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लघुकथा -रोटी भेजी हुई है।

लघुकथा - रोटी भेजी हुई है।
बात बहुत पुरानी है। एक गांव में एक बूढ़ी मां और उसका बेटा रहता था। घर का काम बड़ी मुश्किल से चलता। आस पास के युवा दूर किसी नगरी में कमा कर भेजते तो बूढ़ी अम्मा अपने बेटे को शहर जा कर कमाने के लिए कहती। बेटा मां और गांव को नहीं छोड़ना चाहता था, बात को किसी तरह टाल देता। काफी समय बीत गया, कमाई के बिना परिवार के जीवन पर बन आई। 
इसका एक कारण यह भी था कि उनका घर गांव से बाहर था, ढूंढारे, मुसाफिर और सवार रात बासा मांगते तो बूढ़ी अम्मा सहर्ष जैसा घर में होता उन्हें परोसती और खाट - बिछौना दे देती। हर दिन कोई ना कोई उनके घर में रुकता, इससे उसे बड़ा संतोष मिलता। बेटा मां के इस काम से राजी नहीं रहता, पर कहता कुछ नहीं था। इस आतिथ्य के बदले बूढी मां किसी से कुछ ना लेती।
समय - समय की बात है, होनी को कौन टाल सकता है। इस बार भयंकर दुर्भिक्ष पड़ा, खेत में अनाज सूख कर पीली पा'नी हो गया। खाने के लाले पड़ गए पर बूढ़ी अम्मा की आश्रय देने की आदत जस की तस रही।
एक दिन बेटे ने मां से कहा, तू रोज कहती है कमाने जा, कमाने जा, आज मैं जा रहा हूं, मेरी रोटी बांध दे।
मां ने कहा रोटी भेजी हुई है आगे मिल जाएगी।
इस से पहले दोनों कभी अलग नहीं हुए पर भाग्य के लेख से कौन बचा है।
बेटा, मां से विदा ले कर चल पड़ा। गेडीए पर तौलिया लटकाए धर - मजला धर कूंचा तेजा गाते हुए कोस दर कोस आगे बढ़ता गया। चलते - चलते शाम हो गई। सामने एक खेत में चिमनी जलती दिखी, थका हुआ मुसाफिर बासे की तलाश में च्यानने की तरफ खींचता चला गया।
नजदीक जा कर जोर से रामा - श्यामा की और बासे हेतु निवेदन किया।
बणी की ढाणी में दो झोंपड़े बने हुए थे, झोपड़े के आगे एक अधेड़ चिलम पी रहा था। उसने अपने पास बैठा कर मुसाफिर से गांव - गौत पूछी। युवक ने नाम, गांव, गौत - न्यात बताई। अधेड़ ने बेटी की हेला देते हुए गुड और पानी मंगवाया। थोड़ी देर सोचने के बाद अधेड़ ने कहा तुम्हारे गांव के उतरादे पासे में एक बुढ़िया का घर है, जानते हो क्या। युवक ने तपाक से कहा, मैं उसी बुढ़िया का बेटा हूं। अधेड़ खूब राजी हुआ, इतने में उसकी बेटी गुड़ की डली और पानी ले आई। अधेड़ ने बेटी से कहा - बेटा, यह हमारे अतिथि हैं, एक बार अपनी दो भैंस खो गई थी, मैं ढूंढने गया तो इनके घर दो रात बासा लिया था। इसकी मां  ने मेरी बहुत सेवा की थी। तुम पहले इसके लिए गर्म पानी चढ़ा दो, गर्म पानी से नहाने से इसकी थकान उतर जाएगी और अपनी मां से कहो हारे के दूध में चावल डाल दे। नहा धो कर युवक ने खाना खाया और सो गया। 
सुबह अधेड़ ने उसे मुसाफिरी का कारण पूछा, तो युवक ने सारी कहानी सुनाई। बणी से थोड़ी दूर एक सराय थी, अधेड़ ने वहां उसे काम पर लगा दिया। बहुत समय निकलने पर युवक, मां से मिलने गांव जाते समय उसी अधेड़ की ढाणी में रुका। बढ़िया खाने और  सराय की छाया ने उसे और सुंदर व गठीला नौजवान बना दिया। विदा होते समय अधेड़ ने उसे अपना ऊंट देते हुए कहा, आते समय अपनी मां को साथ ले कर आना। 
घर पहुंच कर युवक ने मां को सारी बात बताई, वह सब समझ गई। महीने भर बाद मां - बेटे बणी की ढाणी पहुंच गए। अधेड़ ने अपनी बेटी का विवाह उसके बेटे से करने का प्रस्ताव रखा। दोनों की वही शादी हो गई और खुशी - खुशी रहने लगे।
शिक्षा - 
- हाथ का दिया आगे मिलता है।
- कर भला तो हो भला, अंत भले का भला।
✍️जिगर चूरूवी 
(शमशेर गांधी)

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