कारण फिरोज को घांधी की जगह गांधी सरनेम मिला।
स्मृति में - 
पुस्तक (जीवनी) - 
बर्टिल फॉक, रोली बुक्स प्राइवेट लिमिटेड 29 नवंबर 2016 - 320 पेज
बर्टिल फ़ॉक (जन्म 1933) एक अत्यंत सम्मानित स्वीडिश समाचार पत्र और टीवी पत्रकार हैं, ने अपने जीवन के दस वर्ष से भी अधिक समय भारत, इंग्लैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका में बिताए। उन्होंने इस यात्रा के समय में फिरोज गांधी के संबंध में यथोचित जानकारियां जुटा कर उनकी जीवनी फिरोज द फोर्गोटेन गांधी के नाम से जीवनी लिखी।
संस्थाएं - 
1. रायबरेली के एक कॉलेज का नाम (स्थापना फिरोज गांधी द्वारा) की गई का नाम फिरोज गांधी कॉलेज रखा गया।
2. NTPC (LTD) उत्तर प्रदेश के ऊंचाहार थर्मल पावर स्टेशन का नाम फिरोज गांधी ऊंचाहार थर्मल पावर प्लांट किया गया।
लेखन एवं संपादन - 
शमशेर गांधी 
(जिगर चूरूवी)
9587243963
स्त्रोत - 
1. विभिन्न पत्रिकाएं एवं अखबारों की रिपोर्ट।
2. गूगल फोटो।
3. इंदिरा गांधी के बारे में लिखे गए लेख।

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