सोनिया गांधी के जीवन, राजनीतिक सफ़र, उपलब्धियाँ और विवाद — एक संपूर्ण परिचय। पढ़िए उनके प्रभावशाली करियर की कहानी।
सोनिया गांधी एक परिचय - बुद्धिमान, मेहनती, प्रतिबद्ध, शिक्षकों के लिए हाई स्कूल में अच्छी तरह से सफल होंगी। स्कूल के रिपोर्ट कार्ड में लिखी गई रिपोर्ट।
व्यक्तिगत परिचय - नाम - सानिया गांधी
असली नाम - एडविग एंटोनिया एल्बिना मेनो (Edvige Antonia Albina Maino)
जन्म - 9 दिसंबर 1946
पिता का नाम - स्टेफानो माइनो
माता का नाम - पाओला माइनो
भाषा - सिंब्रियन
पढ़ाई के बाद जीवन का लक्ष्य -
सोनिया फ्लाइट अटेंडेंट बनना चाहती थीं।
जन्म स्थान - विसेंजा लुसियाना, इटली (मैनी स्ट्रीट, अल्मा मेटरबेल एजुकेशनल ट्रस्ट, इटली) (वेनेटो, इटली में विसेंज़ा से लगभग 35 किमी दूर बसा है।
पीहर पक्ष -
सोनिया माइनो तीन बहनों में सब से बड़ी हैं।
1. सोनिया
2. नादिया
3. अनुष्का
इनका पालन-पोषण रोमन कैथोलिक ईसाई परिवार में हुआ। सोनिया बड़ी हो कर किशोरावस्था में माध्यमिक शिक्षा हेतु ट्यूरिन के पास के शहर ओरबासानो के कैथोलिक स्कूल पढ़ीं।
स्टेफानो निर्माण मिस्त्री का काम करते थे ने ओर्बासानो में निर्माण व्यवसाय शुरू किया। वर्ष 1998 में आउटलुक में प्रकाशित जाविद लाइक के साथ एक साक्षात्कार में स्टेफानो ने दावा किया कि उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में पूर्वी मोर्चे पर हिटलर के वेहरमाच के साथ सोवियत सेना के विरुद्ध लड़ाई लड़ी और वो बेनिटो मुसोलिनी और इटली की राष्ट्रीय फासीवादी पार्टी के वफादार एवं समर्थक रहे हैं। उक्त लेख के अनुसार, परिवार में मुसोलिनी के लेखन और भाषणों पर चमड़े की जिल्द वाली किताबें थीं, स्टेफानो ने पूर्वी मोर्चे में इतालवी भागीदारी की स्मृति में सोनिया और उनकी बड़ी बहन का नाम नादिया रखा। 1983 में उनकी मृत्यु हो गई।
गांधी की मां पाओला माइनो का 27 अगस्त 2022 को इटली में उनके घर पर बीमारी के कारण लगभग 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
पीहर पक्ष का एड्रेस -
31, कॉन्ट्राडा मैनी (मैनी स्ट्रीट), लुसियाना इटली।
प्रेम कहानी -
सोनिया गांधी ने 13 साल की उम्र में स्कूली शिक्षा पूरी की। 1964 में वो कैम्ब्रिज शहर में बेल एजुकेशनल ट्रस्ट के भाषा स्कूल में अंग्रेजी पढ़ने गईं। अगले वर्ष 1965 में। राजीव गांधी से वर्सिटी रेस्तरां में उनकी मुलाकात हुई। इस रेस्टोरेंट में सोनिया माइनो अंशकालिक वेट्रेस के रूप में काम करती थीं। राजीव तब कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। इस संदर्भ में, टाइम्स , लंदन ने बताया, "श्रीमती गांधी 1965 में कैम्ब्रिज के एक छोटे से भाषा कॉलेज में 18 वर्षीय छात्रा थीं, [...] जब उनकी मुलाकात एक सुंदर युवा इंजीनियरिंग छात्र से हुई"। [ 28 ] इस जोड़े ने 1968 में हिंदू रीति-रिवाज से शादी की, जिसके बाद वह अपनी सास और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के घर चली गईं । [ 29 ] [ 8 ]
भारत की नागरिक - 27/04/1983 से
धर्म - रोमन कैथोलिक (विवाह के बाद पति का धर्म)
विवाह - 1968 इंदिरा गांधी के बड़े बेटे राजीव रत्न गांधी से, जो एयर इंडिया में पायलट थे।बाद में भारत के प्रधानमंत्री बने। 1991 में बम धमाके से मृत्यु। केंब्रिज कॉलेज में अध्ययनरत राजीव गांधी मुलाकात के बाद 1968 में विवाह हुआ।
राजनीतिक दल - भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
संतान -
1. राहुल गांधी (पुत्र) अविवाहित, सांसद, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष एवं वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष।
2. प्रियंका गांधी (पुत्री) रॉबर्ट वाड्रा से विवाह के बाद प्रियंका वाड्रा, इनके एक पुत्र है जिसका नाम ईशान वाड्रा है। वर्तमान में सांसद एवं महासचिव कांग्रेस। पति प्रसिद्ध व्यवसाई हैं।
सास - ससुर
इंदिरा फिरोज गांधी
पेशा - राजनीतिज्ञ, पूर्व प्रधानमंत्री की पुत्रवधु एवं पत्नी।
शिक्षा -
1. प्रारंभिक शिक्षा लुसियाना इटली
2. भाषाओं पर विशेष अध्ययन करने हेतु इंग्लैंड के कैम्ब्रिज कॉलेज में नामांकन।
वैवाहिक जीवन -
इसके बाद वह भारत आ गईं और अपनी सास, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ उनके नई दिल्ली स्थित आवास पर रहने लगीं । हालाँकि , सोनिया गांधी अपने पति के प्रधानमंत्री काल के दौरान भी सार्वजनिक जीवन से दूर रहीं।
राजीव - सोनिया दंपति के दो बच्चे हुए 01. राहुल गांधी (1970)
02. प्रियंका गांधी (वाड्रा) (1972)
प्रतिष्ठित परिवार से होने के बावजूद सोनिया और राजीव ने राजनीति में किसी भी तरह की भागीदारी से परहेज किया। यह काम संजय गांधी पर छोड़ दिया गया।राजीव इंडियन एयरवेज में पायलट और सोनिया जिम्मेदार पत्नी के रूप में काम करते रहे। सास इंदिरा गांधी के साथ उनकी खूब पटरी खाती थी। इंदिरा अक्सर बच्चों को खिलाने हेतु समय निकाल कर सोनिया के पास आया करतीं। दूसरी बहु मेनका से इंदिरा जी के मेल कम रहा। वर्ष 1985 में हिंदी पत्रिका धर्मयुग को दिए साक्षात्कार में वो इंदिरा जी को बेहतरीन सास बता कर याद करती हैं। सास के लिए - "उन्होंने मुझ पर अपना सारा स्नेह और प्यार बरसाया।"
आपातकाल के बाद 1977 में पद से हटाए जाने के तुरंत बाद , राजीव परिवार ने थोड़े समय के लिए विदेश जाने पर विचार किया। परन्तु 23 जून 1980 को विमान दुर्घटना में छोटे भाई संजय की मृत्यु के बाद 1982 में राजीव ने राजनीति में प्रवेश किया।
राजनैतिक जीवन -
पति राजीव गांधी की हत्या के बाद, कांग्रेस नेताओं ने सोनिया गांधी को पार्टी का नेतृत्व संभालने हेतु आमंत्रित किया जिसे उन्होंने नकार दिया। पार्टी के काफी आग्रह के बाद, वर्ष 1997 में राजनीति में आने के लिए राजी हुईं। अगले वर्ष उन्हें पार्टी अध्यक्ष पद के लिए नामित किया गया। उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने 2004 के चुनावों के बाद अन्य वामपंथी दलों से UPA गठबंधन बना कर सरकार बनाई। तब से सोनिया गांधी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) की चेयर पर्सन हैं। देश की जनता ने खूब आग्रह किया पर उन्होंने प्रधानमंत्री बनने से इनकार कर दिया। तब मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया गया जो 2014 तक सत्ता में रहे । सरकार के संचालन हेतु गठबंधन द्वारा संचालित राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की चेयरपर्सन रहीं।
सोनिया गांधी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष बनने वाली प्रथम महिला रही हैं। जिसने स्वतंत्रता के बाद के इतिहास में भारत पर शासन किया है। उन्होंने 1998 में पार्टी नेता के रूप में पदभार संभाला और बाईस साल की सेवा के बाद 2017 तक इस पद पर रहीं। वह 2019 में अंतरिम अध्यक्ष के रूप में पद पर लौटीं और अगले तीन वर्षों तक अध्यक्ष रहीं।
राजनैतिक कार्यकाल में सोनिया गांधी ने -
1. सूचना का अधिकार
2. खाद्य सुरक्षा विधेयक
3. मनरेगा
4. काम की गारंटी अधिनियम
5. शिक्षा का अधिकार
6. परमाणु समझौता
7. भूमि अधिनियम
8. सम्पूर्ण कर्ज़माफी
जैसी कल्याणकारी योजनाओं को अमल में ला कर सक्षम नेतृत्व का परिचय दिया।
यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल के उत्तरार्ध में स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण गांधी की राजनीति में सक्रिय भागीदारी कम होने लगी। उन्होंने दिसंबर 2017 में कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे कर राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाया गया, राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद अगस्त 2019 में पार्टी का नेतृत्व करने के लिए वापस लौट आईं। सोनिया गांधी ने भारत सरकार में कोई सार्वजनिक पद नहीं संभाला, परन्तु उनको देश के सबसे शक्तिशाली राजनेताओं में से एक के रूप में वर्णित किया जाता है। विश्व स्तर पर फोर्ब्स पत्रिका द्वारा उन्हें दुनिया की सबसे शक्तिशाली महिलाओं में सूचीबद्ध किया गया।
सोनिया गांधी द्वारा धारित पद -
कांग्रेस अध्यक्ष -
(14 मार्च 1998 – 16 दिसंबर 2017 तक) 1998 में शरद पवार के स्थान पर पदभार ग्रहण किया। 2017 तक रहीं। इसके बाद स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ना पड़ा, परन्तु 10.08.2019 से 26.10.2022 तक पुनः पद संभालना पड़ा। 2022 में मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनका पदभार ग्रहण किया। सोनिया गांधी ने अब तक सब से लंबी अवधि तक कांग्रेस अध्यक्ष रहने का कीर्तिमान बनाया।
संसद सदस्य, राज्यसभा है-
3 अप्रैल 2024 राजस्थान राज्य से।
चेयर पर्सन यूपीए -
6 मई 2004 – 18 जुलाई 2023
अध्यक्ष राष्ट्रीय सलाहकार परिषद -
4 जून 2004 – 23 मार्च 2006
29 मार्च 2010 – 25 मई 2014
संसद सदस्य , लोकसभा
17 मई 2004 – 2 अप्रैल 2024
वर्ष/ सन क्षेत्र कुल मिले वोट %
13/1999 अमेठी 418960 67.12
13/1999 बेल्लारी 414,650 51.70
14/2004 रायबरेली 378107 58.75
15/2009 रायबरेली 4,81,490 72.23
16/2014 रायबरेली 5,26,434 63.80
17/2019 रायबरेली 5,34,918 55.80
नेता प्रतिपक्ष लोकसभा -
13 अक्टूबर 1999 – 6 फ़रवरी 2004
सम्मान एवं पुरस्कार -
01. 2008 मानद डॉक्टरेट (साहित्य) मद्रास विश्वविद्यालय।
02. 2006 किंग लियोपोल्ड का आदेश बेल्जियम सरकार
03. 2006 मानद डॉक्टरेट व्रीजे यूनिवर्सिटिट ब्रुसेल्स (ब्रुसेल्स विश्वविद्यालय)
राजनीतिक उतार चढ़ाव -
राजीव गांधी का प्रधानमंत्रित्व काल (1984-1990) -
40वें राष्ट्रपति USA रोनाल्ड रीगन नैन्सी रीगन दंपति के साथ जून 1985
सोनिया गांधी का सार्वजनिक जीवन से जुड़ाव इंदिरा जी की हत्या के बाद पति के प्रधानमंत्री बनने के बाद शुरू हुआ। भारत के प्रधानमंत्री की पत्नी के रूप में, उन्होंने उनकी आधिकारिक के रूप में कार्य किया और कई राजकीय यात्राओं में उनके साथ रहीं। वर्ष 1984 में उन्होंने देवरानी मेनका गांधी के विरुद्ध सक्रिय रूप से प्रचार किया जो अमेठी में राजीव के सामने चुनाव लड़ रही थीं।
✍️ सक्रिय राजनीतिक में पदार्पण और कांग्रेस अध्यक्ष पद (1991-1998) -
वर्ष 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी ने कांग्रेस सरकार बनने के बाद भी कांग्रेस अध्यक्ष और प्रधानमंत्री बनने से मना कर दिया। पार्टी ने पीवी नरसिम्हा राव को चुनकर प्रधानमंत्री बनाया। अगले कुछ वर्षों में कांग्रेस की स्थिति लगातार खराब होती गई और वह 1996 के चुनाव हार गई। माधवराव सिंधिया, राजेश पायलट, नारायण दत्त तिवारी, अर्जुन सिंह, ममता बनर्जी, जीके मूपनार, पी. चिदंबरम और जयंती नटराजन जैसे कई वरिष्ठ नेताओं ने मौजूदा अध्यक्ष सीताराम केसरी के खिलाफ खुली बगावत करते हुए जंग छेड़ दी। उनमें से कई ने पार्टी छोड़ नई पार्टियों का गठन कर लिया। कांग्रेस की शक्ति कई गुटों में बंट गई। पार्टी के गिरते भाग्य को पुनर्जीवित करने के प्रयास हेतु सोनिया 1997 में कलकत्ता अधिवेशन में प्राथमिक सदस्य के रूप में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुईं और 1998 में पार्टी की वरिष्ठ नेता बन गईं।
मई 1999 में, पार्टी के तीन वरिष्ठ नेताओं (शरद पवार, पीए संगमा और तारिक अनवर ) ने उनके विदेशी मूल के कारण भारत के प्रधानमंत्री बनने के उनके प्रयास के अधिकार को चुनौती दी। जवाब में, उन्होंने पार्टी नेता के पद से इस्तीफा देने की पेशकश की, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें भारी समर्थन मिला और तीन बागी नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया जिन्होंने आगे चलकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी बनाई। कांग्रेस के प्राथमिक सदस्य के रूप में शामिल होने के 62 दिनों के भीतर उन्हें पार्टी अध्यक्ष पद की पेशकश की गई जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।
वर्ष 1999 में बेल्लारी , कर्नाटक और अमेठी , उत्तर प्रदेश दो सीटों से लोकसभा चुनाव लड़ा और दोनों सीटें जीत कर अमेठी का प्रतिनिधित्व करना चुना। बेल्लारी में, उन्होंने भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज को हराया था। वर्ष 1999 में वे 13वीं लोकसभा में विपक्ष की नेता बनीं। वर्ष 2000 में, उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में जितेंद्र प्रसाद को 97% के भारी अंतर से हराया। उन्हें बिना किसी चुनाव के बार-बार इस पद के लिए चुना जाता रहा। विपक्ष के नेता के रूप में सोनिया गांधी ने 2003 में वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
2004 के आम चुनावों में गांधी ने भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) गठबंधन के इंडिया शाइनिंग नारे के विपरीत आम आदमी के नारे पर देश भर में घूमते हुए एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया। चुनाव में रायबरेली से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से 200000 मतों के अंतर से दोबारा चुनी गईं। एनडीए की अप्रत्याशित हार के बाद, उन्हें व्यापक रूप से भारत का अगला प्रधानमंत्री बनने की उम्मीद थी। 16 मई 2004 को उन्हें सर्वसम्मति से वामपंथियों द्वारा समर्थित 15 दलों की गठबंधन सरकार का नेतृत्व करने के लिए चुना गया और बाद में इसे संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) नाम दिया गया। पराजित एनडीए ने एक बार फिर उनके विदेशी मूल के बारे में विरोध किया और वरिष्ठ एनडीए नेता सुषमा स्वराज ने धमकी दी कि अगर सोनिया प्रधानमंत्री बनीं तो वह अपना सिर मुंडवा लेंगी और जमीन पर सोएंगी।
एनडीए ने दावा किया कि कुछ कानूनी कारण थे जिनके कारण उन्हें प्रधानमंत्री पद से रोका गया। उन्होंने विशेष रूप से भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 5 की ओर इशारा किया जिसके बारे में उनका दावा था कि उसमें पारस्परिकता निहित है। अन्य लोगों ने इसका विरोध किया और अंततः भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इन मुकदमों को खारिज कर दिया।
चुनाव के कुछ दिनों बाद सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद के लिए मनमोहन सिंह की सिफारिश की जिसे स्वीकार कर लिया गया। इस कदम को उनके समर्थकों ने त्याग की प्राचीन भारतीय परंपरा से और विरोधियों ने राजनीतिक स्टंट से तुलना की।
23 मार्च 2006 को गांधी ने लाभ के पद विवाद और इस अटकल के तहत लोकसभा से और राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के अध्यक्ष पद से भी अपने इस्तीफे की घोषणा की कि सरकार राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के अध्यक्ष के पद को लाभ के पद के दायरे से मुक्त करने के लिए एक अध्यादेश लाने की योजना बना रही है। मई 2006 में वह अपने निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली से 400000 से अधिक मतों के अंतर से फिर से चुनी गईं।
राष्ट्रीय सलाहकार समिति और यूपीए की अध्यक्ष के रूप में, उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना और सूचना का अधिकार अधिनियम को कानून बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने 2 अक्टूबर 2007 को महात्मा गांधी की जयंती पर संयुक्त राष्ट्र को संबोधित किया जिसे 15 जुलाई 2007 को पारित संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के बाद अहिंसा के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है।
योजनाओं के दम पर यूपीए ने 2009 के आम चुनावों में मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री बनने के साथ निर्णायक बहुमत हासिल किया। कांग्रेस ने खुद 206 लोकसभा सीटें जीतीं जो 1991 के बाद से किसी भी पार्टी द्वारा जीती गई सबसे अधिक सीटें थीं। सोनिया रायबरेली से तीसरे कार्यकाल हेतु फिर से चुनी गईं।
वर्ष 2013 में सोनिया लगातार 15 वर्षों तक कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में सेवा करने वाली पहली व्यक्ति बनीं।उसी वर्ष भारतीय दंड संहिता की धारा 377 का समर्थन करने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले की निंदा की और एलजीबीटी अधिकारों का समर्थन किया।
✨ सक्रिय राजनीति और राज्यसभा छोड़ना -
वर्ष 2014 के आम चुनाव में रायबरेली सीट बरकरार रखी पर कांग्रेस व यूपीए गठबंधन बुरी तरह से हार गया। कांग्रेस को केवल 44 यूपीए को कुल 59 सीटें ही मिलीं। सरकार धर्मांधता की आंधी में धराशाई हो गई। सोनिया ने सक्रिय राजनीति छोड़ राहुल गांधी को आगे बढ़ाना शुरू किया। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में 16 दिसंबर 2017 को राहुल गांधी को 49वें अध्यक्ष का पदभार संभला दिया।
राहुल ने 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव हेतु भरसक प्रयास किए। सोनिया ने भी 2016 से चुनाव प्रचार से दूर रहने के बाद बीजापुर में चुनावी रैली को संबोधित किया। यहां कांग्रेस भाजपा के बाद 78 सीटों के साथ चुनाव में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, बीजापुर से पांच विधानसभा सीटें जीतीं। सोनिया ने जनता दल (S) के साथ चुनाव के बाद गठबंधन करने में भी सक्रिय भूमिका निभाई और सरकार बनाई।
वर्ष 2019 के आम चुनावों में कांग्रेस पार्टी की लगातार दूसरी हार की ज़िम्मेदारी लेते हुए राहुल गांधी ने 25 मई को अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया। इस्तीफ़े के बाद, पार्टी नेताओं ने उनकी जगह लेने के लिए एक उपयुक्त उम्मीदवार पर विचार-विमर्श करते हुए पुनः सोनिया गांधी को अध्यक्ष बनाने की अपील की। कांग्रेस कार्यसमिति ने इस मामले पर अंतिम निर्णय लेने हेतु 10 अगस्त को बैठक में सोनिया गांधी को सर्वसम्मति से उम्मीदवार चुने जाने तक अंतरिम अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने हेतु प्रस्ताव पारित किया।
उनकी नियुक्ति के बाद सोनिया गांधी ने कांग्रेस की राज्य इकाइयों का पुनर्गठन किया और कुमारी शैलजा और एकनाथ गायकवाड़ को पार्टी की हरियाणा और मुंबई इकाइयों का अध्यक्ष नियुक्त किया। हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड सहित चुनाव वाले राज्यों में पार्टी की संगठनात्मक इकाइयों में भी कई अन्य बदलाव किए।
फरवरी 2020 में सोनिया गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों को रोकने में विफल रहने के कारण गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। वर्ष 2022 में सोनिया गांधी ने अगले भारतीय आम चुनाव में नेतृत्व हेतु कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का नाम प्रस्तावित किया। गहलोत ने चुनाव नहीं लड़ा और गांधी के वफादार मल्लिकार्जुन खड़गे ने गैर-वफादार शशि थरूर को हराकर नए कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में चुना गया।
फरवरी 2024 में सोनिया गांधी ने स्वास्थ्य और उम्र संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए आम चुनाव से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने सेवानिवृत्त सांसद मनमोहन सिंह की जगह लेने के लिए राजस्थान से 2024 के राज्यसभा चुनाव लड़ने हेतु नामांकन दाखिल किया। नामांकन दाखिल करते समय, उनके साथ राहुल गांधी , अशोक गहलोत और पार्टी के अन्य वरिष्ठ सदस्य मौजूद थे। सोनिया गांधी 20 फरवरी 2024 को राजस्थान से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुनी गईं और अप्रैल में शपथ ली।
15 अप्रैल 2025 को प्रवर्तन निदेशालय ने नेशनल हेराल्ड मामले के संबंध में उनके खिलाफ आरोप पत्र दायर किया।
वर्ष 2025 में, ईरान पर इज़राइल के हमले के बाद, सोनिया गांधी ने ज़ोर देकर कहा कि इज़राइल की कार्रवाइयों पर भारत सरकार की चुप्पी नैतिक और रणनीतिक परंपराओं से विचलन है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की नेता ने द हिंदू अख़बार के एक संपादकीय में कहा कि 13 जून को ईरान पर इज़राइल के हमले अवैध थे और ईरानी संप्रभुता का उल्लंघन थे।
⚖️ सोनिया गांधी का स्वास्थ्य -
अगस्त 2011 में उन्होंने न्यूयॉर्क के मेमोरियल स्लोन-केटरिंग कैंसर सेंटर में सर्वाइकल कैंसर की सफल सर्जरी करवाई और 9 सितंबर 2011 को लौटीं।
🛳️ सोनिया गांधी की संपत्ति -
2014 के आम चुनाव में दायर हलफनामे के अनुसार सोनिया गांधी ने 9.28 करोड़ रुपए की संपत्ति घोषित की, जिसमें 2.81 करोड़ चल और 6.47 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियाँ शामिल थीं। 2009 में उनकी संपत्ति में छह गुना वृद्धि हुई।
🔔 भारत एवं विश्व की सब से शक्तिशाली राजनेता -
सोनिया गांधी को फोर्ब्स पत्रिका ने वर्ष 2004 से 2014 तक भारत की सबसे शक्तिशाली राजनेता के रूप में अंकित किया। वर्ष 2013 में, फोर्ब्स पत्रिका द्वारा सोनिया गांधी को दुनिया की सबसे शक्तिशाली महिलाओं में 21वां और 9वीं सबसे शक्तिशाली महिला का स्थान दिया।
2007 में उन्हें इसी पत्रिका द्वारा दुनिया की तीसरी सबसे शक्तिशाली महिला का खिताब दिया था। वर्ष 2007 में अनन्य सूची में 6वें स्थान पर रहीं।
वर्ष 2010 में फोर्ब्स ने सोनिया गांधी को ग्रह पर नौवें सबसे शक्तिशाली व्यक्ति के रूप में स्थान दिया था। फोर्ब्स की शक्तिशाली लोगों की सूची में 2012 में उन्हें 12वां स्थान मिला था।
सोनिया को 2007 व 08 में टाइम पत्रिका ने दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में भी शामिल किया।
न्यू स्टेट्समैन ने 2010 में दुनिया के 50 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में सोनिया गांधी को 29वें स्थान पर सूचीबद्ध किया।
☀️ आलोचना एवं भ्रामक जानकारियां -
बार गर्ल -
कुछ लोग सोशल मीडिया पर सोनिया गांधी को बार गर्ल कह कर आलोचना करते हैं। वास्तविकता यह है कि सोनिया माइनो गरीब परिवार से संबंध थीं। पिता निर्माण मिस्त्री और माता गृहणी थीं। केंब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ना आसान नहीं था। लंदन में रह कर पढ़ना और खर्च चलाना बेहद मुश्किल काम था। इसलिए उन्होंने एक रेस्तरां में वेट्रेस का पार्टटाइम काम शुरू किया। इसी को विरोधी बार गर्ल के रूप में प्रचारित करते हैं।
🚀 बोफोर्स घोटाला -
ओतावियो क्वात्रोची , एक इतालवी व्यवसाइ के नाम के साथ उनका नाम उछाला जाता है, उपरोक्तानुसार फैक्ट चेक करने पर यह सर्वथा भ्रामक और झूठ ठहराया गया है। क्वात्रोची का नाम बोफोर्स घोटाले में आया था। इसे सोनिया गांधी का मित्र बताया गया,जिसकी प्रधानमंत्री आवास तक सीधी पहुँच बताई गई। यह एकदम भ्रामक है।
🔥नागरिकता से पहले वोटर लिस्ट में नाम -
भाजपा ने आरोप लगाया है कि अप्रैल 1983 में भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से पहले, वह भारतीय कानून का उल्लंघन करते हुए नई दिल्ली की मतदाता सूची में शामिल थीं। मामला कोर्ट में गया, ट्रायल के बाद इसे समाप्त कर दिया गया।
📋 नेशनल हेराल्ड -
आजादी की लड़ाई के समय नेहरू द्वारा निकाला गया अखबार नेशनल हेराल्ड जिसका संपादन फिरोज गांधी करते थे, के संचालन हेतु ट्रस्ट का गठन किया गया। भाजपा ने इस में आर्थिक अनियमितता के आरोप लगाए। E.d. द्वारा मामला दर्ज कर राहुल गांधी एवं सोनिया गांधी पर ट्रायल कर पूछताछ की गई।
🗽 विदेशी जन्म -
भाजपा द्वारा सोनिया गांधी के विदेशी मूल का होने पर भारतीय राजनीति में सक्रियता का विरोध किया गया। कांग्रेस के भीतर भी शरद पवार एवं तारीख अनवर ने भी यह मामला उठाया था। इसके बाद पवार ने पृथक से पार्टी नेशनल कांग्रेस पार्टी के नाम से बनाई।सुषमा स्वराज ने 2004 में कहा कि यदि सोनिया प्रधानमंत्री बनीं तो वो सर मुंडवा कर जमीन पर सोएंगी। मामला कोर्ट में गया, ट्रायल के बाद मुकदमा खारिज हो गया।
📝 किताबों में -
01. सोनिया गांधी - एक असाधारण जीवन, एक भारतीय नियति (2011), रानी सिंह द्वारा लिखित जीवनी।
02. सोनिया गांधी - नूरुल इस्लाम सरकार द्वारा भारत के साथ मुलाकात।
03. द रेड साड़ी - सोनिया गांधी की एक नाटकीय जीवनी ( एल. सारी रोजो ) जेवियर मोरो द्वारा लिखित।
04. सोनिया - रशीद किदवई द्वारा लिखित जीवनी।
05. संजय बारू द्वारा द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर 2014 में।
शमशेर गांधी
जिगर चूरूवी
9587243963
स्त्रोत -
विभिन्न पत्रिकाएं एवं सोनिया गांधी के संबंध में लिखे गए लेख।
वर्ष 1968 से आज तक के अखबारों की सुर्खियां
इंटरनेट पर उपलब्ध फोटो गैलरी
सोशल मीडिया पर लोगों के कमेंट।
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